07/03/2025
*हर साल हज मे तकलीफ और मशक्कत होती ही है*
.✍️ तकलीफ पहले भी होती थी लेकिन बताने के लिए व्हाट्सप्प नही था,
यह फरिज़ा मेहनत का ही है..
किसी भी दुनिया की सरकार के बस में नही है कि इतने बड़े मजमे को 6 बार शिफ्टिंग करा सके..
1.मक्का से मीना
2.मीना से अराफात
3.अराफात से मुज्दल्फा
4.मुज्दल्फा से मीना
5.मीना से मक्का
6.मक्का से मीना..
इतनी Advance Technology सब fail...
अल्लाह वालों ने पैदल हज किए, पैदल चलने वालों की जीत है,
पहले के दौर मे No Elecrtricity ..
No AC..
No washing Machine
No fan
No Lunch dinner
No building
उस दौर में ऊंट पर, और पैदल हज होता था
सामान की पोटलियाँ ऊँटों पर रखकर हाजी-हज्जन एहराम
की हालत में जद्दा से मक्का जाते थे,
कैसे किया लोगो ने...?
अभी तो फिर भी बहुत सहूलियत है...
आज सहूलियत , luxurious की आदत है... इसलिए इंसान उम्मीद करता है "इन्तेज़ाम अच्छा होना चाहिए"
हदीस का खुलासा
*हज अफज़ल जिहाद है....*
जिहाद मतलब मेहनत, मशक्कत, तकलीफ यह कोई भी सरकार खत्म नहीं करा सकती...
अल्लाह *इसी तकलीफ* पर हाजी को गुनाहों से ऐसा पाक साफ करता है, जैसे आज ही माँ के पेट से पैदा हुआ हो,
ऐसी तकलीफ पर ही
हाजी अपने गुनाहों से पाक साफ होता है...
हाजी की दुआ ऐसे ही क़ुबूल नही होती...
धूप, गर्मी, थकान, पैदल
टेंट का नहीं मिलना,
भूख की शिद्दत वगैरह
तभी तो आंसू निकलते है
वर्ना एयर कंडीशनर नर्म बिस्तरों पर कहाँ आंसू निकलते है...?
अल्लाह को 3 चीज़े पसन्द है
*शुक्र करने वाला दिल*
*ज़िक करने वाली ज़ुबान*
*और*
*मशक्कत बर्दाश्त करने* *वाला जिस्म*
हज के एहराम की नियत करते वक़्त हम क्या कहते हैं
*आसान फरमा*
*कुबूल फरमा*
लिहाज़ा...
* सफर की कमियों और खामियों की शिकायत ना करे, शिकायत इंसान को शिर्क तक पहुंचाती है..
* जो भी तकलीफ़ अगर आयी है तो इसे अल्लाह की तरफ से समझे....
जो भी हालात आए
अल्लाह ने हमे पाक-साफ कर दिया, इस पर शुक्र अदा करें,
आने के बाद 40 दिन हमारी दुआए कुबूल होंगी,
इस दुआ को अपने लिए.. उम्मत के लिए इस्तेमाल करें
अल्लाह सबका हज कुबूल करे - आमीन
*(ऑल इण्डिया हज वेलफेयर सोसायटी)*