03/08/2026
दिनांक 03 अगस्त 2026 को जयपुर, राजस्थान में UGC के नवीन नियमों/विनियमों के रोलबैक की मांग को लेकर श्री महिपाल सिंह मकराना जी के नेतृत्व में शांति मार्च/विरोध प्रदर्शन आयोजित किया जा रहा था। उपलब्ध समाचार रिपोर्टों के अनुसार शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा लाठीचार्ज एवं वाटर कैनन का प्रयोग किए जाने की सूचना सामने आई है, यह निंदनीय कृत्य है ।
यदि शांतिपूर्ण एवं निहत्थे नागरिकों पर बिना पर्याप्त एवं वैधानिक कारण के अत्यधिक बल प्रयोग किया गया है, यह अत्यंत गंभीर मानवाधिकार संबंधी विषय है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों को अपनी मांगों एवं असहमति को शांतिपूर्ण ढंग से व्यक्त करने का अधिकार प्राप्त है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग, वाटर कैनन तथा लाठीचार्ज का प्रयोग किया गया। ऐसी स्थिति में यह अत्यंत आवश्यक है कि स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच के माध्यम से यह निर्धारित किया जाए कि पुलिस बल का प्रयोग असंसदीय/ अवैधानिक ही था तथा कितने निर्दोष/निहत्थे व्यक्ति के साथ अनावश्यक मारपीट या दुर्व्यवहार किया गया है ।
अतः प्रदेश मानवाधिकार संगठन निम्नलिखित मांग करता है:
1. दिनांक 03.08.2026 को जयपुर में हुए लाठीचार्ज एवं पुलिस बल प्रयोग की स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
2. घटना के समय उपस्थित पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों की पहचान कर यह जांच की जाए कि किस अधिकारी के आदेश पर लाठीचार्ज/बल प्रयोग किया गया।
3. घटना से संबंधित CCTV फुटेज, पुलिस बॉडी कैमरा फुटेज, ड्रोन फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग तथा अन्य डिजिटल साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित कराया जाए, ताकि महत्वपूर्ण साक्ष्य नष्ट या परिवर्तित न हो सकें।
4. लाठीचार्ज अथवा अन्य बल प्रयोग में घायल हुए प्रत्येक व्यक्ति का स्वतंत्र चिकित्सकीय परीक्षण एवं मेडिकल रिकॉर्ड सुरक्षित कराया जाए तथा घायलों को उचित उपचार उपलब्ध कराया जाए।
5. यदि जांच में किसी पुलिस अधिकारी/कर्मचारी द्वारा अनावश्यक, अत्यधिक या गैर-कानूनी बल प्रयोग पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध विभागीय एवं विधिक कार्रवाई की जाए।
6. यदि किसी प्रदर्शनकारी को बिना वैधानिक आधार के हिरासत में लिया गया हो अथवा उसके साथ दुर्व्यवहार किया गया हो, तो उसकी भी स्वतंत्र जांच कर उचित राहत प्रदान की जाए।
7. राजस्थान पुलिस को निर्देशित किया जाए कि भविष्य में शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रदर्शन एवं मार्च के दौरान न्यूनतम आवश्यक एवं आनुपातिक बल का ही प्रयोग किया जाए तथा मानवाधिकारों एवं नागरिक गरिमा का पूर्ण सम्मान सुनिश्चित किया जाए।
8. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग/राजस्थान सरकार द्वारा इस घटना पर Action Taken Report (ATR) प्राप्त कर शिकायतकर्ता संगठन को उपलब्ध कराई जाए।
9. यदि जांच में मानवाधिकार उल्लंघन प्रमाणित होता है तो पीड़ित व्यक्तियों को नियमानुसार उचित क्षतिपूर्ति/मुआवजा एवं अन्य राहत प्रदान की जाए।
10. संपूर्ण प्रकरण की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए जांच को ऐसे अधिकारी/जांच एजेंसी से कराया जाए जिसका घटना में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई संबंध न हो।
माननीय आयोग/प्रशासन से विशेष अनुरोध है कि इस शिकायत को केवल कानून-व्यवस्था के सामान्य विषय के रूप में न देखा जाए, बल्कि नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, व्यक्तिगत गरिमा एवं पुलिस बल के अनुपातिक प्रयोग से संबंधित मानवाधिकार के गंभीर प्रश्न के रूप में लिया जाए।
प्रदेश मानवाधिकार संगठन लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक मूल्यों में विश्वास रखता है तथा किसी भी प्रकार की हिंसा अथवा कानून-व्यवस्था भंग करने का समर्थन नहीं करता। साथ ही, नागरिकों के विरुद्ध अनावश्यक अथवा अत्यधिक पुलिस बल प्रयोग का भी संगठन स्पष्ट रूप से विरोध करता है।
अतः मानवीय संवेदनशीलता एवं संवैधानिक दायित्वों को ध्यान में रखते हुए उपर्युक्त प्रकरण में तत्काल संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच, दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई तथा पीड़ितों को न्याय एवं उचित राहत प्रदान करने की कृपा करें।
भवदीय,
डॉ. अरविंद सिंह
चेयरमैन/ राष्ट्रीय अध्यक्ष
प्रदेश मानवाधिकार संगठन
प्रयागराज, उत्तर प्रदेश