Shree Rajendra Jayant VG Trust

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08/08/2026

શ્રુતપ્રભાવકની શ્રુતપ્રભાવના..
સાત્ત્વિક જિનવાણી

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08/08/2026
✨॥ ऊँ ह्रीं श्रीं अर्हम् नमः ॥✨🌺 रचयिताविश्वपूज्य • प्रातःस्मरणीयश्री अभिधान राजेन्द्र कोष के निर्माता🙏 प्रभु श्रीमद्विज...
08/08/2026

✨॥ ऊँ ह्रीं श्रीं अर्हम् नमः ॥✨

🌺 रचयिता
विश्वपूज्य • प्रातःस्मरणीय
श्री अभिधान राजेन्द्र कोष के निर्माता
🙏 प्रभु श्रीमद्विजय राजेन्द्रसूरि महाराजा 🙏

📚 हिन्दी अनुवादक
श्रुतप्रभावक • प्रवचनप्रभावक
🙏🏻 परम पूज्य मुनिराजश्री वैभवरत्नविजयजी महाराज साहेब 🙏🏻

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📖 श्री अभिधान राजेन्द्र कोष (भाग–1)

📜 कोष शब्द – 10
✍🏻 अणुभाग (अनुभाग)

📖 श्लोक – 01 : वैक्रियकरणादि कायानामचिन्त्यशक्तौ

🪶 अर्थ :
वैक्रिय आदि शरीरों की जो अचिन्त्य, अद्भुत एवं विलक्षण शक्ति होती है, उसे 'अनुभाग' कहा जाता है। जैन दर्शन में यह शब्द कर्म की प्रभावशक्ति एवं उसकी विशेष सामर्थ्य का भी बोध कराता है।

🙏 जिनवाणी का ज्ञान — आत्मकल्याण का अमूल्य मार्ग। 🙏
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*શ્રી સહસ્ત્રફણા પાર્શ્વનાથાય નમઃ*સકળ શ્રીસંઘ-શાસન-સુભટોને મુનિરાજશ્રી વૈભવરત્ન વિજયજી મ.સા. નો હાકલપત્ર તીર્થોધ્ધારની મ...
07/08/2026

*શ્રી સહસ્ત્રફણા પાર્શ્વનાથાય નમઃ*
સકળ શ્રીસંઘ-શાસન-સુભટોને
મુનિરાજશ્રી વૈભવરત્ન વિજયજી મ.સા. નો હાકલપત્ર
તીર્થોધ્ધારની મહાયાત્રામાં સૌ કોઈ આરાધકને અવશ્ય જોડાવવા વિનંતી.
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

*श्री सहस्रफणा पार्श्वनाथाय नमः*
सकल श्रीसंघ-शासन-सुभटों को
मुनिराजश्री वैभवरत्न विजयजी म.सा. का संदेश पत्र
तीर्थोद्धार की महायात्रा में सभी आराधकों को अवश्य जुड़ने हेतु विनती।
👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻

*श्री सहस्रफणा पार्श्वनाथाय नमः*
*विश्वपूज्य प्रभु श्रीमद्विजय राजेन्द्रसूरि गुरुदेवाय नमः*

वंदनीय श्री संघ...
जैन शासन के जाज्वल्यमान तत्त्वावधान में अरिहंत केंद्रवर्ती हैं। प्रभु दर्शन से मोक्षयात्रा की पूर्णता बताई गई है। हम सब "दर्शनम् देव देवस्य" से भक्ति का प्रारंभ जिनालयों में करते हैं। बात है — गोपीपुरा के गौरव की। गरिमापूर्ण भूतकाल को भूलना उचित नहीं है। विशिष्ट प्रभावक आराधनाओं का इतिहास जिनालयों में गूंज रहा है।

प्राचीन जिनालयों और व्रत-तप से युक्त यह भव्य नगरी जिणोद्धार की प्रतिक्षा कर रही है। हम सब के नैतिक दायित्व के भाग स्वरुप इस पावन भूमि की भव्यता को सजाना जरूरी है। तन-मन-धन के त्रिवेणी संगम से गोपीपुरा गूँज उठेगा। "केसरीनंदन" वर्षावास त्रिस्तुतिक जैन संघ के प्रांगण में मैं कर रहा हूँ... श्री सहस्रफणा दादा हमारे रोम-रोम में बसे हैं। सूरत की शान रूप इस भव्य विरासत को पुनर्जीवित करने के लिए सख्त पुरुषार्थ आवश्यक है — बलिदान हमेशा अमर बनता है, सुवर्ण इतिहास में गुंजायमान बना है। हमारे लक्ष और पक्ष में श्री सहस्रफणा पार्श्वनाथ दादा अवश्य-निरंतर हर सांस में विद्यमान होने ही चाहिए...
संकल्पबद्ध इस महान कार्य को श्रेष्ठ आराधना बनाये।

आ.श्री जयंतसेन सूरिश्वरजी म.सा. के शिष्य
वैभवरत्न वि.
6 अगस्त 2026, गुरुवार
पाल, सूरत

🌼 ऊँ ह्रीं श्रीं अर्हम् नमः 🌼🌺 रचयिताविश्वपूज्य प्रातःस्मरणीयश्री अभिधान राजेन्द्र कोष के निर्माताप्रभु श्रीमद्विजय राजे...
06/08/2026

🌼 ऊँ ह्रीं श्रीं अर्हम् नमः 🌼

🌺 रचयिता
विश्वपूज्य प्रातःस्मरणीय
श्री अभिधान राजेन्द्र कोष के निर्माता
प्रभु श्रीमद्विजय राजेन्द्रसूरि महाराजा 🌺

📚 हिन्दी अनुवादक
श्रुतप्रभावक • प्रवचनप्रभावक
🙏🏻 परम पूज्य मुनिराजश्री वैभवरत्नविजयजी महाराज साहेब 🙏🏻

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📖 श्री अभिधान राजेन्द्र कोष (भाग–1)

📜 कोष शब्द – 08
✍🏻 अणिच्चभावना (अनित्यभावना)

🪶 अर्थ:
पदार्थ, निमित्त तथा व्यक्तियों की अनित्यता का सम्यक् बोध ही अनित्यभावना है।

📖 विवरण:
'अनित्यभावना' का अर्थ है—यह चिंतन करना कि संसार के सभी संयोग, पदार्थ, शरीर, संबंध, वैभव और भोग नश्वर तथा परिवर्तनशील हैं। जो आज प्राप्त है, वह एक दिन अवश्य छूट जाएगा। केवल आत्मा ही शाश्वत है, जबकि संसार की प्रत्येक वस्तु अनित्य है।

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✨ ॥ ऊँ ह्रीं श्रीं अर्हम् नमः ॥ ✨🙏 रचयिता🌺 विश्वपूज्य, प्रातःस्मरणीयश्री अभिधान राजेन्द्र कोष के निर्माताप्रभु श्रीमद् व...
05/08/2026

✨ ॥ ऊँ ह्रीं श्रीं अर्हम् नमः ॥ ✨

🙏 रचयिता
🌺 विश्वपूज्य, प्रातःस्मरणीय
श्री अभिधान राजेन्द्र कोष के निर्माता
प्रभु श्रीमद् विजय राजेन्द्रसूरि महाराजा 🌺

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📖 श्रुतप्रभावक • प्रवचनप्रभावक
🙏🏻 परम पूज्य मुनिराजश्री वैभवरत्नविजयजी महाराज साहेब 🙏🏻

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📖 श्री अभिधान राजेन्द्र कोष (भाग–१)

🌸 जिनवाणी का ज्ञान — आत्मकल्याण का अमूल्य मार्ग 🌸

📜 कोष शब्द – ०७
✍🏻 अणाह (अनाथ)

🪶 श्लोक :
अशरणे।

📖 हिन्दी अर्थ :
जिसका कोई शरणदाता नहीं हो, जो वास्तविक आश्रय से वंचित हो, वह अनाथ (अशरण) कहलाता है।

🌿 सरल भावार्थ :
संसार में धन, परिवार, मित्र या संबंधी होने पर भी यदि जीव को धर्म, सम्यक् दर्शन और आत्मकल्याण का सच्चा आश्रय प्राप्त नहीं है, तो वह वास्तविक अर्थ में अनाथ है।
वास्तविक शरण केवल अरिहंत, सिद्ध, गुरु और जिनवाणी का आश्रय है, जो जीव को भवसागर से पार कर मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर करता है।

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✨ ॥ ऊँ ह्रीं श्रीं अर्हम् नमः ॥ ✨🙏 रचयिता🌺 विश्वपूज्य, प्रातःस्मरणीयश्री अभिधान राजेन्द्र कोष के निर्माताप्रभु श्रीमद् व...
03/08/2026

✨ ॥ ऊँ ह्रीं श्रीं अर्हम् नमः ॥ ✨

🙏 रचयिता
🌺 विश्वपूज्य, प्रातःस्मरणीय
श्री अभिधान राजेन्द्र कोष के निर्माता
प्रभु श्रीमद् विजय राजेन्द्रसूरि महाराजा 🌺

📚 हिन्दी अनुवादक
📖 श्रुतप्रभावक • प्रवचनप्रभावक
🙏 परम पूज्य मुनिराजश्री वैभवरत्नविजयजी महाराज साहेब 🙏

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📖 श्री अभिधान राजेन्द्र कोष (भाग–१)

🌸 जिनवाणी का ज्ञान — आत्मकल्याण का अमूल्य मार्ग 🌸

📜 कोष शब्द – ०५
✍🏻 अच्छेर (आश्चर्य)

🪶 श्लोक :
आ विस्मयतः चर्यन्ते अवगम्यन्ते इति आश्चर्याणि।

📖 हिन्दी अर्थ :
जो वस्तु, घटना या दृश्य सामान्य मानवीय कल्पना, अनुभव अथवा समझ से परे हो तथा जिसे देखकर विस्मय उत्पन्न हो, उसे आश्चर्य कहा जाता है।

🌼 सरल भावार्थ :
जो सामान्य अनुभव से बिल्कुल भिन्न, अद्भुत एवं अलौकिक प्रतीत हो और जिसे देखकर मन आश्चर्य एवं विस्मय से भर जाए, वही अच्छेर (आश्चर्य) कहलाता है।

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02/08/2026

*जीवन शणगार अभियान*
एवं
*अभ्युदयम शिबिर*
🌞🌞🌞🌞🌞

आज सूरत श्रीसंघ में
*श्रुतप्रभावक मुनिराजश्री वैभवरत्न विजयजी म.सा.* की निश्रा में त्रिभुवन नाथ देवाधिदेव परमात्मा की सामूहिक अष्टप्रकारी पूजा का आयोजन हुआ।
पाठशाला के बालक-बालिका द्वारा अनुपम भक्ति हुई।

साथ थी, दोपहर में विशेष संस्करण शिबिर का आयोजन हुआ ।

बरसों से *जीवन शणगार अभियान* एवं *अभ्युदयम शिबिर* शिबिर द्वारा आगामी पीढ़ी में संस्कारों का सिंचन करके अनेक आत्माओं को महात्मा बनने हेतु प्रबल निमित्त समान संस्कारदाता मुनिवर की अनंत अनुमोदना
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
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