05/03/2023
अमरोहा की कहानी सैयद इनाम हुसैन आबदी की जुबानी ...
आम और लकड़ी की ढोलकों के लिये पहचाना जाने वाला शहर अमरोहा इल्म और तहजीब का एक महत्वपूर्ण केन्द्र रहा है। अमरोहा की ज़मीन से उपजी कितनी ही कला, और साहित्य की हस्तियों को अपने फन के विस्तार और पहचान बनाने के लिये कभी न कभी अमरोहा छोड़ना ही पड़ा। ऐसे कितने ही लोगों ने पहचान बनाए रखने के लिये अपने नाम के आगे अमरोहवी लिखना शुरू कर दिया किन्तु मुझ जैसे, ऐसे भी बहुत से लोग हैं जो अमरोहवी नहीं लिखते पर अमरोहा उनके दिल में बसता है।
वख्त के हालात पर अपने को छोड़ कितने ही लोग दूरदराज़ के इलाकों में जा बसे किन्तु अमरोहा की मिट्टी से अपना नाता नहीं छोड़ सके। जिसे जब भी वख्त मिलता है अमरोहा की मिट्टी की सुगंध लेने चला आता है।किन्तु ऐसे भी बहुत से लोग है जिनके हालात उन्हें यह मौका नहीं देते पर उनकी निगाहें अमरोहा की तरफ ही टकटकी लगाये रहती हैं। उन्हें हमेशा तलाश रहती है अमरोहा से आने वाले पैगाम की...
अमरोहा शहर अपनेआप में एक अजूबा है। कितने वहां रहनेवाले लोग अपने शहर और वहां के लोंगो के बारे में नहीं जानते। इसबात का इल्म अमरोहा के ही एक नौजवान लेखक और कम्प्यूटर एप्लीकेशन के विशेषज्ञ इनाम आबदी अमरोहवी को भी था। हालांकि वह एक अरसे से लखनऊ आ बसे हैं किन्तु अमरोहा को लेकर उनकी संजीदगी का एहसास उनकी हाल ही में अमरोहा पर पब्लिश किताब से लगाया जा सकता है।
आज सुबह इनाम आबदी मेरे घर तशरीफ़ लाये और मुझे अपनी किताब मेकिंग आफ ए कस्बा, द स्टोरी आफ अमरोहा भेंट की। इस किताब में मेरा भी मुक्तसर सा सहयोग रहा है। एक सरसरी दृष्टि से देखने पर लगता है कि लेखक ने सेलेक्टिव हो कर प्रमाणिक और महत्वपूर्ण जानकारी पर ही फोकस किया है। इनाम साहब को उनकी इस कोशिश और शानदार प्रकाशन के लिये बहुत-बहुत बधाई।