શ્રી હળવદ ભવન ટ્રસ્ટ - અમદાવાદ

  • Home
  • India
  • Ahmedabad
  • શ્રી હળવદ ભવન ટ્રસ્ટ - અમદાવાદ

શ્રી હળવદ ભવન ટ્રસ્ટ - અમદાવાદ Halvad Bhavan Trust was founded for the social activities and for the upbringing of needy people..

ભગવાન વિષ્ણુના છઠ્ઠા અવતાર એવા ચિરંજીવ ભગવાન પરશુરામ જી ના જન્મોત્સવ,  અક્ષય તૃતીયા ના પાવન દિને યોજાયેલ શિવ આરાધના ની એ...
21/04/2026

ભગવાન વિષ્ણુના છઠ્ઠા અવતાર એવા ચિરંજીવ ભગવાન પરશુરામ જી ના જન્મોત્સવ, અક્ષય તૃતીયા ના પાવન દિને યોજાયેલ શિવ આરાધના ની એક જલક..

19/04/2026
મહાદેવ હર અને જય માતાજી સાથે જણાવવાનું કે, હળવદ ભવન ટ્રસ્ટ  આયોજિત  ગરબા રાત્રિ (તારીખ 04/10/2025 ) મા અંદાજે 100+ પાસ ન...
30/09/2025

મહાદેવ હર અને જય માતાજી સાથે જણાવવાનું કે, હળવદ ભવન ટ્રસ્ટ આયોજિત ગરબા રાત્રિ (તારીખ 04/10/2025 ) મા અંદાજે 100+ પાસ નું બુકિંગ થય ગયુ છે, યોગ્ય વ્યવસ્થા થાય એ હેતુ થી માત્ર 350 પાસ નું બૂકિંગ લેવામાં આવશે..

ગરબા DJ ના તાલ પર રહેશે..

અને દરેક વય જૂથ મૂજબ હળવદ ભવન ટ્રસ્ટ તરફ થી ઇનામ આપવામા આવશે.

આથી વહેલા તે પહેલાના ધોરણે બૂકિંગ કરાવી ને આયોજન મા સહકાર આપશો.

બુકિંગ નું પેમેન્ટ વ્યક્તિ દીઠ 100/- મુજબ 9426369018 ( વિનય ભાઈ ત્રિવેદી) પર તા 02/10/25 પેહલા મોકલી આપવુ.

કાર્યક્રમ મા 7 વાગ્યે માતાજી ની સ્તુતિ કરીને કાર્યક્રમ શરૂ કરવામાં આવશે અને 11.30 એ મહાઆરતી કરી પ્રસાદ લઈ પૂર્ણ થશે.

જેમણે મહાઆરતી મા ભાગ લેવો હોય એમણે પોતાની આરતી ની થાળી લઈ ને આવવા વિનંતી છે.

રાત્રિ ભોજનમાં ભાજીપાવ, ગુલાબ જાંબુ છાશ રાખેલ છે..

09/08/2025

आप सभी सनातनियों को श्रावणी की शुभकामनाएं
#श्रावणी_उपाकर्म (साभार आद्य शङ्कराचार्य सन्देश )

उपाकर्म का अर्थ है प्रारंभ करना। उपाकरण का अर्थ है आरंभ करने के लिए निमंत्रण या निकट लाना। यह वेदों के अध्ययन के लिए विद्यार्थियों का गुरु के पास एकत्रित होने का काल है । इसके आयोजन काल के बारे में धर्मगंथों में लिखा गया है कि - जब वनस्पतियां उत्पन्न होती हैं, श्रावण मास के श्रवण व चंद्र के मिलन (पूर्णिमा) या हस्त नक्षत्र में श्रावण पंचमी को उपाकर्म होता है। इस अध्ययन सत्र का समापन, उत्सर्जन या उत्सर्ग कहलाता था। यह सत्र माघ शुक्ल प्रतिपदा या पौष पूर्णिमा तक चलता था। श्रावण शुक्ल पूर्णिमा के शुभ दिन रक्षाबंधन के साथ ही श्रावणी उपाकर्म का पवित्र संयोग बनता है। विशेषकर यह पुण्य दिन ब्राह्मण समुदाय के लिए बहुत महत्व रखता है। जीवन की वैज्ञानिक प्रक्रिया:- जीवन के विज्ञान की यह एक सहज, किन्तु अति महत्त्वपूर्ण प्रक्रिया है । जन्मदात्री माँ चाहती है कि हर अण्डा विकसित हो । इसके लिए वह उसे अपने उदर की ऊर्जा से ऊर्जित करती है, अण्डे को सेती है । माँ की छाती की गर्मी पाकर उस संकीर्ण खोल में बंद जीव पुष्ट होने लगता है । उसके अंदर उस संकीर्णता को तोड़कर विराट् प्रकृति, विराट् विश्व के साक्षात्कार का संकल्प उभरता है । उसे फिर उस सुरक्षित संकीर्ण खोल को तोड़कर बाहर निकलने में भय नहीं लगता । वह दूसरा-नया जन्म ले लेता है । यह प्रक्रिया प्रकृति की सहज प्रक्रिया है, किन्तु पुरुषार्थसाध्य है । पोषक और पोषित; दोनों को इसके अंतर्गत प्रबल पुरुषार्थ करना पड़ता है । इसीलिए युगऋषि ने लिखा है- 'मनुष्य जन्म तो सहजता से हो जाता है, किन्तु मनुष्यता विकसित करने के लिए कठोर पुरुषार्थ करना पड़ता है ।' जैसे अण्डा माता की छाती की ऊष्मा से पकता है, वैसे ही मनुष्यता गुरु-अनुशासन में वेदमाता की गर्मी (शुद्ध ज्ञान की ऊर्जा) से धीरे-धीरे परिपक्व होती है । परिपक्व होने पर साधक अपने संकल्प से उस संकीर्णता के घेरे को तोड़ डालता है । तब उसे अपने तथा जन्मदात्री माता के स्वरूप का बोध होता है । तब वह भी माँ की तरह विराट् आकाश में उड़ने की चेष्टा करता है । तब माँ ऊँची उड़ानें भरने के उसके प्रयासों को शुद्ध-सही बनाती है । यही मर्म है- 'पावमानी द्विजानाम्' का । जो संकीर्णता के खोल में बंद है, उसे माँ विकसित करने के लिए अपनी ऊर्जा तो देती रहती है, किन्तु नया जन्म लेने के पहले उसके लिए अपने अन्य कौशलों का प्रयोग नहीं कर सकती । जिसने दूसरा जन्म ले लिया, वह 'द्विज' । नये दुर्लभ जन्म की प्रक्रिया को पूरा करने की प्रवृत्ति-साधना है 'द्विजत्व' । जब द्विज के चिंतन, चरित्र, व्यवहार पवित्र हो जाते हैं, तो वह ब्रह्म के अनुशासन में सिद्ध ब्राह्मण हो जाता है । जब उसकी कामनाएँ ब्रह्म के अनुरूप ही हो जाती हैं, तो ब्राह्मी चेतना-आदिशक्ति उसके लिए कामधेनु बन जाती है । जिसकी कामनाएँ-प्रवृत्तियों अनगढ़ हैं, उन्हें पूरा करने से तो संसार में अनगढ़ता ही बढ़ेगी । इसलिए माता सुगढ़-शुद्ध कामना वालों के लिए ही कामधेनु का रूप धारण करती है । भारतीय संस्कृति में द्विजत्व और ब्राह्मणत्व का संबंध किसी जाति या वर्ग विशेष में जन्म लेने से नहीं है, बल्कि वह साधना की उच्च कक्षा से जुड़े सम्बोधन हैं । इसीलिए संस्कारों से द्विजत्व की प्राप्ति की बात कही जाती रही है । संगीत के द्वार सभी के लिए खुले हैं, किन्तु संगीताचार्य अपनी बारीकियाँ उन्हीं के सामने खोलते हैं, जिनकी संगीत साधना उच्च स्तरीय हो गई है । खेल सभी खेल सकते हैं, किन्तु खेल प्रशिक्षक खेल तकनीक की बारीकियाँ उसी को समझाता है, जिनके कौशल और दमखम की साधना उच्च स्तरीय है । जिसकी साधना विकसित नहीं हुई है, उसे आगे की बात बताने से बतलाने वाले का प्रयास निरर्थक तो जाता ही है, कई बार उसका विपरीत प्रभाव भी भोगना पड़ जाता है । तिथि:- श्रावण पूण्रिमा में यदि ग्रहण या संक्रांति हो तो श्रावणी उपाकर्म श्रावण शुक्ल पंचमी को करना चाहिये।'भद्रायां ग्रहणं वापि पोर्णिमास्या यदा भवेत। उपाकृतिस्तु पंचम्याम कार्या वाजसेनयिभ:' संक्रांति व पूर्णिमा युति या ग्रहण पूर्णिमा युति में वाजसेनी आदि सभी शाखा के ब्राह्मणों को उपाकर्म (श्रावणी) पंचमी को कर लेनी चाहिये। शास्त्र सम्मत श्रावण उपाकर्म भद्रा दोष, ग्रहण युक्त पूर्णिमा, संक्राति युक्त पूर्णिमा में नहीं किया जाता तब उससे पूर्व श्रावण शुक्ल पंचमी नागपंचमी में श्रावणी स्नान उपाकर्म करने के शास्त्रोक्त निर्देश हैं। हेमाद्रिकल्प, स्कंद पुराण, स्मृति महार्णव, निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु आदि योतिष व धर्म के निर्णय ग्रंथों में इसके प्रमाण हैं। कुछ ग्रंथों के प्रमाण इस प्रकार हैं- 'श्रावण शुक्लया: पूर्णिमायां ग्रहणं संक्रांति वा भवेतदा। यजुर्वेदिभि: श्रावण शुक्ल पंचम्यामुपाकर्म कर्तव्यं॥' अर्थात श्रावण पूण्रिमा में यदि ग्रहण या संक्रांति हो तो श्रावणी उपाकर्म श्रावण शुक्ल पंचमी को करना चाहिये। एक अन्य श्लोक के उल्लेख के अनुसार भद्रा में दो कार्य नहीं करना चाहिये एक श्रावणी अर्थात उपाकर्म, रक्षाबंधन, श्रवण पूजन आदि और दूसरा फाल्गुनि होलिका दहन। भद्रा में श्रावणी करने से राजा की मृत्यु होती है तथा फाल्गुनी करने से नगर ग्राम में आग लगती है तथा उपद्रव होते हैं। श्रावणी अर्थात उपाकर्म रक्षाबंधन, श्रवण पूजन भद्रा के उपरांत ही की जा सकती है। लेकिन ग्रहण युक्त पूर्णिमा भी श्रावणी उपाकर्म में निषिध्द है|ब्राह्मणों का यह अतिमहत्वपूर्ण कर्म हैं|

#श्रावणी_पर्व:- श्रावणी पर्व द्विजत्व की साधना को जीवन्त, प्रखर बनाने का पर्व है । जो इस पर्व के प्राण-प्रवाह के साथ जुड़ते हैं, उनका द्विजत्व-ब्राह्मणत्व जाग्रत् होता जाता है तथा वे आदिशक्ति, गुरुसत्ता के विशिष्ठ अनुदानों के प्रामाणिक पात्र बन जाते हैं । द्विजत्व की साधना को इस पर्व के साथ विशेष कारण से जोड़ा गया है । युगऋषि ने श्रावणी पर्व के सम्बन्ध में लिखा है कि यह वह पर्व है जब ब्रह्म का 'एकोहं बहुस्यामि' का संकल्प फलित हुआ । पौराणिक उपाख्यान सबको पता है । भगवान की नाभि से कमलनाल निकली, उसमें से कमल पुष्प विकसित हुआ । उस पर स्रष्टा ब्रह्मा प्रकट हुए, उन्होंने सृष्टि की रचना की । युगऋषि इस अंलकारिक आख्यान का मर्म स्पष्ट करते हुए लिखते हैं- ''संकल्पशक्ति क्रिया में परिणित होती है और उसी का स्थूल रूप वैभव एवं घटनाक्रम बनकर सामने आता है । नाभि (संकल्प) में से अन्तरंग बहिरंग बनकर विकसित होने वाली कर्म-वल्लरी को ही पौराणिक अलंकरण में कमलबेल कहा गया है । पुष्प इसी बेल का परिपक्व परिणाम है । सृष्टि का सृजन हुआ, इसमें दो तत्व प्रयुक्त हुए-१ ज्ञान, २ कर्म । इन दोनों के संयोग से सूक्ष्म चेतना, संकल्प शक्ति स्थूल वैभव में परिणत हो गई और संसार का विशाल कलेवर बनकर खड़ा हो गया । उसमें ऋद्धि-सिद्धियों का आनन्द-उल्लास भर गया । यही कमल-पुष्प की पखुड़ियाँ हैं । इसका मूल है ज्ञान और कर्म, जो ब्रह्म की इच्छा और प्रत्यावर्तन प्रक्रिया द्वारा सम्भव हुआ । ज्ञान और कर्म के आधार पर ही मनुष्य की गरिमा का विकास हुआ है ।'' मनुष्य की महान गरिमा के अनुरूप जीवन जीने के अभ्यास को द्विजत्व की साधना कहा गया है । द्विजत्व की साधना सहज नहीं है । मन की कमजोरियों और परिस्थितियों की विषमताओं के कारण प्रयास करने पर भी साधकों से चूकें हो जाती हैं । समय-समय पर आत्म समीक्षा द्वारा उन भूल-चूकों को चिन्हित करके उन्हें ठीक करना, अपने अन्दर सन्निहित महान सम्भावनाओं को जाग्रत्-साकार करने के प्रयास करना जरूरी होता है । इस सदाशयतापूर्ण संकल्प को पूरा करने के लिए श्रावणी पर्व-ब्राह्मी संकल्प के फलित होने वाले पर्व से श्रेष्ठ और कौन-सा समय हो सकता है? इसलिए ऋषियों ने द्विजत्व के परिमार्जन-विकास के लिए श्रावणी पर्व को ही चुना है ।

#विधि :- श्रावणी उपाकर्म के तीन पक्ष है- प्रायश्चित्त संकल्प, संस्कार और स्वाध्याय। सर्वप्रथम होता है- प्रायश्चित्त रूप में हेमाद्रि स्नान संकल्प। गुरु के सान्निध्य में ब्रह्मचारी गोदुग्ध, दही, घृत, गोबर और गोमूत्र तथा पवित्र कुशा से स्नानकर वर्षभर में जाने-अनजाने में हुए पापकर्मों का प्रायश्चित्त कर जीवन को सकारात्मकता से भरते हैं। स्नान के बाद ऋषिपूजन, सूर्योपस्थान एवं यज्ञोपवीत पूजन तथा नवीन यज्ञोपवीत धारण करते हैं। यज्ञोपवीत या जनेऊ आत्म संयम का संस्कार है। आज के दिन जिनका यज्ञोपवित संस्कार हो चुका होता है, वह पुराना यज्ञोपवित उतारकर नया धारण करते हैं और पुराने यज्ञोपवित का पूजन भी करते हैं । इस संस्कार से व्यक्ति का दूसरा जन्म हुआ माना जाता है। इसका अर्थ यह है कि जो व्यक्ति आत्म संयमी है, वही संस्कार से दूसरा जन्म पाता है और द्विज कहलाता है। उपाकर्म का तीसरा पक्ष स्वाध्याय का है। इसकी शुरुआत सावित्री, ब्रह्मा, श्रद्धा, मेधा, प्रज्ञा, स्मृति, सदसस्पति, अनुमति, छंद और ऋषि को घृत की आहुति से होती है। जौ के आटे में दही मिलाकर ऋग्वेद के मंत्रों से आहुतियां दी जाती हैं। इस यज्ञ के बाद वेद-वेदांग का अध्ययन आरंभ होता है। इस सत्र का अवकाश समापन से होता है। इस प्रकार वैदिक परंपरा में वैदिक शिक्षा साढ़े पांच या साढ़े छह मास तक चलती है। वर्तमान में श्रावणी पूर्णिमा के दिन ही उपाकर्म और उत्सर्ग दोनों विधान कर दिए जाते हैं। प्रतीक रूप में किया जाने वाला यह विधान हमें स्वाध्याय और सुसंस्कारों के विकास के लिए प्रेरित करता है। यह जीवन शोधन की एक अति महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक-आध्यात्मिक प्रक्रिया है । उसे पूरी गम्भीरता के साथ किया जाना चाहिए । श्रावणी पर्व शरीर, मन और इन्द्रियों की पवित्रता का पुण्य पर्व माना जाता है । इस पर्व पर की जाने वाली सभी क्रियाओं का यह मूल भाव है कि बीते समय में मनुष्य से हुए ज्ञात-अज्ञात बुरे कर्म का प्रायश्चित करना और भविष्य में अच्छे कार्य करने की प्रेरणा देना। द्विज और द्विजत्व:- द्विज सम्बोधन यहाँ किसी जाति-वर्ग विशेष के लिए नहीं है, यह एक गुणवाचक सम्बोधन है । जीवन साधना की उच्चतम कक्षा के सफल साधक का पर्याय है । द्विज का अर्थ होता है-दुबारा जन्म लेने वाला । संस्कृत साहित्य में पक्षियों को भी द्विज कहा जाता है । माँ जन्म देती है अण्डे को । माँ के गर्भ से जन्म ले लेने की प्रक्रिया पूरी हो जाने पर भी बच्चे का स्वरूप जन्मदात्री के स्वरूप के अनुरूप नहीं होता । परन्तु अण्डे के अंदर जो जीव है, उसमें जन्मदात्री के अनुरूप विकसित होने की सभी संभावनाएँ होती हैं । प्रकृति के अनुशासन का पालन किये जाने पर उसका समुचित विकास हो जाता है और वह अण्डे में बँधी अपनी संकीर्ण सीमा को तोड़कर अपने नये स्वरूप में प्रकट हो जाता है । इस प्रक्रिया को उसका दूसरा जन्म कहना हर तरह से उचित है । यह प्रक्रिया पूरी होने पर ही उसे प्रकृति की विराटता का बोध होता है । तभी माँ उसे उड़ने का प्रशिक्षण देती है । ऋषियों ने अनुभव किया कि मनुष्य स्रष्टा की अद्भुत कृति है । उसमें दिव्य शक्तियों, क्षमताओं के विकास की अनंत सँभावनाएँ हैं । सामान्य रूप से तो माँ के गर्भ से जन्म लेने के बाद भी वह पशुओं जैसी आहार, निद्रा, भय, मैथुन की संकीर्ण प्रवृत्तियों के घेरे में ही कैद रहता है । मनुष्य की अंतःचेतना जब पुष्ट होकर संकीर्णता के उस अण्डे जैसे घेरे को तोड़कर बाहर आने का पुरुषार्थ करती है, तब उसका दूसरा जन्म होता है । तभी माता (आदिशक्ति) उसे सदाशयता और सत्पुरुषार्थ (सद्ज्ञान एवं सत्कर्म) के पंख फैलाकर जीवन की ऊँचाइयों में उड़ने का प्रशिक्षण देती है । तैयारी करें:- जो साधक वास्तव में इसका यथेष्ट लाभ उठाना चाहते हैं, उन्हें इसके लिए कम से कम एक दिन पूर्व से विचार मंथन करना चाहिए । गुरुदीक्षा के समय अथवा अगले चरण के साधना प्रयोगों में जो नियम-अनुशासन स्वीकार किये गये थे, उन पर ध्यान दिया जाना चाहिए । भूलों को समझे और स्वीकार किए बिना उनका शोधन संभव नहीं । आत्मसाधना में समीक्षा के बाद ही शोधन, निर्माण एवं विकास के कदम बढ़ाये जा सकते हैं । जो भुल-चूकें हुई हों, उन्हें गुुरुसत्ता के सामने सच्चे मन से स्वीकार किया जाना चाहिए । क्षति पूर्ति के लिए अपने र्कत्तव्य निश्चित करके गुुरुसत्ता से उसमें समुचित सहायता की प्रार्थना करनी चाहिए ।

श्रावणी उपाकर्म के सामूहिक क्रम में जो शामिल हों, उन्हें सामूहिक कर्मकाण्ड का लाभ तभी मिलेगा, जब वे उसके लिए व्यक्तिगत मंथन कर चुके होंगे । उसके बाद शिखा सिंचन उच्च विचार-ज्ञान साधना को तेजस्वी बनने के लिए किया जाता है । यज्ञोपवीत परिवर्तन यज्ञीय कर्म अनुशासन को अधिक प्रखर-प्रामाणिक बनाने के लिए किया जाता है । ब्रह्मा का, वेद का और ऋषियों का आवाहन, पूजन उनकी साक्षी में संकल्प करने तथा उनके सहयोग से आगे बढ़ते रहने के भाव से किया जाता है । रक्षाबंधन प्रगति के श्रेष्ठ संकल्पों को पूरा करने के भाव से किया-कराया जाता है । प्रकृति के अनुदानों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के साथ उसके ऋण से यथाशक्ति उऋण होने के भाव से वृक्षारोपण करने का नियम है । श्रावणी पर हर दीक्षित साधक को साधना का परिमार्जन करने के साथ उसको श्रेष्ठतर स्तरों पर ले जाने के संकल्प करने चाहिए । ऐसा करने वाले साधक ही इष्ट, गुरु या मातृसत्ता के उच्च स्तरीय अनुदानों को प्राप्त करने की पात्रता अर्जित कर सकते हैं । यदि सामूहिक पर्व क्रम में शामिल होने का सुयोग न बने तथा विशेष कर्मकाण्डों का करना-कराना संभव न हो, तो भी अपने साधना स्थल पर भावनापूर्वक पर्व के आवश्यक उपचारों द्वारा श्रावणी के प्राण-प्रवाह से जुड़कर उसका पर्याप्त लाभ प्राप्त किया जा सकता है । इसके लिए सभी को एक दिन पहले से ही जागरूकतापूर्वक प्रयास करने-कराने चाहिए । भूलों के सुधार तथा विकास के लिए निर्धारित नियमों को लिखकर पूजा स्थल पर रख लेना चाहिए । उपासना के समय उन पर दृष्टि पड़ने से होने वाली भूलों, विसंगतियों से बचना संभव होता है । हमारे सार्थक प्रयास हमें उच्च स्तरीय प्रगति का अधिकारी बना सकते हैं|

।। जय श्री काशीविश्वनाथ ।।

🕉🔱卐 શ્રી ગણેશાય નમઃ卐🔱 🕉હર હર મહાદેવ સાથે જણાવવાનું કે ,  આજ રોજ હળવદ ભવન ખાતે  હળવદ ભવન ટ્રસ્ટ અને શ્રી હળવદ બ્રહ્મ સમાજ...
03/08/2025

🕉🔱卐 શ્રી ગણેશાય નમઃ卐🔱 🕉

હર હર મહાદેવ સાથે જણાવવાનું કે , આજ રોજ હળવદ ભવન ખાતે હળવદ ભવન ટ્રસ્ટ અને શ્રી હળવદ બ્રહ્મ સમાજ અમદાવાદ દ્વારા આયોજિત પાઠાત્મક સહ અભિષેકતામ્ક લઘુરુદ્ર નુ સુંદર કાર્ય નિર્વિઘ્ન સંપન્ન થયેલ.

કુલ 31 યજમાન શ્રી ઓ ને ધર્મ લાભ પ્રાપ્ત થયો.. અને કુલ 300+ જ્ઞાતિ બાંધવો એ દર્શન લાભ નો લીધેલ.

આ તકે અમો બધા યજમાન શ્રી ઓ , દાતાશ્રીઓ, કારોબારી સમિતિ, સ્વયં સેવકો, ટ્રસ્ટીગણ , તમામ નો હૃદય પૂર્વક આભાર માનીએ છીએ.

દેવાધિદેવ મહાદેવ સર્વે નુ મંગલ કરે, સુખાકારી આપે અને આવા ધર્મલાભ ના કાર્યક્રમ કરાવતા રહે એજ પ્રાર્થના.

આયોજક :
શ્રી હળવદ ભવન ટ્રસ્ટ અમદાવાદ
શ્રી હળવદ બ્રહ્મ સમાજ અમદાવાદ

શ્રી ચિંતન ભાઈ જાની ( પ્રમુખ ) - ૯૮૯૮૧૪૪૪૧૩
શ્રી રુદ્રદત્ત રાવલ ( મંત્રી ) - ૭૮૭૪૩૯૬૯૬૯
તથા સમગ્ર ટ્રસ્ટીગણ અને કારોબારી સમિતિ ના મહાદેવ હર..

|| शिव संकल्पमस्तु ||

30/07/2025

40 વર્ષ પહેલાં રેડિયો માં શ્રાવણ માસમાં સોમવારે સવારે વગાડતા એ શિવ મહિમ્ન સ્તોત્ર 🙏

શ્રી હળવદ બ્રહ્મ સમાજ - અમદાવાદ શ્રી હળવદ બ્રહ્મ સમાજ

21/07/2025

🕉 શ્રી ગણેશાય નમઃ 🕉
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
હર હર મહાદેવ સાથે જણાવવાનું કે , આવનારા પવિત્ર શ્રાવણ માસ નિમિતે શ્રી હળવદ ભવન ટ્રસ્ટ અને શ્રી હળવદ બ્રહ્મ સમાજ અમદાવાદ ના સયુંકત ઉપક્રમે સામુહિક પાઠાત્મક સહ અભિષેકતામ્ક લઘુરુદ્ર - શ્રાવણ સુદ નવમી તારીખ 03/08/2025 રવિવાર ના રોજ તથા હોમાત્મક લઘુરુદ્ર શ્રાવણી અમાવાસ્યા તારીખ 23/08/2025 શનિવાર ના રોજ નિર્ધારિત કરેલ છે.

લઘુરુદ્ર ની વિગત :
૧) તા 03/08/2025 રવિવાર - પાઠાત્મક સહ અભિષેકતામ્ક લઘુરુદ્ર ( 27 યજમાન )
૨) તા 23/08/2025 રવિવાર - હોમાતાત્મક લઘુરુદ્ર ( 5 યજમાન )

પાઠાત્મક સહ અભિષેકતામ્ક લઘુરુદ્ર સવારે 8:00 કલાકે આરંભ થશે તથા બપોરે 2:00 કલાકે પૂર્ણ થશે. ત્યારબાદ બપોરે ફળાહાર / રુચિ ભોજન ની વ્યવસ્થા રાખેલ છે . પાઠાત્મક સહ અભિષેકતામ્ક લઘુરુદ્ર ના કુલ યજમાન ( પાટલા ) - 27 યુગલ યજમાન

હોમાત્મક લઘુરુદ્ર સવારે 7.30 કલાકે આરંભ થશે તથા સાંજે 5.30 એ પુર્ણાહુતી થશે . ત્યારબાદ સાંજે ભોજન પ્રસાદ ની વ્યવસ્થા રાખેલ છે. જે લોકો પાઠાત્મક સહ અભિષેકતામ્ક લઘુરુદ્ર માં પૂજા માં ભાગ લીધેલ હશે એમને 2 પાસ નિઃશુલ્ક આપવામાં આવશે.

જેમાં યજમાન શ્રી એ માત્ર પોતાની રીતે શ્રી ગણેશ જી ની મૂર્તિ અને મહાદેવજી નું શિવલિંગ, પંચપાત્ર, તરભાણું, આચમની નેપકીન વિગીરે સાથે લાવવાના રહેશે ..

બાકી બધી પૂજા સામગ્રી ( વાસણ , આસાન , પાટલા , પૂજાપા ની સામગ્રી વગેરે ) શ્રી હળવદ ભવન ટ્રસ્ટ અને શ્રી હળવદ બ્રહ્મ સમાજ અમદાવાદ તરફ થી આપવામાં આવશે .

આ કાર્ય ક્રમ સમસ્ત બ્રાહ્મણ સમાજ માટે છે ( યજમાન પદે - હળવદ તથા હળવદ બહાર કોઈ પણ બ્રહ્મ બંધુ આવકાર્ય છે )

ઉપરોક્ત કાર્યક્રમ માં લાભ લેવા નીચે મુજબ શુલ્ક નક્કી કરેલ છે.
પાઠાત્મક લઘુરુદ્ર - 27 યુગલ યજમાન - 3100 /- ( 4 ભોજન પાસ ફ્રી )
હોમતમક લઘુરુદ્ર - 5 યજમાન - 15000/- ( 11 ભોજન પાસ ફ્રી )

યજમાન શ્રી ને વધુ પાસ ની જરૂરત અથવા અન્ય લોકો કાર્યકમ ભોજન પ્રસાદ લેવા ઇચ્છતા હોય તો 200/- ભેટ / સેવા પેટે અર્પણ કરી બીજા પાસ મેળવી શકશે .
ઉપરોક્ત કાર્યક્રમ માટે દાતાશ્રી આવકાર્ય છે .. આપનો સહકાર અમારી સેવા ..

જે લોકો 2500/- ભેટ આપવા ઇચ્છતા હોય એમને ૫ ભોજન પાસ તથા 5000/- ભેટ આપવા ઇચ્છતા હોય એમને 10 ભોજન પાસ નિ:શુલ્ક આપવા માં આવશે.

અમદાવાદ માં વસતા તમે હળવદ ના ભૂદેવો ને દર્શન નો લાભ જરૂર થી લેવો .. આવા બધા સાથે મળી ને પવિત્ર શ્રાવણ માસ માં મહાદેવ ની ભક્તિ માં લિન થાય સૌના કલ્યાણ ની કામના કરીએ ..

કાર્યક્રમ માં ભાગ લેવા માટે તથા ભોજન / પ્રસાદ પાસ લેવા માટે નીચે મુજબ ના સ્વયં સેવકો નો સંપર્ક કરવો :

1) શ્રી વિનય ભાઈ ત્રિવેદી - 9426369018
2) શ્રી પ્રકાશ ભાઈ રાવલ - 9904158355

આયોજક :
1) શ્રી ચિંતન ભાઈ જાની ( પ્રમુખ)- 9898144413
2) શ્રી રુદ્રદત્ત રાવલ ( મંત્રી )- 7874396969 તથા સમગ્ર ટ્રસ્ટીગણ
શ્રી હળવદ ભવન ટ્રસ્ટ અમદાવાદ
શ્રી હળવદ બ્રહ્મ સમાજ અમદાવાદ

🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩

3/08/2025

1) Chintan Jani
2) Pranavbhai Joshi
3) Bhaveshnhai jani
4) Hemaben Jani
5) Neetaben Dave
6) Anilaben Dave
7) Hansa Ben Dave
8) Kalpeshbhai Raval
9) Rajeshbhai R Shukla
10) Raina Mehta
11) Swati Nipun Dave
12) Vraj Trivedi
13) Renukaben Thakar
14) Rudradutt Raval
15) Prakash bhai raval
16) Prakash bhai raval relative
17) mukundrai Raval
18) Bhumi Shukla ( kishore bhai raval )
19) Bipin Bhai D Raval
20) Manshi gaurav trivedi
21) Anurag Acharya
22)Bhavik Dave
23) Pranav Naik
24) Pooja Ketan Bhatt
25) Udai Bhai Dave
26) Sirish bhai Tripathi
27) Yogesh Bhai Arvindbhai Acharya

23/08/2025 હોમાત્મક લઘુરુદ્ર

1) Kaushal Manoj Raval
2) Paresh Shukla ( sanat bhai )
3) Hasubhai Yagnik
4) Mayur P Mehta

મહાદેવ હર સાથે જણાવવાનું કે હવે માત્ર હોમાત્મક લઘુરુદ્ર ના 1 યજમાન નો જ સમાવેશ થાય એમ છે એટલે જેમને ધર્મ લાભ લેવાની ઇચ્છા હોય એ વેહલા તે પેહલા ના ધોરણે નોંધાવી દેશો.

શ્રી હળવદ બ્રહ્મ સમાજ - અમદાવાદ
શ્રી હળવદ ભવન ટ્રસ્ટ - અમદાવાદ
Halvad breaking Mojjlu halvad official હળવદ જંકશન Maru Halvad

આજ રોજ હળવદ ભવન ટ્રસ્ટ - હળવદ બ્રહ્મ સમાજ અમદાવાદ,  લાયન્સ ક્લબ ઓફ અમદાવાદ ફોર્ટ  અને જોધપુર હિલ અમદાવાદ   દ્વારા આયોજિત...
13/07/2025

આજ રોજ હળવદ ભવન ટ્રસ્ટ - હળવદ બ્રહ્મ સમાજ અમદાવાદ, લાયન્સ ક્લબ ઓફ અમદાવાદ ફોર્ટ અને જોધપુર હિલ અમદાવાદ દ્વારા આયોજિત ફ્રી સર્વ રોગ નિદાન કેમ્પ મા નીચે મુજબ લાભાર્થી એ સારવાર લીધેલ.

1) આંખ ની સારવાર અને હળવદ ભવન ટ્રસ્ટ દ્વારા નિ શુલ્ક ચશ્મા અને આંખ ના ટીપા આપવામા આવેલ - 241 લોકો

2) જનરલ ચેક અપ- 120 લોકો

3) ફ્રી થાયરોડ ટેસ્ટ- 50 લોકો

4) ફ્રી આયુર્વેદિક દવાઓ અને સારવાર- 250+ લોકો

5) રાહત દરે મેમો ગ્રાફી અને પેપટેસ્ટ - 12 લોકો

6) ડાયાબીટીસ ચેક અપ - 70 લોકો.

અમો આજ ના ઉદ્ઘાટક શ્રી જીતુભાઈ પટેલ ( ધારાસભ્ય- નારણપુરા ), અતિથિ વિશેષ શ્રી દેવાંગભાઇ દાણી ( સ્ટેન્ડિંગ કમીટી ચેરમેન અમ્યૂકો ) શ્રી નરેન્દ્રભાઈ પુરોહિત ( કન્વીનર-ભાજપા) નો એમની ખાસ ઉપસ્થિતિ અને સમાજ માટે સમય ફાળવવા માટે આભાર માનીએ છીએ.

સાથે સાથે આ તકે અમે બધા ડોક્ટર, જીસીએસ હોસ્પિટલ અને લાયન્સ ક્લબ ના ગિરીશ ભાઈ પટેલ, વિનોદભાઈ પટેલ, રાજેશ બારૈયા , ભરત શેઠ, પરાગ શાહ તેમજ બધા હોદેદારો નો આભાર માનીએ છીએ.

અને ખાસ અમારા સહયોગી એવા સ્વયં સેવકો, ટ્રસ્ટી મંડળ, કારોબારી સમિતિ અને દાતા શ્રી ઓ નો હૃદય પૂર્વક આભાર માનીએ છીએ.

ભવિષ્ય મા પણ આવો સહયોગ મળતો રહે એવી આશા.

લી. રૂદ્રદત્ત રાવલ
મંત્રી તથા ટ્રસ્ટી
હળવદ ભવન ટ્રસ્ટ અમદાવાદ

આદરણીય સભ્યશ્રીઓ, તારીખ 13-07-2025 રવિવાર ના રોજ હળવદ ભવન ટ્રસ્ટ અને લાયન્સ ક્લબ ઓફ અમદાવાદ જોધપૂર હિલ અને ફોર્ટ દ્વારા ...
11/07/2025

આદરણીય સભ્યશ્રીઓ, તારીખ 13-07-2025 રવિવાર ના રોજ હળવદ ભવન ટ્રસ્ટ અને લાયન્સ ક્લબ ઓફ અમદાવાદ જોધપૂર હિલ અને ફોર્ટ દ્વારા હળવદ ભવન હોલ સોલા અમદાવાદ ખાતે નિઃશુલ્ક મેડિકલ કેમ નું આયોજન કરેલ છે

સમય : સવારે ૯.૩૦ થી ૧૨.૩૦ તારીખ 13-07-2025 રવિવાર

ઉપરોક્ત કેમ્પ માં

 નિશુલ્ક આંખ ની તપાસ , નિશુલ્ક મોતિયા ના ઓપરેશન ( નેત્રમણી તથા ઓપરેશન)

 દાંત ની તપાસ તથા રાહત દરે દાંત ની સફાઈ તથા અન્ય ટ્રીટમેન્ટ.

 સાંધા ના તથા હાડકા ના રોગ ની તપાસ ( વધુ તપાસ ની જરૂર હોય એપોઇન્ટમેન્ટ દ્વારા વધુ સારવાર થશે )

 સ્ત્રીરોગ સંબંધિત સારવાર અને નિદાન

 ચામડી ના રોગો નું નિદાન

 થાયરોઈડ ટેસ્ટ વિના મૂલ્ય કરી આપવામાં આવશે

 આયુર્વેદિક ડોક્ટરશ્રીઓ દ્વારા તપાસ તથા દવાઓ મફત આપવામાં આવશે.

 હોમિયોપેથીક ઉપચાર તથા જરૂરી દવાઓ મફત આપવામાં આવશે

 ફિઝયોથેરાપી અને એક્યુપ્રેસર થેરાપી ફ્રી કરી આપવામાં આવશે

કેન્સર સંબંધી નિદાન અને સારવાર તથા માર્ગદર્શન

રક્તદાન શિબિર

 તથા અન્ય ..

આયોજક : શ્રી હળવદ ભવન ટ્રસ્ટ અને શ્રી હળવદ બ્રહ્મ સમાજ અમદાવાદ

ઉપરોક્ત કાર્યક્રમ સમાજ ને સ્વસ્થ અને નિરોગી રાખવા ના આશય થી યોજેલ છે જેથી સર્વે સભ્યો ને આ કાર્યક્રમ નો બહોળી સંખ્યા માં ભાગ લેવા તથા આ સેવા યજ્ઞ માં સહભાગી થવા નમ્ર વિનંતી છે .

Address

Ahmedabad

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when શ્રી હળવદ ભવન ટ્રસ્ટ - અમદાવાદ posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Organization

Send a message to શ્રી હળવદ ભવન ટ્રસ્ટ - અમદાવાદ:

Share