29/12/2025
उत्तराखंड में हाल ही में एक नॉर्थ-ईस्ट के लड़के की हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया। यह सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि नफरत, भेदभाव और कमजोर कानून-व्यवस्था का दर्दनाक सच है।
पहाड़ की शांत वादियों में जब एक बाहर से आया हुआ युवा—जो यहाँ पढ़ने, काम करने या सपने पूरा करने आया था—हिंसा की आग में जल जाता है, तो यह देवभूमि के माथे पर लगा ऐसा दाग है जिसे आसानी से धोया नहीं जा सकता।
नॉर्थ-ईस्ट के लड़कों को अक्सर:
उनके कपड़ों
उनकी भाषा
और उनके चेहरे-रंग रूप के कारण अलग समझा जाता है
और कुछ दरिंदे इसी अलग दिखने को निशाना बनाकर उन्हें कमजोर समझ बैठते हैं।
उत्तराखंड की धरती वीरों की है, लेकिन कुछ हिंसा-भड़काऊ लोगों ने इसे डर की धरती बनाने की कोशिश की। यह हत्या बताती है कि:
समाज में सहनशीलता घट रही है
पुलिस और प्रशासन हर बार समय पर नहीं पहुँचता
और न्याय की प्रक्रिया इतनी धीमी है कि अपराधियों को डर नहीं, हौंसला मिलता है
लेकिन यह भी सच है—
“उत्तराखंड पूरा नकली नहीं है,
यहाँ इंसानियत भी जिंदा है,
बस उसे आवाज देने की जरूरत है।”
अब जरूरत है:
दोषियों को फास्ट-ट्रैक कोर्ट में सजा
नॉर्थ-ईस्ट के छात्रों और युवाओं की सुरक्षा गारंटी
और समाज में भेदभाव खत्म करने की मुहिम
क्योंकि आज अगर एक नॉर्थ-ईस्ट का बेटा मरा है,
तो कल यह आग किसी भी परिवार तक पहुँच सकती है।
“अलग चेहरा, अलग बोली,
पर खून का रंग एक ही है…
फिर नफरत किस बात की है?”