13/02/2026
घुघुती की उड़ान
इस कहानी की शुरुआत एक साधारण-से सवाल से हुई। ऋषिकेश की ओर जाती कार में सौम्या मैम ने पूछा कि कुमाऊँ में ऐसे कौन-से त्योहार हैं जो प्रकृति से जुड़े होते हैं। बातचीत आगे बढ़ी और बात घुघुती त्यार तक पहुँची—जनवरी में मनाया जाने वाला वह पर्व, जब पौष समाप्त होता है और माघ आता है। जब देश मकर संक्रांति मनाता है, तब कुमाऊँ में पक्षियों को पुकारा जाता है। उसी क्षण एक विचार जन्मा—क्या इस त्योहार को सिर्फ याद किया जाए, या इसे फिर से जिया जाए?
नानकमत्ता लौटने के बाद यह विचार एक जिम्मेदारी बन गया। सवाल थे, समय कम था, लेकिन सपना बड़ा था—यह आयोजन किसी एक संस्था का नहीं, बल्कि पूरे समुदाय का होना चाहिए। चार महीनों तक स्कूलों, संगठनों और सहयोगियों के साथ मिलकर इस विचार को आकार दिया गया, ताकि यह आयोजन समावेशी, विविध और सार्थक बन सके।
और फिर 19 जनवरी आया। मंच पर उत्तराखंड की प्रकृति और संस्कृति जीवंत हो उठी। अंकुरम ग्लोबल एकेडमी के छात्रों ने प्रकृति से जुड़े पारंपरिक त्योहारों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। शाइनिंग स्टार स्कूल के छात्रों ने मानव लालच और प्राकृतिक संसाधनों पर उसके प्रभाव को शक्तिशाली नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से सामने रखा। पायनियर्स एकेडमी के छात्रों ने सह-अस्तित्व का संदेश अपने सशक्त नृत्य के जरिए फैलाया। कार्यक्रम का समापन नानकमत्ता पब्लिक स्कूल के थारू जनजातीय छात्रों की संगीतमय होली से हुआ, जिसने पूरे वातावरण को उत्सव में बदल दिया। मंच से बाहर पक्षियों पर आधारित प्रदर्शनी, मानव बुनकरों और बया पक्षियों के सह-अस्तित्व को दर्शाती लाइव बुनाई, छात्रों द्वारा संचालित सस्टेनेबल जीवनशैली और स्वस्थ खान-पान के स्टॉल्स, और “Birds of Terai” पुस्तिका का विमोचन इस आयोजन को और विशेष बना रहे थे।
इस आयोजन की सफलता अनेक सहयोगों का परिणाम थी। हम सर्वप्रथम उधम सिंह नगर के माननीय जिलाधिकारी श्री नितिन भदौरिया, IAS का हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं, जिन्होंने अपने व्यस्त समय में से समय निकालकर कार्यक्रम में सहभागिता की और छात्रों के कार्यों की सराहना कर उनका उत्साह बढ़ाया। इसके बाद हम जिले के मुख्य विकास अधिकारी श्री दिवेश शशनी, IAS के प्रति कृतज्ञ हैं, जिन्होंने न केवल छात्रों के प्रयासों की प्रशंसा की, बल्कि उन्हें आगे विभिन्न मंचों पर अपनी बात रखने के अवसर देने का विश्वास भी दिलाया। हम उत्तराखंड वन विभाग के प्रति विशेष आभार व्यक्त करते हैं सहयोग के बिना यह आयोजन संभव नहीं हो पाता। विशेष रूप से प्रभागीय वनाधिकारी श्री उमेश तिवारी, IFS का निरंतर मार्गदर्शन और विचार साझा करना इस पूरी यात्रा की मजबूत नींव रहा। साथ ही रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर और कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित सभी वन अधिकारियों का सहयोग हर कदम पर हमारे साथ रहा।
हम सभी सहभागी छात्रों और विद्यालय प्रशासन का भी आभार व्यक्त करते हैं, जिन्होंने शीतकालीन अवकाश के दौरान भी अभ्यास कर अपने प्रदर्शन को मंच के योग्य बनाया। हमारी MAEE टीम, हमारे वन गुर्जर साथी, Coexistence Consortium और TDU के आर्थिक सहयोग तथा Green Hub – Western Himalayas द्वारा इन यादगार पलों के दस्तावेज़ीकरण ने इस आयोजन को और भी सार्थक बनाया। अंत में, मेरी अपनी टीम—आप सभी की मेहनत, समर्पण और विश्वास ने एक विचार को वास्तविकता में बदल दिया।
19 जनवरी का वह दिन एक आयोजन भर नहीं था; वह एक संदेश था—कि जब समुदाय, संस्कृति और प्रकृति एक साथ आते हैं, तो घुघुती की उड़ान दूर तक जाती है।