23/09/2026
संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE ने बांग्लादेश को एक कड़वी हकीकत का एहसास करा दिया है और इसके बाद हालात पूरी तरह उथल-पुथल वाले हो गए हैं।
UAE सरकार ने करीब 4,800 बांग्लादेशियों के वीजा रद्द कर दिए हैं। इसका सीधा मतलब है कि उनके लिए UAE में नौकरी, उनके लाखों-करोड़ों दिरहम के कारोबार और उनकी रोजी-रोटी के दरवाजे बंद हो गए हैं। इनमें से हजारों लोग छुट्टी मनाने के लिए ढाका गए हुए थे, लेकिन जब वापस UAE लौटने की कोशिश की तो उन्हें पता चला कि अब उनके लिए अमीरात में वापस आने पर स्थायी रोक लगा दी गई है।
आखिर ऐसा क्यों हुआ? वजह बताई जा रही है कि UAE अपनी जमीन पर दूसरे देशों से आयात होने वाली राजनीतिक अशांति को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करता। कई सालों से कुछ प्रदर्शनकारियों को लगता था कि वे अपने देश की सड़कों पर होने वाले राजनीतिक विरोध और हंगामे को दूसरे देशों की राजधानियों तक भी ले जा सकते हैं और इसका कोई गंभीर परिणाम नहीं होगा।
इस साल की शुरुआत में बांग्लादेशी प्रवासियों ने अपने देश में चल रहे राजनीतिक विवादों को लेकर UAE की सड़कों पर बिना अनुमति के प्रदर्शन किए। UAE ने इस पर तुरंत और सख्त कार्रवाई की। जहां पश्चिमी देशों की कुछ राजधानियों में विरोध और प्रदर्शनों के नाम पर कानून तोड़ने और सड़कों पर हंगामे को काफी हद तक सहन किया जाता है, वहीं UAE ने साफ कर दिया कि उसकी जमीन पर इस तरह की राजनीतिक गतिविधियों की इजाजत नहीं दी जाएगी।
UAE ने इन मामलों में आरोपियों पर मुकदमे चलाए, कड़ी सजा दी और राजनीतिक गतिविधियों तथा सोशल मीडिया से जुड़े नियमों के उल्लंघन पर निगरानी और सख्ती बढ़ा दी।
अब ढाका में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार UAE के इस फैसले को पलटवाने के लिए अबू धाबी से लगातार अपील कर रही है। लेकिन UAE फिलहाल अपने फैसले से पीछे हटता दिखाई नहीं दे रहा है। UAE ने आधिकारिक तौर पर आंतरिक सुरक्षा को इसका कारण बताया है। इससे साफ संदेश गया है कि उसकी संप्रभुता और सार्वजनिक व्यवस्था के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
अगर आप आर्थिक अवसरों के लिए किसी दूसरे देश में जाते हैं, तो वहां की जमीन का इस्तेमाल अपनी घरेलू राजनीतिक लड़ाई लड़ने के लिए नहीं किया जा सकता। आपको उस देश के कानून, उसकी सुरक्षा व्यवस्था और उसके सामाजिक नियमों का सम्मान करना ही होगा।
राजनीतिक विरोध के नाम पर कानून की सीमाएं पार करने का नतीजा यह हुआ कि करीब 4,800 बांग्लादेशी कामगारों और उनके परिवारों की रोजी-रोटी पर बड़ा असर पड़ा और यह भी सामने आया कि जब किसी देश की बुनियादी कानूनी सीमाओं का उल्लंघन होता है, तो उसके बाद कूटनीतिक प्रभाव की सीमाएं कितनी साफ दिखाई देने लगती हैं।