Rajputs of Prayagraj

Rajputs of Prayagraj एक नेतृत्व! एक निर्णय! एक निर्देश!
हमारा उद्देश्य प्रयागराज के राजपूत समाज को इन तीन सिद्धांतों के साथ एक मंच पर एक छत्र के नीचे एक मत के साथ संगठित करना है!

08/08/2026

श्री जगराय माता
कच्छवाहा कुल की कुलदेवी

"कुल की रक्षा, धर्म की शक्ति और आस्था का आधार—
जय श्री जगराय माता।"

कच्छवाहा वंश की आराध्या कुलदेवी श्री जगराय माता के चरणों में कोटि-कोटि नमन।

कुलदेवी केवल आस्था का केंद्र नहीं होतीं...
वह पीढ़ियों को अपनी जड़ों, संस्कारों और परंपराओं से जोड़ने वाली शक्ति होती हैं।

माँ से यही प्रार्थना है कि कच्छवाहा कुल पर सदैव अपनी कृपा बनाए रखें, परिवारों में सुख-शांति दें और प्रत्येक संतति को धर्म, साहस, सदाचार एवं स्वाभिमान के मार्ग पर चलने की शक्ति प्रदान करें।

जय श्री जगराय माता।
जय राजपूताना।

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Rajputs Of Prayagraj

जय राजपूताना। जय माँ शारदा भवानी।

— Rajputs Of Prayagraj

एक नेतृत्व। एक निर्णय। एक निर्देश।
एक क्षत्र। एक मंच। एक मत।

{Jagray Mata, Kachhwaha Kuldevi, Kachhwaha Rajput, Kuldevi, Rajputana}

08/08/2026

"दो ही चीजां आपसूं, चाहूं म्हारी मात।
मन में थारी मूर्ति, सिर पर थारो हाथ॥
मंढ़ देशाणै मायनैं, सगत रूप साक्षात्।
दुनिया खातर देवता, म्हारी खातर मात॥"

इन पंक्तियों में भक्ति भी है और माँ से जुड़ा एक अद्भुत अपनापन भी।

दुनिया के लिए माँ करणी देवी हैं,
शक्ति का स्वरूप हैं,
पूजनीय हैं।

लेकिन भक्त के लिए...

वह सबसे पहले "माँ" हैं।

मन में उनकी छवि,
सिर पर उनका आशीर्वाद,
और हृदय में उनका विश्वास हो,
तो कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी मनुष्य अकेला नहीं रहता।

हमारी प्रार्थना बस इतनी है—

माँ करणी का हाथ हमारे सिर पर बना रहे,
हमारे परिवार पर उनकी कृपा बनी रहे,
हमारे समाज में एकता और सद्भाव बना रहे,
और हमें धर्म, सत्य, साहस एवं स्वाभिमान के मार्ग पर चलने की शक्ति मिलती रहे।

दुनिया खातिर देवता...
म्हारी खातिर मात।

जय माँ करणी।
जय माँ शारदा भवानी।
जय माँ जगदम्बा।
जय राजपूताना।

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जय राजपूताना। जय माँ शारदा भवानी।

— Rajputs of Prayagraj

एक नेतृत्व। एक निर्णय। एक निर्देश।
एक क्षत्र। एक मंच। एक मत।

{Maa Karni, Karni Mata, Kuldevi, Rajputana, Shakti, Sanatan Dharma}

08/08/2026

"कुछ सैनिक सेना में सेवा करते हैं...
और कुछ सैनिक स्वयं एक संस्था बन जाते हैं।"

लेफ्टिनेंट जनरल हनुत सिंह राठौड़, PVSM, MVC उन्हीं महान सैनिकों में से एक थे।

6 जुलाई 1933 को राजस्थान के जसोल में जन्मे हनुत सिंह ने 1952 में भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त किया और 17 पूना हॉर्स से जुड़े। आगे चलकर वे भारतीय सेना के सबसे सम्मानित आर्मर्ड कमांडरों में गिने गए। 1

1971 का भारत-पाक युद्ध उनके सैन्य जीवन का सबसे गौरवशाली अध्याय बना।

बसंतर की लड़ाई में 17 पूना हॉर्स ने पाकिस्तानी बख्तरबंद जवाबी हमलों का सामना किया। हनुत सिंह के नेतृत्व में भारतीय टैंक दस्ते ने असाधारण साहस और सैन्य कौशल का प्रदर्शन किया। इसी युद्ध में उनके रेजिमेंट के सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेतरपाल को मरणोपरांत परमवीर चक्र मिला। हनुत सिंह को उनके व्यक्तिगत साहस और उत्कृष्ट नेतृत्व के लिए महावीर चक्र प्रदान किया गया। 2

उनकी पहचान केवल युद्धभूमि के योद्धा के रूप में नहीं थी।

वे कठोर अनुशासन, पेशेवर उत्कृष्टता, अध्ययन और नैतिक दृढ़ता के लिए भी प्रसिद्ध थे। बाद में उन्होंने 1 आर्मर्ड डिवीजन और II Corps जैसी महत्वपूर्ण कमान संभाली। 3

एक ऐसा सैनिक जिसने पद से अधिक कर्तव्य को महत्व दिया...

और जिसने अपने आचरण से साबित किया कि महान सेनापति केवल युद्ध नहीं जीतते—
वे आने वाली पीढ़ियों को नेतृत्व करना सिखाते हैं।

फक्र-ए-हिंद—
लेफ्टिनेंट जनरल हनुत सिंह राठौड़ को शत-शत नमन।

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जय राजपूताना। जय माँ शारदा भवानी।

— Rajputs of Prayagraj

एक नेतृत्व। एक निर्णय। एक निर्देश।
एक क्षत्र। एक मंच। एक मत।

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07/08/2026

रमानंद सागर कृत रामायण | भाग – 3

"ऐसा दृश्य शायद भारत ने पहले कभी नहीं देखा था।"

रविवार की सुबह...

सड़कों पर सन्नाटा...

बाज़ारों में भीड़ नहीं...

लोग स्नान कर, पूजा करके, पूरे परिवार के साथ टीवी के सामने बैठ जाते थे।

रामायण का प्रसारण केवल एक धारावाहिक नहीं था...

वह पूरे भारत का सामूहिक सांस्कृतिक अनुभव बन गया।

यह धारावाहिक भारतीय टेलीविजन के इतिहास का सबसे लोकप्रिय कार्यक्रमों में से एक बना। इसके पात्र घर-घर पूजे जाने लगे और संवाद लोगों की स्मृतियों का हिस्सा बन गए।

आज भी जब रामायण का नाम लिया जाता है, तो सबसे पहले रमानंद सागर की वही अमर प्रस्तुति याद आती है।

यह केवल एक सीरियल नहीं...

भारत की संस्कृति, आस्था और मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के आदर्शों को घर-घर पहुँचाने वाला युगांतकारी अभियान था।

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जय श्रीराम।
जय राजपूताना। जय माँ शारदा भवानी।

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एक क्षत्र। एक मंच। एक मत।

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07/08/2026

रमानंद सागर कृत रामायण | भाग – 2

"कुछ भूमिकाएँ निभाई नहीं जातीं...

उन्हें जिया जाता है।"

जब श्रीराम के लिए अरुण गोविल, माता सीता के लिए दीपिका चिखलिया, हनुमान जी के लिए दारा सिंह और रावण के लिए अरविंद त्रिवेदी का चयन हुआ, तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि ये कलाकार करोड़ों लोगों के लिए उन्हीं पात्रों की पहचान बन जाएंगे।

शूटिंग के दौरान पूरी टीम अत्यंत अनुशासन और श्रद्धा के साथ कार्य करती थी।

समय के साथ कलाकारों को लोग उनके वास्तविक नाम से कम और उनके निभाए पात्रों के नाम से अधिक पहचानने लगे।

यही किसी कलाकार की सबसे बड़ी सफलता होती है।

रामायण ने अभिनय की परिभाषा बदल दी।

(क्रमशः...)

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जय श्रीराम।
जय राजपूताना। जय माँ शारदा भवानी।

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07/08/2026

रमानंद सागर कृत रामायण | भाग – 1

"जिस धारावाहिक ने करोड़ों भारतीयों की आस्था को एक सूत्र में बाँध दिया...

उसके प्रसारण को लेकर शुरुआत में ही संशय था।"

जब श्री रमानंद सागर ने रामायण पर धारावाहिक बनाने का विचार प्रस्तुत किया, तब दूरदर्शन पर इसके प्रसारण को लेकर सरकारी स्तर पर कई प्रकार की आशंकाएँ व्यक्त की गईं।

तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधिकारियों के बीच यह चर्चा थी कि क्या धार्मिक विषय पर आधारित धारावाहिक को राष्ट्रीय प्रसारण मंच पर स्थान दिया जाना चाहिए।

कुछ प्रशासनिक स्तरों पर प्रारंभिक आपत्तियाँ भी सामने आईं। बाद में विचार-विमर्श के पश्चात प्रसारण की अनुमति प्रदान की गई।

किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि यही निर्णय भारतीय टेलीविजन इतिहास का सबसे सफल अध्याय बनेगा।

जिस रामायण को लेकर संदेह था...

वही आगे चलकर करोड़ों भारतीयों की श्रद्धा का केंद्र बन गई।

(क्रमशः...)

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07/08/2026

"चित्तौड़गढ़...

जहाँ की प्रत्येक शिला वीरता का इतिहास सुनाती है।"

यदि विश्व के महान दुर्गों की सूची बनाई जाए, तो चित्तौड़गढ़ दुर्ग का नाम उसमें स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा।

लगभग 700 एकड़ क्षेत्र में फैला यह दुर्ग भारत का सबसे विशाल जीवित पहाड़ी दुर्ग माना जाता है। समुद्र तल से लगभग 590 मीटर तथा आसपास के मैदान से लगभग 180 मीटर ऊँची पहाड़ी पर स्थित यह दुर्ग केवल स्थापत्य कला का चमत्कार नहीं, बल्कि सैन्य विज्ञान का भी उत्कृष्ट उदाहरण है।

दुर्ग के भीतर लगभग 80 से अधिक जल स्रोत—तालाब, कुंड, बावड़ियाँ और जलाशय—निर्मित किए गए थे। कहा जाता है कि इनमें इतना जल संग्रहित किया जा सकता था कि लंबे समय तक घेराबंदी के दौरान हजारों लोग दुर्ग के भीतर सुरक्षित रह सकें।

इसकी सुरक्षा व्यवस्था भी अद्भुत थी।

• सात विशाल प्रवेश द्वार
• घुमावदार चढ़ाई
• ऊँची प्राचीरें
• प्राकृतिक पर्वतीय सुरक्षा
• विशाल जल प्रबंधन प्रणाली
• राजमहल, मंदिर और विजय स्तंभ

यह केवल युद्ध के लिए नहीं, बल्कि एक पूर्ण विकसित नगर के रूप में बनाया गया था।

यही वह दुर्ग है जिसने—

• 1303 का प्रथम जौहर
• 1535 का द्वितीय जौहर
• 1568 का तृतीय जौहर

और असंख्य साके एवं बलिदानों को देखा।

यहीं महाराणा कुम्भा ने विजय स्तंभ का निर्माण कराया।

यहीं से मेवाड़ ने विदेशी आक्रमणकारियों के सामने स्वाभिमान का सबसे ऊँचा उदाहरण प्रस्तुत किया।

चित्तौड़गढ़ का इतिहास हमें सिखाता है कि दुर्ग पत्थरों से नहीं...

बल्कि उसके रक्षकों के चरित्र, साहस और बलिदान से महान बनते हैं।

चित्तौड़ केवल मेवाड़ का गौरव नहीं...

यह सम्पूर्ण भारत की अस्मिता का प्रतीक है।

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{Chittorgarh Fort, Mewar, Rajput Architecture, Water Management, Rajput History, Maharana Kumbha, Vijay Stambh, Jauhar, Saka, Indian Heritage, UNESCO, Rajputs Of Prayagraj}

06/08/2026

"जब पूरी दुनिया चीन की महान दीवार की बात करती है...

तो भारत के पास भी एक ऐसा स्थापत्य चमत्कार है, जिस पर हर भारतीय को गर्व होना चाहिए।"

वह है—

कुंभलगढ़ दुर्ग।

15वीं शताब्दी में महाराणा कुम्भा द्वारा निर्मित यह दुर्ग केवल मेवाड़ की सुरक्षा का केंद्र नहीं था, बल्कि सैन्य रणनीति, जल प्रबंधन और स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण भी था।

लगभग 36 किलोमीटर लंबी इसकी प्राचीर विश्व की सबसे लंबी किलेबंद दीवारों में गिनी जाती है। इसी कारण इसे "Great Wall of India" भी कहा जाता है।

लेकिन इसकी सबसे बड़ी विशेषता केवल इसकी दीवार नहीं थी...

बल्कि इसकी दूरदर्शी योजना थी।

• विशाल जलाशय और बावड़ियाँ
• अन्न भंडारण की व्यवस्था
• सैकड़ों मंदिर
• दुर्ग के भीतर सुरक्षित आवास
• बहुस्तरीय सुरक्षा प्रणाली
• अरावली की ऊँची पर्वतमालाओं पर रणनीतिक स्थिति

इन व्यवस्थाओं के कारण लंबे समय तक घेराबंदी की स्थिति में भी दुर्ग के भीतर बड़ी संख्या में लोग सुरक्षित रह सकते थे।

यही वह दुर्ग है जहाँ 1540 ईस्वी में महाराणा प्रताप का जन्म हुआ।

कुंभलगढ़ केवल एक किला नहीं...

यह राजपूत पराक्रम, विज्ञान, स्थापत्य और दूरदर्शिता का जीवंत विश्वविद्यालय है।

यदि भारतीय इतिहास को सही रूप में पढ़ाया जाए, तो कुंभलगढ़ विश्व की महान सैन्य एवं स्थापत्य उपलब्धियों में अपना उचित स्थान अवश्य पाएगा।

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{Kumbhalgarh Fort, Great Wall of India, Maharana Kumbha, Maharana Pratap Birthplace, Rajput Architecture, Mewar History, Rajasthan Tourism, Indian Heritage, UNESCO, Rajputs Of Prayagraj}

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Prayagraj
Allahabad
212301

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