18/10/2026
मैं अपनी गाड़ी में बैठा हुआ था, तभी एक छोटी सी मासूम बच्ची मेरे पास आई। उसकी नन्हीं आँखों में एक अजीब सी लाचारी और उदासी थी। उसने बेहद मासूमियत और कांपती हुई आवाज़ में कहा— "भैया! बहुत भूख लगी है, कुछ खाने को दे दो... मैं बहुत गरीब हूँ, मेरे पास तो रात को सोने के लिए भी कोई छत या बिछौना नहीं है।"
उसकी ये बातें सुनते ही मेरा कलेजा कांप उठा। जिस उम्र में बच्चों को हाथों में किताबें थमाकर स्कूल जाना चाहिए, अपने सपनों को जीना चाहिए, उस उम्र में यह बच्ची सड़कों पर माँग-माँग कर अपना पेट भरने को मजबूर है।
मुझसे उसका यह दर्द और आँख में छलाछला आया आँसू देखा नहीं गया। मैंने तुरंत उसके लिए खाने का इंतज़ाम किया। जब उसने वो खाना खाया और उसके चेहरे पर जो थोड़ी सी तसल्ली और सुकून दिखा, उससे मेरा मन तो भर आया, लेकिन दिल में एक गहरा सवाल छोड़ गया—
ईश्वर से बस यही दुआ है कि इस दुनिया में कोई भी बच्चा कभी भूखा न सोए और हर मासूम को उसका हक़ और बचपन ज़रूर मिले। अगर आप कभी किसी ऐसे ज़रूरतमंद बच्चे को देखें, तो अपनी क्षमता अनुसार उसकी मदद ज़रूर करें। आपकी एक छोटी सी मदद किसी का पूरा दिन बदल सकती है