20/06/2023
स्वामीजी प्राच्य भारत और आधुनिक भारत के मध्य एक पक्के सेतु की तरह हैं। जो पूरी प्राचीन हिंदू सभ्यता संस्कृति का आधुनिक भारतीयों को प्रासंगिक,तार्किक और नए भारत की दिशा और बेहतरी की दृष्टि के साथ दिग्दर्शन कराते हैं। उनमें एक सर्वांगपूर्ण समग्रता है।जो अद्वितीय है। उनमें आधुनिक पश्चिमी सभ्यता के साथ प्राच्य हिंदू संस्कृति के आवश्यक मिलन से निर्मित उत्तम फल निष्पादित करने की समझ,दृष्टि और कौशल है।
बिना ऊर्जा व्यर्थ किए,न्यूनतम टकराव और बिना भटकाव वाले उस राजमार्ग को उन्होंने निकाला है जिस पर चलकर नया भारत विश्व गुरु बनेगा।
स्वामी जी भविष्य दृष्टा थे वह अगले हजार वर्ष को देख रहे थे।वह आध्यात्मिक शक्ति पुंज थे इसलिए बहुत सारे अज्ञात तथ्यों के बावजूद प्राचीन भारत के मूल भाव,विशिष्ट दर्शन और सनातन संस्कृति के कालजई होने के खास कारणों को अनुभव से आत्मसात करके उन्होंने संसार में जिस हिंदू धर्म संस्कृति की पताका फहराई और संदेश दिया वह उनके जाने के डेढ़ शताब्दी के बावजूद उतना ही प्रेरक ,मार्गदर्शक और प्रासंगिक है।अगले पांच सौ वर्ष तक वह भारत और संसार को मार्ग दिखायेगा।
बाकी जितने भी उनके पूर्व और उत्तर के हिंदू हृदय सम्राट रहे हैं,कोई भी स्वामी जी के व्यापक,स्पष्ट और कल्याणकारी दर्शन को खारिज करने की भूल नहीं किया।बल्कि गीता की तरह उनकी ही किसी एक व्याख्या को पकड़ा और खुद को संसार में प्रमाणित कर दिया।
इसलिए स्वामी जी को आधुनिक कृष्ण भी कहा गया...जिन्होंने श्री गीता की ही तरह अपने संबोधन में सनातन के सभी मार्गो बल्कि संसार के सभी पंथों की युक्तियुक्त व्याख्या करी और सबको यथोचित सम्मान और समीक्षा भी करी।जिसको जो रुचे पचे उसे ग्रहण करने का रास्ता भी बताया।इसलिए वह नए भारत की दृष्टि से सर्वोपयुक्त थे हैं और बने रहेंगे।