Rajput's of Allahabad

Rajput's of Allahabad एक नेतृत्व! एक निर्णय! एक निर्देश!
हमारा उद्देश्य प्रयागराज के राजपूत समाज को इन तीन सिद्धांतों के साथ एक मंच पर एक छत्र के नीचे एक मत के साथ संगठित करना है!

भारतीय राजनीति में स्वाभिमान और सिद्धांतो से बिना समझौता किए अगर किसी ने अपनी पारी खेली और राजनैतिक मूल्यों की स्थापना क...
17/04/2026

भारतीय राजनीति में स्वाभिमान और सिद्धांतो से बिना समझौता किए अगर किसी ने अपनी पारी खेली और राजनैतिक मूल्यों की स्थापना की तो वो सिर्फ एक ही शख्स है : बलिया के बागी, दाढ़ी बाबा, बाबू साहब स्व. श्री चंद्रशेखर सिंह!

आज के छद्म समाजवाद के दौर में जहां पौंड्रिक सरीखे समाजवादी जो हर पल हर क्षण अपने विचार, अपने सिद्धांत, अपने जमीर को बेचते हैं,
उन्हें, इस ख़ांटी विशुद्ध समाजवादी से सीखना चाहिए जिसने ये कह कर प्रधानमंत्री का पद त्याग दिया की "जाके बोल दो राजीव गांधी से की मैं चंद्रशेखर सिंह हूं, दिन में तीन बार अपने विचार नहीं बदलता हूं!"

जिसने आजादी के बाद भी बागी बलिया के बगावती तेवरों को जिंदा रखने का और अधिक मजबूत करने का कार्य किया, मंगल पांडे के बाद यदि बलिया में दिल्ली की कुर्सी के खिलाफ कोई आवाज बुलंद करने वाला था तो वह थे बागी बलिया के बाबू साहेब देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चंद्रशेखर सिंह।

अगर वाकई में किसी की राजनैतिक जीवन को आत्मसात करना होता तो वो सिर्फ और सिर्फ आदरणीय चंद्रशेखर सिंह जी ही हैं।

उनकी जन्म जयंती पर उनके चरणों में सादर प्रणाम।

- Rajput's of Allahabad
( #चंद्रशेखर_के_लोग)

#इलाहाबाद #प्रयागराज

वीर शिरोमणि राणा सांगा (महाराणा संग्राम सिंह) जयंती पर सादर नमन 🙏शरीर पर 84 घावों के कारण महाराणा सांगा को "मानवों का खं...
12/04/2026

वीर शिरोमणि राणा सांगा (महाराणा संग्राम सिंह) जयंती पर सादर नमन 🙏
शरीर पर 84 घावों के कारण महाराणा सांगा को "मानवों का खंडहर" भी कहा जाता है।

इन महाराणा का कद मंझला, चेहरा मोटा, बड़ी आँखें, लम्बे हाथ व गेहुआँ रंग था। दिल के बड़े मजबूत व नेतृत्व करने में माहिर थे। युद्धों में लड़ने के शौकीन ऐसे कि जहां सिर्फ अपनी फौज भेजकर काम चलाया जा सकता हो, वहां भी खुद लड़ने जाया करते थे।

महाराणा सांगा अंतिम शासक थे, जिनके ध्वज तले खानवा के युद्ध में समस्त राजपूताना एकजुट हुआ था।

महाराणा सांगा के समय मेवाड़ दस करोड़ सालाना आमदनी वाला प्रदेश था।

महाराणा सांगा द्वारा बाबर को हिंदुस्तान में आमंत्रित करने की घटना मात्र एक भ्रम है, जो स्वयं बाबर द्वारा फैलाया गया। जवाहर लाल नेहरू द्वारा लिखित पुस्तक पर आधारित धारावाहिक "भारत एक खोज" द्वारा बिना किसी ठोस आधार पर इसे और फैलाया गया, वरना जिन महाराणा ने दिल्ली के बादशाह इब्राहिम लोदी को 2 बार परास्त कर भगाया हो वे भला बाबर से मदद की आस क्यों रखेंगे। वास्तव में इब्राहिम लोदी से अनबन के चलते पंजाब के गवर्नर दौलत खां लोदी ने बाबर को भारत में आमंत्रित किया था।

खातोली के युद्ध में महाराणा सांगा का एक हाथ कट गया व एक पैर ने काम करना बंद कर दिया था।

महाराणा सांगा ने मालवा के मुस्लिम सुल्तान को युद्ध में हराया और 6 महीने तक अपनी कैद में रखा फिर उसके घाव ठीक होने पर उसे वापस छोड़ दिया और दिल्ली सुल्तान इब्राहिम लोदी को 02 बार युद्ध में परास्त किया और गुजरात के सुल्तान को मेवाड़ की तरफ बढ़ने से रोक दिया।

बाबर को बयाना का युद्ध में पूरी तरह परास्त किया और बाबर से बयाना का दुर्ग जीत लिया। इस प्रकार इस हिंदू राजा ने भारतीय इतिहास पर एक अमित छाप छोड़ दी।

एक विश्वासघाती के कारण अपने ही लोगों द्वारा विष दे दिया गया ओर 30 जनवरी 1528 को देवलोकगमन हो गया।

ऐसा महान योद्धा जिसने अपने जीवन काल में 100 से अधिक युद्ध लड़े और सभी जीते केवल अंतिम युद्ध जो बाबर के खिलाफ सन् 1527 में खानवा का युद्ध हारे वो भी अपने ही लोगों के विश्वासघात के कारण ।
किन्तु राजनीतिक दोगलो के कारण हमें केवल हारे हुए युद्ध के बारे में ही बताया जाता है ।

"अस्सी घाव लगे थे तन पे,
फिर भी व्यथा नहीं थी मन में"

80 से अधिक घावों को शरीर पर आभूषण की तरह धारण कर असंख्य युद्ध जीतने वाले महावीर महान योद्धा, सनातन धर्म रक्षक, मेवाड़ केसरी, मेवाड़ के गौरव महाराणा संग्राम सिंह 'राणा सांगा' जी की जयंती पर उन्हें कोटिशः नमन।

- Rajput's of Allahabad

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जनपद में  क्षत्रिय वोटों की संख्या 2.5 लाख + है।वहां 5 विधानसभा सीटों में से एक भी टिकट नहीं द...
17/03/2026

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जनपद में क्षत्रिय वोटों की संख्या 2.5 लाख + है।

वहां 5 विधानसभा सीटों में से एक भी टिकट नहीं दिया गया।

फिर 2024 मे लोकसभा का भी टिकट काट दिया गया।

न कोई जिलापंचायत अध्यक्ष, न ही एमएलसी ,न ही कोई BJP जिलाध्यक्ष, न ही कोई मेयर, चेयरमैन और अब जिला कार्यकारिणी से भी गायब कर दिया गया है।

नोट:- गाजियाबाद के क्षत्रियों में राजनीतिक एवं सामाजिक जागरूकता है भी अथवा शून्य है?

विशेष:- विचारधारा के प्रति इतनी बड़ी मानसिक गुलामी, क्षत्रियों की नई पीढ़ी की राजनीति को पूरी तरह खत्म कर देगी।

- Rajput's of Allahabad

कुआं ठाकुर का,मिट्टी ठाकुर की, कुएँ में फैंकी गई लड़की ठाकुर की,मिट्टी में 100 मीटर घसीटती हुई लड़की ठाकुर की। लेकिन ठाक...
14/03/2026

कुआं ठाकुर का,
मिट्टी ठाकुर की,
कुएँ में फैंकी गई लड़की ठाकुर की,
मिट्टी में 100 मीटर घसीटती हुई लड़की ठाकुर की।

लेकिन ठाकुर का क्या?
ठाकुर का कुछ नहीं साहब, ठाकुर का कुछ नहीं,
ना मीडिया,
ना अखबार,
ना प्रशासन,
ना सरकार,
ना नेता,
ना सामाजिक न्याय !!

पर हाँ ठाकुर का कुआँ,
ठाकुर का सामंतवाद,
ठाकुर का अत्याचार,
ठाकुर का शोषण.
बस.... इससे अधिक इतना अधिक लिखने का मन है कि इस व्यवस्था, इस सिस्टम , इस सत्ता की चूल्हे हिल जाएं।

लिखूंगा, जरूर लिखूंगा, अब बहोत हुआ, आज जो #बिहार के #सारन में हुआ, अगर उसके बारे में लिखा,
बोला और पढ़ा नहीं गया तो नपुंसक हो चुका है समाज और हम और आप ।

- Rajput's of Allahabad

UGC विनियम: ब्रिटिश युग के अपराधी जाति अधिनियम की वापसी!ब्रिटिश शासन के अपराधी जाति अधिनियम(1871) कानून में भारत की अनेक...
25/01/2026

UGC विनियम: ब्रिटिश युग के अपराधी जाति अधिनियम की वापसी!

ब्रिटिश शासन के अपराधी जाति अधिनियम(1871) कानून में भारत की अनेक जातियों को जन्मजात अपराधी माना गया था। ऐसा ही एक विनियम UGC लेकर आई है जिसमें अनेक जातियों को जन्मजात अपराधी व नैचुरल क्रिमिनल घोषित किया गया है?

इस विनियम को बहुत ध्यानपूर्वक पढ़ने के बाद सर्वसामान्य समझ के आधार पर यह लेख लिखा है। आप सब शुरुआत से अंत तक यह लेख पूरा पढ़ें, (चाहें थोड़ा सा बोर हों) और यदि संभव हो तो इसका खंडन करें ताकि देश की एकता को बचाया जा सके।

उच्च शिक्षा संस्थानों में तथाकथित समता के संवर्धन हेतु UGC विनियम 2026 का घोषित उद्देश्य है कि,

"6 आधारों पर 5 प्रकार के लोगों के साथ भेदभाव का उन्मूलन करना"

◆ ये 6 और 5 क्या हैं?
नीचे दिए गए 6 आधार पर भेदभाव:
"१. धर्म,
२. नस्ल,
३. जाति,
४. लिंग,
५. जन्म-स्थान या
६. दिव्यांगता के आधार पर विशेष रूप से"

(किसके साथ) नीचे दिए गए 5 प्रकार के लोगों के साथ:
१. अनुसूचित जाति SC एवं
२.अनुसूचित जनजाति ST,
३.सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों OBC,
४. आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों EWS,
५. दिव्यांगजनों

अथवा इनमें से किसी के भी सदस्यों के विरुद्ध भेदभाव का उन्मूलन करना तथा उच्च शिक्षा संस्थानों के हितधारकों के मध्य पूर्ण समता एवं समावेशन को संवर्धन देना।"

तो ये 6 आधार हैं जिनके आधार पर 5 प्रकार के लोगों साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। परिभाषा खण्ड में क्रमांक (ड़) में भी ये उल्लेखित हैं।

लेकिन फिर इन्होंने हमारे साथ यहां चोट की,
फिर क्रमांक (ग.) में उल्लेखित "जाति आधारित भेदभाव" का अर्थ पुनः मात्र SC, ST व OBC से जाति आधारित भेदभाव दिया है। जिसमें से EWS को भी गायब कर दिया है। यानि मूलतः यह विनियम केवल SC ST OBC के लिए ही है, इसलिए इसका नाम भी समता विनियम की जगह SC-ST-OBC का विनियम होना चाहिए।

◆ यह विनियम केवल छात्रों के लिए नहीं है:
3.(ख) के अनुसार यह हितधारकों यानि, छात्र, संकाय के सभी सदस्य शिक्षकों, सभी कर्मचारियों, प्रबंधन समिति, व संस्था निदेशक/प्राचार्य/ कुलपति तक सभी के बीच समता स्थापित करेगा, इसका सीधा सा अर्थ है कि शिक्षकों से लेकर कुलपति तक पर भेदभाव का आरोप लगाकर घसीटा जाना सुनिश्चित किया गया है। 10(ख) वापिस इस बात की पुष्टि करता है।

इसके निहितार्थ क्या हैं:-

1. विश्वविद्यालयों में केवल SC, ST, OBC, दिव्यांग हितधारकों से भेदभाव होता है। अर्थात जनरल छात्र के साथ कोई भेदभाव हो ही नहीं सकता या होता ही नहीं है।

2. धर्म के आधार पर सिर्फ SC, ST, OBC, व दिव्यांग के साथ भेदभाव होता है। अर्थात सभी प्रकार के धर्म केवल ये 5 वर्ग ही मानते हैं व जनरल वर्ग किसी भी धर्म में नहीं आता जिस कारण उनके साथ धार्मिक भेदभाव हो ही नहीं सकता या होता ही नहीं है।

3. नस्ल के आधार पर सिर्फ SC, ST, OBC, व दिव्यांग के साथ भेदभाव होता है।

4. जाति के आधार पर सिर्फ SC, ST, OBC के साथ भेदभाव होता है।

5. जाति के आधार पर EWS के साथ भी भेदभाव हो ही नहीं सकता या होता ही नहीं है, क्योंकि इसमें भी सवर्ण होते हैं। इसलिए सवर्ण हितधारकों के साथ देश में किसी भी तरह का भेदभाव हो ही नहीं सकता, ऐसा UGC मानती है।

6. लिंग के आधार पर सिर्फ SC, ST, OBC, EWS व दिव्यांग के साथ ही भेदभाव होता है।संभवतया जनरल सवर्ण वर्ग में एक ही लिंग के लोग हैं इसलिए उनमें लैंगिक भेदभाव संभव नहीं है।

7. जन्म स्थान के आधार पर सिर्फ SC, ST, OBC, EWS व दिव्यांग के साथ भेदभाव होता है। तो जन्मस्थान भी भेदभाव का कारक नहीं हुआ, मूल कारक जाति ही हुई।

8. दिव्यांगता के आधार पर SC, ST, OBC, EWS, दिव्यांग वर्ग के दिव्यांगों के साथ भेदभाव होता है।

9. इसका सीधा सा अर्थ है कि पीड़ित केवल SC, ST, OBC, EWS व दिव्यांग हैं, व जनरल वर्ग कभी भी पीड़ित नहीं हो सकता है। जनरल केवल घोषित रूप से अपराधी हो सकता है।

10. SC, ST, OBC, दिव्यांग कभी भी इस विनियम में अपराधी नहीं हो सकता है, क्योंकि ये सब आपस में ही एक दूसरे पर जाति भेदभाव का आरोप लगा सकेंगे तो आपस में एक दूसरे की शिकायत ही क्यों करेंगे?

11. OBC की स्थिति इसमें SC-ST एक्ट से बिल्कुल अलग व अच्छी है क्योंकि SC ST एक्ट में केवल SCST जातिगत पीड़ित थे जबकि इस विनियम के जातिगत भेदभाव में SC ST OBC तीनों सम्मिलित हैं जिस कारण SC-ST इस विनियम में OBC के विरुद्ध शिकायत नहीं कर सकेंगे।

13. कुल मिलाकर केवल जनरल ही अपराधी कहलाने के लिए बचेंगे जिनके विरुद्ध शिकायत की जा सकेगी।

14. "अजनरल" छात्र जनरल शिक्षक से लेकर जनरल कुलपति तक का कैरियर खराब कर सकेगा, व "अजनरल" हितधारक जनरल छात्र की शिक्षा व कैरियर तबाह कर सकेगा।

◆ अन्य महत्त्वपूर्ण पक्ष:

1. 7.(ज) व 8.(क) में कथित पीड़ित की पहचान गोपनीय रखने का प्रावधान। कथित भेदभाव से पीड़ित के लिए बलात्कार पीड़ित का प्रावधान क्यों रखा गया है? यह आरोपित के मानवाधिकार का हनन है, जिसे पता नहीं चलेगा कि किस अपराध के लिए उसपर कार्यवाही की जा रही है। व कोई भी एनोनिमसली आरोप लगाकर अपने अनैतिक हित सिद्ध कर सकेगा।

2. गलत शिकायत करने वाले को सजा का कोई भी प्रावधान नहीं है। यानि गोपनीय रूप से झूठी शिकायत कर जनरल वर्ग के सम्मान से खिलवाड़ करने की छूट दी गई है। व उनके मानसिक उत्पीड़न की कोई भी जवाबदेही न तो झूठे शिकायतकर्ता की है, न समता समिति की, न शिक्षण संस्थान की, न यूजीसी की, न सरकार की। यह कैसा अंधा कानून है ?

अधिकांश जनरल वर्ग के सदस्यों वाली कमिटी ने ही ऐसे अंधकारपूर्ण विनियम बनाए हैं, या तो वे कम्युनिस्ट विचारधारा के हो सकते हैं, या पहले से ही तय प्रारूप पर औपचारिक भर कर सकते हैं, दोनों ही स्थितियों में न्याय की सामान्य समझ वाले लोग भी ऐसे विनियम नहीं बना सकते हैं।

- Rajput's of Allahabad

#सवर्ण_विरोधी_भाजपा

नया यूजीसी एक्ट से मैं अचंभित बिल्कुल नहीं हूं, क्योंकि ये तो एक दिन होना ही था।चलिए आज बात कर ही लेते हैं, इस सवर्ण समा...
21/01/2026

नया यूजीसी एक्ट से मैं अचंभित बिल्कुल नहीं हूं, क्योंकि ये तो एक दिन होना ही था।

चलिए आज बात कर ही लेते हैं, इस सवर्ण समाज के बच्चों के शोषण के नया कानून के बारे में।

मेरा हमेशा से मानना रहा ही कि, समानता का रास्ता विभाजन से नहीं, न्यायपूर्ण संतुलन से होकर निकलता है।

और किस पार्टी की वैचारिक बुनियाद अंत्योदय पर रखी गई थी वो सिर्फ और सिर्फ सवर्णों के विनाश की भूमिका तय करने तक सीमित हो गायक है।

मुझे कहने में नंच मात्र भी गुरेज नहीं है कि सवर्णों को सुनियोजित तरीके से हाशिए पर धकेलने की साजिश की जा रही है।

ये यूजीसी एक्ट शिक्षा का सुधार नहीं जातिगत दंड प्रणाली को लागू करने का नया तरीका है, जिसमें जुर्म चाहे जो करे दंड मिलेगा तो सिर्फ सवर्ण को।

सरकार की हर असफल नीति, हर सामाजिक असंतुलन की कीमत सवर्ण समाज के खून पसीने और दमन करके वसूली जा रही है।
पर ऐसा क्यों?
क्या इसलिए कि हम मेरिट में सबसे ऊपर हैं?
या इसलिए कि हम सबसे अधिक टैक्स दे रहे हैं?
या इसलिए की मां भारती के चरणों में अपने प्राणों की आहुति दिए जा रहे हैं?

अगर आप अब भी चुप रहे तो याद रखना आपकी योग्यता को ही आपका अपराध घोषित कर दिया जाएगा।

ये लड़ाई किसी जाती विशेष के खिलाफ नहीं, सवर्ण समाज के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ है, और याद रखिएगा,
"जब किसी समाज को लगातार दीवार से लगाया जाता है,
तो एक दिन वही दीवार सवाल बनकर गिरती है।"

और मैं क्षत्रिय समाज का एक युवा, इस निरंकुश सत्ता के आकाओं से वही सवाल पूछता हूं कि इस एक्ट को लाने की क्या आवश्यकता थी?
क्या हमारा त्याग और बलिदान कम पास गया था?
क्या सवर्ण सिर्फ दरी बिछाने, और चंदा देने के लिए हैं?
या सवर्ण सिर्फ तुम्हारे छद्म राष्ट्रवाद के नाम पर अपनी जवानी कुर्बान करने के लिए हैं?

सब छोड़िए अब सवाल ये भी नहीं रह कि ये दंभी सरकार क्या कर रही है, सवाल ये है कि सवर्ण समाज ये सब देखते हुवे भी क्यों चुप है?

क्या इसलिए कि तुम्हें धर्म की अफीम चटाई गई है?
या इसलिए कि तुम्हें भाजपा के किसी मंडल का चिंटू टाइप का अध्यक्ष बना दिया गया है?
या इसलिए कि नॉन-बायोलॉजिकल महामानव की भक्ति में डूबा दिया गया है?
या शायद इसलिए कि तुम्हें व्हाट्स ऐप यूनिवर्सिटी और IT सेल से रटाया गया है कि योगी जी तो जाती से ठाकुर हैं और गाहे बगाहे वो सवर्णों के सबसे बड़े हितैषी हैं (और ये तुम सबकी सबसे बड़ी गलतफहमी है)?

और भाजपा नारा क्या देते हैं:
"सबका साथ, सबका विकास"
जबकि इसकी असलियत ये है,
"सबका साथ,
सिर्फ SC-ST-OBC का विकास,
और सवर्णों का सर्वनाश।"

अंत में यही कहूंगा कि तुम सब लादते रही, शंकराचार्य भगवान को गाली देने में, उनको असली और नकली बनाने में,
क्योंकि व्हाट्स ऐप यूनिवर्सिटी और IT सेल तुमसे बस यही चाहता है,
करते रहो अंधभक्ति, और इतना डूब जाओ कि तुम्हें ये भी न पता चले कि महामानव मोई जी के लिए तुम शंकर स्वरूप शंकराचार्य भगवान को भी गली देके अपने सनातन धर्म पर ही लांछन लगा रहे हो,
और ये पार्टी तुमसे यही करवाना चाह रही है,
वो तुम्हारी शिक्षा पर ही नहीं,
तुम्हारे इतिहास पर ही नहीं,
तुम्हारे धर्म, तू।हरे पुराण, तुम्हारे उपनिषदों को भी पने एजेंडा के हिसाब से रीराइट करना चाहती है,
और तुम (हां तुम्ही अंधभक्तों) एकड़ों इसको भी सही साबित करोगे कि जो भाजपा बोल रही है वहीं वेद है वहीं रामायण है।

बजाओ ताली माननीय चिंटू टाइप के मंडल और बूथ अध्यक्ष, जाने किसके किसके लिए,
बिछाओ दरी अपने आका के लिए,
लगाओ नारे की शंकराचार्य मुर्दाबाद।

- Rajput's of Allahabad

#सवर्ण #सवर्ण_विरोधी_भाजपा

19 जनवरी 1597 वह दिन जब मेवाड़ का सूर्य अस्त हुआ था, लेकिन उनका प्रकाश आज भी हमारे दिलों में जल रहा है। उन्होंने हमें सि...
19/01/2026

19 जनवरी 1597 वह दिन जब मेवाड़ का सूर्य अस्त हुआ था, लेकिन उनका प्रकाश आज भी हमारे दिलों में जल रहा है। उन्होंने हमें सिखाया कि घास की रोटियां खाना स्वीकार है, लेकिन गुलामी नहीं। उनका जीवन हर राजपूत और हर भारतीय के लिए प्रेरणा है।

वीर शिरोमणि, मेवाड़ी सरदार, और स्वाभिमान के प्रतीक महाराणा प्रताप जी की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। 🙏🚩

नमन है उस माटी को, नमन है उस वीर को।
जय मेवाड़! जय एकलिंग जी!

- Rajput's of Allahabad

भारतीय कुश्ती संघ के अभूतपूर्व अध्यक्ष, अभूतपूर्व सांसद समाज के अभिभावक आदरणीय नेताजी  #बृजभूषण_शरण_सिंह जी को जन्मदिन क...
08/01/2026

भारतीय कुश्ती संघ के अभूतपूर्व अध्यक्ष, अभूतपूर्व सांसद समाज के अभिभावक आदरणीय नेताजी #बृजभूषण_शरण_सिंह जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ।

आपके जन्मदिवस पर बाबा विश्वनाथ जी,माँ अन्नपूर्णा जी व प्रभु श्रीराम जी, परम पूज्य औघड़ गुरुपद संभव राम जी से प्रार्थना है कि आपके जीवन में सतत् सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे।

आपकी नेतृत्व शक्ति और समाजसेवा के प्रति आपकी अडिग निष्ठा ने अनगिनत लोगों को प्रेरित किया है। "शरण" शब्द के साथ आपकी पहचान जीवन में दूसरों के लिए आश्रय, समर्थन और मार्गदर्शन का प्रतीक है।

जैसे सूर्य की किरणें पूरे जग को आलोकित करती हैं, वैसे ही आपका कार्यक्षेत्र समाज में नई ऊर्जा और उजाला लाता रहे।
गंगा की पवित्र धारा की भांति आपका जीवन भी समाज के कल्याण हेतु निरंतर प्रवाहित हो।

आपके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए, ईश्वर आपको दीर्घायु और असीम ऊर्जा प्रदान करें।

हर हर महादेव।

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!! शिक्षा, रोजगार, नशामुक्ति !!
!! एक नेतृत्व, एक निर्णय, एक निर्देश !!
!! एक मंच, एक छत्र, एक मत !!


🚩 सिर्फ चेतक ही नहीं, महाराणा प्रताप का हाथी 'रामप्रसाद' भी था स्वामीभक्ति की अनोखी मिसाल!हम सब ने हल्दीघाटी के युद्ध मे...
08/01/2026

🚩 सिर्फ चेतक ही नहीं, महाराणा प्रताप का हाथी 'रामप्रसाद' भी था स्वामीभक्ति की अनोखी मिसाल!

हम सब ने हल्दीघाटी के युद्ध में चेतक की वीरता के किस्से सुने हैं, लेकिन मेवाड़ की उस मिट्टी में एक और जानवर था जिसने अपनी वफादारी से अकबर तक का सर झुका दिया था। उसका नाम था— रामप्रसाद।

📜 इतिहास क्या कहता है?

मुगल इतिहासकार अल-बदायुनी (जो हल्दीघाटी युद्ध में मौजूद था) लिखता है कि अकबर की नज़र सिर्फ दो चीज़ों पर थी: एक स्वयं महाराणा प्रताप और दूसरा उनका हाथी रामप्रसाद।

🔥 रामप्रसाद का पराक्रम:

यह हाथी इतना समझदार और शक्तिशाली था कि हल्दीघाटी के युद्ध में इसने अकेले ही अकबर के 13 शाही हाथियों को मार गिराया था। मुगलों में इसका इतना खौफ था कि इसे पकड़ने के लिए 7 बड़े हाथियों का एक 'चक्रव्यूह' बनाया गया और 14 महावतों ने मिलकर बड़ी मुश्किल से इसे बंदी बनाया।

🙏 स्वामीभक्ति जो रुला दे:

बंदी बनाने के बाद इसे अकबर के सामने पेश किया गया। अकबर ने इसका नाम बदलकर 'पीरप्रसाद' रख दिया। मुगलों ने उसे गन्ने और पानी दिया, लेकिन उस स्वामिभक्त ने दुश्मन का दाना-पानी स्वीकार नहीं किया।
लगातार 18 दिनों तक बिना कुछ खाए-पिए वह मौन खड़ा रहा और अंत में अपने स्वामी की याद में शहीद हो गया।

👑 अकबर के शब्द:

उसकी मृत्यु पर अकबर ने कहा था:
"जिसके हाथी को मैं अपने सामने नहीं झुका पाया, उस महाराणा प्रताप को मैं क्या झुका पाऊँगा?"

नमन है ऐसे मूक पशुओं को भी जो अपनी मातृभूमि और स्वामी के लिए प्राण त्याग देते हैं। 🙏

इस अनसुनी गाथा को जन-जन तक पहुँचाने के लिए शेयर अवश्य करें! 🔁

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!! शिक्षा, रोजगार, नशामुक्ति !!
!! एक नेतृत्व, एक निर्णय, एक निर्देश !!
!! एक मंच, एक छत्र, एक मत !!



🚩 8,000 शूरवीर vs 40,000 की फौज! 🚩इतिहास गवाह है कि जब-जब धर्म और स्वाभिमान की बात आई है, क्षत्रियों ने अपनी जान की परवा...
08/01/2026

🚩 8,000 शूरवीर vs 40,000 की फौज! 🚩

इतिहास गवाह है कि जब-जब धर्म और स्वाभिमान की बात आई है, क्षत्रियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना दुश्मनों को धूल चटाई है।

1568 का चित्तौड़गढ़ का तीसरा साका इसी अदम्य साहस का प्रतीक है। मुट्ठी भर वीरों ने मुगलों की विशाल सेना के छक्के छुड़ा दिए थे।

नमन है उन वीरों को और जौहर की उस पवित्र ज्वाला को! 🙏⚔️

क्या आप हल्दीघाटी युद्ध के ये 5 कड़वे सच जानते हैं? 🚩⚔️इतिहास की किताबों में अक्सर हमें आधी-अधूरी सच्चाई बताई जाती है। हल...
04/01/2026

क्या आप हल्दीघाटी युद्ध के ये 5 कड़वे सच जानते हैं? 🚩⚔️
इतिहास की किताबों में अक्सर हमें आधी-अधूरी सच्चाई बताई जाती है। हल्दीघाटी का युद्ध केवल दो राजाओं की लड़ाई नहीं, बल्कि साम्राज्यवाद बनाम स्वतंत्रता का संघर्ष था।

इस चित्र के माध्यम से जानिये 5 महत्वपूर्ण तथ्य:

1️⃣ यह धर्म युद्ध नहीं था: महाराणा प्रताप के सेनापति हकीम खान सूरी (अफगान) थे, जबकि अकबर की सेना का नेतृत्व मान सिंह (राजपूत) कर रहे थे।

2️⃣ रामप्रसाद हाथी की वीरता: सिर्फ चेतक ही नहीं, राणा का हाथी 'रामप्रसाद' भी एक योद्धा था जिसने मुगलों के 13 हाथियों को पछाड़ दिया था।

3️⃣ परिणाम: अकबर न तो प्रताप को पकड़ पाया, न मार पाया और न ही मेवाड़ को झुका पाया। रणनीतिक रूप से यह मुगलों की हार थी।

4️⃣ भील आदिवासियों का योगदान: राणा पूंजा के नेतृत्व में भील वीरों ने गुरिल्ला युद्ध से मुगलों की नाक में दम कर दिया था।

5️⃣ रक्त तलाई: वह भूमि जहाँ वीरों का इतना खून बहा कि पानी का रंग लाल हो गया।

स्वाभिमान की इस लड़ाई को नमन! 🙏

अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी, तो इसे शेयर करें और कमेंट में 'जय महाराणा' लिखें! 👇

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!! शिक्षा, रोजगार, नशामुक्ति !!
!! एक नेतृत्व, एक निर्णय, एक निर्देश !!
!! एक मंच, एक छत्र, एक मत !!


1868 ई. में भीषण अकाल पड़ा, तब मेवाड़ के महाराणा शम्भूसिंह ने उस ज़माने के लाखों रुपए खर्च करके बाहर से अनाज मंगवाया। रियास...
04/01/2026

1868 ई. में भीषण अकाल पड़ा, तब मेवाड़ के महाराणा शम्भूसिंह ने उस ज़माने के लाखों रुपए खर्च करके बाहर से अनाज मंगवाया। रियासती रिकॉर्ड के अनुसार इस अकाल में 11 लाख 63 हज़ार लोगों को उदयपुर में भोजन करवाया गया। (उदयपुर के बाहर से भी लोग आए थे)

अकाल के वक्त हैजा की बीमारी भी फैलने लगी, जिसके बाद कई लोग मरने लगे। उदयपुर में एकमात्र पिछोला झील में थोड़ा पानी शेष था। मंत्रियों ने महाराणा से कहा कि आप यहां से कुछ कोस दूर चले जावें, लेकिन महाराणा ने कहा कि ऐसी विपत्ति में जो शासक प्रजा के काम न आ सके, वह शासक कहलाने योग्य नहीं।

महाराणा शम्भूसिंह ने जनता से कहा कि मरने वाले लोगों के शवाधान के बाद परिजनों के नहाने के लिए व प्यासों को पानी मिल सके इसलिए जनता को पिछोला झील के पास ही आ जाना चाहिए। इस तरह महाराणा के सत्कर्मों से अनेक लोगों के प्राण बच गए।

(फोटो महाराणा शम्भूसिंह जी का है, वे मेवाड़ के पहले ऐसे महाराणा थे जिनका फोटो कैमरे से खींचा गया)

पोस्ट लेखक :- तनवीर सिंह सारंगदेवोत

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