Nav-Durga Education Welfare Society

Nav-Durga Education Welfare Society Plant a tree, plant a tree so that next generation can get air for free.

प्रिय महोदय,मैं आप सभी समाज कल्याण के लिए कार्य करने वाले नेताओं और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की चिंता करने वाले लोगों...
07/05/2026

प्रिय महोदय,

मैं आप सभी समाज कल्याण के लिए कार्य करने वाले नेताओं और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की चिंता करने वाले लोगों के सामने एक सामाजिक संदेश प्रस्तुत करना चाहता हूँ।

यदि कभी मुझे ऐसा मंच मिला जहाँ मैं अपने देश की वास्तविक समस्याओं को खुलकर व्यक्त कर सकूँ,
तो मैं अपनी पहली आवाज़ इसी संदेश से शुरू करना चाहूँगा।

और यदि मुझे वह अवसर कभी न मिले,
तो आप सभी से निवेदन है कि कृपया इस संदेश को यहीं से आगे बढ़ाइए।

क्योंकि इस कहानी का उद्देश्य प्रसिद्धि, राजनीति या शक्ति प्राप्त करना नहीं है।

इसका उद्देश्य केवल मानवता, संतुलन, शिक्षा, पहचान और आने वाली पीढ़ियों की सोच को सुरक्षित रखना है।

शीर्षक :

“मानव सोच बनाम प्रोग्राम की गई सोच”

(इंसानियत, समाज और आने वाली पीढ़ी की एक कहानी)

एक लेखक की सोच — इंसान, समाज और आने वाली पीढ़ी

लेखक कहता है कि आज दुनिया में सबसे बड़ा संघर्ष इंसान बनाम इंसान का नहीं है।
सबसे बड़ा संघर्ष है — “मानव सोच” और “प्रोग्राम की गई सोच” के बीच।

पहले इंसान अपनी जिंदगी परिवार, अनुभव, शिक्षा और संस्कारों से समझता था।
आज बहुत लोग अपनी पहचान सोशल मीडिया, ट्रेंड, डर, गुस्सा, तुलना और बाहरी प्रभाव से बनाने लगे हैं।

इसीलिए लेखक ने जीवन को चार हिस्सों में समझाने की कोशिश की।

पहला चरण — मानव जीवन
जहाँ इंसान के अंदर शांति, संतुलन, जिम्मेदारी और सकारात्मक सोच होती है।
ऐसे लोग समाज को जोड़ते हैं, तोड़ते नहीं।

दूसरा चरण — प्राकृतिक जीवन
जहाँ इंसान साधारण जीवन जीता है।
अपने परिवार, काम और जीवन में संतुलन रखता है।
किसी को नुकसान पहुँचाए बिना अपना जीवन जीता है।

तीसरा चरण — भटका हुआ जीवन
यहाँ इंसान धीरे-धीरे निराशा, गुस्सा, शराब, गलत संगति और दबाव में बदलने लगता है।
यह बदलाव अचानक नहीं आता।
इसके पीछे असफलता, तुलना, भविष्य का डर और समाज की उम्मीदें होती हैं।

चौथा चरण — नियंत्रित और विनाशकारी सोच
यहाँ इंसान अपने असली मानव संतुलन से दूर होने लगता है।
नशा, हिंसा, नकली शक्ति, दिखावा, डिजिटल प्रभाव और बिना सोच के ट्रेंड उसका रास्ता तय करने लगते हैं।

लेखक स्पष्ट करता है कि “बुराई” किसी इंसान की पहचान नहीं है।
बुराई एक सोच है।

दो सोच हमेशा मौजूद रहती हैं —

पहली : मानव सोच
जहाँ भावना, समझ, धैर्य, जिम्मेदारी और इंसानियत बची रहती है।

दूसरी : IT सोच
जहाँ इंसान धीरे-धीरे सिस्टम, ट्रेंड, एल्गोरिदम, भीड़ और बाहरी नियंत्रण के हिसाब से सोचने लगता है।
वह खुद फैसला कम करता है, प्रभाव में ज्यादा जीता है।

लेखक के अनुसार आने वाली पीढ़ी का सबसे बड़ा खतरा यही है —
अगर इंसान अपनी सोच खो देगा, तो उसकी पहचान भी धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी।

आज समाज धर्म और संस्कृति की रक्षा की बात करता है,
लेकिन शिक्षा, मानसिक संतुलन और युवाओं की दिशा पर उतना ध्यान नहीं देता।

100 बच्चों में से बहुत कम अपने सपनों तक पहुँचते हैं।
कुछ नौकरी पाते हैं।
कुछ खुद का रास्ता बना लेते हैं।
लेकिन बहुत सारे युवा बीच रास्ते में ही टूटने लगते हैं।

समस्या यह नहीं कि वे कमजोर हैं।
समस्या यह है कि उन्हें सिर्फ प्रतियोगिता सिखाई गई, जीवन नहीं।

लेखक कहता है कि असली विकास केवल तकनीक, पैसा और बड़ी इमारतें नहीं हैं।
असली विकास तब होगा जब इंसान अपनी मानव सोच को बचाकर आगे बढ़ेगा।

हर इंसान की जिंदगी भगवान का दिया हुआ अधिकार है।
किसी को हक नहीं कि वह किसी की पहचान छीन ले या उसे अपनी सोच से नियंत्रित करे।

समाधान बहुत स्पष्ट है —

बचपन से शिक्षा को केवल नौकरी नहीं, जीवन से जोड़ो।
युवाओं को दिशा दो, केवल दबाव नहीं।
जिम्मेदारी योग्य लोगों को दो, केवल आदेश मानने वालों को नहीं।
समाज को तुलना से नहीं, संतुलन से चलाओ।

और अगर इंसान अपने गुस्से, दर्द और निराशा को काम, अनुशासन और उद्देश्य में बदल दे —
तो वही पीढ़ी समाज को फिर से मानवता की तरफ ले जा सकती है।

22/04/2026
04/04/2026
मैंने उन्हें देखा नहीं,‎ना उनके बलिदान का गवाह हूँ।‎‎पर उनकी एक आवाज़ आज भी गूंजती है—‎स्वतंत्रता ‎‎ना सिर झुका है कभी,‎...
23/03/2026

मैंने उन्हें देखा नहीं,
‎ना उनके बलिदान का गवाह हूँ।

‎पर उनकी एक आवाज़ आज भी गूंजती है—
‎स्वतंत्रता

‎ना सिर झुका है कभी,
‎ना झुकेगा कभी।

‎ये सिर्फ एक शब्द नहीं,
‎ये जज़्बा है, ये जुनून है,
‎ये उस क्रांति की आग है जो कभी बुझी नहीं।

‎जय हिंद।
‎जय भारत।

06/02/2026

किसान, एक बार जुड़ें और आत्मनिर्भर बनें – सशक्त भारत, आत्मनिर्भर भारत!
प्रणव

अंधकार से प्रकाश की ओर जाना ही असली गुरु है — जरूरी नहीं कि गुरु अंधकार में ही मिले, कभी-कभी जागरूकता ही सबसे बड़ा उपदेश...
04/02/2026

अंधकार से प्रकाश की ओर जाना ही असली गुरु है — जरूरी नहीं कि गुरु अंधकार में ही मिले, कभी-कभी जागरूकता ही सबसे बड़ा उपदेश बन जाती है।

हर राष्ट्र अपनी उपलब्धियों से चमकता है, लेकिन वास्तविक प्रगति जागरूकता, साक्षरता और समझदार नागरिकों से आती है।
हमारा उद्देश्य किसी भी सामाजिक सोच, व्यक्ति या राजनीतिक दल को ऊँचा–नीचा दिखाना नहीं है, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से जुड़े विचारों को बिना किसी को आहत किए प्रस्तुत करना है।
हम मानते हैं कि सच्ची शक्ति आलोचना या विरोध में नहीं, बल्कि सही ज्ञान, आत्मचिंतन और स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता में है — क्योंकि जब नागरिक स्वयं जागरूक होते हैं, तभी वे अपने भविष्य के सही नेतृत्व का चयन कर पाते हैं

यूजीसी क़ानून सवर्ण समाज के विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है - डॉ मूल सिंह शेखावत झुझुनू । जिले के स्वर्ण ( ब्र...
04/02/2026

यूजीसी क़ानून सवर्ण समाज के विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है - डॉ मूल सिंह शेखावत
झुझुनू । जिले के स्वर्ण ( ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य एवं जैन) समाज द्वारा शहर के पीरू सिह सर्किल स्थित एक निजी रेस्टोरेंट में आयोजित एक प्रेस वार्ता में यूजीसी क़ानून ( एक्ट) के विरोध में बोलते हुए पूर्व विधायक डॉ मूलसिह शेखावत ने कहा कि स्वर्ण समाज माननीय सर्वोच्च न्यायालय के स्थगन आदेश का स्वागत करते हैं जिसमें यूजीसी काला क़ानून पर रोक लगाई और उसे लागू करना स्वर्ण समाज के साथ अन्याय बताते हुए पुनः विचार करना आवश्यक समझा। डॉ मूल सिंह ने कहा कि हम केंद्र सरकार से मांग करते हैं कि वे अपने जवाब में इस काले क़ानून को वापस लें। भाजपा की केंद्र सरकार जो हिंदू एकता की बात करती है और दूसरी ओर यूजीसी एक्ट के माध्यम से हिंदू समाज को जातीयों में बाँटकर समाज में नफ़रत का बीज बो रहे हैं जिसका भविष्य में परिणाम अत्यंत घातक साबित होगा। यह स्वर्ण समाज के विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है जिसे हम बर्दास्त नहीं करेंगे । सवर्ण समाज समन्वयक उमाशंकर महमिया ने कहा कि स्वर्ण समाज ने सदैव सभी वर्गों को साथ में लेकर चलने की व्यवस्था का साथ दिया है फिर उनके साथ भेदभाव अन्याय है। यूजीसी कानून का दुष्प्रभाव सभी वर्गों पर पड़ेगा। शिक्षा का स्तर गिरेगा । ये आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा।यूजीसी क़ानून लागू होने से विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता समाप्त हो जाएगी। शिक्षकों के अधिकारों व विद्यार्थियों की स्वतंत्रता पर कुठाराघात होगा व आपस में वैमनस्यता का बीज अंकुरित होगा जिससे स्वर्ण समाज के शिक्षकों व विद्यार्थियों में भय का वातावरण बनेगा। इसके दुष्प्रभाव से स्वर्ण समाज के शिक्षको के अध्यापन कार्य बाधित होंगे और विद्यार्थी शिक्षा से वंचित रहेंगे। वैश्य समाज जिलाध्यक्ष नरेश परशुरामपुरिया ने कहा कि यह सामाजिक न्याय की मूल भावना पर सीधा हमला है। यूजीसी क़ानून लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा प्रहार है जिससे शिक्षा का स्तर गिरता चला जाएगा। सरकारी संस्थाओं को कमजोर कर निजी विश्वविद्यालयों को सीधा लाभ पहुँचाने का कार्य किया जा रहा है। सनातन भारत संघ अध्यक्ष मनोहर सिंह धोङीवारा ने कहा कि यूजीसी एक्ट लागू कर स्वर्ण समाज को हीन बनाकर उन्हें डराने, शिक्षा और रोजगार से वंचित करने का कुत्सित प्रयास व षड्यंत्र किया जा रहा है। स्वर्ण समाज इसके विरोध में सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन के लिए बाध्य है । इस अवसर पर
विप्र फाउंडेशन संरक्षक राजेन्द्र जोशी,गौड़ समाज के कार्यकारी जिलाध्यक्ष प्रदीप शर्मा अलसीसर,विफा संरक्षक एडवोकेट सुशील जोशी ,
विफा संगठन महामंत्री रामगोपाल महमिया,विफा जिला महामंत्री वशिष्ठ शर्मा,रवींद्र सिंह तौलियासर,पुजारी महासंघ के जिलाध्यक्ष विनोद पुजारी,
अग्रवाल समाज के पूर्व अध्यक्ष कैलास सिंघानिया ,वैश्य जिला उपाध्यक्ष रघुनाथ पोद्दार,
जैन समाज के अध्यक्ष एडवोकेट लाल बहादुर जैन, महाराव शेखान शेखा संस्थान अध्यक्ष जगदीश सिंह नांद,पारिक समाज के जिलाध्यक्ष संजय पारिक,
विफा जिला मंत्री रमेश चोमाल,
अमित शेखावत शिशिया सहित स्वर्ण समाज के गणमान्यजन उपस्थित थे ।
Ramakant Sharma
Rk Sharma Sharma
CMO Rajasthan

The first European to come to India directly by sea for trading kalimirch (black pepper) was the Portuguese explorer Vas...
31/01/2026

The first European to come to India directly by sea for trading kalimirch (black pepper) was the Portuguese explorer Vasco da Gama.
He landed at Kappad near Calicut (modern-day Kozhikode, Kerala) on May 20, 1498, opening the sea route via the Cape of Good Hope and initiating direct trade between Europe and India.
Key facts about this historic journey:
Purpose: The primary goal of his voyage was to bypass the land routes controlled by Arab and Venetian middlemen and directly acquire valuable spices, especially black pepper, which was known as "black gold" and was worth its weight in gold.
The "Seven Seas" Connection: Da Gama sailed from Lisbon, Portugal, in 1497, rounded the southern tip of Africa (Cape of Good Hope), and crossed the Indian Ocean with the help of a navigator from East Africa to reach the Malabar Coast.
Outcome: Although his initial, poorly received gifts strained relations with the Zamorin of Calicut, da Gama successfully returned to Portugal with a cargo of pepper and cinnamon, proving the immense profitability of the direct sea route.
Legacy: His arrival started the Portuguese monopoly on the pepper trade for roughly a century and initiated the era of European colonization in India.
While Arab merchants had been sailing the Indian Ocean to trade pepper for centuries before 1498, Vasco da Gama is credited as the first European to arrive via the sea route.

27/01/2026

Good morning.
Whatever we have today is enough for this moment; chasing more only brings us back to the same truth.
So trust God, breathe easy, and say with pride — जो प्राप्त है पर्याप्त है 🌼
Parnav

23/01/2026

🌼 बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएँ 🌼

नव दुर्गा एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसाइटी की ओर से आप सभी को बसंत पंचमी के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएँ।
माँ सरस्वती आप सभी को ज्ञान, बुद्धि, विवेक एवं सद्बुद्धि से परिपूर्ण करें और शिक्षा के मार्ग पर निरंतर प्रगति प्रदान करें।

सरस्वती श्लोकः
या कुन्देन्दु तुषार हार धवला, या शुभ्र वस्त्रावृता।
या वीणा वरदण्ड मण्डित करा, या श्वेत पद्मासना॥

🙏 माँ सरस्वती की कृपा आप पर सदैव बनी रहे।
शुभ बसंत पंचमी🙏

Address

Ward No 10 Vijay Colony
Bagar
333023

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Nav-Durga Education Welfare Society posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Organization

Send a message to Nav-Durga Education Welfare Society:

Share