PAPA NGO - Progressive Association of Parents Awareness

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🏫 केंद्रीय विद्यालय घुमारवीं को मिली बड़ी राहत, अब एक ही परिसर में चलेंगी तीसरी से दसवीं तक की कक्षाएंबच्चों की पढ़ाई अल...
15/08/2026

🏫 केंद्रीय विद्यालय घुमारवीं को मिली बड़ी राहत, अब एक ही परिसर में चलेंगी तीसरी से दसवीं तक की कक्षाएं

बच्चों की पढ़ाई अलग अलग परिसरों में बंटी हो तो परेशानी केवल विद्यार्थियों की नहीं होती. अभिभावक, शिक्षक और स्कूल प्रबंधन सभी को इसका असर झेलना पड़ता है.

हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में केंद्रीय विद्यालय घुमारवीं के विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए राहत की खबर है. विद्यालय को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक कन्या विद्यालय घुमारवीं के परिसर में आठ कमरे उपलब्ध करा दिए गए हैं.

इन कमरों में अब कक्षा 3 से 10 तक के विद्यार्थियों की पढ़ाई शुरू कर दी गई है.

📚 लंबे समय से जगह की समस्या से जूझ रहा था विद्यालय

खबर के मुताबिक कमरों की कमी के कारण केंद्रीय विद्यालय की सभी कक्षाओं को एक ही परिसर में संचालित करना संभव नहीं हो पा रहा था.

कक्षा 1 और 2 की पढ़ाई अभी भी केंद्रीय विद्यालय के पुराने परिसर में संचालित हो रही है, जबकि तीसरी से दसवीं तक की कक्षाएं अब कन्या विद्यालय परिसर में शुरू हो गई हैं.

विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि यदि दो से तीन और कमरे उपलब्ध हो जाएं तो शेष कक्षाओं को भी वहां स्थानांतरित किया जा सकता है. इसके बाद पूरा विद्यालय एक ही परिसर से संचालित हो सकेगा.

👧 बच्चों के साथ अभिभावकों को भी राहत

अलग अलग स्थानों पर कक्षाएं चलने से विद्यार्थियों के साथ शिक्षकों और विद्यालय प्रबंधन को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था.

खबर के अनुसार करीब 13 वर्षों से केंद्रीय विद्यालय घुमारवीं मंदिर की सराय स्थित भवन से संचालित हो रहा है. पिछले वर्ष भारी बारिश के दौरान पुराने भवन में दरारें आने के बाद व्यवस्था प्रभावित हुई थी और कुछ कक्षाओं को दूसरे विद्यालय परिसर में स्थानांतरित करना पड़ा था.

अब आठ कमरे मिलने से समस्या काफी हद तक कम हुई है.

🤔 आगे क्या होना चाहिए?

अस्थायी व्यवस्था राहत जरूर देती है, लेकिन बच्चों की शिक्षा के लिए स्थायी और सुरक्षित विद्यालय परिसर सबसे जरूरी है.

विद्यालय को यदि तीन और कमरे उपलब्ध हो जाते हैं तो अगले शैक्षणिक सत्र से कक्षा 1 और 2 को भी इसी परिसर में लाने की उम्मीद जताई गई है.

PAPA NGO का मानना है कि बच्चों की पढ़ाई के लिए पर्याप्त कक्ष, सुरक्षित भवन और एक व्यवस्थित परिसर कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि शिक्षा की बुनियादी आवश्यकता है.

📢 एक जरूरी संदेश

सरकार और संबंधित विभाग को ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए कि किसी भी विद्यालय के बच्चों की पढ़ाई केवल भवन या कमरों की कमी के कारण प्रभावित न हो.

आठ कमरे मिलना राहत की शुरुआत है. अब प्रयास यह होना चाहिए कि केंद्रीय विद्यालय घुमारवीं के सभी बच्चों को जल्द से जल्द एक ही सुरक्षित और व्यवस्थित परिसर में पढ़ने का अवसर मिले.

#घुमारवीं #बिलासपुर #हिमाचलप्रदेश #केंद्रीयविद्यालय #विद्यालय #शिक्षा #विद्यार्थी

–दीपक सिंह सरीन, संस्थापक–PAPA NGO

🏫 प्रधानाचार्य ही नहीं तो BEO किसे बनाएगी सरकार? पहले पदोन्नति तो कीजिए साहबघोषणा सुनने में अच्छी है कि उच्च प्राथमिक वि...
15/08/2026

🏫 प्रधानाचार्य ही नहीं तो BEO किसे बनाएगी सरकार? पहले पदोन्नति तो कीजिए साहब

घोषणा सुनने में अच्छी है कि उच्च प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को खंड शिक्षा अधिकारी बनाया जाएगा. लेकिन जब वर्षों से प्रधानाचार्य के पद ही पदोन्नति के इंतजार में खाली पड़े हों, तो घोषणा से पहले व्यवस्था की हकीकत देखना भी जरूरी है.

बिजनौर में सरकार द्वारा उच्च प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को खंड शिक्षा अधिकारी यानी BEO के पद पर पदोन्नति देने की घोषणा के बाद शिक्षक संगठनों ने एक बुनियादी सवाल उठाया है.

खबर के मुताबिक उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की पदोन्नति करीब 14 वर्षों से नहीं हुई है.

📌 2012 के बाद से नहीं हुई प्रधानाचार्य पद पर पदोन्नति

रिपोर्ट के अनुसार प्रधानाचार्य पद पर आखिरी पदोन्नति वर्ष 2012 में हुई थी. इसके बाद से बड़ी संख्या में प्रधानाचार्य सेवानिवृत्त हो चुके हैं.

बिजनौर जिले में वर्तमान में केवल 15 प्रधानाचार्य कार्यरत बताए गए हैं और इनमें भी अधिकांश सेवानिवृत्ति के करीब हैं.

कई उच्च प्राथमिक विद्यालयों में इंचार्ज अध्यापक ही प्रधानाचार्य की जिम्मेदारी निभा रहे हैं.

ऐसे में सवाल बेहद सीधा है.

जब प्रधानाचार्य ही नहीं बनाए गए, तो BEO पद पर पदोन्नति किसकी होगी?

🤔 पहले पुरानी व्यवस्था की गांठ तो खोलिए

शिक्षक संगठनों की मांग है कि सरकार सबसे पहले प्रधानाचार्य के रिक्त पदों पर वर्षों से लंबित पदोन्नति करे.

उसके बाद प्रधानाचार्यों को BEO बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए.

खबर में यह सवाल भी उठाया गया है कि जिन गिने चुने प्रधानाचार्यों की सेवानिवृत्ति नजदीक है, यदि उन्हें दूसरे जिलों में BEO बनाकर भेजा जाता है तो यह व्यवस्था व्यावहारिक रूप से कितनी प्रभावी होगी.

📢 सवाल व्यवस्था से

शिक्षा व्यवस्था केवल नई घोषणाओं से मजबूत नहीं होती. पहले वर्षों से लंबित समस्याओं का समाधान भी जरूरी है.

14 वर्षों तक पदोन्नति क्यों नहीं हुई?

प्रधानाचार्य के रिक्त पद इतने लंबे समय तक क्यों नहीं भरे गए?

इंचार्ज व्यवस्था के भरोसे विद्यालय कब तक चलेंगे?

और जब पदोन्नति की मूल श्रृंखला ही रुकी हुई है, तो उसके अगले पद की घोषणा जमीन पर कैसे लागू होगी?

✍️ अंत में बस इतना ही

सरकार की घोषणा स्वागत योग्य हो सकती है, लेकिन उसका लाभ तभी मिलेगा जब पहले प्रधानाचार्य पद पर लंबित पदोन्नतियों का रास्ता साफ किया जाए.

शिक्षा व्यवस्था में पद खाली रखकर जिम्मेदारियां बांटते रहना स्थायी समाधान नहीं है.

पहले प्रधानाचार्य बनाइए, फिर BEO बनाने की बात कीजिए.

#बिजनौर #उत्तरप्रदेश #खंडशिक्षाअधिकारी #प्रधानाचार्य #शिक्षक #पदोन्नति #शिक्षा

–दीपक सिंह सरीन, संस्थापक–PAPA NGO

⚖️ जाति प्रमाणपत्र रद्द करने से पहले निष्पक्ष जांच जरूरी, हाईकोर्ट ने शिक्षक को दी बड़ी राहतकिसी व्यक्ति के प्रमाणपत्र प...
15/08/2026

⚖️ जाति प्रमाणपत्र रद्द करने से पहले निष्पक्ष जांच जरूरी, हाईकोर्ट ने शिक्षक को दी बड़ी राहत

किसी व्यक्ति के प्रमाणपत्र पर सवाल उठे तो जांच जरूर होनी चाहिए. लेकिन जांच ऐसी हो जिसमें संबंधित व्यक्ति को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिले और फैसला कानून के अनुसार हो.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली की जिला स्तरीय जाति जांच समिति के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके आधार पर एक शिक्षक का अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया गया था.

अदालत ने स्पष्ट किया कि जाति प्रमाणपत्र रद्द करने से पहले सतर्कता जांच आवश्यक है और संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए.

📌 क्या है पूरा मामला?

खबर के मुताबिक बहेड़ी के गांव दौलतपुर निवासी केंद्रपाल की नियुक्ति 23 अक्टूबर 2020 को माध्यमिक शिक्षा विभाग में हुई थी. वह बुलंदशहर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज रसूलगढ़ में तैनात हैं.

पत्नी की शिकायत के आधार पर उनके बरेली से जारी अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र की जांच कराई गई. इसके बाद 3 अक्टूबर 2025 को जिला जाति जांच समिति ने उनका जाति प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया.

इस आदेश को शिक्षक ने हाईकोर्ट में चुनौती दी.

⚖️ हाईकोर्ट ने क्या कहा?

खबर के अनुसार अदालत ने पाया कि प्रमाणपत्र निरस्त करने से पहले आवश्यक सतर्कता जांच नहीं कराई गई थी.

हाईकोर्ट ने इसे उच्चतम न्यायालय के दिशा निर्देशों के अनुरूप नहीं माना.

अदालत ने समिति का आदेश रद्द करते हुए संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का पूरा अवसर देकर और आवश्यक विजिलेंस जांच कराकर नया आदेश पारित करने की स्वतंत्रता दी है.

🏫 बरेली कॉलेज के प्रोफेसर को भी राहत

इसी खबर में बरेली कॉलेज के भौतिकी विभाग के प्रोफेसर वीरपाल सिंह से जुड़े एक अन्य मामले का भी उल्लेख है.

कॉलेज प्रबंध समिति ने शिकायत के आधार पर गठित जांच के बाद उन्हें विभाग प्रभारी पद से हटाने का आदेश दिया था. हाईकोर्ट ने जांच और पद से हटाने के आदेश पर रोक लगा दी है.

अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी जांच को मनमाने तरीके से संचालित नहीं किया जा सकता और किसी विभाग प्रभारी को भी मनमाने ढंग से पद से नहीं हटाया जा सकता.

💭 सोचने वाली बात

चाहे मामला शिक्षक का हो, विद्यार्थी का हो या किसी आम नागरिक का, जांच का अर्थ केवल आरोप की पुष्टि करना नहीं होता.

निष्पक्ष जांच में दस्तावेज, तथ्य और संबंधित व्यक्ति का पक्ष तीनों महत्वपूर्ण होते हैं.

किसी शिकायत के आधार पर जांच शुरू होना अलग बात है और बिना निर्धारित प्रक्रिया पूरी किए किसी व्यक्ति को दोषी मान लेना अलग.

न्याय का मूल सिद्धांत यही है कि फैसला लेने से पहले संबंधित व्यक्ति को अपनी बात रखने का उचित अवसर मिले.

📢 एक जरूरी संदेश

शिक्षा संस्थानों और सरकारी व्यवस्थाओं में जवाबदेही जरूरी है, लेकिन जवाबदेही के साथ पारदर्शिता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन भी उतना ही जरूरी है.

नियम सबके लिए हों और कार्रवाई भी नियमों के अनुसार हो. तभी व्यवस्था पर लोगों का विश्वास मजबूत होगा.

#बरेली #प्रयागराज #उत्तरप्रदेश #इलाहाबादहाईकोर्ट #शिक्षक #शिक्षाअधिकार

–दीपक सिंह सरीन, संस्थापक–PAPA NGO

🏫 150 बच्चों की पढ़ाई सिर्फ तीन कमरों में, जर्जर भवन से हटाए गए बच्चे लेकिन विकल्प भी अधूरास्कूल की इमारत जर्जर हो तो बच...
15/08/2026

🏫 150 बच्चों की पढ़ाई सिर्फ तीन कमरों में, जर्जर भवन से हटाए गए बच्चे लेकिन विकल्प भी अधूरा

स्कूल की इमारत जर्जर हो तो बच्चों को वहां बैठाना खतरा है. लेकिन उन्हें सुरक्षित निकालकर ऐसी जगह बैठा देना जहां पढ़ाई के लिए पर्याप्त कमरे ही न हों, क्या इसे समस्या का समाधान कहा जा सकता है?

जरवल क्षेत्र के कंपोजिट विद्यालय चैनपुर निश्चलपुर में भवनों की कमी के कारण शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है. खबर के अनुसार कक्षा 1 से 8 तक के करीब 150 छात्र छात्राओं की पढ़ाई के लिए विद्यालय में केवल तीन उपयोगी कमरे बचे हैं.

नतीजा यह है कि अलग अलग कक्षाओं के बच्चों को इन्हीं सीमित कमरों में बैठाकर पढ़ाना पड़ रहा है.

⚠️ दो साल से जर्जर था भवन, अब घोषित हुआ निष्प्रयोज्य

खबर के मुताबिक विद्यालय का अतिरिक्त कक्ष लंबे समय से जर्जर है. प्राथमिक विद्यालय का भवन भी करीब दो वर्षों से खराब स्थिति में था, जिसे अब निष्प्रयोज्य घोषित कर दिया गया है.

सुरक्षा को देखते हुए जर्जर भवन से बच्चों को हटाना आवश्यक था. लेकिन इसके बाद कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों को भी उच्च प्राथमिक विद्यालय के उपलब्ध कमरों में बैठाया जा रहा है.

इससे कमरों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ गई है और पढ़ाई का माहौल प्रभावित हो रहा है.

विद्यालय में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एलईडी टीवी भी लगाया गया है, लेकिन खबर के अनुसार बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त और सुरक्षित कक्ष उपलब्ध न होने से डिजिटल शिक्षा की व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है.

🤔 सवाल व्यवस्था से

बच्चों को जर्जर भवन से हटाना सराहनीय और जरूरी कदम है. लेकिन सवाल यह है कि भवन को करीब दो वर्षों से खराब स्थिति में बताया जा रहा था, तो वैकल्पिक कक्षों की व्यवस्था पहले क्यों नहीं की गई?

150 बच्चों के लिए सिर्फ तीन उपयोगी कमरे हों तो शिक्षक अलग अलग कक्षाओं को गुणवत्तापूर्ण तरीके से कैसे पढ़ाएंगे?

जब सरकार डिजिटल शिक्षा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात करती है, तो क्या सबसे पहले प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित कक्षा और बैठने के लिए पर्याप्त स्थान मिलना सुनिश्चित नहीं होना चाहिए?

📢 हमारी मांग

जर्जर भवन के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शीघ्र पूरी कराई जाए.

विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार अतिरिक्त सुरक्षित कक्ष तत्काल उपलब्ध कराए जाएं.

नया भवन बनने तक बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए उचित वैकल्पिक व्यवस्था की जाए.

जिले के अन्य सरकारी स्कूलों के जर्जर भवनों और कक्षों का भी सुरक्षा ऑडिट कराया जाए.

किसी भी बच्चे को असुरक्षित भवन में पढ़ने के लिए मजबूर न होना पड़े और सुरक्षित भवन के नाम पर उसकी पढ़ाई भी समझौते का शिकार न बने.

📚 बच्चों को सिर्फ स्कूल में दाखिला नहीं, सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल में शिक्षा पाने का अधिकार भी चाहिए.

#जरवल #बहराइच #उत्तरप्रदेश #सरकारीस्कूल #विद्यालय #स्कूलसुरक्षा #शिक्षा #विद्यार्थी

–दीपक सिंह सरीन, संस्थापक–PAPA NGO

📝 यूपी बोर्ड परीक्षा 2027 के फॉर्म की अंतिम तारीख 16 अगस्त, इस बार नहीं मिलेगा अतिरिक्त समयएक तारीख चूकना विद्यार्थी के ...
15/08/2026

📝 यूपी बोर्ड परीक्षा 2027 के फॉर्म की अंतिम तारीख 16 अगस्त, इस बार नहीं मिलेगा अतिरिक्त समय

एक तारीख चूकना विद्यार्थी के लिए पूरे साल की परेशानी बन सकता है. इसलिए स्कूल, विद्यार्थी और अभिभावक तीनों समय रहते सतर्क रहें.

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की वर्ष 2027 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले संस्थागत एवं व्यक्तिगत परीक्षार्थियों के लिए परीक्षा आवेदन और शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 16 अगस्त निर्धारित की गई है.

खबर के मुताबिक बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि इस अंतिम तिथि को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा.

⏰ स्कूलों के लिए भी जरूरी निर्देश

बहराइच में जिला विद्यालय निरीक्षक ने माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को आवेदन प्रक्रिया समय से पूरी कराने के निर्देश दिए हैं.

खबर के अनुसार प्रधानाचार्यों को परीक्षा शुल्क कोषागार में जमा कराने की सूचना तथा विद्यार्थियों का शैक्षिक विवरण परिषद की वेबसाइट पर 16 अगस्त की मध्यरात्रि तक अपलोड करना अनिवार्य है.

10 अगस्त के बाद विलंब शुल्क के साथ भी 16 अगस्त तक शुल्क जमा किया जा सकेगा, जबकि उसकी ऑनलाइन सूचना 20 अगस्त तक अपलोड करनी होगी.

व्यक्तिगत परीक्षार्थियों के लिए भी यही समय सीमा लागू होने की बात कही गई है.

🎓 कक्षा 9 और 11 के विद्यार्थियों के लिए भी जरूरी सूचना

शैक्षिक सत्र 2026-27 में कक्षा 9 और 11 के विद्यार्थियों के अग्रिम पंजीकरण की अंतिम तिथि 25 अगस्त निर्धारित की गई है.

विद्यालयों को विद्यार्थियों का शुल्क जमा करने के साथ नाम, माता पिता का नाम, जन्मतिथि, जेंडर, विषय और फोटो सहित आवश्यक विवरण परिषद की वेबसाइट पर अपलोड करने होंगे.

खबर में यह भी स्पष्ट किया गया है कि विवरण में त्रुटि होने पर संबंधित कक्षाध्यापक और प्रधानाचार्य की जिम्मेदारी तय होगी.

📢 अभिभावक भी जरूर करें एक काम

यदि आपका बच्चा यूपी बोर्ड से हाईस्कूल या इंटरमीडिएट की परीक्षा देने वाला है, तो केवल स्कूल के भरोसे अंतिम तारीख गुजरने का इंतजार न करें.

विद्यालय से यह जरूर सुनिश्चित करें कि बच्चे का परीक्षा फॉर्म समय से भरा गया है.

नाम, माता पिता का नाम, जन्मतिथि, विषय और अन्य विवरण सही दर्ज हुए हैं या नहीं, इसकी पुष्टि करें.

जहां संभव हो आवेदन या पंजीकरण से संबंधित प्रमाण सुरक्षित रखें.

कक्षा 9 और 11 के अभिभावक भी अग्रिम पंजीकरण की स्थिति समय रहते जांच लें.

⚠️ एक जरूरी संदेश

बोर्ड परीक्षा बच्चे के भविष्य से जुड़ा विषय है. किसी स्कूल की लापरवाही, गलत जानकारी या अंतिम तारीख चूकने का नुकसान विद्यार्थी को नहीं उठाना चाहिए.

समय रहते जांच कीजिए. एक छोटी सी सावधानी बच्चे को बड़ी परेशानी से बचा सकती है.

इस सूचना को यूपी बोर्ड से जुड़े विद्यार्थियों और अभिभावकों तक जरूर पहुंचाएं.

#बहराइच #उत्तरप्रदेश #यूपीबोर्ड #बोर्डपरीक्षा #हाईस्कूल #इंटरमीडिएट #विद्यार्थी #अभिभावक

–दीपक सिंह सरीन, संस्थापक–PAPA NGO

🎓 ITI में प्रवेश का एक और मौका, अब 15 अगस्त की मध्यरात्रि तक कर सकेंगे आवेदनतकनीकी शिक्षा और हुनर रोजगार की दिशा में पहल...
15/08/2026

🎓 ITI में प्रवेश का एक और मौका, अब 15 अगस्त की मध्यरात्रि तक कर सकेंगे आवेदन

तकनीकी शिक्षा और हुनर रोजगार की दिशा में पहला मजबूत कदम बन सकते हैं. अगर किसी कारण से आवेदन छूट गया था, तो युवाओं के लिए एक और अवसर सामने आया है.

बदायूं में राजकीय और निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों यानी ITI में प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाकर 15 अगस्त की मध्यरात्रि तक कर दी गई है.

पहले आवेदन की अंतिम तिथि 12 अगस्त तक बढ़ाई गई थी. अब अभ्यर्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक बार फिर आवेदन का मौका दिया गया है.

📝 पहले आवेदन कर चुके अभ्यर्थियों को भी राहत

खबर के मुताबिक जिन अभ्यर्थियों ने पहले आवेदन कर दिया है, वे इस अवधि में अपने संस्थान और ट्रेड के विकल्प में संशोधन भी कर सकते हैं.

अभ्यर्थी ऑनलाइन पोर्टल पर लॉगिन करके अपडेट शीट मैट्रिक्स देख सकते हैं और अपनी शैक्षिक योग्यता तथा प्राथमिकता के अनुसार नए संस्थान एवं ट्रेड जोड़ सकते हैं या पहले से भरे विकल्पों में बदलाव कर सकते हैं.

इसलिए जिन विद्यार्थियों ने आवेदन पहले ही कर दिया है, उनके लिए भी अपने विकल्पों को एक बार फिर जांच लेना उपयोगी होगा.

🔧 आवेदन छूट गया है तो अवसर न गंवाएं

खबर में बताया गया है कि कई अभ्यर्थी विभिन्न कारणों से अभी तक आवेदन नहीं कर सके थे. ऐसे युवाओं को ध्यान में रखते हुए आवेदन की अवधि बढ़ाई गई है.

ITI के माध्यम से विभिन्न तकनीकी और व्यावसायिक ट्रेड में प्रशिक्षण प्राप्त कर युवा रोजगार और स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं.

📢 PAPA NGO की अपील

ITI में प्रवेश लेने के इच्छुक विद्यार्थी अंतिम समय का इंतजार न करें.

आवेदन नहीं किया है तो समय रहते प्रक्रिया पूरी करें.

पहले आवेदन कर चुके हैं तो अपने संस्थान और ट्रेड के विकल्प दोबारा जांच लें.

आवेदन से संबंधित दस्तावेज और जानकारी भरते समय सावधानी रखें.

इस सूचना को उन विद्यार्थियों और अभिभावकों तक जरूर पहुंचाएं, जिनके बच्चे ITI में प्रवेश लेना चाहते हैं.

कई बार अवसर हमारे सामने होता है, लेकिन जानकारी समय पर न मिलने के कारण हम उससे वंचित रह जाते हैं. शिक्षा और प्रवेश से जुड़ी उपयोगी जानकारी आगे पहुंचाना भी किसी विद्यार्थी की मदद करने का एक तरीका है.

#बदायूं #उत्तरप्रदेश #आईटीआई #आईटीआईप्रवेश #तकनीकीशिक्षा #कौशलविकास #विद्यार्थी

–दीपक सिंह सरीन, संस्थापक–PAPA NGO

📚 स्कूल के नाम से छपी किताबें मिलीं, अब इंटर कॉलेज से मांगा गया जवाबजब निर्धारित पाठ्यपुस्तकें मौजूद हैं, तो सवाल उठना स...
15/08/2026

📚 स्कूल के नाम से छपी किताबें मिलीं, अब इंटर कॉलेज से मांगा गया जवाब

जब निर्धारित पाठ्यपुस्तकें मौजूद हैं, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि स्कूल के अपने प्रकाशन की किताबें बच्चों को क्यों पढ़ाई जा रही हैं?

अयोध्या के दर्शन नगर स्थित समाजोत्थान इंटर कॉलेज में सत्यापन के दौरान विद्यालय के ही प्रकाशन की किताबों से विद्यार्थियों को पढ़ाए जाने का मामला सामने आया है. इस पर जिला विद्यालय निरीक्षक यानी DIOS ने विद्यालय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

🔍 जांच में क्या मिला?

अखबार की खबर के अनुसार सत्यापन करने पहुंची टीम को विद्यालय के नाम से प्रकाशित जीव विज्ञान और भौतिक विज्ञान की पुस्तकें मिलीं.

इसके अलावा मॉडल पेपर और गाइड भी पाए गए.

अब विभाग यह जांच कर रहा है कि इन पुस्तकों का इस्तेमाल अतिरिक्त अध्ययन सामग्री के रूप में किया जा रहा था या निर्धारित पाठ्यपुस्तकों के स्थान पर.

यह भी जांचा जाएगा कि क्या इन पुस्तकों को विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य किया गया था.

🏫 भवन की स्थिति पर भी उठे सवाल

मामला केवल किताबों तक सीमित नहीं है.

खबर के मुताबिक सत्यापन के दौरान विद्यालय भवन की स्थिति भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं मिलने की बात सामने आई है. इस संबंध में भी विद्यालय से जवाब मांगा गया है.

माध्यमिक शिक्षा परिषद ने इस सत्र में कक्षा 9 से 12 तक NCERT और परिषद द्वारा चयनित किताबें लागू की हैं.

❓ सवाल अभिभावकों के हित का

अगर किसी स्कूल की अपनी प्रकाशित किताब या अतिरिक्त गाइड केवल वैकल्पिक अध्ययन सामग्री है, तो अभिभावकों को इसकी स्पष्ट जानकारी होनी चाहिए.

लेकिन यदि ऐसी किताबों को बच्चों के लिए अनिवार्य किया जाता है, तो यह जांच का विषय जरूर होना चाहिए कि क्या अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डाला जा रहा है.

PAPA NGO का मानना है कि स्कूलों में किताबों की व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए.

अभिभावक को साफ पता होना चाहिए कि कौन सी किताब निर्धारित पाठ्यक्रम का हिस्सा है और कौन सी केवल अतिरिक्त या वैकल्पिक सामग्री है.

📢 हमारी मांग

विभाग जांच पूरी कर यह सार्वजनिक करे कि विद्यालय के नाम से प्रकाशित किताबों का वास्तविक उपयोग किस रूप में किया जा रहा था.

यदि अतिरिक्त पुस्तकों को अनिवार्य रूप से खरीदवाया जा रहा था, तो इसकी भी जांच होनी चाहिए.

अभिभावकों को निर्धारित और अतिरिक्त पुस्तकों की स्पष्ट सूची उपलब्ध कराई जाए.

स्कूलों में किताबों के नाम पर अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालने की किसी भी व्यवस्था पर प्रभावी निगरानी हो.

शिक्षा बच्चों के ज्ञान के लिए है. किताबें स्कूलों के लिए कमाई का जरिया नहीं बननी चाहिए.

#अयोध्या #उत्तरप्रदेश #स्कूल #किताबें #एनसीईआरटी #अभिभावक #शिक्षा

–दीपक सिंह सरीन, संस्थापक–PAPA NGO

🎓 छात्रवृत्ति चाहिए तो बैंक खाता आधार से लिंक होना जरूरी, छोटी सी चूक रोक सकती है आपकी धनराशिछात्रवृत्ति किसी विद्यार्थी...
15/08/2026

🎓 छात्रवृत्ति चाहिए तो बैंक खाता आधार से लिंक होना जरूरी, छोटी सी चूक रोक सकती है आपकी धनराशि

छात्रवृत्ति किसी विद्यार्थी के लिए सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं, उसकी पढ़ाई जारी रखने का सहारा भी हो सकती है. इसलिए बैंक खाते से जुड़ी एक छोटी सी तकनीकी कमी भी छात्र की परेशानी का कारण न बने, समय रहते जांच जरूरी है.

अमरोहा में पूर्वदशम और दशमोत्तर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना को लेकर विद्यार्थियों और शिक्षण संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं.

खबर के मुताबिक छात्रवृत्ति की धनराशि प्राप्त करने के लिए विद्यार्थी के बैंक खाते का आधार से जुड़ा होना अनिवार्य है. इसके साथ ही खाते में भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम यानी NPCI की मैपिंग और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी DBT की सुविधा सक्रिय होनी चाहिए.

🏦 आवेदन से पहले इन बातों की जांच जरूरी

विद्यार्थी के आवेदन में दर्ज नाम, माता पिता का नाम, आधार संख्या, बैंक खाता संख्या और बैंक शाखा पहचान संख्या सहित अन्य विवरणों की जांच सही तरीके से की जानी चाहिए.

बैंक खाता विद्यार्थी के नाम से और सक्रिय होना चाहिए.

यदि आधार से बैंक खाता जोड़ने, NPCI मैपिंग या DBT से संबंधित कोई समस्या है, तो विद्यार्थी को संबंधित बैंक शाखा से संपर्क कर उसे समय रहते ठीक कराना चाहिए.

शिक्षण संस्थानों को भी छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति से जुड़े आवेदनों तथा अभिलेखों का निर्धारित समय सीमा में परीक्षण और सत्यापन पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं.

⚠️ गलती हुई तो छात्र को उठाना पड़ सकता है नुकसान

खबर में स्पष्ट किया गया है कि गलत या अधूरी जानकारी, आधार से खाता लिंक न होने, NPCI मैपिंग अथवा DBT सक्रिय न होने या बैंक खाते में किसी त्रुटि के कारण छात्रवृत्ति की धनराशि नहीं मिलने पर विद्यार्थी स्वयं जिम्मेदार होगा.

यही वह बिंदु है जहां अभिभावकों और विद्यार्थियों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है.

📢 PAPA NGO की अपील

छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करने वाले विद्यार्थी अंतिम तारीख का इंतजार न करें.

अपने बैंक में जाकर आधार लिंकिंग की स्थिति की जांच कराएं.

NPCI मैपिंग और DBT सक्रिय है या नहीं, इसकी पुष्टि करें.

आवेदन में नाम, आधार और बैंक खाते की जानकारी मिलान करके ही आवेदन पूरा करें.

किसी तकनीकी समस्या की जानकारी मिलने पर तुरंत बैंक और संबंधित शिक्षण संस्थान से संपर्क करें.

💭 एक जरूरी सवाल

सरकारी छात्रवृत्ति जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए है. इसलिए केवल विद्यार्थी पर जिम्मेदारी डाल देना पर्याप्त नहीं होना चाहिए.

स्कूल, कॉलेज और संबंधित विभागों को भी समय रहते विद्यार्थियों को स्पष्ट जानकारी और सहायता उपलब्ध करानी चाहिए, ताकि किसी गरीब या जरूरतमंद छात्र की छात्रवृत्ति केवल तकनीकी त्रुटि के कारण न रुके.

एक छोटी सी जांच आपकी छात्रवृत्ति बचा सकती है. यह जानकारी किसी जरूरतमंद विद्यार्थी तक जरूर पहुंचाएं.

#अमरोहा #उत्तरप्रदेश #छात्रवृत्ति #विद्यार्थी #शिक्षा #छात्रअधिकार

–दीपक सिंह सरीन, संस्थापक–PAPA NGO

📚 लाखों खर्च करके बनीं गांवों की लाइब्रेरियां, कहीं ताला लटका तो कहीं किताबों की जगह खंडहरभवन बना देना आसान है, व्यवस्था...
15/08/2026

📚 लाखों खर्च करके बनीं गांवों की लाइब्रेरियां, कहीं ताला लटका तो कहीं किताबों की जगह खंडहर

भवन बना देना आसान है, व्यवस्था को जीवित रखना मुश्किल. बच्चों के नाम पर खर्च हुआ सरकारी पैसा तभी सार्थक है, जब उस सुविधा का लाभ वास्तव में बच्चों तक पहुंचे.

अमरोहा के ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को गांव में ही बेहतर पढ़ाई की सुविधा देने के उद्देश्य से ग्राम पंचायत स्तर पर लाइब्रेरियां बनाई गईं. लेकिन अखबार की रिपोर्ट व्यवस्था की चिंताजनक तस्वीर सामने रखती है.

खबर के मुताबिक जिले की 574 ग्राम पंचायतों में से केवल 103 ग्राम पंचायतों में लाइब्रेरी संचालित हो रही हैं.

कहीं लाखों रुपये खर्च कर भवन तैयार किए गए, लेकिन उन पर ताले लटके हैं. कहीं भवन देखरेख के अभाव में बदहाल हो रहे हैं और कहीं किताबें, मेज कुर्सी तथा रोशनी जैसी बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं.

🔒 चार साल से खंडहर बना पुस्तकालय भवन

रिपोर्ट में हसनपुर ब्लॉक के ग्राम देहरा मिलक का उदाहरण सामने आया है. यहां ग्राम सचिवालय के भीतर लाइब्रेरी तैयार की गई थी, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार पुस्तकालय करीब चार साल से बदहाल पड़ा है.

खबर में बताया गया है कि भवन में न किताबें हैं, न बैठने की उचित व्यवस्था और न ही जरूरी संसाधन. इसके कारण गांव के विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए करीब दो किलोमीटर दूर दूसरी लाइब्रेरी जाना पड़ रहा है.

गजरौला ब्लॉक की ग्राम पंचायत मोहरका पट्टी में पंचायत सचिवालय के भीतर लाइब्रेरी तो बनाई गई, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार उसके मुख्य दरवाजे पर ताला लटका मिला.

🎓 नुकसान आखिर किसका हो रहा है?

इन बंद और बदहाल लाइब्रेरियों का सबसे बड़ा नुकसान गांव के उन बच्चों और युवाओं को हो रहा है, जिनके पास निजी लाइब्रेरी की फीस भरने या पढ़ाई के लिए शहर जाने के पर्याप्त साधन नहीं हैं.

सरकारी लाइब्रेरी यदि नियमित रूप से संचालित हो तो विद्यार्थियों को अपने घर के नजदीक पढ़ने का बेहतर वातावरण मिल सकता है और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले ग्रामीण युवाओं को भी बड़ी राहत मिल सकती है.

❓ सवाल व्यवस्था से

बच्चों और युवाओं के नाम पर लाखों रुपये खर्च करके भवन बना देना ही पर्याप्त नहीं है.

सवाल यह है कि जिन लाइब्रेरियों पर सार्वजनिक धन खर्च हुआ, उनके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी है?

कितनी लाइब्रेरियां वास्तव में प्रतिदिन खुल रही हैं?

कितनी लाइब्रेरियों में पर्याप्त किताबें, फर्नीचर, बिजली और इंटरनेट जैसी सुविधाएं मौजूद हैं?

और जो लाइब्रेरियां बंद या बदहाल पड़ी हैं, उनकी जवाबदेही कौन तय करेगा?

📢 PAPA NGO की मांग

जिले की सभी ग्राम पंचायत लाइब्रेरियों का भौतिक सत्यापन कराया जाए.

बंद पड़ी लाइब्रेरियों को तत्काल संचालित कराया जाए.

जहां किताबें, फर्नीचर, बिजली और अन्य जरूरी संसाधनों की कमी है, वहां उन्हें उपलब्ध कराया जाए.

प्रत्येक लाइब्रेरी के खुलने और बंद होने का निर्धारित समय सार्वजनिक किया जाए.

जिन स्थानों पर सरकारी धन खर्च होने के बावजूद सुविधा बच्चों तक नहीं पहुंच रही है, वहां जिम्मेदारी तय की जाए.

बच्चों के नाम पर बजट खर्च होना उपलब्धि नहीं है. असली उपलब्धि तब है, जब उस बजट से बनी सुविधा का दरवाजा बच्चों के लिए वास्तव में खुला हो.

#आगरा #उत्तरप्रदेश #लाइब्रेरी #ग्रामपंचायत #शिक्षा #विद्यार्थी #छात्रअधिकार

–दीपक सिंह सरीन, संस्थापक–PAPA NGO

🎒 बिना बैग स्कूल आएंगे बच्चे, किताबों से कुछ समय की छुट्टी और सीखेंगे जिंदगी के हुनरक्या शिक्षा का मतलब सिर्फ किताब, कॉप...
15/08/2026

🎒 बिना बैग स्कूल आएंगे बच्चे, किताबों से कुछ समय की छुट्टी और सीखेंगे जिंदगी के हुनर

क्या शिक्षा का मतलब सिर्फ किताब, कॉपी, होमवर्क और परीक्षा है? अगर बच्चों को जिंदगी के लिए तैयार करना है, तो उन्हें किताबों के बाहर की दुनिया से भी सीखने का अवसर देना होगा.

अंबेडकरनगर में परिषदीय विद्यालयों के कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए अब हर शैक्षिक सत्र में 10 बैगलेस डे आयोजित करना अनिवार्य किया गया है. इसकी शुरुआत 22 अगस्त से होने की बात कही गई है.

इन दिनों बच्चे बिना स्कूल बैग के विद्यालय आएंगे और खेल, कला, रचनात्मकता, व्यावहारिक ज्ञान तथा जीवन कौशल से जुड़ी गतिविधियों में हिस्सा लेंगे.

🎨 किताबों से बाहर भी है सीखने की बड़ी दुनिया

खबर के मुताबिक निर्धारित शनिवारों को बच्चों को गतिविधि आधारित शिक्षा से जोड़ा जाएगा. विज्ञान प्रयोग, योग, खेलकूद, कला एवं हस्तशिल्प, पौधरोपण, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण जैसी गतिविधियां कराई जाएंगी.

इतना ही नहीं, विद्यार्थियों को स्थानीय शिल्पकारों, कारीगरों और विभिन्न व्यवसायों से परिचित कराने का भी प्रयास किया जाएगा.

14 नवंबर को आयोजित बाल मेले में विद्यार्थी अपने प्रोजेक्ट भी प्रस्तुत करेंगे.

😊 बच्चों पर रटने का दबाव कम करने की कोशिश

इस पहल का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य बच्चों पर लगातार पढ़ाई और रटने के दबाव को कम करना है. बच्चों को अपनी रुचि पहचानने, कुछ नया करने और खेल खेल में सीखने का अवसर मिलेगा.

प्रत्येक विद्यालय को इन गतिविधियों के संचालन के लिए 6,500 रुपये की धनराशि उपलब्ध कराए जाने की बात भी खबर में कही गई है.

🤔 शिक्षा पर एक विचार

PAPA NGO लंबे समय से मानता है कि बच्चे केवल अंक और रिपोर्ट कार्ड बनाने की मशीन नहीं हैं.

बैगलेस डे जैसी पहल तभी सार्थक होगी, जब यह केवल सरकारी आदेश, फोटो और कागजी रिकॉर्ड तक सीमित न रह जाए. स्कूलों में वास्तव में बच्चों को खुलकर सीखने, प्रयोग करने, खेलने और अपनी प्रतिभा पहचानने का अवसर मिले.

एक सवाल अभिभावकों से भी है.

क्या ऐसी व्यवस्था केवल सरकारी विद्यालयों तक सीमित रहनी चाहिए, या निजी स्कूलों में भी निश्चित बैगलेस डे और जीवन कौशल आधारित गतिविधियां अनिवार्य होनी चाहिए?

बच्चों के कंधों से कुछ दिन किताबों का बोझ उतारकर अगर हम उन्हें जिंदगी को समझने का मौका दे सकें, तो शायद शिक्षा का उद्देश्य और भी सार्थक हो सकता है.

#अंबेडकरनगर #उत्तरप्रदेश #बैगलेसडे #स्कूलशिक्षा #जीवनकौशल #विद्यार्थी

–दीपक सिंह सरीन, संस्थापक–PAPA NGO

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