14/06/2026
तरुण पुस्तकालय, भीकमपुरा, अलवर राजस्थान
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तरुण पुस्तकालय, भीकमपुरा वैश्विक जल संरक्षण, जल साहित्य, जल दर्शन, जल संस्कृति और प्रकृति के संबंधों से संबंधित विषयों पर पूरी दुनिया की संस्कृति और प्रकृति की जानकारी देने वाली पत्र-पत्रिकाओं एवं पुस्तकों का समृद्ध संग्रह है। यह पुस्तकालय गांव में एक छोटे से स्थान पर, दूर-दराज के गांव भीकमपुरा में सहजता से उपलब्ध है।
तरुण भारत संघ की स्थापना के दूसरे दशक के प्रारंभ में ही इस पुस्तकालय की शुरुआत हुई। वर्ष 1986 में भीकमपुरा में इसका आरंभ हुआ। तब से लेकर आज तक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकृति, संस्कृति, विरासत, जल, जमीन, जंगल और जंगलवासियों के जीवन से जुड़े प्रश्नों तथा विषयों पर आधारित पुस्तकें यहां संग्रहित की जाती रही हैं।
तरुण भारत संघ ने इस पुस्तकालय के लिए कभी अलग से कोई बजट नहीं बनाया। यह एक प्रकार का “बिना बजट का पुस्तकालय” है। जो भी पुस्तकें हमें आवश्यक लगीं, उन्हें हमने मांगा और लोगों ने उन्हें निःशुल्क उपलब्ध कराया। अनेक प्रकाशकों, संस्थाओं, विश्वविद्यालयों और अन्य संगठनों ने पुस्तकें प्रदान कीं। इस प्रकार पुस्तकों का संग्रह निरंतर बढ़ता गया और आज यहां लगभग 30,000 पुस्तकों का विशाल भंडार उपलब्ध है।
इसके अतिरिक्त यहां लगभग डेढ़ सौ पत्र-पत्रिकाओं का भी संग्रह रहा है। वर्तमान में उनकी संख्या कुछ कम हुई है, किंतु पहले विश्वभर की लगभग 150 पत्र-पत्रिकाएं नियमित रूप से यहां आती थीं। गांव के बच्चे, तरुण भारत संघ के कार्यकर्ता तथा विशेष रूप से पानी के क्षेत्र में कार्य करने वाले देश-विदेश के लोग संदर्भ सामग्री की खोज में इस पुस्तकालय तक पहुंचते हैं।
यह एक सक्रिय और जीवंत पुस्तकालय है। प्रतिदिन सुबह पुस्तकालय खुलता है और लोग अपनी आवश्यकता के अनुसार पुस्तकें देखकर पढ़ते हैं। यहां का वातावरण अत्यंत सहज और खुला है। तरुण भारत संघ के सभी प्रकाशन इस पुस्तकालय के माध्यम से लोगों को निःशुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं। इच्छुक व्यक्ति संदर्भ दर्ज कराते हैं और पुस्तकालय से संबंधित कार्यकर्ता उन्हें तरुण भारत संघ की प्रकाशित पुस्तकें निःशुल्क उपलब्ध करा देते हैं।
तरुण भारत संघ ने इस पुस्तकालय को निःशुल्क इसलिए रखा है क्योंकि इसके निर्माण में संस्था का कोई आर्थिक व्यय नहीं हुआ। यह लोगों के सहयोग से विकसित हुआ है। इसलिए नैतिक रूप से यह निर्णय लिया गया कि इस पुस्तकालय से संस्था कोई आय अर्जित नहीं करेगी।
तरुण पुस्तकालय, भीकमपुरा एक प्रकार से लोक पुस्तकालय हैकृलोगों का पुस्तकालय। यहां पाठकों को अपनी आवश्यकता के अनुसार पुस्तकें बिना किसी अनावश्यक रोक-टोक के उपलब्ध हो जाती हैं। हालांकि कुछ दुर्लभ और संदर्भ पुस्तकें, जो तरुण भारत संघ को विशेष रूप से कहीं से प्राप्त हुई हैं, केवल पुस्तकालय में अध्ययन हेतु उपलब्ध रहती हैं। उन्हें बाहर नहीं दिया जाता, किंतु पाठक उन्हें पढ़ सकते हैं, उनकी फोटोकॉपी कर सकते हैं अथवा स्कैन कर सकते हैं।
विषय-विशेष से संबंधित तरुण भारत संघ की प्रकाशित पुस्तकें सभी को निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं।
इस पुस्तकालय में संयुक्त राष्ट्र संघ, एफएओ, यूएनडीपी, वर्ल्ड बैंक आदि संस्थाओं की महत्वपूर्ण पुस्तकें उपलब्ध हैं। साथ ही महात्मा गांधी, स्वामी विवेकानंद, विनोबा भावे, ग्राम स्वराज, ग्राम स्वावलंबन, जल, जंगल और जमीन की समृद्धि जैसे विषयों पर भी व्यापक साहित्य संग्रहित है।
पानी के प्रबंधन से लेकर मिट्टी, हवा और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण एवं प्रबंधन से संबंधित अनेक पुस्तकें यहां उपलब्ध हैं। खेती, खाद, बीज और मिट्टी जैसे विषयों पर भी समृद्ध सामग्री मौजूद है। भारत की आत्माकृखेती, किसानी, जवानी और पानीकृसे संबंधित ज्ञान का यह महत्वपूर्ण केंद्र है।
युवाओं के समक्ष उपस्थित समकालीन प्रश्नों को समझने और उनके समाधान प्रस्तुत करने वाली पुस्तकें यहां उपलब्ध हैं। साथ ही खेती को समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने वाले व्यावहारिक अनुभवों तथा स्वावलंबन के प्रत्यक्ष दर्शन से संबंधित साहित्य भी यहां संग्रहित है।
यह पुस्तकालय केवल पुस्तकों का संग्रह नहीं, बल्कि व्यवहार और संस्कार का भी केंद्र है। जीवन के लिए आवश्यक ज्ञान, प्रेरणा और मार्गदर्शन देने वाली पुस्तकें यहां सहजता से उपलब्ध हो जाती हैं। इसी कारण इसे “तरुण लोक पुस्तकालय” कहा जाता है।
आप भी आइए, इस पुस्तकालय को देखिए, पढ़िए और अनुभव कीजिए। निश्चित रूप से यहां का वातावरण और ज्ञान-संपदा आपको आकर्षित करेगी।