JPS Development Foundation

JPS Development Foundation "If We Change Ourselves, Society Will Also Change"

 # सच्ची कहानी / प्रेरणादायक कहानी ..................................................................वॉक फॉर पीस एक प्रे...
05/01/2026

# सच्ची कहानी / प्रेरणादायक कहानी ..................................................................
वॉक फॉर पीस एक प्रेरणादायक यात्रा है, जिसमें टेक्सास के फोर्ट वर्थ स्थित हुआंग दाओ विपस्सना भावना सेंटर के 19 बौद्ध भिक्षु और उनका प्यारा रेस्क्यू डॉग अलोका (जिसे "पीस डॉग" भी कहा जाता है) शामिल हैं।
वे अमेरिका में शांति, प्रेम-करुणा, एकता और आंतरिक उपचार का संदेश फैलाने के लिए लगभग 2300 मील की पैदल यात्रा कर रहे हैं – यह कोई विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि सकारात्मकता फैलाने का एक सचेतन कार्य है।
मुख्य जानकारी
शुरूआत: 26 अक्टूबर 2025, फोर्ट वर्थ, टेक्सास से।
समाप्ति: लगभग 13 फरवरी 2026 को वाशिंगटन डी.सी. के यूएस कैपिटल में, जहां एक शांति सभा आयोजित की जाएगी।
3 जनवरी 2026 तक (यात्रा का 70वां दिन), भिक्षु जॉर्जिया राज्य में हैं – बिशप और वाटकिन्सविले क्षेत्र से पूर्व की ओर बढ़ रहे हैं। जल्द ही वे साउथ कैरोलाइना, फिर नॉर्थ कैरोलाइना (शार्लोट, ग्रीन्सबोरो, रैले आदि), वर्जीनिया और आगे बढ़ेंगे।
यात्रा में ठंडी मौसम और शुरुआती दुर्घटना जैसी चुनौतियां आईं, लेकिन रास्ते में लोगों का भरपूर समर्थन, दान और सभाएं मिल रही हैं।
यह यात्रा पूरे देश में लोगों का दिल जीत रही है, खासकर अलोका के प्यारे अपडेट्स की वजह से, जो भिक्षुओं के साथ खुशी-खुशी चलता है।
आप उनकी लाइव प्रोग्रेस यहां ट्रैक कर सकते हैं: उनकी फेसबुक पेज पर नियमित अपडेट्स आते हैं।
अगर आप उनके रूट के पास हैं, तो कई समुदाय शाम की शांति सभाएं या आशीर्वाद आयोजित करते हैं – यह याद दिलाता है कि शांति हर कदम से शुरू होती है। ☮️
अलोका की कहानी: पीस डॉग की प्रेरणादायक यात्रा 🐾
अलोका, जिसे प्यार से "पीस डॉग" कहा जाता है, वॉक फॉर पीस की सबसे प्यारी और वायरल स्टार है। इसकी कहानी वफादारी, दृढ़ता और करुणा की एक जीती-जागती मिसाल है।
शुरुआत: भारत में एक आवारा कुत्ता
अलोका की उम्र लगभग 4 साल है और यह इंडियन पैरिया डॉग (भारतीय देशी कुत्ता) नस्ल का माना जाता है।
यह भारत में एक आवारा कुत्ता (स्ट्रे) के रूप में जीवन बिता रहा था।
कुछ साल पहले, जब भिक्षु (हुआंग दाओ विपस्सना भावना सेंटर के) भारत में एक 112 दिनों की पीस वॉक कर रहे थे, तो अलोका अचानक उनके पीछे-पीछे चलने लगा।
वह पूरे रास्ते उनके साथ चलता रहा – कभी पीछे नहीं हटा।
चुनौतियां और दृढ़ संकल्प
उस यात्रा के दौरान अलोका को कई कठिनाइयां आईं: वह बीमार पड़ा, यहां तक कि एक कार एक्सीडेंट में घायल हो गया।
भिक्षुओं ने उसकी सुरक्षा के लिए उसे ट्रक में बैठाकर कहीं सुरक्षित जगह छोड़ने की कोशिश की, लेकिन अलोका ने मना कर दिया – वह रोने लगा और वापस भिक्षुओं के साथ चलने पर जोर दिया।
उसकी इस अटूट वफादारी और दृढ़ता से भिक्षु प्रभावित हो गए और उन्होंने उसे आधिकारिक रूप से अपने समूह का हिस्सा बना लिया।
अलोका का नाम संस्कृत में "प्रकाश" या "लाइट" (Aloka) अर्थ रखता है – और उसके माथे पर एक दिल के आकार का निशान भी है, जो उसे और भी खास बनाता है।
अमेरिका की वॉक फॉर पीस में साथी
अब अलोका अमेरिका की 2300 मील की वॉक फॉर पीस (अक्टूबर 2025 से फरवरी 2026) में भिक्षुओं का अभिन्न अंग है।
वह कभी पैदल चलता है (मजबूत महसूस करने पर आगे-आगे दौड़ता भी है), कभी थकने पर सपोर्ट व्हीकल में आराम करता है।
रास्ते में लोग उसे पानी पिलाते हैं, कपड़े या बैंडाना पहनाते हैं, और वह शांतिपूर्वक सबका ध्यान आकर्षित करता है।
अलोका कोई भाषण नहीं देता, कोई बोर्ड नहीं उठाता – बस चुपचाप कदम-दर-कदम चलकर शांति, वफादारी और करुणा का संदेश देता है।
उसके अपने सोशल मीडिया अकाउंट हैं (), जहां लाखों लोग उसके अपडेट्स देखते हैं।
अलोका की कहानी हमें सिखाती है कि सच्ची करुणा और शांति में कोई शोर नहीं होता – बस एक-एक कदम की जरूरत होती है। वह एक पूर्व आवारा कुत्ता से "पीस डॉग" बन गया, जो आज पूरे अमेरिका के दिलों को जीत रहा है। ☮️🐕








05/11/2025
दिनांक 1-11-2025 को ओजोन सिटी के गोल चक्कर 01 पर शाम 6:00 बजे एक सड़क दुर्घटना में इस एरिया में रहने वाले एक कम्युनिटी डॉ...
05/11/2025

दिनांक 1-11-2025 को ओजोन सिटी के गोल चक्कर 01 पर शाम 6:00 बजे एक सड़क दुर्घटना में इस एरिया में रहने वाले एक कम्युनिटी डॉग की मृत्यु हो गयी जिसके क्रम में यह पोस्ट लिखना ही इस बात की गवाही है, कि उसने किसी एक व्यक्ति नहीं वल्कि इस क्षेत्र में रहने वाले प्रत्येक परिवार, पुरुष - स्त्री एंव बच्चों के दिलों को जीता उम्र उसकी ज्यादा नहीं रही होगी मुझे लगता है कि वह 16-18 माह का ही होगा लेकिन रिश्ता उसने सदियों से भी पुराना बनाया l
अब आप सोच रहे होंगे की क्या सच में ऐंसा हो सकता है, यह तो फिल्मों की कहानी सी लगती है तो मेरा जबाब होगा की क्यों नहीं हो सकता यदि इन्सान थोडा सा भी इन्सान बन जाये तो प्रत्येक, गांब, मोहल्ल्ला, टोला, वार्ड में ऐसी कहानी बन सकती है l और ओजोन सिटी के A ब्लाक में यह हुआ, तभी तो वह किसी का भूरा था, किसी का ब्राउनी, किसी का मस्तानी, किसी का छोटू, किसी का साथी प्रत्येक परिवार ने उसे नया नाम दिया और बह सभी का हो गया l लेकिन उपरोक्त दिनांक को हुए इस हादसे में उसकी जान चली गयी जिससे इन सभी परिवारों को बहुत आघात पहुंचा l लेकिन बह इतने कम समय में यह सिखा कर गया की यदि आप में जीतने की क्षमता है, तो आप इस जहाँ को जीत सकते हैं फिर मायने यह नहीं रखता कि आप राजा हैं या रंक, इन्सान हैं या जानवर l यदि किसी के जाने से, जो एक रिक्त स्थान बन जाता है उसे भरा तो नहीं जा सकता लेकिन उसके एहसास को सदैव् ही पास रखा जा सकता है और इसी एहसास को और मजूबत किये जाने हेतु आज दिनांक 05/11/2025 को तुम्हारी याद में जे०पी० एस डवलपमेंट फाउंडेशन के सहयोग से 02 वृक्ष लगाये गये मुझे आशा है की तुम्हारे एहसास को ब्लाक A के परिवार सदा ही स्मरण रखेंगे l
विशेष योगदान – श्री संजीव जैसवाल (अंकल जी) श्रीमती मीरा जैसवाल (आंटी जी), डा. करन सिंह, श्री संजीव कुमार जी , श्री गोवर्धन जी, प्रीती सागर श्रीमती सुमनलता l
अन्य सहयोगी - प्रत्युष, गुनगुन, एंजल, ईशान, सुप्रीम कुमार सागर, सानवी एंव जैक l
ज़र्रों में रहगुज़र के चमक छोड़ जाऊंगा
पहचान अपनी दूर तलक छोड़ जाऊंगा
खामोशियों की मौत गवारा नहीं मुझे
शीशा हूं टूट कर भी खनक छोड़ जाऊंगा...................................................................
PETA India Poonam YadavAnimalDog Home Foundation

युवाओं में तेजी से हार्ट अटैक के मामले बढ़ रहे हैं। जिसे देखते हुए वर्ल्ड हार्ट डे 2025 पर खास थीम रखी गई है। इस थीम का ...
29/09/2025

युवाओं में तेजी से हार्ट अटैक के मामले बढ़ रहे हैं। जिसे देखते हुए वर्ल्ड हार्ट डे 2025 पर खास थीम रखी गई है। इस थीम का मतलब है हार्ट बीट को मिस न करें। इसके लिए हार्ट अटैक के लक्षणों को जानना और खतरे को पहचानना जरूरी है l

't Miss The Beat health day

't Miss The Beat JPS Development Foundation Poonam Yadav
PMO India Government of UP World Health Organization (WHO)

साथियों यह जो फोटो और वीडियो में आप देख रहे हो यह एक कम्युनिटी फीमेल डॉग है, यह डॉग कल रात को कही से हमारे घर के बाहर आ ...
22/09/2025

साथियों
यह जो फोटो और वीडियो में आप देख रहे हो यह एक कम्युनिटी फीमेल डॉग है, यह डॉग कल रात को कही से हमारे घर के बाहर आ गया था यह हमारे मोहल्ले के डॉग में से नहीं थी, पता नहीं कहा से आई थी लेकिन मैंने देखा की इसके पीछे वाले दोनों पैर काम नहीं कर रहे थे इस फीमेल डॉग को किसी कार या बाइक वाले ने टक्कर मारकर अपाहिज बना दिया जब मैंने इसकी स्थिति देखी तो मुझे बहुत दुःख हुआ की इन्सान को इन जीवों पर कोई दया नहीं आती यह बेचारी तो अपना दर्द कह भी नहीं सकती ना जाने कितने लोगों ने अपने दरवाजे पर से इसे भगाया होगा और यह इतने असहनीय दर्द के साथ रोड पर घिसटते हुए हमारे घर के बाहर आ गयी लेकिन मैंने इसे नहीं भगाया और रात को कुछ दर्द निवारक दवाएं खिला कर रात को अपने घर के अन्दर ही रखा और आज सुबह इसका एक्स रे करा कर एक शेल्टर होम मैं इलाज के लिए पंहुचा कर आया हूं अब इसे आप लोगो की दुआओं की आवश्यकता है l

 # Raise Voice for Voiceless
12/08/2025

# Raise Voice for Voiceless

कुत्तों को जिस प्रकार से वर्तमान की सरकार और सर्वोच्च न्यायायलय जिस प्रकार से इंसानों को बहुत बड़ा खतरा बताते हुए उन्हें ...
12/08/2025

कुत्तों को जिस प्रकार से वर्तमान की सरकार और सर्वोच्च न्यायायलय जिस प्रकार से इंसानों को बहुत बड़ा खतरा बताते हुए उन्हें एक जेल नुमा शेल्टर मैं बंद कर देना चाहते हैं यह कितना न्यायोचित है यह बहुत ही सोचनीय है

इंसानों का सबसे बड़ा दुश्मन कुत्तों को बताकर कहीं सिस्टम अपनी जिम्मदारी से भाग तो नहीं रहा है यह सबाल तो बनता है क्योंकि सरकार यह स्पष्ट करे की जानवरों के उपचार एंव आबश्यक प्रबंधन हेतु कितने अस्पताल खोले गए l प्रत्येक वर्ष कितने फीमेल जनवारो का बध्याकरण किया गया l
जिस प्रकार पढ़े लिखे मानव को प्रत्येक बीमारी से लेकर खाने पीने तक का प्रशिक्षण दिया जाता है उसी प्रकार रेबीज जान लेबा है का प्रचार तो किया लेकिन किया कभी इस बिषय मैं जागरूक किया की बेबजाह किसी कुत्ते पर पत्थर ना मारें, किसी कुत्ते पर गाडी न चढायें, किसी कुत्ते की पूछ मैं पटाखा लगाकर ना जलायें l लेकिन इन्ही सबसे बचने के लिए वो किसी इन्सान को कुछ चोट पंहुचा दे तो वो बहुत बड़ा जानबर बन जाता है और उसे कभी कभी तुरंत ही मार भी दिया जाता है l यदि प्रति वर्ष जानवरों के द्वारा होने वाली मौतों को देखें तो कुत्ते तो बदनाम हैं प्रत्येक वर्ष सर्पदंश से लगभग 58000 हजार लोग भारत मैं अपनी जान गँवा देते हैं बही रेबीज की बात करें तो मात्र 126 मौत ही रैबीज से होती हैं जिन्हें उपयोगी कदम उठाये जाएँ तो इन मौतों को हम शून्य कर सकते हैं l
JPS Development Foundation सर्वोच्च न्यायलय से इन बेजुबानो के लिए आजादी की मांग करता है प्लीज इन्हें इंसानों से दूर ना करके इनके प्रति इंसानों के दायित्व तय करने [पर विचार विमर्श कर इन्हें आजादी भरी जिन्दगी प्रदान करें l

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