08/04/2026
हरियाणा की इस महिला के संस्कार देखो! अपने पति के साथ ऋषिकेश आकर गंगा किनारे शराब पी रही थी और जब पुलिस और स्थानीय लोगों ने ऐसा करने से रोका, तो वो उल्टा पुलिस और स्थानीय लोगों को धौंस दिखाते हुए उनसे अभद्रता करने लगी और माँ-बहन की गा_लियां देने लगी। लोगों ने जब समझाने की कोशिश की कि गंगा तट धार्मिक और आध्यात्मिक स्थल है, गंगा नदी में करोड़ों लोगों की इसमें आस्था है, तो बद्तमीज महिला भड़क उठी और कहने लगी कि अपने पैसों की पी है... तुम्हारे पैसों की पी है क्या?
महिला यहीं पर नहीं रुकी... उसने उत्तराखंड के लोगों का अपमान करते हुए बड़ी ही अपमानजनक बात कही कि हमारी वजह से इनकी रोज़ी-रोटी चलती है।
इन लोगों को पता नहीं क्यों ये गलतफहमी है कि पहाड़ी राज्य देवभूमि उत्तराखंड और हिमाचल की अर्थव्यवस्था इन जैसे हुड़दंगियों पर निर्भर है? पर्यटन पहाड़ी राज्यों की अर्थव्यवस्था का बस एक छोटा सा हिस्सा है। ये राज्य पूरी तरह से इस पर निर्भर नहीं हैं। कभी नहीं थे। और जितना हैं भी, तो उसमें सबसे बड़ा योगदान उन विदेशी पर्यटकों का है, जो यहां सिर्फ घूमने नहीं आते, बल्कि पहाड़ और पहाड़ी संस्कृति को जानने और समझने आते हैं, वो हमेशा यहां से केवल अच्छी यादें लेकर जाते हैं। जबकि इस महिला जैसे देसी पर्यटक केवल अशांति फैलाने आते हैं, उससे ज्यादा कुछ भी नहीं।
पहाड़ी लोग तब भी अपनी मेहनत से खा कमा रहे थे जब तुम यहां आते भी नहीं थे। और अब भी अपनी मेहनत से खा कमा रहे हैं। तुम तो अब आ रहे हो... तुम्हारी जमीन के कुछ टुकड़े बिकने के बाद। खैर! जिन लोगों को यहां आकर केवल हुड़दंग, लड़ाई-झगड़े करने और गंगा किनारे शराब पीने आना है, वो न ही आए तो बेहतर है। अपने साथ उन अच्छे पर्यटकों का मजा और समय खराब न करें, जो अपने परिवार और बच्चों के साथ सुंदर व शांत पहाड़ों में छुट्टियां बिताने आते हैं।
और इस महिला जैसे बेशर्म, बदतमीज और दिमाग से पैदल पर्यटक कहां से आते हैं, अब पूरी दुनिया जानती है। इन्होंने पूरी दुनिया में अपनी छाप छोड़ दी है... जहां जाते हैं, हुडदंग और मारपीट करते हैं। तीर्थ नगरी ऋषिकेश से लेकर बदरीनाथ-केदारनाथ तक इन जैसों ने माहौल खराब किया हुआ है। क्या उत्तराखंड, क्या हिमाचल, क्या स्विट्ज़रलैंड, क्या पेरिस? हर जगह लोग इनके ऐसे व्यवहार से परेशान हैं और शिकायत करते हैं। मगर ये नहीं सुधरते और न कभी सुधरेंगे! इसकी आर्थिक स्थिति अच्छी होती तो ये किसी होटल में रूम लेकर वहां अपना खाना-पीना कर सकती थी, लेकिन जब एक सेंटर फ्रूट (च्यूइंगम) खाने के पी पैसे न हो तो इन जैसे हुड़दंगी गंगा किनारे बैठ जाते हैं... शराब पीने!