01/01/2020
हर वर्ष की तरह आज भी एक नया वर्ष आ ही गया।( यह वर्ष डा. अब्दुल कलाम जी के लिए भी खास था लेकिन आज वह दुखी होते कि जैसा उन्होंने सोचा था भारत वैसा नहीं बन सका।) अब हम हर वर्ष की तरह मन ही मन एक नई शुरुआत की शपथ लेते हैं और व्हाट्सएप और फेसबुक पर हैप्पी न्यू ईयर लिखकर भेजना शुरू कर देते हैं और नए वर्ष के पहले दूसरे हफ्ते काफी उत्साहित भी रहते हैं लेकिन क्या हम इसी पुराने कार्य को हमेशा से नहीं करते आ रहे हैं! और ऐसे ही धीरे-धीरे हर एक वर्ष हम लोगों से छूटता चला जा रहा है और हम लोग अपनी छोटी-छोटी जरूरतों में ही व्यस्त रहते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपने जो पिछले वर्ष 1 जनवरी को सोचा था वह पूरा हुआ? अधिकतर लोगों का जवाब होगा, नहीं। तो आप कैसे सोच सकते हैं जो आप आज सोच रहे हो वह पूरा हो जाएगा।
मेरे विचार में हमें सिर्फ एक परिवर्तन करना होगा अपने जीवन में बस एक *लक्ष्य* तय करना होगा और लक्ष्य भी ऐसा होना चाहिए कि वह सिर्फ आप से ही नहीं बल्कि समाज से भी जुड़ा हो। क्योंकि जब आप उस लक्ष्य को देख जाते हैं तो आप अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अकेले ही नहीं होते बल्कि आपके साथ वह सभी होते हैं जिनके लिए आप लक्ष्य प्राप्त करना चाहते हैं।
तब कहीं ना कहीं आप खुद ही अपने उच्चतम जोश व उत्साह के साथ उस कार्य में लग जाते हैं क्योंकि तब आप जान रहे होते हैं कि उस आपके लक्ष्य प्राप्ति से एक पूरे समाज में परिवर्तन आएगा और विकास होगा।
अगर आपको इसका उदाहरण देखना है तो देखिए इस भारतीय उपमहाद्वीप पर सामाजिक विकास हुआ तो सबसे बड़ा साम्राज्य एक आम लड़के चंद्रगुप्त मौर्य ने बनाया था क्योंकि उसके दिमाग में चाणक्य ने एक लक्ष्य को डाल दिया था वह लड़का अपने समाज को राजा घनानंद के अत्याचारों से बचाना चाहता था। और हम आजादी के समय की बात करें तो देखेंगे कि जितने भी महान व्यक्तित्व हुए वह सभी लोग अपने देश व समाज के लिए लड़े जैसे महात्मा गांधी, डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर, सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह, सावित्रीबाई फुले, रानी लक्ष्मीबाई ऐसे बहुत से नाम है हमारे पास जो दूसरों के लिए कार्य किए और अमर हो गया।
तो हम क्यों नहीं कर सकते! उनमें क्या था जो हमने नहीं है, लक्ष्य के अलावा।
मगर आप यह बोलेंगे आपके जीवन में ऐसा मौका ही नहीं आया जिसमें आप अपना लक्ष्य तय कर सकें, अगर आपने ऐसा सोचा है तो आप अपने आप को धोखा देते आ रहे हैं अभी तक।
क्योंकि जब आप सामाजिक संस्था को ध्यान से देखेंगे तो पायेंगे कि हजारों लाखों लोगों की जरूरत है इस समाज में, आप तो बस एक ही है। और आप बोल रहे हैं आपको लक्ष्य नहीं मिला। आप खुद को कभी भी छोटा मत समझिए, क्योंकि जब आप यह सोचने लगते हैं कि आप अकेले क्या करेंगे तो मत भूलिए गांधी जी को जो अफ्रीका में काले लोगों के साथ होने वाले बदसलूकी के खिलाफ अकेले ही धरने पर बैठ गए थे. और अभी कुछ कुछ दिनों के पहले आपने ग्रेटा थनवर्ग का नाम सुना ही होगा जो अपने देश स्वीडन के संसद के बाहर पर्यावरण को बचाने के मांग के लिए धरने पर बैठ गई थी। और आज उनके सपोर्ट में दुनिया के करोड़ों लोग हैं।
तो अब आप भी इस नये साल में और नये जोश व सोच के साथ तैयार हो जाइए अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए।
आप सीसे में खुद को देखिए और सीसे में दिखने वाले इन्सान को आदेश दीजिए जो आप करना चाहते हैं। उसे बताइए आप खास हैं।आप भी वह कर सकते हैं जो महान व्यक्तित्व करते आए हैं और उनसे बेहतर भी कर सकते हैं। तब देखिए आप अपने लक्ष्य की तरफ कितनी आसानी से बढते जाते हैं। और तब होगा असली मायने में Happy New Year.. And Happy New Thinks.. 😊.. धन्यवाद।।
अनुराग कुमार