19/05/2026
महाभारत में एक घटना आती है —
जब कर्ण युद्धभूमि में घायल पड़ा था,
तब श्रीकृष्ण उसके पास गए और पूछा —
“कर्ण,
जीवन भर तुम्हारे साथ अन्याय हुआ।
जन्म से अपमान मिला,
अपनों का प्रेम नहीं मिला,
फिर भी तुम्हारे भीतर इतना क्रोध क्यों नहीं है?”
कर्ण मुस्कुराया और बोला —
“क्रोध इस बात का नहीं कि
मेरे साथ क्या हुआ…
दर्द इस बात का है कि
मैंने जिन लोगों के लिए सब कुछ दिया,
एक दिन वही लोग मुझे गलत समझ गए।”
कुछ क्षण के लिए
पूरा युद्धक्षेत्र शांत हो गया।
क्योंकि जीवन का सबसे बड़ा दुख
हार नहीं होता…
बल्कि अपने इरादों पर सवाल उठते देखना होता है।
जब आपकी नीयत साफ हो,
लेकिन लोग फिर भी आपको गलत समझें…
वह चोट सबसे गहरी होती है।
लेकिन माधव कहते हैं —
“समय से बड़ा कोई न्यायाधीश नहीं।”
लोग शब्दों से भ्रम पैदा कर सकते हैं,
लेकिन समय हमेशा सत्य को सामने ले आता है। ✨
– Praveen Speaks