Shri Durga Saptshati Chandi Mandir Foundation

Shri Durga Saptshati Chandi Mandir Foundation ऐंकारी सृष्टिरूपायै ह्रींकारी प्रतिपालिका।
क्लींकारी कामरूपिण्यै बीजरूपे नमोऽस्तु ते ॥३॥

श्रीं दुर्गा सप्तशती चंडी मंदिर फाउंडेशन पारंपरिक वैदिक दृष्टिकोण से कुछ आचार्य मानते हैं कि जिन मंत्रों, वेदपाठों या वि...
02/06/2026

श्रीं दुर्गा सप्तशती चंडी मंदिर फाउंडेशन

पारंपरिक वैदिक दृष्टिकोण से कुछ आचार्य मानते हैं कि जिन मंत्रों, वेदपाठों या विशेष अनुष्ठानों के लिए उपनयन संस्कार (जनेऊ धारण) आवश्यक बताया गया है, उनमें जनेऊ धारण करना चाहिए। इसलिए कुछ विद्वान सिद्ध कुंजिका स्तोत्र या अन्य गूढ़ साधनाओं के लिए भी जनेऊ, शुद्धाचार और गुरु-दीक्षा पर जोर देते हैं।
लेकिन सिद्ध कुंजिका स्तोत्र स्वयं वेद मंत्र नहीं है, बल्कि देवी उपासना से संबंधित स्तोत्र है। शाक्त परंपराओं में कई आचार्य और संत यह मानते हैं कि देवी भक्ति का अधिकार सभी श्रद्धालुओं को है। इसलिए वे इसके पाठ को केवल जनेऊधारी लोगों तक सीमित नहीं मानते।
यही कारण है कि आपको दो प्रकार के मत सुनने को मिलते हैं:
कठोर पारंपरिक मत — जनेऊ, दीक्षा, नियम और गुरु-अनुमति आवश्यक है।
भक्ति-प्रधान मत — श्रद्धा, शुद्धता और देवी-भक्ति प्रमुख है; जाति या जनेऊ को अनिवार्य नहीं माना जाता।
इसलिए यह कहना कि "सभी विद्वान जनेऊ को अनिवार्य मानते हैं" सही नहीं होगा, क्योंकि इस विषय में विभिन्न संप्रदायों और आचार्यों के मत अलग-अलग हैं।

"कुछ परंपराओं में सिद्ध कुंजिका स्तोत्र के पाठ हेतु जनेऊ धारण करना, शुद्धाचार का पालन करना तथा गुरु-मार्गदर्शन प्राप्त करना आवश्यक माना गया है। वहीं अन्य परंपराओं में श्रद्धा, भक्ति और देवी के प्रति समर्पण को प्रमुख आधार माना गया है।"
यह कथन विभिन्न परंपराओं का सम्मान करता है और किसी एक मत को सार्वभौमिक शास्त्रीय नियम के रूप में प्रस्तुत नहीं करता।
॥ जय मां चंडी ॥ 🙏🚩🌺
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पूर्णिमा के अवसर पर सतलुज नदी तट पर भगवान सत्यनारायण जी की कथा का आयोजनआनंदपुर साहिब, 31 मई 2026 (रविवार): पूर्णिमा के प...
31/05/2026

पूर्णिमा के अवसर पर सतलुज नदी तट पर भगवान सत्यनारायण जी की कथा का आयोजन

आनंदपुर साहिब, 31 मई 2026 (रविवार): पूर्णिमा के पावन अवसर पर सतलुज नदी तट पर श्री दुर्गा सप्तशती चंडी मंदिर फाउंडेशन द्वारा भगवान श्री सत्यनारायण जी की पावन कथा एवं धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन श्रद्धा और भक्ति भाव से किया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर भगवान सत्यनारायण जी का आशीर्वाद प्राप्त किया।

कार्यक्रम में श्री दुर्गा सप्तशती चंडी मंदिर फाउंडेशन के आचार्य दानवीर विश्वकर्मा ब्राह्मण विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने भगवान श्री सत्यनारायण जी की कथा में सहभागिता करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, सेवा, सत्य एवं सनातन संस्कृति के मार्ग पर चलने का संदेश दिया तथा सभी के सुख, समृद्धि और कल्याण की कामना की।

कथा के दौरान भगवान सत्यनारायण जी की महिमा, सत्य आचरण, धर्म, दान-पुण्य तथा मानव जीवन में भक्ति के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। इस अवसर पर जय देव लखविंदर खनौड़ा ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य को सत्य, सेवा और ईश्वर भक्ति के मार्ग पर चलकर अपने जीवन को सफल बनाना चाहिए।

इस अवसर पर श्री दुर्गा सप्तशती चंडी मंदिर फाउंडेशन के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के चेयरमैन जय देव लखविंदर खनौड़ा ने विशेष रूप से उपस्थित होकर भगवान सत्यनारायण जी की कथा का श्रवण किया तथा आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम के दौरान फाउंडेशन के कोर कमेटी सदस्य अमनप्रीत सिंह भट्टी, जिला मालेरकोटला (यूथ विंग) के अध्यक्ष गुरसेवक सिंह ढींडसा तथा गुरसेवक सिंह सोटी भी उपस्थित रहे। श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया और सर्वजन कल्याण, विश्व शांति तथा मानवता के मंगल हेतु प्रार्थना की।

कार्यक्रम के समापन पर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया तथा सभी के सुख, शांति, समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना की गई। श्री दुर्गा सप्तशती चंडी मंदिर फाउंडेशन ने भविष्य में भी ऐसे धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम आयोजित करने का संकल्प दोहराया।

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29/05/2026
27/05/2026

श्रीं दुर्गा सप्तशती चंडी मंदिर के आचार्य दनवीर विश्वकर्मा ब्राह्मण जी द्वारा जल में बैठकर सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ अत्यंत गूढ़, रहस्यमय एवं शक्तिशाली साधना माना जाता है। तांत्रिक परंपरा में इसे इतना प्रभावशाली माना गया है कि बड़े-बड़े साधक भी इस साधना को पूर्ण नियम, संयम और गुरु-आदेश के बिना करने का साहस नहीं करते। इस साधना को समझना और विधिपूर्वक संपन्न करना अत्यंत कठिन एवं तपस्वी कार्य माना गया है।
मां Durga Saptashati की असीम कृपा एवं आशीर्वाद से आचार्य दनवीर विश्वकर्मा ब्राह्मण जी को पूजा-पाठ, यज्ञ एवं होम जैसी दिव्य साधनाओं को संपन्न करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। श्रद्धा, भक्ति और पूर्ण समर्पण के साथ की गई यह साधना देवी कृपा, आत्मबल एवं आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है।
॥ जय मां चंडी ॥ 🙏🚩🌺

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26/05/2026

श्री दुर्गा सप्तशती चंडी मंदिर के आचार्य दनवीर विश्वकर्मा ब्राह्मण जी द्वारा अष्टमी तिथि के पावन अवसर पर जल में बैठकर सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ किया गया।
शाक्त परंपरा में अष्टमी तिथि देवी उपासना के लिए अत्यंत शुभ एवं फलदायी मानी जाती है। जल को शुद्धता, पवित्रता और दिव्य चेतना का प्रतीक माना गया है। इसलिए जल में बैठकर अथवा जल के समीप की गई साधना साधक के मन को एकाग्र, शांत और सात्त्विक बनाती है।
शास्त्रीय मान्यता के अनुसार अष्टमी तिथि पर देवी शक्ति का विशेष प्रभाव रहता है। इस दिन श्रद्धा, नियम और पूर्ण समर्पण के साथ किया गया जप, पाठ एवं साधना साधक को विशेष आध्यात्मिक फल प्रदान करती है। जल में बैठकर सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करना तप, संकल्प और आत्मनिष्ठ साधना का प्रतीक माना जाता है।
सिद्ध कुंजिका स्तोत्र को Durga Saptashati के समस्त मंत्रों की कुंजी कहा गया है। मान्यता है कि इसके श्रद्धापूर्वक पाठ से देवी महाशक्ति की कृपा प्राप्त होती है, मंत्र जागृत होते हैं तथा साधना की सिद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
अष्टमी तिथि पर जल में बैठकर सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करने से साधना में विशेष एकाग्रता, शुद्धि, तपशक्ति एवं देवी कृपा की प्राप्ति होती है। शास्त्रीय मान्यता के अनुसार इस दिन किया गया जप-पाठ साधक को विशेष आध्यात्मिक एवं पुण्यदायी फल प्रदान करता है।
॥ जय माता दी ॥ 🙏🌺🚩
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25/05/2026

श्रीं दुर्गा सप्तशती चंडी मंदिर के आचार्य दनवीर विश्वकर्मा ब्राह्मण जी द्वारा अष्टमी तिथि के पावन अवसर पर जल में बैठकर सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ किया गया। सिद्ध कुंजिका स्तोत्र को दुर्गा सप्तशती के मंत्रों की कुंजी माना गया है। इसके पाठ से सप्तशती के मंत्र जागृत एवं सिद्ध होते हैं तथा साधक को मंत्र-साधना का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
॥सिद्धकुञ्जिकास्तोत्रम्॥

शिव उवाच
शृणु देवि प्रवक्ष्यामि कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम्।
येन मन्त्रप्रभावेण चण्डीजापः शुभो भवेत् ॥१॥

न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम्।
न सूक्तं नापि ध्यानं च न न्यासो न च वार्चनम्॥२॥

कुञ्जिकापाठमात्रेण दुर्गापाठफलं लभेत्।
अति गुह्यतरं देवि देवानामपि दुर्लभम्॥३॥

गोपनीयं प्रयत्‍‌नेन स्वयोनिरिव पार्वति।
मारणं मोहनं वश्यं स्तम्भनोच्चाटनादिकम्।
पाठमात्रेण संसिद्ध्येत् कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम्॥४॥

॥अथ मन्त्रः॥
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्च�

🌺🚩 जय माँ चंडी 🚩🌺आचार्य दनवीर विश्वकर्मा ब्राह्मण जी ने श्री दुर्गा सप्तशती चंडी मंदिर में माँ चंडी की पावन पूजा एवं प्र...
23/05/2026

🌺🚩 जय माँ चंडी 🚩🌺
आचार्य दनवीर विश्वकर्मा ब्राह्मण जी ने श्री दुर्गा सप्तशती चंडी मंदिर में माँ चंडी की पावन पूजा एवं प्राण प्रतिष्ठा का शुभारंभ किया है।
यह दिव्य अनुष्ठान माँ आदिशक्ति की कृपा प्राप्त करने तथा जीवन से नकारात्मक शक्तियों, बाधाओं एवं शत्रुओं के विनाश हेतु समर्पित है।
माँ चंडी को सनातन धर्म में शक्ति, साहस और धर्म रक्षा की अधिष्ठात्री देवी माना गया है।
देवी की प्राण प्रतिष्ठा एवं चंडी उपासना के माध्यम से भक्तों के कष्टों का नाश, शत्रुओं का विनाश और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
यह पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि धर्म, सत्य और न्याय की विजय का प्रतीक है।
आचार्य दनवीर विश्वकर्मा ब्राह्मण जी द्वारा किए जा रहे इस पावन कार्य से भक्तों में नई आध्यात्मिक ऊर्जा और देवी शक्ति के प्रति अटूट विश्वास जागृत हो रहा है।
✨ “या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥” ✨
🚩 जय माँ चंडी 🚩
📿 श्री दुर्गा सप्तशती चंडी मंदिर फाउंडेशन 📿
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🌺🙏 आचार्य दनवीर विश्वकर्मा ब्राह्मण जी 🙏🌺आचार्य दनवीर विश्वकर्मा ब्राह्मण जी ने श्री दुर्गा सप्तशती चंडी मंदिर फाउंडेशन ...
21/05/2026

🌺🙏 आचार्य दनवीर विश्वकर्मा ब्राह्मण जी 🙏🌺
आचार्य दनवीर विश्वकर्मा ब्राह्मण जी ने श्री दुर्गा सप्तशती चंडी मंदिर फाउंडेशन के माध्यम से सनातन धर्म, शक्ति उपासना और समाज सेवा के पावन कार्यों को नई दिशा प्रदान की है।
माँ चंडी की कृपा से प्रेरित होकर वे धार्मिक अनुष्ठानों, चंडी पाठ, कलश स्थापना एवं जनकल्याणकारी कार्यों द्वारा समाज में आध्यात्मिक जागरूकता फैलाने का सतत प्रयास कर रहे हैं।
इस दिव्य कलश स्थापना एवं पूजा के माध्यम से माँ आदिशक्ति का आह्वान कर सुख, शांति और समृद्धि की मंगलकामना की गई।
उनका उद्देश्य केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं, बल्कि समाज में संस्कार, सेवा, एकता और धर्म के प्रकाश को फैलाना है।
✨ “धर्म की शक्ति ही समाज को सत्य, शांति और समृद्धि की ओर ले जाती है।” ✨
🚩 जय माता दी 🚩
📿 श्री दुर्गा सप्तशती चंडी मंदिर फाउंडेशन 📿
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ਅਮਲੋਹ ਦੇ ਸ਼੍ਰੀ ਦੁਰਗਾ ਸਪਤਸ਼ਤੀ ਚੰਡੀ ਮੰਦਰ ਵਿਖੇ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ 'ਲੋਹ ਕਲਸ਼' ਦੀ ਸਥਾਪਨਾ​ਅਮਲੋਹ:ਸ਼੍ਰੀ ਦੁਰਗਾ ਸਪਤਸ਼ਤੀ ਚੰਡੀ ਮੰਦਰ ਵਿਖੇ ਅਧਿਆਤਮ...
02/05/2026

ਅਮਲੋਹ ਦੇ ਸ਼੍ਰੀ ਦੁਰਗਾ ਸਪਤਸ਼ਤੀ ਚੰਡੀ ਮੰਦਰ ਵਿਖੇ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ 'ਲੋਹ ਕਲਸ਼' ਦੀ ਸਥਾਪਨਾ
​ਅਮਲੋਹ:
ਸ਼੍ਰੀ ਦੁਰਗਾ ਸਪਤਸ਼ਤੀ ਚੰਡੀ ਮੰਦਰ ਵਿਖੇ ਅਧਿਆਤਮਿਕ ਗਤੀਵਿਧੀਆਂ ਦੀ ਲੜੀ ਨੂੰ ਅੱਗੇ ਤੋਰਦਿਆਂ, ਮੰਦਰ ਦੇ ਚੇਅਰਮੈਨ ਜੈ ਦੇਵ ਲਖਵਿੰਦਰ ਖਨੌੜਾ ਵੱਲੋਂ ਪੂਰਨ ਵਿਧੀ-ਵਿਧਾਨ ਅਨੁਸਾਰ ਲੋਹੇ ਦੇ ਕਲਸ਼ ਦੀ ਸਥਾਪਨਾ ਕੀਤੀ ਗਈ। ਇਸ ਮੌਕੇ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਤੌਰ 'ਤੇ ਲੋਹੇ ਦੀ ਥਾਲੀ ਅਤੇ ਲੋਹੇ ਦੀ ਗੜਵੀ ਦਾ ਇਸਤੇਮਾਲ ਕੀਤਾ ਗਿਆ, ਜੋ ਕਿ ਧਾਰਮਿਕ ਸਾਧਨਾ ਵਿੱਚ ਆਪਣਾ ਇੱਕ ਵਿਲੱਖਣ ਮਹੱਤਵ ਰੱਖਦਾ ਹੈ।
​ਸਥਾਪਨਾ ਦਾ ਮੁੱਖ ਮਨੋਰਥ:
ਇਸ ਧਾਰਮਿਕ ਅਨੁਸ਼ਠਾਨ ਦਾ ਮੁੱਖ ਉਦੇਸ਼ ਸ਼ਤਰੂ ਨਾਸ਼, ਗ੍ਰਹਿ ਸ਼ਾਂਤੀ ਅਤੇ ਪਰਿਵਾਰਕ ਸੁਰੱਖਿਆ ਹੈ। ਧਾਰਮਿਕ ਮਾਨਤਾਵਾਂ ਅਨੁਸਾਰ:
​ਲੋਹਾ (Iron): ਸ਼ਕਤੀ, ਦ੍ਰਿੜਤਾ ਅਤੇ ਅਟੁੱਟ ਸੁਰੱਖਿਆ ਦਾ ਪ੍ਰਤੀਕ ਹੈ। ਇਹ ਨਕਾਰਾਤਮਕ ਊਰਜਾ ਨੂੰ ਸੋਖ ਕੇ ਭਗਤਾਂ ਲਈ ਇੱਕ 'ਰੱਖਿਆ ਕਵਚ' ਵਜੋਂ ਕੰਮ ਕਰਦਾ ਹੈ।
​ਚੰਡੀ ਪਾਠ: ਸ਼੍ਰੀ ਦੁਰਗਾ ਸਪਤਸ਼ਤੀ ਦੇ ਪਾਠ ਦੌਰਾਨ ਲੋਹੇ ਦੇ ਪਾਤਰਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਦੇਵੀ ਮਾਤਾ ਦੇ ਉਸ ਰੂਪ ਦੀ ਅਰਾਧਨਾ ਹੈ ਜੋ ਬੁਰਾਈਆਂ ਅਤੇ ਰੁਕਾਵਟਾਂ ਦਾ ਜੜ੍ਹ ਤੋਂ ਨਾਸ਼ ਕਰਦੀ ਹੈ।
​ਚੇਅਰਮੈਨ ਦਾ ਸੰਦੇਸ਼:
ਇਸ ਮੌਕੇ ਚੇਅਰਮੈਨ ਜੈ ਦੇਵ ਲਖਵਿੰਦਰ ਖਨੌੜਾ ਨੇ ਸਮੂਹ ਸੰਗਤ ਨਾਲ ਵਿਚਾਰ ਸਾਂਝੇ ਕਰਦਿਆਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਇਹ ਸਥਾਪਨਾ ਕੇਵਲ ਇੱਕ ਰਸਮ ਨਹੀਂ, ਸਗੋਂ ਮਾਤਾ ਰਾਣੀ ਦੀ ਅਪਾਰ ਕਿਰਪਾ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨ ਦਾ ਇੱਕ ਸਾਧਨ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ, "ਸਾਡਾ ਮਨੋਰਥ ਘਰ-ਪਰਿਵਾਰ ਦੀ ਸੁੱਖ-ਸ਼ਾਂਤੀ ਦੇ ਨਾਲ-ਨਾਲ ਸਮੁੱਚੇ ਸਮਾਜ ਦੀ ਭਲਾਈ ਅਤੇ ਮਾਨਸਿਕ ਸ਼ਾਂਤੀ ਸਥਾਪਿਤ ਕਰਨਾ ਹੈ।"
​ਮੰਦਰ ਵਿੱਚ ਹੋਈ ਇਸ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਸਥਾਪਨਾ ਨੂੰ ਲੈ ਕੇ ਸ਼ਰਧਾਲੂਆਂ ਵਿੱਚ ਭਾਰੀ ਉਤਸ਼ਾਹ ਅਤੇ ਅਟੁੱਟ ਆਸਥਾ ਦੇਖਣ ਨੂੰ ਮਿਲ ਰਹੀ ਹੈ।
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श्रीं दुर्गा सप्तशती चंडी मंदिर फाउंडेशन की तरफ से पर्यावरण संरक्षण के लिए पेड़-पौधों का रोपण करना अत्यंत आवश्यक है।पेड़...
22/04/2026

श्रीं दुर्गा सप्तशती चंडी मंदिर फाउंडेशन की तरफ से पर्यावरण संरक्षण के लिए पेड़-पौधों का रोपण करना अत्यंत आवश्यक है।

पेड़ लगाओ, पेड़ बचाओ, देश बचाओ।

आने वाले समय में पर्यावरण संतुलन और देश के सुरक्षित भविष्य के लिए पेड़-पौधों की देखभाल करना भी उतना ही जरूरी है, जितना उनका रोपण करना।
हमारी श्रीं दुर्गा सप्तशती चंडी मंदिर फाउंडेशन हर वर्ष पेड़-पौधों के रोपण का कार्य करती आ रही है।
हमारी कोशिश है कि हम अपने देश के उज्ज्वल और सुरक्षित भविष्य के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाएं। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ हरियाली बढ़ेगी और जीवन को समृद्धि मिलेगी।

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