13/06/2026
*☆ भगवानराम लीलामृत☆*
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ई पण्डित जी जौन कहें, तौन कुल कर दिह
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लेकिन ऐसे ही जमीन बाबा को नहीं दिखा दी गई। लल्लू सिंह बताने लगे:
तो बहुत आत्मविश्वास के साथ समूह की स्थापना हुई। सभी कार्यक्रम हाजी सुलेमान के बगीचे में शुरु हो गए। उसी समय बाबा शतचण्डी जग में रोडवेज की बस से जा रहे थे। उस समय लोग साधन विहीन थे। रोडवेज की बस में बाबा को कानपुर के लिये चढ़ाया गया। उस वक्त बाबा ने कहा कि मैं तो जा रहा हूँ कानपुर, लेकिन हिन्दुस्तान की सधुवाई का ढँग बदलना होगा। काशी में कुष्टी अस्पताल के लिये भूमि खरीद के हमरा बैनामा का कगज देब कि ना देब? मैं था, मेरे छोटे-छोटे लड़के थे, मेरी धर्मपत्नी थीं, और मेरा एक मित्र था, पृथ्वीलाल जैन। मैंने उत्तर में कहा था, "यदि आप की कृपा हो जाय तो सब कुछ हो सकता है।"
बस कानपुर के लिये चली गई। उसी समय मैंने पृथ्वीलाल जैन से कहा, "भाई, तुम तो हम से पुराने भक्त हो। बताओ की वह जमीन कहाँ है? उसको आज ही देखा जायगा।"
वह मेरा मित्र अब दिवंगत हो चुका है। लेकिन उसके जैसा आत्मविश्वासी व्यक्ति मैंने अब तक नहीं पाया है। उसने कहा, "चल, तेरी जमीन तुझे ही नहीं पता है। आज ही दिखाता हूँ।"
वह मुझको राजघाट, गंगा जी के पार, पड़ाव पर ले गया। वह जमीन वहाँ जहाँ पर कि आज आश्रम है, उस समय बिल्कुल उबड़-खाबड़, काशी के लोगों के आत्महत्या की भूमि थी। उसके माध्यम से मैं उस जमीन पर घूमता रहा। लेकिन जब मैं उस स्थान पर घूम रहा था तो मेरी आत्मा कह रही थी कि पृथ्वी माता बोल रही हैं कि तुम हमको खरीद लो। आत्मा प्रकाशित होने के बाद जो विश्वास होता है, उस विश्वास को मैंने पाया। प्रत्येक काम लोग उनको पूछ कर करते थे, मैं उनको स्मरण करके करता था। हुकुम हो गया, उसको करना ही करना है। मेरा यह दृढ़ विश्वास था कि यदि आप चाहेंगे नहीं तो यह होगा नहीं। इसीलिये अपने सहयोगी मित्रों के सहयोग से, रामनगर सब-रजिस्ट्रार से बैनामे का कागज तैयार करा के, मात्र तीन सौ रुपये में उस जमीन के एक अंश को लिया था।
गार्ड साहब ने और बताया:
रातों रात हम लोग चौका घाट से लाकर एक औघड़ की समाधि वहाँ लगा दिये। वह साधु राजेश्वर राम बाबा के पहले की गद्दी का शिष्य था और चौका घाट में तपस्या करते हुए शरीर छोड़ा था। उसी समाधि के ऊपर बाबा की मड़ई बनी। उस समय शहर के कलक्टर इत्यादि और पी•डब्ल्यू•डी के अफसर भी बाबा के सम्पर्क में आ चुके थे। तो उनके सहयोग से यह भूमि मिली और कार्य शुरु हुआ। आज वही संस्था आपके सामने है।
(203) क्रमशः -----:
।।प, पू, अघोरेश्वर।।
।।।अघोर पीठ जन सेवा अभेद आश्रम ट्रस्ट।।।
।।।पोंड़ी दल्हा अकलतरा।।