Nyay Chkra Foundation

Nyay Chkra Foundation निष्पक्ष न्याय

13/05/2026
07/05/2026

न्याय चक्र फाउंडेशन संस्थापक एंव राष्ट्रीय अध्यक्ष हरे कृष्ण पांडे (एडवोकेट) इलाहाबाद हाइकोर्ट

07/05/2026

न्याय चक्र फाउंडेशन की ओर से उत्तरप्रदेश के जिला हाथरस में नारी शक्ति जागरूकता अभियान

07/05/2026

न्याय चक्र फाउंडेशन अपने उद्देश्य गतिविधियों और नियमों पर आधारित हर समय संघर्षशील।आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून के शासन के तहत अदालतों को न्याय एवं अन्याय में फर्क करने का अधिकार हासिल हैं। सही क्या है तथा गलत क्या है यह अदालत विधान की पुस्तकों के आधार पर तय करती हैं। आज लम्बित मामलों की संख्या को देखकर कहा जा सकता है इंसाफ चाहने वाले पीड़ित लोगों की संख्या दिन ब दिन बढ़ती जा रही हैं। न्याय की देरी व अभाव ही इसकी मांग को उतरोत्तर बढ़ा रहा हैं। हमारे देश की विधायी व्यवस्था में न्याय की शीर्षस्थ संस्था न्यायालय हैं स्वाभाविक रूप से सभी स्तरों पर उत्पन्न न्याय की अभिलाषा यहाँ एकत्रित हो जाती हैं। जिसका अर्थ है कि न्यायालय में कई वर्षों से जमा विचाराधीन मामले इस बात का प्रमाण है कि न्यायालय न्याय प्राप्ति के विश्वसनीय स्रोत हैं। मगर जेहन में एक सवाल यह भी आता है क्या न्याय प्रणाली मात्र अदालतों तक ही सिमित हैं। क्या हमारें समाज में इसके अतिरिक्त अन्य न्यायिक संस्थाओं की आवश्यकता या व्यवस्था हैं। देश में अलग अलग स्तरों पर मनमुटाव रोकने और व्यवस्था व्यवस्था बहाल करने के लिए अलग अलग निकाय हैं। जिनमें पुलिस प्रशासन पंचायत स्थानीय शासन आदि ऐसे संस्थान है जो अपनी सीमाओं में न्यायिक मामलों की सुनवाई करते हैं। अपने कार्यक्षेत्र के बाहर के मामले को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किये जाने की व्यवस्था कायम हैं। एक अनुमान के मुताबिक़ भारत में उच्च न्यायालय एक मुकदमें का निर्णय सुनाने में लगभग चार वर्ष से अधिक का समय लेते हैं। उच्च न्यायालय से निम्न स्तरीय अदालतों का हाल तो इससे कही बुरा हैं। जिला कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक चलने वाले एक मुकदमें का अंतिम फैसला 7 से 10 साल में आता हैं। राजस्थान, इलाहाबाद, कर्नाटक और कलकत्ता हाईकोर्ट देश के सबसे अधिक समय लेने वाले कोर्ट बन चुके हैं। वही निचली अदालतों की धीमी कार्यवाहियों वाले राज्यों की बात करे तो इसके गुजरात पहले पायदान पर हैं। न्यायालय की कार्यप्रणाली को लेकर एक संस्था ने शोध किया जिसके नतीजे हैरतअंगेज करने वाले हैं। इस शोध में यह बात सामने आई कि किसी मुकदमें में लगने वाले कुल समय का 55 प्रतिशत हिस्सा मात्र तारीख और समन में व्यय हो जाता हैं शेष मात्र 45 प्रतिशत समय में ही मुकदमें की सुनवाई होती हैं।
न्याय चक्र फाउंडेशन
जय हिंद जय भारत
जय राष्ट्र

10/01/2026

Very sad, our Managing Editor of Unna Crime, Jaideep Dubey, National President of Vishv Vyapi Brahmin Ekta Mahasangh is no more among us today, while serving the society impartially, he has dedicated some memories to all of us. May God give peace to his soul and give courage to his sad family to bear the difficult times. Om Shanti Shanti Om

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