14/06/2026
अतिरिक्त कक्षाओं और बरामदों में चल रहे 127 स्कूल, नए भवनों का इंतजार जारी
"जहां बच्चों को सुरक्षित और सम्मानजनक शिक्षण वातावरण नहीं मिलता, वहां शिक्षा का अधिकार अधूरा रह जाता है."
#बाराबंकी जिले में परिषदीय विद्यालयों के भवनों की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है. पिछले पांच वर्षों में जर्जर घोषित 277 विद्यालय भवनों को ध्वस्त किए जाने के बावजूद 127 विद्यालय आज भी अपने स्थायी भवनों की प्रतीक्षा कर रहे हैं. इन विद्यालयों में बच्चों की पढ़ाई अतिरिक्त कक्षाओं, बरामदों अथवा अस्थायी व्यवस्थाओं के सहारे संचालित की जा रही है, जिससे शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं.
समाचार के अनुसार वर्ष 2021 से 2026 के बीच सुरक्षा मानकों के आधार पर जिले में 277 जर्जर विद्यालय भवनों को गिराया गया था. इनमें से 150 विद्यालयों को नए भवन मिल चुके हैं, जहां नियमित शिक्षण कार्य प्रारंभ हो गया है. हालांकि शेष 127 विद्यालय अब भी पर्याप्त आधारभूत सुविधाओं के अभाव में संचालित हो रहे हैं.
रिपोर्ट के अनुसार इन विद्यालयों में से 119 स्कूलों के नए भवन निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है. बेसिक शिक्षा विभाग का कहना है कि बजट आवंटित होते ही निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा. लेकिन इस बार बजट जारी करने के नियमों में हुए बदलाव और छात्र संख्या से जुड़ी शर्तों के कारण कई प्रस्ताव लंबित हैं. यदि किसी विद्यालय में निर्धारित न्यूनतम छात्र संख्या नहीं है तो नए भवन के लिए बजट स्वीकृति में कठिनाई आ रही है.
समाचार में यह भी बताया गया है कि सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र सूरतगंज ब्लॉक है, जहां 23 विद्यालय भवनों का निर्माण अभी शेष है. इसके अलावा दरियाबाद और हैदरगढ़ में 13-13, मसौली और सिद्धौर में 11-11 तथा अन्य ब्लॉकों में भी कई विद्यालय नए भवनों की प्रतीक्षा कर रहे हैं. जर्जर भवनों के ध्वस्तीकरण के बाद बच्चों को कई वर्षों से अस्थायी व्यवस्थाओं में पढ़ाई करनी पड़ रही है.
प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ़ पेरेंट्स अवेयरनेस (PAPA NGO) का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए सुरक्षित और पर्याप्त विद्यालय भवन अनिवार्य हैं. बच्चों को बरामदों, अस्थायी कमरों या अपर्याप्त सुविधाओं में पढ़ाना शिक्षा के अधिकार की भावना के अनुरूप नहीं है. सरकार को भवन निर्माण प्रस्तावों की स्वीकृति और बजट आवंटन प्रक्रिया में तेजी लानी चाहिए, ताकि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, सुविधायुक्त और सम्मानजनक शैक्षणिक वातावरण मिल सके.
दीपक सिंह सरीन, राष्ट्रीय संयोजक, प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ़ पेरेंट्स अवेयरनेस (PAPA NGO)
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