29/09/2025
युवतियों की समस्याओं और समाधान पर कार्यक्रम
अहमदाबाद के गोमतीपुर इलाके में, 'इदारतुल उम्मत ग्रुप' ने गर्ल्स इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन ऑफ गुजरात, रखियाल यूनिट के सहयोग से "युवतियों की समस्याओं और समाधान" के विषय पर एक अहम प्रोग्राम का आयोजन किया। इस प्रोग्राम में शाज़िया शेख (सचिव, महिला विभाग, जमाअते इस्लामी हिन्द, गुजरात) ने बतौर मुख्य वक्ता शिरकत की, जबकि उनके अलावा डॉ. कौसर इन्दौरी (अध्यक्ष, GIO गुजरात) और तैय्यबा मुहम्मदी (अध्यक्ष, GIO रखियाल यूनिट) ने भी अपने ख्यालात का इज़हार किया। स्थानीय नसीम आपा ने भी इस मौके़ पर अपनी बातें पेश कीं।
डॉ. कौसर इन्दौरी ने अपनी तक़रीर में कहा कि एक औरत की इज़्ज़त और अज़्मत (गरिमा और महानता) उसकी फ़र्ज़-ए-ऐन (व्यक्तिगत फ़र्ज़) और फ़र्ज़-ए-मंसब (सामाजिक फ़र्ज़) की सही अदायगी में पोशीदा है। उन्होंने ज़ोर दिया कि इस्लाम औरतों को सिर्फ़ घर तक महदूद नहीं करता, बल्कि उन्हें उनकी सलाहियत (क्षमता) के मुताबिक़ समाज, दीन और ज़ाती ज़िंदगी में बेहतरीन किरदार (योगदान) अदा करने की हौसला अफ़ज़ाई (प्रोत्साहन) करता है। वहीं, तैय्यबा मुहम्मदी ने इस बात पर रोशनी डाली कि इस्लाम के आने से पहले जाहिलियत के दौर में औरतों को सताया जाता था और उन्हें इंसान नहीं समझा जाता था। उन्होंने अफ़सोस ज़ाहिर करते हुए कहा कि इस्लाम ने औरतों को उनका खोया हुआ हक़ वापस दिलाया, मगर आज की लड़कियाँ मग़रिबी तहज़ीब (पश्चिमी संस्कृति) की नकल करके फिर से उसी जाहिलियत की तरफ़ जा रही हैं, जहाँ "आज़ादी" के नाम पर औरतों का सिर्फ़ इस्तेमाल किया जा रहा है।
मुख्य वक्ता शाज़िया शेख ने अपने ख़िताब में बताया कि इंसान की ज़िंदगी का सबसे कीमती वक़्त जवानी का ज़माना है। उन्होंने कहा कि इस्लाम युवतियों को उनकी जवानी को ईमान, हया (शर्म), शख्सीयत-साज़ी (व्यक्तित्व-निर्माण) और ख़िदमत (सेवा) से जोड़ने की तालीम देता है। उन्होंने कहा कीः अल्लाह की नज़र में सबसे ऊँचा दर्जा उसे मिलता है जो अपनी जवानी को इबादत, पाकीज़गी (पवित्रता) और हुक्म-बरदारी (आज्ञापालन) में गुज़ारता है। उन्होंने कुछ सहाबियात की मिसालें भी पेश कीं जिन्होंने अपनी जवानी दीन की ख़िदमत में कुर्बान कर दी।
शाज़िया शेख ने मौजूदा दौर की नौजवान नसल (युवा पीढ़ी) के सामने कई मुश्किलों का ज़िक्र किया, जैसे: सोशल मीडिया का ग़लत इस्तेमाल, फ़ैशन और बेफ़िक्री भरी ज़िंदगी, तालीम (शिक्षा) का ग़लत तसव्वुर (धारणा) जो सिर्फ़ दुनियावी फ़ायदे तक महदूद हो गया है, मग़रिबी तहज़ीब की पैरवी (अनुसरण) और फेमिनिज़्म के नाम पर ज़िम्मेदारियों से दूर भागना। उन्होंने ऐसे मुश्किल वक़्त में इस्लामी रहनुमाई देते हुए युवतियों से कहा कि वे अपना ईमान मज़बूत करें, नमाज़, क़ुरआन और ज़िक्र (अल्लाह को याद करना) को थामे रहें, दीनी और दुनियावी दोनों तरह की तालीम हासिल करें, अपनी हया और पाकीज़गी की हिफ़ाज़त करें, अपने वक़्त का सही इस्तेमाल करें और दीन और इंसानियत दोनों की ख़िदमत में अपना हिस्सा डालें।
'इदारतुल उम्मत ग्रुप' के अध्यक्ष शेख़ मुदस्सिर भाई, सदस्य शब्बीर शेख और हाफ़िज़ राहिल, साथ ही जमाअते इस्लामी हिन्द, अहमदाबाद पूर्व के उपाध्यक्ष आफ़ताब आलम ने इस कार्यक्रम को कामयाब बनाने के लिए बहुत मेहनत की।