01/12/2024
जितनी गंदी राजनीति पंचायत और वार्ड लेवल पर होती है। उतनी कही नही होती। शायद इसीलिए लोग अपने साथ समाज में कुछ भी गलत होने पर कहते है कि मेरे साथ राजनीति हो रही है। #नीलोत्पल_मृणाल जी का उपन्यास #औघड़ इसी सब सामाजिक ताने बाने पर लिखी गई है। इस उपन्यास के चरित्र विभिन्न नाम की शक्लों में आपको ग्रामीण भारत में आसानी से दिख जाएँगे। ये उपन्यास ग्रामीण भारत के राजनैतिक और सामाजिक जटिलताओं पर विस्तार से लिखी गई है।
जब आप इसे पढ़ना शुरू करते हैं तो पहले के दस बीस पन्ने आपको बेहद सामान्य से लगते हैं। किसी चलताऊ हिंदी फार्मूला फिल्म की तरह आपको ऐसा महसूस होता है, जैसे आगे की कहानी आपको पहले से पता हो। धीरे-धीरे कहानी आपको अपने तिलस्म में जकड़ने लगती है। आप जैसे ही कहानी के तिलस्म में फँसते है। कहानी के किरदार आपको अपने आसपास दिखने लगते है। फिर आप जबतक इस उपन्यास को पूरा नही पढ़ लेते। ये आपके हाथ से नही छूटती। इस कहानी का अंत बेहद रोचक एवं यथार्थ से भरा है।
ुस्तक_को_क्यों_पढ़े?
ये पुस्तक आपको ग्रामीण भारत के सामाजिक और राजनैतिक पहलुओं से बिना लाग लपेट सीधा परिचय करवाती है। यदि आप की इच्छा ग्रामीण भारत को समझने की है तो ये पुस्तक आपके लिए कुंजी की तरह काम करेगी। यदि आप ग्रामीण परिवेश में पले बढ़े है तो आपको अपने गाँव-घर की कहानी महसूस होगी। आप इस पुस्तक से ज्यादा जुड़ाव महसूस करेंगे।
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