The Buddhist Society of India Legal Adviser in Uttar Pradesh

The Buddhist Society of India Legal Adviser in Uttar Pradesh Akhlendra Pratap Singh Advocate High Court Allahabad / Prayagraj Akhlendra Pratap Singh Buddhist Society of India Legal Adviser in Uttar Pradesh

Akhlendra Pratap Singh Advocate High Court Allahabad अनुसूचित जाति के भूमिधर द्वारा गैर-अनुसूचित जाति व्यक्ति को बिना पू...
14/08/2026

Akhlendra Pratap Singh
Advocate High Court Allahabad
अनुसूचित जाति के भूमिधर द्वारा गैर-अनुसूचित जाति व्यक्ति को बिना पूर्व अनुमति भूमि हस्तांतरण का परिणाम : भूमि का राज्य सरकार में निहित होना

यदि आपका आशय उत्तर प्रदेश में एक अनुसूचित जाति के भूमिधर द्वारा अपनी कृषि भूमि दूसरे अनुसूचित जाति के व्यक्ति को बेचने से है, तो स्थिति सामान्यतः गैर-SC व्यक्ति को बिक्री से अलग है। वर्तमान उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 में धारा 98 अनुसूचित जाति के भूमिधर द्वारा भूमि के अंतरण पर प्रतिबंध से संबंधित है। धारा 98(1) में मुख्य प्रतिबंध यह है कि SC भूमिधर अपनी भूमि किसी गैर-अनुसूचित जाति व्यक्ति को विक्रय, दान, बंधक या पट्टे पर बिना कलेक्टर की पूर्व लिखित अनुमति के हस्तांतरित नहीं कर सकता; इसलिए यदि क्रेता भी अनुसूचित जाति का है, तो धारा 98 में वर्णित उक्त अनुमति की आवश्यकता उस आधार पर नहीं पड़ती। � इसके साथ धारा 104 महत्वपूर्ण है, जो संहिता के विरुद्ध किए गए अंतरण को शून्य घोषित करती है, जबकि धारा 105 ऐसे अंतरण के परिणामों से संबंधित है। � अतः किसी SC भूमिधर द्वारा दूसरे SC व्यक्ति के पक्ष में भूमि विक्रय के मामले में केवल विक्रेता और क्रेता की जाति देखना पर्याप्त नहीं है; यह भी देखना आवश्यक है कि भूमि का हस्तांतरणीय अधिकार क्या है, भूमि पर संहिता के किसी अन्य प्रावधान का प्रतिबंध तो नहीं है तथा विक्रय विधिवत पंजीकृत और राजस्व अभिलेखों के अनुरूप है। उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता नियमावली, 2016 का नियम 99 विशेष रूप से धारा 98 के अंतर्गत कलेक्टर की अनुमति की प्रक्रिया से संबंधित है।

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27/06/2026
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31/03/2026

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11/03/2026

आज भारत में गैस सिलेंडर की सबसे बड़ी समस्या है यह समस्या भारत के मेक इन इंडिया फॉर्मूले को पूरी तरह से फेल कर रही है
Akhlendra Pratap Singh
Advocate High Court Allahabad
095321 12005

05/03/2026

न्यायालय में सबसे ज्यादा जातिवादी मानसिकता के लोग रहते हैं अधिवक्ता से लेकर न्यायाधीश तक सभी जातिवादी मानसिकता के हैं पूरी वीडियो देखें इस एडवोकेट की मानसिकता पूर्ण रूप से मनुवादी है और यह कट्टर जातिवादी मानसिकता से पीड़ित है इसके साथ आए सभी लोग भी जातिवादी मानसिकता के हैं लेकिन दुर्भाग्य से ऐसे एडवोकेट के ऊपर कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं होती क्योंकि भारत के सभी न्यायालय में सवर्ण समुदाय का वर्चस्व है इस वर्चस्व के कारण कोई भी व्यक्ति ऐसे लोगों के विरुद्ध कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं कर सकता

इसीलिए बाबा साहब अंबेडकर ने कहा था कि शिक्षित बनो संगठित रहो और आगे बढ़ो अनुसूचित जाति और जनजाति में अधिवक्ताओं की संख्या भारत में बहुत कम है यदि संख्या अधिक होती तो इसके जैसा दो कौड़ी का सवर्ण समुदाय का अधिवक्ता किसी को इस तरह से जाति सूचक शब्दों का इस्तेमाल करके बेज्जती नहीं करता

ऐसे लोग के विरुद्ध में सर्वोच्च न्यायालय भी कुछ नहीं करता बल्कि सर्वोच्च न्यायालय ऐसे लोगों का सपोर्ट करता है और सर्वोच्च न्यायालय या कहता है कि एससी एसटी एक्ट तभी लगेगा जब आपकी बेइज्जती भरे बाजार हो बंद कमरे में यदि कोई आपको जाति सूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए गाली बकता है तो वह बेज्जती नहीं मानी जाएगी अजब जमाना है सुप्रीम कोर्ट में समझदार लोग तो बिल्कुल नहीं होंगे यदि होते तो उन्हें इज्जत और बेज्जती की थोड़ी सी भी समझ होती

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24/02/2026

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महाड सत्याग्रह सामाजिक समानता और मानव अधिकारों की ऐतिहासिक क्रांति तथाडॉ आंबेडकर के विरुद्ध दर्ज हुए मुकदमे भार....

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