Diabetes Awareness & Support Organization - DASO

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डायबिटीज़ मरीजों के लिए जागरूकता, मॉनिटरिंग और सहयोग।
ब्लड शुगर रिमाइंडर, हेल्थ टिप्स और नियमित कैंप—एक स्वस्थ जीवन की ओर।
हम डायबिटीज़ पेशेंट्स को सही जानकारी, समय-समय पर शुगर जांच की याद दिलाने और बीमारी से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए समर्पित हैं।

28/12/2025
30/11/2025

⭐ डायबिटीज़ में लापरवाही के खतरों को समझें — और खुद को बदलने के लिए प्रेरित हों

डायबिटीज़ एक Silent Disease है—शुरू में दर्द नहीं होता, दिक्कत नहीं दिखती…
लेकिन अंदर ही अंदर शरीर को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाती रहती है।

इसलिए लापरवाही सबसे बड़ा दुश्मन है।
जानिए, लापरवाही करने पर क्या-क्या समस्याएँ हो सकती हैं:

❗ डायबिटीज़ में लापरवाही करने से होने वाली बड़ी दिक्कतें

1. दिल की बीमारी (Heart Attack / Stroke)

ब्लड शुगर बढ़ा रहने से खून की नलियाँ सख्त होने लगती हैं।
लापरवाही करने वाले मरीजों में दिल का दौरा और स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

2. किडनी फेल होना

ब्लड शुगर लगातार हाई रहने पर किडनी की फ़िल्टरिंग क्षमता धीरे-धीरे खत्म होती है।
कई लोग डायलिसिस तक पहुँच जाते हैं—सिर्फ इसलिए कि उन्होंने ध्यान नहीं रखा।

3. आँखों की रोशनी कम होना या अंधापन

डायबिटिक रेटिनोपैथी चुपचाप बढ़ती है।
लापरवाही करने पर आखिर में साफ़ दिखना भी मुश्किल हो जाता है।

4. नसों की कमजोरी (Neuropathy)

पैरों में जलन

सुन्नपन

दर्द

चलने में परेशानी

ये सब uncontrolled sugar की वजह से आते हैं।

5. पैरों में घाव, कट लगने पर न भरना

पैर में छोटा-सा कट भी ठीक नहीं होता।
कई मरीजों को देर से पता चलने पर अंग कटाने तक की स्थिति बन जाती है।

6. बार-बार इन्फेक्शन

बार-बार पेशाब में infection, skin infection—ये uncontrolled diabetes की निशानी है।

⭐ अब सबसे ज़रूरी बात — मोटिवेशन

डायबिटीज़ जिंदगी खत्म नहीं करती,
लापरवाही करती है।

आपका शुगर कंट्रोल में रखना:
❇ आपकी आँखों की रोशनी बचाता है
❇ आपकी किडनी को सुरक्षित रखता है
❇ आपका दिल मजबूत रखता है
❇ आपके पैरों की रक्षा करता है
❇ आपकी उम्र और गुणवत्ता दोनों बढ़ाता है

**आपके परिवार को आपकी जरूरत है।

आपके बच्चे आपकी जरूरत हैं।
आपकी खुशियाँ, आपके सपने, सब आपके स्वस्थ रहने पर निर्भर करते हैं।**

आज आप छोटी-सी कोशिश करेंगे,
तो कल बड़ी-बड़ी परेशानियों से बच जाएंगे।

✔ रोज़ 30 मिनट चलना

✔ खाना संतुलित रखना

✔ दवा और इंसुलिन समय पर लेना

✔ महीने में एक बार शुगर चेक करना

✔ 3–6 महीने में डॉक्टर को दिखाना

यह आपकी जिंदगी बदल देगा।

💬 मोटिवेशनल मैसेज

“शुगर बढ़ती है तो बीमारी बढ़ती है,
पर आप चाहते तो कंट्रोल कर सकते हैं।
खुद की जिंदगी से प्यार कीजिए…
क्योंकि आपकी सेहत ही आपका सबसे बड़ा धन है।”

“लापरवाही मत कीजिए—
आप बीमारी को नहीं, बीमारी आपको कंट्रोल कर लेगी।”

30/11/2025

डायबिटीज़ को कंट्रोल करने में लाइफ़स्टाइल मैनेजमेंट सबसे जरूरी हिस्सा है। सही खान-पान, नियमित व्यायाम और कुछ व्यवहारिक बदलाव मिलकर दवाइयों पर निर्भरता कम करते हैं और स्वास्थ्य को लंबे समय तक बेहतर बनाते हैं।

1. पोषण (Nutrition)

कार्बोहाइड्रेट का सही प्रबंधन

खाना कम मात्रा में और संतुलित

Mediterranean या DASH जैसे आहार
ये सब ब्लड शुगर और हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं।

2. व्यायाम (Physical Activity)

एरोबिक एक्सरसाइज

रेसिस्टेंस ट्रेनिंग

HIIT(High - intensity interval training)
ये इंसुलिन की कार्यक्षमता बढ़ाते हैं और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य सुधारते हैं।

3. व्यवहारिक बदलाव (Behavioral Interventions)

मोटिवेशनल इंटरव्यूइंग

CBT(Cognitive behavioral therapy)

सेल्फ-मॉनिटरिंग

स्ट्रेस मैनेजमेंट
ये आदतों को लंबे समय तक बनाए रखने में बहुत मदद करते हैं।

तकनीक जैसे मोबाइल ऐप या ग्लूकोमीटर से ट्रैकिंग करने से मरीजों की भागीदारी और सफलता बढ़ती है।

4. डॉक्टर की भूमिका

डॉक्टरों को चाहिए कि वे:

patient-centered care दें

सही शिक्षा व समर्थन दें

मरीज के अनुसार सलाह तय करें

अंत में

अगर मरीज धीरे-धीरे स्थायी आदतें अपनाएँ, तो लाइफ़स्टाइल बदलाव:

दवाइयों का असर बढ़ाते हैं

जीवन की गुणवत्ता सुधारते हैं

डायबिटीज़ की जटिलताओं और बोझ को कम करते है.

प्रश्न: डायबिटीज़ के किन लक्षणों से हम इसके होने का संदेह कर सकते हैं?उत्तर:डायबिटीज़ एक ऐसी बीमारी है जो कई बार लंबे सम...
29/11/2025

प्रश्न: डायबिटीज़ के किन लक्षणों से हम इसके होने का संदेह कर सकते हैं?

उत्तर:
डायबिटीज़ एक ऐसी बीमारी है जो कई बार लंबे समय तक बिना किसी लक्षण (asymptomatic) के बनी रह सकती है और देर से पता चलती है। यह बीमारी शरीर के लगभग सभी अंगों को प्रभावित करने वाली कई जटिलताओं का कारण बन सकती है। अक्सर यह बीमारी नियमित स्वास्थ्य जाँच के दौरान पता चलती है या तब जब मरीज अपनी किसी जटिलता के साथ डॉक्टर के पास आता है।

डायबिटीज़ के मुख्य (classical) लक्षण हैं—

1. Polyuria (बार-बार या अधिक पेशाब आना)

2. Polydipsia (बहुत अधिक प्यास लगना)

3. Polyphagia (बहुत अधिक भूख लगना)
इनके साथ-साथ वज़न कम होना भी एक सामान्य लक्षण है।

डायबिटीज़ वाले लोग अक्सर अपने घावों के जल्दी न भरने की शिकायत करते हैं। उन्हें बार-बार इंफेक्शन भी होते हैं। अधिक पेशाब आने की वजह से शरीर में पानी की कमी हो जाती है, जिससे अत्यधिक प्यास लगती है (polydipsia)। बार-बार पेशाब के साथ ग्लूकोज़ के शरीर से बाहर निकलने के कारण वज़न में कमी होती है। थकान, मांसपेशियों में कमजोरी और सुस्ती भी आम लक्षण हैं। कभी-कभी पुरुषों में नपुंसकता (impotence) भी हो सकती है।

कुछ डायबिटीज़ मरीजों में पेशाब के बाद जूतों पर सफेद दाग (glucose के सूखने से) दिखाई दे सकते हैं।

डायबिटीज़ के उन्नत (advanced) चरण में कुछ लोगों को किडनी फेल होना, सेंसशन कम होना (neuropathy) और दृष्टि धुंधली होना (retinopathy) जैसी जटिलताएँ भी हो सकती हैं।

29/11/2025

डायबिटीज़ को समय पर कंट्रोल करना ही सबसे बड़ी जीत है!
हम “डायबिटीज़ जागरूकता एवं सहयोग संस्था” (Diabetes Awareness & Support Organisation - DASO)आपको हर महीने ब्लड शुगर जांच की याद दिलाती है,
सही डाइट बताती है और डायबिटीज़ से होने वाले नुकसान से बचाती है।

👉 अभी सदस्य बनें और पाएं:

1. समय समय पर शुगर-जांच के लिए अलर्ट करना

2. डॉक्टर द्वारा डायबिटीज़ कंट्रोल करने लिए टिप्स देना

3. समय समय पर आपको जरूरी जांच कराने के लिए याद
दिलाना और आपके द्वारा भेजी गई रिपोर्ट को चेक करना

4. डायबिटीज़ कंट्रोल करने के लिए मोटिवेट करना

प्र. डायबिटीज़ (मधुमेह) क्या है?उत्तर:डायबिटीज़ एक ऐसी कंडीशन है जिसमें ब्लड में ग्लूकोज़ (शुगर) का लेवल नॉर्मल लेवल से ...
29/11/2025

प्र. डायबिटीज़ (मधुमेह) क्या है?

उत्तर:
डायबिटीज़ एक ऐसी कंडीशन है जिसमें ब्लड में ग्लूकोज़ (शुगर) का लेवल नॉर्मल लेवल से अधिक बढ़ जाता है।
यह स्थिति इंसुलिन नामक हार्मोन की कमी या उसके ठीक से काम न करने के कारण होती है। इंसुलिन अग्न्याशय (Pancreas) में बनता है।

रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) की नॉर्मल लेवल :

फास्टिंग (खाली पेट): 70–100 mg/dl

पोस्टप्रांडियल (भोजन के 2 घंटे बाद): 100–140 mg/dl

रैंडम: < 140 mg/dl

किसी व्यक्ति को डायबिटिक घोषित करने के लिए सिर्फ एक रीडिंग पर्याप्त नहीं होती।
कम से कम तीन बार जाँच आवश्यक है, और तीनों रिपोर्टें पॉज़िटिव (उच्च) आनी चाहिए।

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