14/08/2026
Akhlendra Pratap Singh
Advocate High Court Allahabad
अनुसूचित जाति के भूमिधर द्वारा गैर-अनुसूचित जाति व्यक्ति को बिना पूर्व अनुमति भूमि हस्तांतरण का परिणाम : भूमि का राज्य सरकार में निहित होना
यदि आपका आशय उत्तर प्रदेश में एक अनुसूचित जाति के भूमिधर द्वारा अपनी कृषि भूमि दूसरे अनुसूचित जाति के व्यक्ति को बेचने से है, तो स्थिति सामान्यतः गैर-SC व्यक्ति को बिक्री से अलग है। वर्तमान उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 में धारा 98 अनुसूचित जाति के भूमिधर द्वारा भूमि के अंतरण पर प्रतिबंध से संबंधित है। धारा 98(1) में मुख्य प्रतिबंध यह है कि SC भूमिधर अपनी भूमि किसी गैर-अनुसूचित जाति व्यक्ति को विक्रय, दान, बंधक या पट्टे पर बिना कलेक्टर की पूर्व लिखित अनुमति के हस्तांतरित नहीं कर सकता; इसलिए यदि क्रेता भी अनुसूचित जाति का है, तो धारा 98 में वर्णित उक्त अनुमति की आवश्यकता उस आधार पर नहीं पड़ती। � इसके साथ धारा 104 महत्वपूर्ण है, जो संहिता के विरुद्ध किए गए अंतरण को शून्य घोषित करती है, जबकि धारा 105 ऐसे अंतरण के परिणामों से संबंधित है। � अतः किसी SC भूमिधर द्वारा दूसरे SC व्यक्ति के पक्ष में भूमि विक्रय के मामले में केवल विक्रेता और क्रेता की जाति देखना पर्याप्त नहीं है; यह भी देखना आवश्यक है कि भूमि का हस्तांतरणीय अधिकार क्या है, भूमि पर संहिता के किसी अन्य प्रावधान का प्रतिबंध तो नहीं है तथा विक्रय विधिवत पंजीकृत और राजस्व अभिलेखों के अनुरूप है। उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता नियमावली, 2016 का नियम 99 विशेष रूप से धारा 98 के अंतर्गत कलेक्टर की अनुमति की प्रक्रिया से संबंधित है।
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