01/07/2026
उठ, आगे बढ़!
नदियों सा बहना सीख ज़रा,
चट्टानों से टकराना सीख।
जो राह में आएँ मुश्किलें,
उनसे भी मुस्कुराना सीख।
ये रात अगर अंधियरी है,
तो भोर भी होना निश्चित है।
तू खुद में एक सवेरा है,
यह बात माननी निश्चित है।
पंखों से नहीं, हौसलों से,
ऊंची उड़ान हुआ करती है।
जो डर के आगे झुकते नहीं,
दुनिया उनकी दीवानी होती है।
मत बैठ थककर ऐ मुसाफ़िर,
अभी तो पूरा आसमान बाकी है।
ये तो बस एक शुरुआत है,
तेरी असली उड़ान अभी बाकी है।
#स्वरचित