15/04/2026
साल (FIR): 2015
• फैसला: अप्रैल 2026
• मामला: ऑफिस में महिला सहकर्मी को घूरने का आरोप
बॉम्बे हाई कोर्ट का अहम फैसला: ऑफिस में महिला सहकर्मी के स्तन को घूरना 'ताक-झांक' का अपराध नहीं।
मुंबई, 15 अप्रैल 2026 — बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि कार्यालय में महिला सहकर्मी के शरीर या सीने को घूरना नैतिक रूप से गलत और असभ्य व्यवहार तो है, लेकिन भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354C के तहत ताक-झांक (voyeurism) का आपराधिक अपराध नहीं माना जा सकता।
न्यायमूर्ति अमित बोरकर की एकलपीठ ने 2015 में दर्ज एक FIR को रद्द करते हुए कहा, “आरोप केवल यह है कि आरोपी ने मीटिंग के दौरान महिला के सीने को घूरा। अनचाहा घूरना, भले ही सही माना जाए, धारा 354C के अर्थ में ताक-झांक नहीं है। कानून को उसके शाब्दिक शब्दों से आगे नहीं खींचा जा सकता।”
मामला क्या था?
यह मामला एक निजी बीमा कंपनी का है। आरोपी उस समय असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट के पद पर था। महिला शिकायतकर्ता (डिप्टी सेल्स मैनेजर) ने 2015 में बोरीवली पुलिस में FIR दर्ज कराई थी। आरोप था कि मीटिंग के दौरान आरोपी आंखों में संपर्क बनाने की बजाय महिला के सीने को घूरता था और अनुचित टिप्पणियां भी करता था।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ IPC धारा 354C (voyeurism) के तहत मामला दर्ज किया था। आरोपी ने हाई कोर्ट में FIR रद्द करने की याचिका दायर की।
कोर्ट ने क्या कहा?
न्यायमूर्ति बोरकर ने अपने फैसले में जोर दिया कि धारा 354C तब लागू होती है जब कोई व्यक्ति महिला को निजी गतिविधि करते समय देखे या रिकॉर्ड करे, जहां महिला को निजता की उम्मीद होती है (जैसे बाथरूम, अंडरवियर या यौन संबंधी गतिविधियां)। ऑफिस की मीटिंग में घूरना इस परिभाषा में नहीं आता।
कोर्ट ने आगे कहा - "ऐसा व्यवहार अनैतिक (morally wrong), असभ्य (indecent) और मिसकंडक्ट हो सकता है। लेकिन इसे क्रिमिनल अपराध बनाने के लिए कानून को अतिरिक्त खींचना उचित नहीं।"
FIR और आगे की कार्यवाही को रद्द कर दिया गया।
POSH एक्ट के तहत अलग प्रावधान
हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह voyeurism नहीं है, लेकिन ऐसे व्यवहार POSH Act 2013 (Sexual Harassment of Women at Workplace Act) के अंतर्गत यौन उत्पीड़न माना जा सकता है। POSH में staring/leering को unwelcome non-verbal conduct of sexual nature माना जाता है, जो काम के माहौल को असहज या hostile बना दे।
कंपनी को Internal Complaints Committee (ICC) के माध्यम से जांच करनी चाहिए और यदि साबित हो तो अनुशासनात्मक कार्रवाई (चेतावनी, सस्पेंशन या बर्खास्तगी) हो सकती है।
विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
कई कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला कानून की सीमाओं को स्पष्ट करता है। एक वकील ने कहा, “अनचाहा घूरना निश्चित रूप से गलत है और workplace में इसे बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए, लेकिन हर offensive behavior को criminal offence नहीं बनाया जा सकता। POSH जैसे सिविल और प्रशासनिक तंत्रों का इस्तेमाल ज्यादा प्रभावी है।”
क्या कहते हैं कानून के जानकार?
धारा 354C: निजी गतिविधि में ताक-झांक या रिकॉर्डिंग — 1 से 3 साल तक की सजा।
POSH Act: workplace sexual harassment की व्यापक परिभाषा, जिसमें staring शामिल।
अन्य IPC धाराएं (354A, 509, 354) भी गंभीर मामलों में लागू हो सकती हैं, लेकिन context, repetition और intent पर निर्भर करता है।
निष्कर्ष: बॉम्बे हाई कोर्ट का यह फैसला याद दिलाता है कि नैतिकता और कानून में फर्क है। सम्मानजनक कार्यस्थल बनाने की जिम्मेदारी सिर्फ कानून पर नहीं, बल्कि हर कर्मचारी और कंपनी प्रबंधन पर भी है। महिलाओं को असहज महसूस होने पर ICC या HR में शिकायत करने का अधिकार है, जबकि पुरुषों को प्रोफेशनल और सम्मानजनक व्यवहार रखना चाहिए।
(यह न्यूज आर्टिकल बॉम्बे हाई कोर्ट के हालिया फैसले पर आधारित है। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स — NDTV, Times of India, Indian Express, LiveLaw आदि — से संकलित जानकारी पर लिखा गया है।)