Adhivakta Manch Allahabad

Adhivakta Manch Allahabad अधिवक्ता मंच लोकतंत्र, संविधान, धर्मनिरपेक्षता को समर्पित अधिवक्ताओं का जनवादी मंच

प्रेस विज्ञप्तिअधिवक्ता मंच, इलाहाबादअधिवक्ता मंच, इलाहाबाद, इलाहाबाद उच्च न्यायालय की एकलपीठ द्वारा पारित उस अंतरिम आदे...
12/02/2026

प्रेस विज्ञप्ति
अधिवक्ता मंच, इलाहाबाद

अधिवक्ता मंच, इलाहाबाद, इलाहाबाद उच्च न्यायालय की एकलपीठ द्वारा पारित उस अंतरिम आदेश पर गंभीर आपत्ति और गहरी चिंता व्यक्त करता है, जिसके द्वारा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, संभल द्वारा धारा 156(3) दंप्रसं के अंतर्गत पारित FIR दर्ज करने के आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी गई है।
फुल बेंच के ऐतिहासिक निर्णय Father Thomas vs. State of U.P. में यह विधि स्पष्ट और बाध्यकारी रूप से प्रतिपादित है कि मजिस्ट्रेट का 156(3) का आदेश एक न्यायिक आदेश है, जिसमें उच्च न्यायालय का हस्तक्षेप अत्यंत सीमित और अपवादस्वरूप ही होना चाहिए। यदि किसी एकलपीठ को फुल बेंच द्वारा प्रतिपादित विधि से असहमति हो, तो स्थापित न्यायिक परिपाटी यह अपेक्षा करती है कि मामला लार्जर बेंच को संदर्भित किया जाए—न कि फुल बेंच के सिद्धांतों की उपेक्षा कर दी जाए। वर्तमान परिदृश्य न्यायिक अनुशासन की इसी स्थापित परंपरा से विचलन दर्शाता है।
CJM का आदेश किसी को दोषी ठहराने का नहीं था; वह केवल विधिसम्मत जांच प्रारंभ कराने का निर्देश था। सामान्य विधिक क्रम यह था कि FIR दर्ज होती, निष्पक्ष जांच होती, और यदि कोई निर्दोष होता तो जांच के निष्कर्ष स्वयं उसे मुक्त कर देते। इसके विपरीत, जांच की प्रक्रिया को प्रारंभ होने से पहले ही रोक देना न्याय की स्वाभाविक धारा को अवरुद्ध करना है।
मामले का एक अत्यंत महत्वपूर्ण तथ्य यह भी बताया गया है कि घायल व्यक्ति के शरीर से जो गोली बरामद हुई, वह पुलिस के मानक हथियार से चली गोली से भिन्न प्रतीत होती है। यह तथ्य मामले को और गंभीर बनाता है—क्या वैध शस्त्रों से इतर हथियारों का उपयोग हुआ, या पुलिस कार्रवाई की आड़ में किसी अन्य द्वारा गोली चलाई गई? ऐसे प्रश्नों का उत्तर केवल विधिसम्मत FIR और उसके पश्चात होने वाली निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकता था। इसलिए मजिस्ट्रेट के आदेश में हस्तक्षेप न केवल विधि सिद्धांतों के विपरीत है, बल्कि सत्य के अन्वेषण की प्रक्रिया को भी बाधित करता है।
अधिवक्ता मंच राज्य सरकार की भूमिका पर भी गंभीर प्रश्न उठाता है। न्यायिक आदेश के विरुद्ध पुलिस अधिकारियों के पक्ष में सक्रिय पैरवी करना तथा अपर महाधिवक्ता द्वारा उन्हीं के समर्थन में तर्क रखना, विधि के शासन की उस भावना के अनुरूप नहीं है जहाँ राज्य का दायित्व निष्पक्षता का होता है, न कि पक्षधरता का। यह प्रवृत्ति अधीनस्थ न्यायपालिका के आत्मबल और संस्थागत सम्मान के लिए भी प्रतिकूल संकेत देती है।
अधिवक्ता मंच का मत है कि इस प्रकार का हस्तक्षेप एक प्रतिकूल नजीर (bad precedent) स्थापित कर सकता है, जिससे भविष्य में भी मजिस्ट्रेटों द्वारा पारित विधिसम्मत आदेशों के क्रियान्वयन में अनावश्यक अवरोध उत्पन्न होंगे। यह न्याय की मंशा के विपरीत है तथा पीड़ित परिवार के साथ अन्याय का कारण बनता है।
उपरोक्त परिस्थितियों में, अधिवक्ता मंच, इलाहाबाद, यह मांग करता है कि इस प्रकरण को लार्जर बेंच को संदर्भित कर न्यायिक अनुशासन, फुल बेंच की बाध्यकारी विधि, और निष्पक्ष जांच के सिद्धांतों के अनुरूप पुनः विचार किया जाए।
न्याय का तकाज़ा है कि जांच रुके नहीं—सत्य सामने आए, और विधि का शासन प्रभावी रहे।
राजवेंद्र सिंह, संयोजक
मो0 सईद सिद्दीकी, सह संयोजक
प्रमोद गुप्ता, एडवोकेट
चार्ली प्रकाश, एडवोकेट
नीतेश कुमार एडवोकेट
राकेश कुमार यादव एडवोकेट
सदस्य, कार्यपरिषद
अधिवक्ता मंच, इलाहाबाद।

मानवाधिकार दिवस के अवसर पर होनेवाले चर्चा में आपका स्वागत है..
09/12/2025

मानवाधिकार दिवस के अवसर पर होनेवाले चर्चा में आपका स्वागत है..

18/09/2025
11/06/2025

*अति आवश्यक सूचना*

*महाकुंभ की भगदड़ के शिकार लोगों की मदद के लिए हेल्प लाइन*

प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ 2025 के दौरान 29 जनवरी को हुई भगदड़ में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओ ने असमय अपनी जान गवां दी थी और अनेकों श्रद्धालु घायल हो गए थे। सरकार के द्वारा मृतकों के परिजनों को 25 - 25 लाख और गंभीर रूप से घायल घायलों को मुआवजे की घोषणा की गई थी मगर अभी भी अधिकांश मृतकों के परिजनों और घायलों को कोई मुआवजा नहीं मिला है। बीबीसी ने अपने हालिया रिपोर्ट में 82 मौतों की शिनाख्त की है। जबकि सरकार की सुई पांच महीनों से 37 मौतों पर ही अटकी हुई है। इस सम्भावना से इनकार नहीं किया जा सकता है कि अभी सैकड़ों परिवार ऐसे हैं जो कुंभ से खोए अपने परिजनों को खोज कर थक हार कर घर बैठ गए हैं। अधिवक्ता मंच सारे पीड़ित परिवारों को इंसाफ दिलाने के लिए कृत संकल्प है ।इसी तरह के एक मामले में माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद में सुनवाई चल रही है। न्यायालय ने सरकार से सभी मृतकों और घायलों की सूची तलब कर लिया है। अधिवक्ता मंच सभी मृतकों के परिजनों को मुआवजा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।
सभी मृतकों के परिजनों, गंभीर रूप से घायल और घायल श्रद्धालुओं को न्याय मिल सके इसके लिए अधिवक्ता मंच हेल्प लाइन जारी कर रहा है।

अतः भुक्तभोगी परिवार के सदस्यों से निवेदन है कि दिए गए नंबरों पर फोन अथवा व्हाट्सअप या e-mail पर संपर्क करके, विवरण साझा करें ताकि भुक्तभोगियों को निःशुल्क कानूनी सहायता प्रदान करते हुए न्याय सुनिश्चित कराया जा सके।

*हेल्प लाइन नंबर : फोन या whatasap*
9415734354
9452539900
9453242638
8795807177

E Mail id:

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*अधिवक्ता मंच इलाहाबाद।*
आपसे निवेदन है ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि भुक्तभोगियों तक मदद पहुंचाई जा सके। धन्यवाद।

 # # प्रकाशनार्थ  # # # अधिवक्ता मंच इलाहाबाद ने राजकीय मुद्रणालय में कर्मचारियों के जारी आंदोलन को अपना पूरा समर्थन करन...
25/03/2025

# # प्रकाशनार्थ # #

# अधिवक्ता मंच इलाहाबाद ने राजकीय मुद्रणालय में कर्मचारियों के जारी आंदोलन को अपना पूरा समर्थन करने ऐलान किया है।

#निदेशक सहित विभिन्न अधिकारियों की स्थायी नियुक्ति न करके राजकीय मुद्रणालय के प्रयागराज से लखनऊ शिफ्ट करने की नियत सफल नहीं होने दी जाएगी।

गवर्नमेन्ट प्रेस मिनिस्टीरियल इम्प्लॉयीज सोसिएशन के द्वारा निदेशक की स्थायी नियुक्ति, मुख्य वित्त एवं लेखा नियंत्रक की स्थायी नियुक्ति, खाली पड़े पदों में भर्ती किये जाने, कैडर पुनरीक्षण सहित विभिन्न मांगों को लेकर 4 मार्च से शुरू हुए आंदोलन और 19 मार्च से शुरू हुए क्रमिक अनशन को अधिवक्ता मंच इलाहाबाद ने अपने पूरे समर्थन की घोषणा की है।
ज्ञात हो कि विगत समय से एक-एक कर विभिन्न सरकारी कार्यालयों को प्रयागराज से लखनऊ ले जाया जा रहा है। इसके पहले भी आबकारी ऑफिस, पुलिस हेड क्वार्टर सहित विभिन्न ऑफिसों का मुख्य कार्यालय प्रयागराज की जगह लखनऊ शिफ्ट कर दिया गया है। इसी क्रम में प्रयागराज स्थित गवर्नमेंट प्रेस में भी सरकारी अराजकता पैदा की जा रही है, ताकि इसी बहाने से इसे भी प्रयागराज शहर से लखनऊ ले जाया जा सके। लंबे समय से इलाहाबाद स्थित राजकीय मुद्रणालय में किसी स्थाई निदेशक की नियुक्ति नहीं की जा रही है साथ ही साथ संयुक्त निदेशक और मुख्य वित्त नियंत्रक एवम लेखा अधिकारी के पद पर भी अतिरिक्त पदभार देकर दूसरे कार्यालय के अधिकारियों से कम चलाया जा रहा है, जिसको लेकर गवर्नमेंट प्रेस के कर्मचारियों में काफी गुस्सा व्याप्त है। ज्ञात हो कि गवर्नमेंट प्रेस प्रयागराज का एक बहुत महत्वपूर्ण ऑफिस रहा है जिसमें हजारों कर्मी काम करते रहे हैं लेकिन सरकारी लापरवाही के चलते धीरे-धीरे कर पद खाली पड़े रह जा रहे हैं, जहां एक तरफ नौजवान रोजगार के लिए भटक रहे हैं वहीं दूसरी तरफ खाली पड़े पदों पर भर्ती न करके कार्यालय को अराजकता के माहौल में धकेला जा रहा है। यह तब है, जबकि संबंधित विभाग के कैबिनेट मंत्री माननीय नंद गोपाल गुप्ता नंदी की इसी शहर से आते हैं लेकिन मंत्री महोदय अब तक राजकीय मुद्रणालय का दौरा तक नहीं कर पाए हैं, जबकि लंबे समय से वहां के कर्मचारियों के बीच में कार्यालय के अंदर व्याप्त राजकता के खिलाफ गुस्सा है और अंत में और कोई रास्ता न देखते हुए गवर्नमेंट प्रेस के कर्मचारी आंदोलन के लिए विवश हुए हैं।
अधिवक्ता मंच कर्मचारियों के उपरोक्त आंदोलन का पूरा समर्थन करते हुए सरकार से मांग करता है कि उनकी मांगों पर त्वरित रूप से विचार करते हुए कर्मचारियों की बातों को सुना जाए और राजकीय मुद्रणालय में अविलंब स्थाई निदेशक, सहायक निदेशक और लेखा एवम वित्त नियंत्रक आदि पदों पर नियमित नियुक्तियां की जाए तथा खाली पड़े पदों पर भर्ती और कर्मचारियों की अन्य मांगों पर विचार करते हुए उन्हें पूरा करने की दिशा में तुरंत कदम उठाया जाए।

अधिवक्ता मंच के प्रतिनिधि मंडल में संयोजक राजवेंद्र सिंह, सहसंयोजक मो0 सईद सिद्दीकी, प्रमोद कुमार गुप्ता, नितेश कुमार, इंद्रदेव यादव और विकास कुमार मौर्य शामिल रहे जबकि आंदोलनकारियों की ओर से अध्यक्ष राम सुमेर, महामंत्री ध्रुव नारायण, अल्प नारायण सिंह, अनिल रजक, राम गोपाल यादव आदि आंदोलनकारी मौजूद रहे।

भवदीय,
राजवेंद्र सिंह, संयोजक अधिवक्ता मंच इलाहाबाद।

22/01/2025
08/09/2024

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Allahabad

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