10/10/2025
“गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णुः, गुरु देवो महेश्वरः।
गुरु साक्षात् परब्रह्म, तस्मै श्री गुरवे नमः॥”
जब प्रेमानंद जी महाराज ने अपने पूज्य गुरुदेव का चरणामृत लिया,
उनकी आँखों से आँसू अपने आप बह निकले —
वो आँसू भक्ति के थे, कृतज्ञता के थे,
वो उस प्रेम की भाषा थे जो शब्दों से परे है।
उस क्षण में लगा जैसे स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश
एक ही रूप में आकर आशीर्वाद बरसा रहे हों।
गुरु के चरणों में झुकना — मानो ईश्वर को छू लेना।
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गुरु और शिष्य का यह मिलन — प्रेम, समर्पण और ईश्वरत्व का संगम है।
जय गुरु देव 🙏
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