08/11/2015
प्रगति का पथ
नव जाति का इतिहास स्थानांतरण या प्रवास की घटनाओं से भरा पड़ा है- अफ्रीका से यूरोप तक, मध्य एशिया से भारत (आर्यों का आगमन) तक, बर्फीले अटलांटिक को पार कर उत्तरी अमेरिका से अलास्का और आर्कटिक क्षेत्रों तक तथा इन स्थानों से वापसी भी। इन सभी में मनुष्यों और सामान का आवागमन तो हुआ ही होगा। इसलिए परिवहन के साधन मनुष्य के विकास में सदैव महत्वपूर्ण कारक थे- चाहे वे पैदल हों, बैलगाड़ी हों, घोड़े, गधे, याक, ऊंट हों या आसमान में उड़ते विमान हों, जो आपको कुछ ही घंटों में दुनिया के एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंचा देते हैं।
आज जब हम परिवहन की बात करते हैं तो हमारा आशय होता है- राजमार्ग या उन्नत राजमार्ग (सुपर-हाईवे), त्वरित पटरियों पर दौड़ती बुलेट ट्रेन और शहरी जीवन का कायाकल्प करने वाली मेट्रो रेल आदि। लोगों और सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए सड़क परिवहन ही अब तक सबसे प्रमुख साधन बना हुआ है। इसका अर्थ है कि किसी भी देश को एक छोर से दूसरे छोर तक और सुदूर तथा दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचाने वाली अच्छी और बेहतर रख-रखाव वाली सड़कों की आवश्यकता होती है। हमारे पुरखों की ही तरह यह पीढ़ी भी प्रवासी है, जो आजीविका की तलाश में अपने गृहनगर से बड़े शहरों की ओर चली जाती है। छुट्टी मनाने के लिए घूमने का चलन भी आजकल बढ़ गया है। इसके अलावा दूध और सब्जियां या फ्रिज और वाशिंग मशीन जैसी उपभोक्ता तथा गैर उपभोक्ता सामग्री भी एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजी जाती हैं। इस प्रकार सड़कें अर्थव्यवस्था के केंद्र सरीखी हो गई हैं। इसलिए भारत जैसी विकासशील अर्थव्यवस्था के लिए अधिक सड़कों की योजना बनाना और निर्माण करना, देश के सुदूरतम भागों को भी जोड़ना सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ नीतियों के कारण विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है।
‘छुक छुक गाड़ी’ को आशीर्वाद में अशोक कुमार के ‘रेल गाड़ी, रेल गाड़ी’ से लेकर शाहरुख खान के ‘छैयां, छैयां’ तक कई फिल्मी गीतों में रूपक बनाया गया है। बचपन में यात्रा के दौरान मैं ट्रेन की खिड़की से झांकते हुए पटरी मुड़ने का बेसब्री से इंतजार करती थी क्योंकि वहां मुझे पूरी ट्रेन एक साथ दिख जाती थी। लेकिन, रेलगाड़ी केवल सपने नहीं दिखाती है। मालगाडि़यों और रेलगाडि़यों के व्यापक नेटवर्क के साथ रेलवे सचमुच भारत जैसे विशाल देश की जीवन रेखा है। यात्रियों को कश्मीर से कन्याकुमारी तक ले जाने से अलावा कोयले और लोहे को कारखानों तक पहुंचाने तक सब कुछ रेल ही करती है। भारत के पास संभवतः दुनिया का सबसे अच्छा और सबसे व्यापक रेल नेटवर्क है, जिसमें रोजाना 21000 से अधिक ट्रेन चलती हैं। दुख की बात है कि कोई इस बात पर ध्यान नहीं देता। खबर तो दुर्घटना और देर की ही दी जाती है, इतने कम किराए में यात्रियों और सामान को लाने-ले जाने की चर्चा कोई नहीं करता।
जो देश तीन ओर से समुद्र से घिरा हो और जिसके एक छोर से दूसरे छोर तक ढेरों नदियां बहती हों, वहां जहाजरानी और जलमार्ग भी परिवहन के उतने ही महत्वपूर्ण साधन होते हैं। सरकार की सागरमाला परियोजना का लक्ष्य बंदरगाहों को विकास का इंजन बनाना है। आंतरिक जलमार्ग को राष्ट्रीय जलमार्ग बनाने का उसका निर्णय भी हमारी नदियों का उपयोग विकास के माध्यम के रूप में करने के उद्देश्य से है।
प्रदूषण का जिक्र किए बगैर आप परिवहन की बात नहीं कर सकते। दोनों का चोली-दामन का साथ लगता है, एक के बगैर दूसरा हो ही नहीं सकता। कम दूरी के लिए परिवहन के हरित यानी पर्यावरण के अनुकूल साधनों के प्रयोग को ही बढ़ावा दिया जाना चाहिए, जैसे साइकिल, साइकिल रिक्शा, विक्टोरिया, ठेले और हमारे पांव। आस-पड़ोस की किराने की दुकान पर सामान खरीदने के लिए बाइक या कार से जाने की क्या आवश्यकता है? दूध-ब्रेड खरीदने के लिए सुबह टहलना निश्चित रूप से बाइक पर जाने की अपेक्षा अधिक स्वास्थ्यकर होगा। इसके अलावा राजमार्ग और मुख्य सड़कों के इर्द-गिर्द आॅक्सीजन पट्टियां विकसित करने के लिए हरित पट्टियों की योजना बनानी चाहिए। सरकार की हरित राजमार्ग नीति इस दिशा में स्वागत योग्य कदम है।
विमान यात्रा अब भी धनी वर्ग के यातायात का माध्यम मानी जाती है लेकिन यदि आज हवाई अड्डे देखें तो यह मिथक समाप्त हो रहा है। हवाई अड्डों पर प्रत्येक आयु आयु वर्ग और आर्थिक स्थिति वाले लोग मिलेंगे। इसका मुख्य कारण है तेज यात्रा करने और गंतव्य तक शीघ्र पहुंचने की लोगों की इच्छा। नागर विमानन इसीलिए यात्रा का महत्वपूर्ण साधन बन गया है। सरकार भी इसे स्वीकार कर रही है और नागर विमानन नीति शीघ्र ही आ सकती है।
अंग्रेजी भाषा के कवि राॅबर्ट प्रफाॅस्ट ने अपनी एक कविता में कहा था, ‘जंगल घने हैं, अंधेरे से भरे हैं और प्यारे हैं लेकिन मुझे सोना नहीं है, अभी तो मीलों चलना है।’ हमारे पहले प्रधानमंत्राी पंडित जवाहरलाल नेहरू विकास की बात करते समय अक्सर यह कविता कहते थे। यह सच है कि परिवहन के प्रमुख साधन-सड़क, रेल और विमान राष्ट्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं और यदि सरकार राष्ट्र को विश्व के आर्थिक मानचित्रा पर देखना चाहती है तो उसे इनसे जुड़ी समस्याएं सुलझानी ही होंगी।
#योजना_हिंदी के #नवम्बर2015 अंक का संपादकीय