दाना पानी सेवा संस्थान द्वारा संचालित गौ सेवा अभियान के तहत गाय को चारा, पानी तथा उनके लिए रहने के स्थान का चयन किया जाता है। इस अभियान के दौरान विमार, चोटल, बेसहारा, कमजोर, बिना दुध देने वाली गायों का संस्था द्वारा सेवा करने का अवसर प्रदान किया जाता है। आज जिस तरह से लोग बेजुबान जानवरों का शोषण करते है एवं उनका मांस खाते है तथा कुछ पैसे के लिये उनपर अत्याचार करते है। मनुष्य ये भूल जाता है। कि प्र
कृति ने आपके लिये जिस तरह से सबकुछ बनाया है। जैसे हवा, पानी, आग, सुरज, चाॅद, सितारें, पृथवी, पेड़-पौधे, जीव-जन्तु, पशु-पक्षी इत्यादि का निर्माण किया है। ठीक उसी तरह हर प्राणी को रहने का अधिकार मिला है। जिस तरह से वो लोग हमारे जीवन में किसी प्रकार की परेशानी नही उत्पन्न करते है। हमें भी उनके जीवन को स्वतन्त्र रखना चाहियें यही मनुष्य का प्रथम धर्म है। जो कि मनुष्य जानवरों से ज्यादा समझ दार है। पर फिर भी वह मनुष्य जानवरों से बत्तर जिन्दगीं जी रहा है। आज जिस तराह से इतनी खतरनाक बिमारीयों का जन्म हो रहा है। कही न कही मनुष्य उसका स्वायं जिम्मेदार है। अगर वह अभी नही रूका तो एक दिन वो खूद अपनी बर्बादी का कारण होगा आज मनुष्य पानी के लिये मर रहा है कल वह आॅक्सीजन के लिये मरेगा आज जितना अपने संसाधन का र्दुपयोग कर रहा है कल उस संसाधन को तरसे गा अभि भी समय है। बिलुप्त हो रहे जीव-जन्तु, पशु-पक्षी, पेड़-पौधों को बचानें का नही तो उक कहावत है- अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेंत।