15/08/2026
🏫 केंद्रीय विद्यालय घुमारवीं को मिली बड़ी राहत, अब एक ही परिसर में चलेंगी तीसरी से दसवीं तक की कक्षाएं
बच्चों की पढ़ाई अलग अलग परिसरों में बंटी हो तो परेशानी केवल विद्यार्थियों की नहीं होती. अभिभावक, शिक्षक और स्कूल प्रबंधन सभी को इसका असर झेलना पड़ता है.
हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में केंद्रीय विद्यालय घुमारवीं के विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए राहत की खबर है. विद्यालय को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक कन्या विद्यालय घुमारवीं के परिसर में आठ कमरे उपलब्ध करा दिए गए हैं.
इन कमरों में अब कक्षा 3 से 10 तक के विद्यार्थियों की पढ़ाई शुरू कर दी गई है.
📚 लंबे समय से जगह की समस्या से जूझ रहा था विद्यालय
खबर के मुताबिक कमरों की कमी के कारण केंद्रीय विद्यालय की सभी कक्षाओं को एक ही परिसर में संचालित करना संभव नहीं हो पा रहा था.
कक्षा 1 और 2 की पढ़ाई अभी भी केंद्रीय विद्यालय के पुराने परिसर में संचालित हो रही है, जबकि तीसरी से दसवीं तक की कक्षाएं अब कन्या विद्यालय परिसर में शुरू हो गई हैं.
विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि यदि दो से तीन और कमरे उपलब्ध हो जाएं तो शेष कक्षाओं को भी वहां स्थानांतरित किया जा सकता है. इसके बाद पूरा विद्यालय एक ही परिसर से संचालित हो सकेगा.
👧 बच्चों के साथ अभिभावकों को भी राहत
अलग अलग स्थानों पर कक्षाएं चलने से विद्यार्थियों के साथ शिक्षकों और विद्यालय प्रबंधन को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था.
खबर के अनुसार करीब 13 वर्षों से केंद्रीय विद्यालय घुमारवीं मंदिर की सराय स्थित भवन से संचालित हो रहा है. पिछले वर्ष भारी बारिश के दौरान पुराने भवन में दरारें आने के बाद व्यवस्था प्रभावित हुई थी और कुछ कक्षाओं को दूसरे विद्यालय परिसर में स्थानांतरित करना पड़ा था.
अब आठ कमरे मिलने से समस्या काफी हद तक कम हुई है.
🤔 आगे क्या होना चाहिए?
अस्थायी व्यवस्था राहत जरूर देती है, लेकिन बच्चों की शिक्षा के लिए स्थायी और सुरक्षित विद्यालय परिसर सबसे जरूरी है.
विद्यालय को यदि तीन और कमरे उपलब्ध हो जाते हैं तो अगले शैक्षणिक सत्र से कक्षा 1 और 2 को भी इसी परिसर में लाने की उम्मीद जताई गई है.
PAPA NGO का मानना है कि बच्चों की पढ़ाई के लिए पर्याप्त कक्ष, सुरक्षित भवन और एक व्यवस्थित परिसर कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि शिक्षा की बुनियादी आवश्यकता है.
📢 एक जरूरी संदेश
सरकार और संबंधित विभाग को ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए कि किसी भी विद्यालय के बच्चों की पढ़ाई केवल भवन या कमरों की कमी के कारण प्रभावित न हो.
आठ कमरे मिलना राहत की शुरुआत है. अब प्रयास यह होना चाहिए कि केंद्रीय विद्यालय घुमारवीं के सभी बच्चों को जल्द से जल्द एक ही सुरक्षित और व्यवस्थित परिसर में पढ़ने का अवसर मिले.
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–दीपक सिंह सरीन, संस्थापक–PAPA NGO