07/05/2026
राजनीति में उतरने से पहले सर्वप्रथम अपने घर, परिवार, रिश्तेदार और समाज का समर्थन होना प्रत्याशी की सबसे बड़ी ताकत होती है, किंतु कुछ हद से ज्यादा नालायक प्रत्याशी अन्य टुच्चे मुच्चे, कमीशनखोर, लुटेरों, हवाबाज़, किरायेदार टाईप लोगों को बाप मानकर अपनों को ही नजरअंदाज कर देते हैं, फिर नतीजा भी ऐसा ही आता है,लाखों रुपए में टिकट, करोड़ो चुनाव प्रचार में, और अंत चुनाव मे हार | दो चार अपने, कुछ बिना किसी लालच आपना समझ कर इनको सपोर्ट और उनके चुनाव में खुद का खर्च करें, उनको भी ये नालायक प्रत्याशी अपने लुटेरे चापलूसी चमचो की झूठी बातों मे फस इग्नोर करें, और फिर बाद मे उल्टा समाज को ही टारगेट करे, की समाज अपनों ने साथ नहीं दिया,
तब यही भडास बाकि सबके मन मे भी चलती है तुने जिनको बाप बनाया था, उन्होंने तुझे बिना लूटे तेरे लिए क्या खर्च किया, और तेरे लिए कितनी वोट इकट्ठी की, घर परिवार रिश्तेदार समाज को टारगेट करने से पहले खुद के अंदर झांक कर देखना चाहिए, कि तुमने उन सबके लिए केवल इग्नोर और अपमान के
अलावा आज तक क्या किया?
खुद पर्सनल चुनाव प्रचार राजनीति के लिए तुम भले ही करोड़ों खर्च कर दो, किंतु समाज हित के लिए तुम्हारी ₹10 की औकात नहीं... और फिर बात करते हैं समाज ने साथ नहीं दिया