PAPA NGO - Progressive Association of Parents Awareness

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अतिरिक्त कक्षाओं और बरामदों में चल रहे 127 स्कूल, नए भवनों का इंतजार जारी"जहां बच्चों को सुरक्षित और सम्मानजनक शिक्षण वा...
14/06/2026

अतिरिक्त कक्षाओं और बरामदों में चल रहे 127 स्कूल, नए भवनों का इंतजार जारी

"जहां बच्चों को सुरक्षित और सम्मानजनक शिक्षण वातावरण नहीं मिलता, वहां शिक्षा का अधिकार अधूरा रह जाता है."

#बाराबंकी जिले में परिषदीय विद्यालयों के भवनों की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है. पिछले पांच वर्षों में जर्जर घोषित 277 विद्यालय भवनों को ध्वस्त किए जाने के बावजूद 127 विद्यालय आज भी अपने स्थायी भवनों की प्रतीक्षा कर रहे हैं. इन विद्यालयों में बच्चों की पढ़ाई अतिरिक्त कक्षाओं, बरामदों अथवा अस्थायी व्यवस्थाओं के सहारे संचालित की जा रही है, जिससे शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं.

समाचार के अनुसार वर्ष 2021 से 2026 के बीच सुरक्षा मानकों के आधार पर जिले में 277 जर्जर विद्यालय भवनों को गिराया गया था. इनमें से 150 विद्यालयों को नए भवन मिल चुके हैं, जहां नियमित शिक्षण कार्य प्रारंभ हो गया है. हालांकि शेष 127 विद्यालय अब भी पर्याप्त आधारभूत सुविधाओं के अभाव में संचालित हो रहे हैं.

रिपोर्ट के अनुसार इन विद्यालयों में से 119 स्कूलों के नए भवन निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है. बेसिक शिक्षा विभाग का कहना है कि बजट आवंटित होते ही निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा. लेकिन इस बार बजट जारी करने के नियमों में हुए बदलाव और छात्र संख्या से जुड़ी शर्तों के कारण कई प्रस्ताव लंबित हैं. यदि किसी विद्यालय में निर्धारित न्यूनतम छात्र संख्या नहीं है तो नए भवन के लिए बजट स्वीकृति में कठिनाई आ रही है.

समाचार में यह भी बताया गया है कि सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र सूरतगंज ब्लॉक है, जहां 23 विद्यालय भवनों का निर्माण अभी शेष है. इसके अलावा दरियाबाद और हैदरगढ़ में 13-13, मसौली और सिद्धौर में 11-11 तथा अन्य ब्लॉकों में भी कई विद्यालय नए भवनों की प्रतीक्षा कर रहे हैं. जर्जर भवनों के ध्वस्तीकरण के बाद बच्चों को कई वर्षों से अस्थायी व्यवस्थाओं में पढ़ाई करनी पड़ रही है.

प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ़ पेरेंट्स अवेयरनेस (PAPA NGO) का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए सुरक्षित और पर्याप्त विद्यालय भवन अनिवार्य हैं. बच्चों को बरामदों, अस्थायी कमरों या अपर्याप्त सुविधाओं में पढ़ाना शिक्षा के अधिकार की भावना के अनुरूप नहीं है. सरकार को भवन निर्माण प्रस्तावों की स्वीकृति और बजट आवंटन प्रक्रिया में तेजी लानी चाहिए, ताकि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, सुविधायुक्त और सम्मानजनक शैक्षणिक वातावरण मिल सके.

दीपक सिंह सरीन, राष्ट्रीय संयोजक, प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ़ पेरेंट्स अवेयरनेस (PAPA NGO)

#बाराबंकी

अब बेसिक स्कूलों में खेल प्रतिभाओं को मिलेगा मंच"किताबों से ज्ञान मिलता है, लेकिन खेल, कला और रचनात्मक गतिविधियां बच्चों...
14/06/2026

अब बेसिक स्कूलों में खेल प्रतिभाओं को मिलेगा मंच

"किताबों से ज्ञान मिलता है, लेकिन खेल, कला और रचनात्मक गतिविधियां बच्चों के व्यक्तित्व को पूर्णता प्रदान करती हैं."

#इटावा जिले के बेसिक विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए खेल, सांस्कृतिक और अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है. शासन ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं और गतिविधियों के आयोजन हेतु बजट जारी कर दिया है. इससे सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले हजारों बच्चों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा.

समाचार के अनुसार खेलकूद, बाल कल्याण तथा अन्य शैक्षिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए जिले को कुल 2.07 लाख रुपये का बजट आवंटित किया गया है. जिले में 1484 परिषदीय विद्यालय हैं, जिनमें 90 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं. इस बजट के माध्यम से विद्यालय, ब्लॉक, जनपद और मंडल स्तर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन कराया जाएगा.

रिपोर्ट के अनुसार जिले के सभी आठ ब्लॉकों और एक नगर क्षेत्र के लिए 72 हजार रुपये तथा जनपद स्तरीय प्रतियोगिताओं के लिए 1.35 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है. प्रतियोगिताओं में केवल खेलकूद ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, बौद्धिक और रचनात्मक गतिविधियों को भी शामिल किया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों को अपनी बहुआयामी प्रतिभाओं को प्रदर्शित करने का अवसर प्राप्त होगा.

शिक्षा विभाग का मानना है कि नियमित प्रतियोगिताओं के आयोजन से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास बढ़ेगा, टीम भावना विकसित होगी और विद्यालयों में खेल एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को नई गति मिलेगी. विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को भी अपनी खेल और रचनात्मक क्षमताओं को प्रदर्शित करने का मंच उपलब्ध होगा.

प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ़ पेरेंट्स अवेयरनेस (PAPA NGO) का मानना है कि शिक्षा केवल परीक्षा और अंकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए. खेल, कला, साहित्य, विज्ञान और सांस्कृतिक गतिविधियां बच्चों के समग्र विकास का आधार हैं. सरकार और शिक्षा विभाग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसे कार्यक्रम केवल बजट आवंटन तक सीमित न रहें, बल्कि प्रत्येक विद्यालय में प्रभावी रूप से आयोजित हों ताकि ग्रामीण और वंचित वर्ग के बच्चों को भी समान अवसर मिल सकें.

दीपक सिंह सरीन, राष्ट्रीय संयोजक, प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ़ पेरेंट्स अवेयरनेस (PAPA NGO)

#इटावा

छात्रा की फोटो खींचने के आरोप पर कॉलेज में बवाल, जांच के घेरे में शिक्षक"शिक्षा का वातावरण तभी सुरक्षित माना जाएगा, जब व...
14/06/2026

छात्रा की फोटो खींचने के आरोप पर कॉलेज में बवाल, जांच के घेरे में शिक्षक

"शिक्षा का वातावरण तभी सुरक्षित माना जाएगा, जब विद्यार्थियों की गरिमा, निजता और सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए."

#नईदिल्ली स्थित दिल्ली विश्वविद्यालय के सत्यवती मॉर्निंग कॉलेज में एक छात्रा की बिना अनुमति फोटो खींचे जाने के आरोप को लेकर विवाद खड़ा हो गया. घटना के बाद छात्राओं ने कॉलेज परिसर में विरोध प्रदर्शन किया और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई. आरोप एक शिक्षक पर लगाए गए हैं, जिसके बाद कॉलेज प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित शिक्षक का मोबाइल फोन जांच के लिए अपने कब्जे में ले लिया है.

समाचार के अनुसार परीक्षा देने आई एक छात्रा ने आरोप लगाया कि कॉलेज के एक शिक्षक ने उसकी जानकारी और सहमति के बिना मोबाइल फोन से उसकी तस्वीर खींच ली. छात्रा की एक सहपाठी ने शिक्षक को मोबाइल का उपयोग करते हुए देखा, जिसके बाद संदेह होने पर छात्रा को इसकी जानकारी दी गई. छात्रा और अन्य छात्राओं ने शिक्षक से स्पष्टीकरण मांगा तथा मोबाइल फोन दिखाने का अनुरोध किया, लेकिन कथित रूप से शिक्षक ने ऐसा करने से इनकार कर दिया. इसके बाद छात्राओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया.

रिपोर्ट के अनुसार कॉलेज प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रकरण को आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. साथ ही सीसीटीवी फुटेज और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों की जांच भी की जा रही है. कॉलेज प्रशासन का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को दोषी मानने से पहले पूरी जांच प्रक्रिया पूरी की जाएगी, लेकिन यदि कोई अनुचित आचरण या अनियमितता सामने आती है तो कठोर कार्रवाई की जाएगी.

समाचार में यह भी उल्लेख है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों में छात्राओं और महिला कर्मचारियों से जुड़े उत्पीड़न अथवा अनुचित व्यवहार के मामले पूर्व में भी सामने आते रहे हैं. इसी कारण छात्र संगठनों और विद्यार्थियों ने इस मामले में पारदर्शी तथा समयबद्ध जांच की मांग की है, ताकि विद्यार्थियों का विश्वास बना रहे.

प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ़ पेरेंट्स अवेयरनेस (PAPA NGO) का मानना है कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान में छात्राओं की निजता, सुरक्षा और सम्मान से जुड़ी शिकायतों को अत्यंत गंभीरता से लिया जाना चाहिए. साथ ही किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले निष्पक्ष, पारदर्शी और साक्ष्य आधारित जांच आवश्यक है. शिक्षा संस्थानों में ऐसी मजबूत शिकायत निवारण व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे विद्यार्थी बिना भय के अपनी बात रख सकें और न्यायसंगत कार्रवाई सुनिश्चित हो सके.

दीपक सिंह सरीन, राष्ट्रीय संयोजक, प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ़ पेरेंट्स अवेयरनेस (PAPA NGO)

#नईदिल्ली

पीजी कॉलेज की चौथी मंजिल पर लगी आग, समय रहते निकाली गईं छात्राएं"शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा केवल नियमों का विषय नहीं...
14/06/2026

पीजी कॉलेज की चौथी मंजिल पर लगी आग, समय रहते निकाली गईं छात्राएं

"शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा केवल नियमों का विषय नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के जीवन और भविष्य की रक्षा का दायित्व भी है."

#नईदिल्ली के उत्तरी दिल्ली स्थित सब्जी मंडी-घंटाघर क्षेत्र में एक गर्ल्स पीजी की चौथी मंजिल पर आग लगने की घटना सामने आई है. गुरुवार शाम अचानक आग लगने से क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया. हालांकि आग की लपटें उठते ही छात्राओं को तुरंत सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया.

समाचार के अनुसार शाम करीब 4:39 बजे दमकल विभाग को आग लगने की सूचना प्राप्त हुई. सूचना मिलते ही दमकल विभाग की चार गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया. संकरे रास्तों के कारण दमकल वाहनों को मुख्य सड़क पर खड़ा करना पड़ा, जिसके बाद लगभग 150 मीटर लंबी पाइपलाइन बिछाकर आग पर काबू पाने का प्रयास किया गया.

रिपोर्ट के अनुसार दमकल कर्मियों ने करीब ढाई घंटे की मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह नियंत्रण प्राप्त कर लिया. प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट को आग लगने का संभावित कारण माना जा रहा है. राहत की बात यह रही कि सभी छात्राओं को समय रहते बाहर निकाल लिया गया और किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है.

इसी दौरान मायापुरी औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 स्थित एक फैक्ट्री में भी भीषण आग लगने की घटना सामने आई. वहां आग बुझाने के लिए 18 दमकल वाहनों को लगाया गया और लंबे प्रयास के बाद आग पर काबू पाया गया.

प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ़ पेरेंट्स अवेयरनेस (PAPA NGO) का मानना है कि छात्रावासों, पीजी आवासों, विद्यालयों और महाविद्यालयों में अग्नि सुरक्षा मानकों का कठोरता से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए. नियमित फायर ऑडिट, आपातकालीन निकासी अभ्यास, विद्युत व्यवस्था की समय-समय पर जांच तथा सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता अनिवार्य होनी चाहिए, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहे.

दीपक सिंह सरीन, राष्ट्रीय संयोजक, प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ़ पेरेंट्स अवेयरनेस (PAPA NGO)

#नईदिल्ली

ओबीसी का कटऑफ अंक सामान्य वर्ग से भी अधिक, पीसीएस-2024 परिणाम ने खींचा ध्यान"प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता केवल आरक्षण य...
14/06/2026

ओबीसी का कटऑफ अंक सामान्य वर्ग से भी अधिक, पीसीएस-2024 परिणाम ने खींचा ध्यान

"प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता केवल आरक्षण या श्रेणी से नहीं, बल्कि तैयारी की गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धा की तीव्रता से तय होती है."

#प्रयागराज में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) द्वारा पीसीएस-2024 परीक्षा का अंतिम परिणाम और कटऑफ जारी किए जाने के बाद एक दिलचस्प तथ्य सामने आया है. कई पदों पर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का अंतिम चयन कटऑफ सामान्य वर्ग से अधिक रहा, जिसने अभ्यर्थियों और प्रतियोगी परीक्षा विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित किया है.

समाचार के अनुसार पीसीएस-2024 प्रारंभिक परीक्षा में सामान्य वर्ग का कटऑफ 101 अंक तथा ओबीसी वर्ग का 102 अंक रहा. वहीं अनुसूचित जाति (एससी) के लिए 85 अंक, अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए 70 अंक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए 100 अंक का कटऑफ निर्धारित किया गया. महिला अभ्यर्थियों का कटऑफ 98 अंक दर्ज किया गया.

रिपोर्ट के अनुसार मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार के बाद अंतिम चयन सूची में भी कई पदों पर ओबीसी वर्ग का चयन अंक सामान्य वर्ग से अधिक रहा. डिप्टी कलेक्टर के 37 पदों पर सामान्य वर्ग का न्यूनतम चयनित अंक 862 रहा, जबकि ओबीसी वर्ग में यह 893 अंक तक पहुंच गया. इसी प्रकार पुलिस उपाधीक्षक (सीओ) के पदों पर सामान्य वर्ग का अंतिम चयन 886 अंक तक गया, जबकि ओबीसी वर्ग में न्यूनतम चयनित अंक 874 दर्ज किया गया.

आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार विभिन्न पदों के लिए कटऑफ और चयन अंक अलग-अलग रहे. नायब तहसीलदार, सहायक आयुक्त, वाणिज्य कर अधिकारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी और अन्य प्रमुख प्रशासनिक पदों के लिए भी चयनित अभ्यर्थियों के अंक काफी ऊंचे रहे, जो प्रतियोगिता के बढ़ते स्तर को दर्शाते हैं.

यूपीपीएससी ने अभ्यर्थियों को 15 जून तक अपनी वेबसाइट से प्राप्तांक और कटऑफ संबंधी जानकारी डाउनलोड करने की सुविधा उपलब्ध कराई है. इसके बाद सत्यापन प्रक्रिया के लिए पंजीकृत मोबाइल नंबर पर ओटीपी भेजा जाएगा, जिसके माध्यम से अभ्यर्थी अपने अंक और अन्य विवरण प्राप्त कर सकेंगे.

प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ़ पेरेंट्स अवेयरनेस (PAPA NGO) का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं के परिणामों का विश्लेषण करते समय केवल कटऑफ को देखकर निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए. विभिन्न श्रेणियों में अभ्यर्थियों की संख्या, पदों का आरक्षण, मेरिट की स्थिति और चयन प्रक्रिया की संरचना भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. विद्यार्थियों को कटऑफ की तुलना में अपनी तैयारी की गुणवत्ता, विषय ज्ञान और निरंतर अभ्यास पर अधिक ध्यान देना चाहिए.

दीपक सिंह सरीन, राष्ट्रीय संयोजक, प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ़ पेरेंट्स अवेयरनेस (PAPA NGO)

#प्रयागराज

कॉलेजों की लापरवाही से अटका परिणाम, प्रयोगात्मक परीक्षा के अंक दर्ज करने की अंतिम तिथि फिर बढ़ी"जब विद्यार्थी परीक्षा दे...
14/06/2026

कॉलेजों की लापरवाही से अटका परिणाम, प्रयोगात्मक परीक्षा के अंक दर्ज करने की अंतिम तिथि फिर बढ़ी

"जब विद्यार्थी परीक्षा देकर अपना दायित्व पूरा कर चुके हों, तब परिणाम में देरी की जिम्मेदारी व्यवस्था और संस्थानों की बन जाती है."

#आगरा स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों की लापरवाही के कारण हजारों विद्यार्थियों का परीक्षा परिणाम प्रभावित होने की स्थिति उत्पन्न हो गई है. विश्वविद्यालय प्रशासन को प्रयोगात्मक परीक्षाओं के अंक अपलोड करने की अंतिम तिथि एक बार फिर बढ़ानी पड़ी है, क्योंकि अनेक कॉलेज निर्धारित समय सीमा के भीतर अंक दर्ज नहीं कर सके.

समाचार के अनुसार विश्वविद्यालय ने पहले प्रयोगात्मक परीक्षाओं के अंक ऑनलाइन दर्ज करने की अंतिम तिथि 10 जून निर्धारित की थी. इसके बावजूद बड़ी संख्या में महाविद्यालयों ने छात्रों के अंक पोर्टल पर अपलोड नहीं किए. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने अंतिम तिथि बढ़ाकर 20 जून कर दी है.

रिपोर्ट के अनुसार विश्वविद्यालय की स्नातक और परास्नातक परीक्षाएं 23 मई को समाप्त हो चुकी हैं तथा लिखित परीक्षाओं का मूल्यांकन कार्य भी पूरा हो चुका है. इसके बावजूद परिणाम जारी नहीं हो पा रहे हैं क्योंकि कॉलेजों द्वारा प्रयोगात्मक परीक्षाओं के अंक समय पर उपलब्ध नहीं कराए गए हैं. विश्वविद्यालय प्रशासन के बार-बार निर्देश देने के बाद भी करीब 150 महाविद्यालयों ने अंक अपलोड नहीं किए हैं.

विश्वविद्यालय ने अब स्पष्ट चेतावनी दी है कि 20 जून तक भी अंक दर्ज नहीं करने वाले महाविद्यालयों पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया जाएगा. परीक्षा नियंत्रक डॉ. ओमप्रकाश के अनुसार बीए, बीएससी, बीकॉम सहित विभिन्न स्नातक और परास्नातक पाठ्यक्रमों के द्वितीय, चतुर्थ और षष्ठम सेमेस्टर के प्रयोगात्मक अंकों को कॉलेजों की लॉगिन आईडी के माध्यम से ऑनलाइन अपलोड किया जाना है.

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि परिणाम जारी करने में हो रही देरी का सबसे बड़ा कारण कॉलेजों द्वारा समय पर अंक अपलोड न करना है. यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर यह कार्य पूरा हो जाता है तो विद्यार्थियों को समय पर परिणाम मिल सकेंगे और उनकी आगे की प्रवेश तथा रोजगार संबंधी प्रक्रियाएं प्रभावित नहीं होंगी.

प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ़ पेरेंट्स अवेयरनेस (PAPA NGO) का मानना है कि विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक लापरवाही स्वीकार नहीं की जानी चाहिए. परीक्षा परिणाम में देरी का सीधा प्रभाव छात्रों के उच्च शिक्षा प्रवेश, छात्रवृत्ति, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार अवसरों पर पड़ता है. विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को जवाबदेह बनाते हुए ऐसी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए जिसमें छात्रों को संस्थागत लापरवाही का खामियाजा न भुगतना पड़े.

दीपक सिंह सरीन, राष्ट्रीय संयोजक, प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ़ पेरेंट्स अवेयरनेस (PAPA NGO)

#आगरा

बड़ी ख़बर..हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, निजी स्कूलों के शिक्षकों को भी मिलेगा चाइल्ड केयर लीव का अधिकार"शिक्षा केवल कक्षा तक ...
11/06/2026

बड़ी ख़बर..हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, निजी स्कूलों के शिक्षकों को भी मिलेगा चाइल्ड केयर लीव का अधिकार

"शिक्षा केवल कक्षा तक सीमित नहीं होती. एक शिक्षक भी अभिभावक होता है और परिवार की जिम्मेदारियों का सम्मान किसी भी संवेदनशील समाज की पहचान है."

#नईदिल्ली से आई एक महत्वपूर्ण खबर में दिल्ली उच्च न्यायालय ने निजी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के अधिकारों को लेकर ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि सरकारी स्कूलों की तरह निजी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को भी अपने बच्चों की देखभाल के लिए चाइल्ड केयर लीव (सीसीएल) प्राप्त करने का अधिकार है. यह निर्णय देशभर के निजी विद्यालयों में कार्यरत हजारों शिक्षकों के लिए राहत लेकर आया है.

समाचार के अनुसार मामला एक निजी विद्यालय की शिक्षिका से जुड़ा था, जिन्होंने अपने 12वीं कक्षा में अध्ययनरत पुत्र के मानसिक स्वास्थ्य और देखभाल के लिए एक माह के अवकाश की मांग की थी. शिक्षिका का कहना था कि उनका पुत्र मानसिक दबाव से गुजर रहा है और उसे इस समय माता की देखभाल की आवश्यकता है. हालांकि विद्यालय प्रबंधन ने ऐसा कोई प्रावधान न होने का हवाला देकर अवकाश देने से इनकार कर दिया था.

इसके बाद शिक्षिका ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और लगभग एक वर्ष तक कानूनी लड़ाई लड़ी. मामले की सुनवाई के बाद दिल्ली उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने एकलपीठ के पूर्व निर्णय को निरस्त करते हुए शिक्षिका के पक्ष में फैसला सुनाया. न्यायालय ने कहा कि बच्चों की देखभाल के लिए दिया जाने वाला अवकाश कोई विशेष सुविधा नहीं, बल्कि कर्मचारी का वैध अधिकार है.

अदालत ने अपने फैसले में दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम, 1973 की धारा 10 का उल्लेख करते हुए कहा कि निजी विद्यालयों के कर्मचारियों को वेतन, भत्ते, चिकित्सा सुविधाओं, पेंशन और अन्य सेवा लाभों के मामले में सरकारी विद्यालयों के कर्मचारियों के समान अधिकार प्राप्त हैं. ऐसे में चाइल्ड केयर लीव से उन्हें वंचित नहीं किया जा सकता.

न्यायालय ने यह भी कहा कि बच्चे के हित, स्वास्थ्य और मानसिक विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए. यदि किसी बच्चे को विशेष परिस्थितियों में माता-पिता की आवश्यकता है तो नियोक्ता को संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए. यह फैसला शिक्षकों के पारिवारिक अधिकारों और बच्चों के हितों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ़ पेरेंट्स अवेयरनेस (PAPA NGO) का मानना है कि शिक्षा व्यवस्था में कार्यरत शिक्षकों को केवल कर्मचारी नहीं, बल्कि समाज निर्माता के रूप में देखा जाना चाहिए. यदि एक शिक्षक अपने बच्चे की देखभाल के लिए अवकाश मांगता है तो उसे संवेदनशीलता के साथ देखा जाना चाहिए. बच्चों का मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य सर्वोपरि है तथा अभिभावकों और शिक्षकों के पारिवारिक अधिकारों की रक्षा एक स्वस्थ और मानवीय समाज की आधारशिला है.

दीपक सिंह सरीन, राष्ट्रीय संयोजक, प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ़ पेरेंट्स अवेयरनेस (PAPA NGO)

#नईदिल्ली

आईजीडीटीयूडब्ल्यू ने खोले प्रवेश के द्वार, एमएससी, एमटेक और पीएचडी कार्यक्रमों में आवेदन शुरू"उच्च शिक्षा केवल करियर का ...
11/06/2026

आईजीडीटीयूडब्ल्यू ने खोले प्रवेश के द्वार, एमएससी, एमटेक और पीएचडी कार्यक्रमों में आवेदन शुरू

"उच्च शिक्षा केवल करियर का मार्ग नहीं, बल्कि शोध, नवाचार और नेतृत्व की नई संभावनाओं का प्रवेश द्वार भी है."

#नईदिल्ली स्थित इंदिरा गांधी दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी फॉर वुमन (IGDTUW) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए विभिन्न स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध कार्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी है. विश्वविद्यालय ने इच्छुक छात्राओं से एमएससी, एमटेक, एमप्लान, पीएचडी तथा एकीकृत बीएससी-एमएससी कार्यक्रमों के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं. आवेदन पोर्टल 22 जून तक खुला रहेगा.

समाचार के अनुसार विश्वविद्यालय में बीटेक और बीआर्क कार्यक्रमों में प्रवेश जेएसी दिल्ली काउंसिलिंग के माध्यम से होगा. विश्वविद्यालय की प्रवेश नीति के तहत 85 प्रतिशत सीटें दिल्ली क्षेत्र के अभ्यर्थियों तथा 15 प्रतिशत सीटें दिल्ली के बाहर के अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित रखी गई हैं. बीबीए और एमबीए पाठ्यक्रमों में 75-75 सीटें उपलब्ध हैं, जबकि एमसीए में 76 सीटों पर प्रवेश दिया जाएगा.

पीएचडी कार्यक्रमों में इंजीनियरिंग, भौतिकी, रसायन विज्ञान, गणित, प्रबंधन, वास्तुकला तथा नियोजन सहित विभिन्न विषयों में कुल 125 सीटें उपलब्ध कराई गई हैं. शोध कार्यक्रमों में प्रवेश रिसर्च एप्टीट्यूड टेस्ट (RAT) और साक्षात्कार के आधार पर किया जाएगा. वहीं अर्बन प्लानिंग में एमप्लान कार्यक्रम के लिए 13 सीटें निर्धारित की गई हैं.

विश्वविद्यालय द्वारा संचालित पांच वर्षीय एकीकृत बीएससी-एमएससी कार्यक्रम में भौतिकी, रसायन विज्ञान और गणित विषयों में 45-45 सीटों सहित कुल 135 सीटें उपलब्ध हैं. इस कार्यक्रम में प्रवेश सीयूईटी के माध्यम से किया जाएगा. विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार इन कार्यक्रमों के लिए आवेदन प्रक्रिया जुलाई में शुरू होने की संभावना है.

तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से स्थापित यह विश्वविद्यालय इंजीनियरिंग, प्रबंधन, विज्ञान और शोध के क्षेत्र में विशेष पहचान रखता है. विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे संस्थान छात्राओं को उच्च गुणवत्ता वाली तकनीकी शिक्षा के साथ नेतृत्व और नवाचार के अवसर भी प्रदान करते हैं.

प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ़ पेरेंट्स अवेयरनेस (PAPA NGO) का मानना है कि छात्राओं को तकनीकी, वैज्ञानिक और शोध आधारित शिक्षा में अधिक अवसर उपलब्ध कराना समय की आवश्यकता है. उच्च शिक्षा संस्थानों को केवल डिग्री प्रदान करने तक सीमित न रहकर नवाचार, शोध और रोजगारोन्मुख कौशल विकास पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए. अभिभावकों और छात्राओं को प्रवेश से पूर्व पाठ्यक्रम की गुणवत्ता, मान्यता, प्लेसमेंट और शोध सुविधाओं की जानकारी अवश्य प्राप्त करनी चाहिए.

दीपक सिंह सरीन, राष्ट्रीय संयोजक, प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ़ पेरेंट्स अवेयरनेस (PAPA NGO)

PAPA NGO - Progressive Association of Parents Awareness #नईदिल्ली

संबद्धता विस्तार शुल्क में राहत, डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय ने कम किया अर्थदंड"शिक्षा संस्थानों पर नियमों का पालन ...
11/06/2026

संबद्धता विस्तार शुल्क में राहत, डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय ने कम किया अर्थदंड

"शिक्षा संस्थानों पर नियमों का पालन आवश्यक है, लेकिन दंड ऐसा हो जो व्यवस्था सुधारे, संस्थानों को अनावश्यक बोझ तले न दबा दे."

#आगरा स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय ने संबद्ध महाविद्यालयों को बड़ी राहत देते हुए संबद्धता विस्तार (Affiliation Extension) से जुड़े अर्थदंड में कमी करने का निर्णय लिया है. विश्वविद्यालय की कार्य परिषद की ऑनलाइन बैठक में यह महत्वपूर्ण फैसला लिया गया, जिससे अनेक कॉलेजों को वित्तीय राहत मिलने की उम्मीद है.

समाचार के अनुसार कार्य परिषद की बैठक कुलपति प्रो. आशु रानी की अध्यक्षता में आयोजित की गई. बैठक में पूर्व में लिए गए उस निर्णय में संशोधन किया गया, जिसके तहत संबद्धता विस्तार के लिए कॉलेजों पर अधिक अर्थदंड लगाया जा रहा था. अब संशोधित व्यवस्था के अनुसार महाविद्यालयों को निर्धारित संबद्धता शुल्क के साथ कम अर्थदंड का भुगतान करना होगा.

विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि संबद्धता विस्तार के लिए आवेदन करने वाले महाविद्यालयों को निर्धारित शुल्क जमा करने के साथ शिक्षकों, प्रबंधन समिति, भवन एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं से संबंधित दस्तावेज भी प्रस्तुत करने होंगे. स्नातक स्तर पर प्रति पाठ्यक्रम 29,500 रुपये संबद्धता शुल्क निर्धारित किया गया है. इसके साथ 20 हजार रुपये अर्थदंड जोड़कर कुल 49,500 रुपये प्रति पाठ्यक्रम जमा करने होंगे. पहले यह अर्थदंड 25 हजार रुपये निर्धारित था.

इसी प्रकार परास्नातक स्तर पर प्रति विषय 29,500 रुपये संबद्धता शुल्क के साथ 5 हजार रुपये अर्थदंड जोड़कर कुल 34,500 रुपये जमा करने होंगे. विश्वविद्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था उन महाविद्यालयों पर लागू होगी जिन्हें शैक्षणिक सत्र 2025-26 में अस्थायी संबद्धता प्रदान की गई थी.

रिपोर्ट के अनुसार संबद्धता विस्तार के लिए आवेदन पत्रावली 20 जून तक विश्वविद्यालय में जमा करनी होगी. 20 जून के बाद और 30 जून तक आवेदन करने वाले महाविद्यालयों को अतिरिक्त विलंब शुल्क देना पड़ेगा. वहीं 30 जून के बाद किसी भी प्रकार के आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा.

विश्वविद्यालय का कहना है कि संबद्धता प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और समयबद्ध बनाने के लिए यह निर्णय लिया गया है ताकि नए शैक्षणिक सत्र में छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो और कॉलेजों की मान्यता संबंधी प्रक्रियाएं समय पर पूरी हो सकें.

प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ़ पेरेंट्स अवेयरनेस (PAPA NGO) का मानना है कि संबद्धता और मान्यता संबंधी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, समयबद्धता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए. महाविद्यालयों को केवल शुल्क भुगतान तक सीमित न रखते हुए उनकी शैक्षणिक गुणवत्ता, शिक्षक उपलब्धता, आधारभूत संरचना और छात्रों को दी जाने वाली सुविधाओं का भी कठोर मूल्यांकन होना चाहिए. शिक्षा व्यवस्था का अंतिम उद्देश्य छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है, इसलिए संबद्धता प्रक्रिया को केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि गुणवत्ता सुनिश्चित करने के माध्यम के रूप में देखा जाना चाहिए.

दीपक सिंह सरीन, राष्ट्रीय संयोजक, प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ़ पेरेंट्स अवेयरनेस (PAPA NGO)

PAPA NGO - Progressive Association of Parents Awareness #आगरा

बेसिक शिक्षा में रिक्त पदों का बड़ा खुलासा, 60 हजार शिक्षकों की भर्ती की तैयारी"विद्यालयों की इमारतें जितनी आवश्यक हैं, ...
11/06/2026

बेसिक शिक्षा में रिक्त पदों का बड़ा खुलासा, 60 हजार शिक्षकों की भर्ती की तैयारी

"विद्यालयों की इमारतें जितनी आवश्यक हैं, उतने ही आवश्यक उनमें पढ़ाने वाले शिक्षक भी हैं. शिक्षक विहीन शिक्षा व्यवस्था भविष्य की सबसे बड़ी चुनौती बन सकती है."

#प्रयागराज से आई एक महत्वपूर्ण खबर के अनुसार उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में लगभग 60 हजार रिक्त पदों पर शिक्षक भर्ती की तैयारी तेज हो गई है. विभाग द्वारा रिक्त पदों का विवरण संकलित कर उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे लंबे समय से प्रतीक्षित शिक्षक भर्ती प्रक्रिया का मार्ग प्रशस्त हो सकता है.

समाचार के अनुसार बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में कुल लगभग 60 हजार पद रिक्त हैं. इनमें से करीब 48 हजार पद ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में तथा 11,508 पद नगर क्षेत्र के विद्यालयों में खाली हैं. विभाग इन सभी रिक्तियों का विस्तृत विवरण ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से चयन आयोग को भेजने की तैयारी कर रहा है. इसके लिए भर्ती नियमावली में आवश्यक संशोधन और अद्यतन प्रक्रिया भी जारी है.

रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2018 के बाद ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयों में कोई बड़ी शिक्षक भर्ती नहीं हुई है, जबकि नगर क्षेत्र के विद्यालयों में भी लंबे समय से नियुक्तियां नहीं की गई हैं. परिणामस्वरूप अनेक विद्यालय शिक्षक संकट से जूझ रहे हैं. विभाग ने पूर्व की भर्तियों से रिक्त रह गए पदों का भी पुनः आकलन किया है, जिससे रिक्तियों की संख्या और स्पष्ट हो सकी है.

समाचार में यह भी उल्लेख किया गया है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में सरप्लस शिक्षकों के पुनर्समायोजन की प्रक्रिया चल रही है. जिलों को निर्देश दिए गए हैं कि सरप्लस शिक्षकों की अंतिम सूची 26 जून तक उपलब्ध कराई जाए. न्यायालय के आदेश के कारण फिलहाल तबादलों पर भी रोक लगी हुई है. पुनर्समायोजन और नियमावली संशोधन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भर्ती अधियाचन आयोग को भेजा जाएगा.

विशेष बात यह है कि पहली बार परिषदीय शिक्षकों के चयन के लिए भर्ती परीक्षा उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के माध्यम से कराए जाने की तैयारी की जा रही है. इससे भर्ती प्रक्रिया में एकरूपता और पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है.

यदि यह भर्ती प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ होती है तो प्रदेश के हजारों अभ्यर्थियों को रोजगार का अवसर मिलेगा और शिक्षक संकट से जूझ रहे विद्यालयों को भी राहत प्राप्त होगी. शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि रिक्त पदों को भरना केवल रोजगार का विषय नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता से भी सीधा जुड़ा हुआ है.

प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ़ पेरेंट्स अवेयरनेस (PAPA NGO) का मानना है कि प्रदेश के विद्यालयों में लंबे समय से रिक्त पड़े शिक्षक पदों को भरना अत्यंत आवश्यक है. शिक्षा का अधिकार तभी सार्थक हो सकता है जब प्रत्येक विद्यालय में विषयानुसार पर्याप्त और प्रशिक्षित शिक्षक उपलब्ध हों. सरकार को भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी, समयबद्ध और विवादमुक्त बनाते हुए शीघ्र नियुक्तियां सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो और शिक्षा व्यवस्था मजबूत बन सके.

दीपक सिंह सरीन , राष्ट्रीय संयोजक, प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ़ पेरेंट्स अवेयरनेस (PAPA NGO)

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