08/06/2026
मित्रों ! आज हम तंत्र मन्त्र की बहुत सी बातें बहुत जोर शोर से करते हैं , लेकिन तंत्र मन्त्र की वास्तविक स्थिति क्या है ? उसे अब तक नहीं समझ पाये ! तंत्र सदैव एक सा नहीं रहता ! सनातन एक सा रहने वाला कोई समय , स्थितियां और युग के अनुसार उसमे भी परिवर्तन आते रहते है ! वर्तमान समय में तंत्र मन्त्र एक पहेली बना हुआ है जिसकी सर्वसम्मत परिभाषा कठिन है ! तंत्र शास्त्र की जड़ में कर्म है और कर्म की ही उपज है तंत्र ! पूरा का पूरा तंत्र कर्म पर टिका है ! श्रीमदभागवद में एक कथा आती है जिसमे एक राजा था ! उस राजा की भेंट किसी सन्यासी से होती है और राजा प्रश्न करता है कि आप स्वयं में खोये हुए हैं एक विचार रहित व्यक्ति लगते हैं , लेकिन आपके मुख की आभा यह बता रही है कि आप एक प्रज्ञावान और पूर्ण जाग्रत व्यक्तित्व हैं ! आपके गुरु कौन है ? और आपने क्या क्या प्राप्त कर लिया है ? सन्यासी ने उत्तर दिया कि मेरे दो नहीं चोबीस गुरु हैं ! और प्रत्येक से मैंने कुछ ना कुछ प्राप्त किया है अर्थात साधक के जीवन में ज्ञान प्राप्ति ही महान उद्देश्य है ! अगर साधक में आकर्षण नहीं है , मुख पर ज्ञान का तेज नहीं है , वाणी में ओज नहीं है , शरीर में खिचाव नहीं है तो वह एक बेकार वस्तु है ‘तांत्रिक’ नहीं है ! तांत्रिक सबसे पहले कहता है = छाप (अंगूठी) तिलक सब धर दीनी रे तोसे नयना मिलायके ! जब सिद्धि का नूर देख लिया तो फ़िर किसी और चीज़ को देखने की क्या आवश्यकता है ? कहा है = नहीं मोहताज जेवर की जिसे खूबी खुदा ने दी ! बहल ने यह आभूषण , ये रंग बिरंगे वस्त्र , ये माला कंठी तिलक सब त्याग दिया मैंने जब उसकी झलक देख ली तो मुझे और क्या देखना शेष है ? आप इस बात को समझ लें , मुझे भटकना नहीं है क्योंकि भटकने वालों को खजाने नहीं मिलते ! मानव शरीर जैसा अन्य कोई शरीर नहीं अगर साधक मान्त्रिक हो ! मानव के कर्म जैसा अन्य किसी प्राणी का कर्म नहीं अगर उसमे साधना ना हो ? मानव की बुद्धि जैसी अन्य किसी प्राणी की बुद्धि नहीं अगर निर्मल ना हो ! साधना से ही सब कुछ मिला है और मिल सकता है किन्तु सबकुछ देकर भी ‘सिद्धि’ नहीं मिली तो इस जीवन से मृत्यु सबसे उत्तम विकल्प है ! साधना और ज्ञान के आभाव में मुझे ऐसी ‘मृत्यु’ स्वीकार नहीं है ! मुझे ऐसी मृत्यु चाहिए कि सब रोयें और मैं हंसू चाहता हूँ एक ऐसा समय भी आये जब मुझको मेरे बाद ज़माना खोजे ! स्वार्थी चेहरे के मुख पर मुस्कान आ ही नहीं सकती और साधक के चेहरे पर भी मुस्कान नहीं आती ! तांत्रिक के मुख पर मुस्कान आ भी नहीं सकती ! अगर वास्तविक अर्थों में ‘तांत्रिक’ है तो धीर और गंभीर रहेगा ! बाहर है ही नहीं उसके तो आएगा क्या क्योकि जो कुछ है तो वह दिखाएगा नहीं ! स्वार्थी , लोभी , प्रदर्शनप्रिय साधक हर समय एक ही बात सोचेगा कि मैं कैसे दूसरे को लूटूं ? कैसे झपटू ? उसके ह्रदय में साधना की ज्ञान की हिलोर उठ ही नहीं सकती ! पापाचार , योनाचार , व्यभिचार , धन हड़पना तंत्र नहीं है ! यह तो राक्षसी प्रवृति है ! तंत्र का सिद्धांत है जिसने सबकुछ खो दिया उसने सब पा लिया और जिसने दुनियवी वस्तुएं पा ली उसने सबकुछ खो दिया ! मेरी इस बात पर ध्यान दें = समय कम है , साधना आवश्यक है और अवसर भी यही है ! महत्त्व इस बात का नहीं कि कितना जीए ? महत्त्व इस बात का है कि कैसे जीए ? साधक के पास हालांकि बहुमूल्य वस्तुएं तो हैं और हो भी सकती हैं , किन्तु रत्न तो केवल साधनामय जीवन ही है इसलिए अवसर का सदुपयोग करो ! साधना से बडकर कोई धन नहीं है परन्तु उसके महत्त्व को ना समझकर व्यर्थ खोते जा रहे हैं ! समय से बढ़कर और कोई बहुमूल्य वस्तु नहीं किन्तु यह तुच्छ विषय भोगों में डूबकर नष्ट होते जा रहे हैं ! तंत्र मार्ग में छलिये , बहरूपिये , अंतरंग चालबाज़ बहुत हैं , अगर इनसे बच सकते हो तो बचो ! झूठे व्यक्ति ही कसम खाते हैं , सच्चे लोग तो कहते नहीं करके दिखलाते हैं ! गारंटी वो देगा जिसके पास देने को कुछ नहीं होगा ? कभी आजमा कर देख लेना ! अधिक जानने के लिए और मेरी पुस्तक “तंत्र भैरवी मिन्ही” ( उपन्यास रूप ) , टोना टोटका गंडे , तावीज़ , नज़र , डोरा , भभूत ,सम्पूर्ण ज्योतिष विद्या एवं अप्सरा साधना रहस्य प्राप्त एवं गोपनीय तांत्रिक मुद्राएँ और मेरा बिल्कुल नया नावेल ‘’बिन फेरे हम तेरे’’ और ‘’क्या यही प्यार है ?’’ प्राप्त करने अथवा वास्तु विजिट के लिए जयेश भाई गायवाला से आज ही सूरत ( गुजरात ) मोबाइल मोबाइल न. 09825574899 पर सम्पर्क करें कृपया वाटस एप्प ( WHATTS APP . ) नहीं करें ! WHATT’S APP करने पर आपके निवेदन पर कोई विचार नहीं किया जायेगा ! सनसनीखेज़ – रोचक – रोमांचक – रहस्यमय – होरर तंत्र और ज्ञानवर्धक काल्पनिक कथा / लेख के लिए मेरे पेज “तांत्रिक बहल की तंत्र यात्रायें” में मेरी सर्वथा नयी तंत्र मन्त्र कथा “तांत्रिक पण्डित” पढ़ें अर्थात लोमहर्षक घटनाओं की दास्तान या जिसने खोजा है उसने ही इस रहस्य को पाया है ! ज्ञान प्राप्ति के लिए यह उक्ति एकदम सही चरितार्थ होती है , स्वयं पढ़ें और अन्य तंत्र प्रेमियों को भी पढने के लिए प्रेरित करें ! U . TUBE पर मेरे चैनल TA**RA SABKE LIYE MISSION ( tm ) में मुझे लाइव देखें और लाइक , शेयर , फ़ॉलो और सब्सक्रायिब भी करें ! ! शेष फिर ! गुरु स्मरण !! हरी ॐ प्रभु !!!.