Tantra Sabke liye Mission

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Tantra Sabke liye Mission “TA**RA SABKE LIYE MISSION” as the name suggests is a non-profit initiative dedicated to providi
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08/06/2026

मित्रों ! आज हम तंत्र मन्त्र की बहुत सी बातें बहुत जोर शोर से करते हैं , लेकिन तंत्र मन्त्र की वास्तविक स्थिति क्या है ? उसे अब तक नहीं समझ पाये ! तंत्र सदैव एक सा नहीं रहता ! सनातन एक सा रहने वाला कोई समय , स्थितियां और युग के अनुसार उसमे भी परिवर्तन आते रहते है ! वर्तमान समय में तंत्र मन्त्र एक पहेली बना हुआ है जिसकी सर्वसम्मत परिभाषा कठिन है ! तंत्र शास्त्र की जड़ में कर्म है और कर्म की ही उपज है तंत्र ! पूरा का पूरा तंत्र कर्म पर टिका है ! श्रीमदभागवद में एक कथा आती है जिसमे एक राजा था ! उस राजा की भेंट किसी सन्यासी से होती है और राजा प्रश्न करता है कि आप स्वयं में खोये हुए हैं एक विचार रहित व्यक्ति लगते हैं , लेकिन आपके मुख की आभा यह बता रही है कि आप एक प्रज्ञावान और पूर्ण जाग्रत व्यक्तित्व हैं ! आपके गुरु कौन है ? और आपने क्या क्या प्राप्त कर लिया है ? सन्यासी ने उत्तर दिया कि मेरे दो नहीं चोबीस गुरु हैं ! और प्रत्येक से मैंने कुछ ना कुछ प्राप्त किया है अर्थात साधक के जीवन में ज्ञान प्राप्ति ही महान उद्देश्य है ! अगर साधक में आकर्षण नहीं है , मुख पर ज्ञान का तेज नहीं है , वाणी में ओज नहीं है , शरीर में खिचाव नहीं है तो वह एक बेकार वस्तु है ‘तांत्रिक’ नहीं है ! तांत्रिक सबसे पहले कहता है = छाप (अंगूठी) तिलक सब धर दीनी रे तोसे नयना मिलायके ! जब सिद्धि का नूर देख लिया तो फ़िर किसी और चीज़ को देखने की क्या आवश्यकता है ? कहा है = नहीं मोहताज जेवर की जिसे खूबी खुदा ने दी ! बहल ने यह आभूषण , ये रंग बिरंगे वस्त्र , ये माला कंठी तिलक सब त्याग दिया मैंने जब उसकी झलक देख ली तो मुझे और क्या देखना शेष है ? आप इस बात को समझ लें , मुझे भटकना नहीं है क्योंकि भटकने वालों को खजाने नहीं मिलते ! मानव शरीर जैसा अन्य कोई शरीर नहीं अगर साधक मान्त्रिक हो ! मानव के कर्म जैसा अन्य किसी प्राणी का कर्म नहीं अगर उसमे साधना ना हो ? मानव की बुद्धि जैसी अन्य किसी प्राणी की बुद्धि नहीं अगर निर्मल ना हो ! साधना से ही सब कुछ मिला है और मिल सकता है किन्तु सबकुछ देकर भी ‘सिद्धि’ नहीं मिली तो इस जीवन से मृत्यु सबसे उत्तम विकल्प है ! साधना और ज्ञान के आभाव में मुझे ऐसी ‘मृत्यु’ स्वीकार नहीं है ! मुझे ऐसी मृत्यु चाहिए कि सब रोयें और मैं हंसू चाहता हूँ एक ऐसा समय भी आये जब मुझको मेरे बाद ज़माना खोजे ! स्वार्थी चेहरे के मुख पर मुस्कान आ ही नहीं सकती और साधक के चेहरे पर भी मुस्कान नहीं आती ! तांत्रिक के मुख पर मुस्कान आ भी नहीं सकती ! अगर वास्तविक अर्थों में ‘तांत्रिक’ है तो धीर और गंभीर रहेगा ! बाहर है ही नहीं उसके तो आएगा क्या क्योकि जो कुछ है तो वह दिखाएगा नहीं ! स्वार्थी , लोभी , प्रदर्शनप्रिय साधक हर समय एक ही बात सोचेगा कि मैं कैसे दूसरे को लूटूं ? कैसे झपटू ? उसके ह्रदय में साधना की ज्ञान की हिलोर उठ ही नहीं सकती ! पापाचार , योनाचार , व्यभिचार , धन हड़पना तंत्र नहीं है ! यह तो राक्षसी प्रवृति है ! तंत्र का सिद्धांत है जिसने सबकुछ खो दिया उसने सब पा लिया और जिसने दुनियवी वस्तुएं पा ली उसने सबकुछ खो दिया ! मेरी इस बात पर ध्यान दें = समय कम है , साधना आवश्यक है और अवसर भी यही है ! महत्त्व इस बात का नहीं कि कितना जीए ? महत्त्व इस बात का है कि कैसे जीए ? साधक के पास हालांकि बहुमूल्य वस्तुएं तो हैं और हो भी सकती हैं , किन्तु रत्न तो केवल साधनामय जीवन ही है इसलिए अवसर का सदुपयोग करो ! साधना से बडकर कोई धन नहीं है परन्तु उसके महत्त्व को ना समझकर व्यर्थ खोते जा रहे हैं ! समय से बढ़कर और कोई बहुमूल्य वस्तु नहीं किन्तु यह तुच्छ विषय भोगों में डूबकर नष्ट होते जा रहे हैं ! तंत्र मार्ग में छलिये , बहरूपिये , अंतरंग चालबाज़ बहुत हैं , अगर इनसे बच सकते हो तो बचो ! झूठे व्यक्ति ही कसम खाते हैं , सच्चे लोग तो कहते नहीं करके दिखलाते हैं ! गारंटी वो देगा जिसके पास देने को कुछ नहीं होगा ? कभी आजमा कर देख लेना ! अधिक जानने के लिए और मेरी पुस्तक “तंत्र भैरवी मिन्ही” ( उपन्यास रूप ) , टोना टोटका गंडे , तावीज़ , नज़र , डोरा , भभूत ,सम्पूर्ण ज्योतिष विद्या एवं अप्सरा साधना रहस्य प्राप्त एवं गोपनीय तांत्रिक मुद्राएँ और मेरा बिल्कुल नया नावेल ‘’बिन फेरे हम तेरे’’ और ‘’क्या यही प्यार है ?’’ प्राप्त करने अथवा वास्तु विजिट के लिए जयेश भाई गायवाला से आज ही सूरत ( गुजरात ) मोबाइल मोबाइल न. 09825574899 पर सम्पर्क करें कृपया वाटस एप्प ( WHATTS APP . ) नहीं करें ! WHATT’S APP करने पर आपके निवेदन पर कोई विचार नहीं किया जायेगा ! सनसनीखेज़ – रोचक – रोमांचक – रहस्यमय – होरर तंत्र और ज्ञानवर्धक काल्पनिक कथा / लेख के लिए मेरे पेज “तांत्रिक बहल की तंत्र यात्रायें” में मेरी सर्वथा नयी तंत्र मन्त्र कथा “तांत्रिक पण्डित” पढ़ें अर्थात लोमहर्षक घटनाओं की दास्तान या जिसने खोजा है उसने ही इस रहस्य को पाया है ! ज्ञान प्राप्ति के लिए यह उक्ति एकदम सही चरितार्थ होती है , स्वयं पढ़ें और अन्य तंत्र प्रेमियों को भी पढने के लिए प्रेरित करें ! U . TUBE पर मेरे चैनल TA**RA SABKE LIYE MISSION ( tm ) में मुझे लाइव देखें और लाइक , शेयर , फ़ॉलो और सब्सक्रायिब भी करें ! ! शेष फिर ! गुरु स्मरण !! हरी ॐ प्रभु !!!.

07/06/2026

मित्रों ! तंत्र अर्थ विशाल , तंत्र जितना वो सामने है उससे कहीं अधिक गुप्त है ! तंत्र रूप सागर में जितने मोती खोजते जाओगे उससे भी अधिक मिल सकते हैं , यह सम्भावना बनी रहेगी ! तंत्र का सहज अर्थ है स्वयं के साथ उन गुप्त , रहस्यमयी शक्तियों को भी साधना , तंत्र का अर्थ है अध्ययन करना ! कुछ खोखली बातें , कुछ सुहावने आदर्शों कुछ कभी ना पूरे होने वाले प्रवचनों की स्वर तरंगो में हम स्वयं को कुछ समय के लिए भुलादें लेकिन वही खोखलापन फ़िर आपके सामने आकर खड़ा हो जाता है ! मैंने अनुभव किया है कुछ लोग स्वयं के साथ छलावा तो करते ही हैं , साथ ही श्रद्धालु लोगों को भी नहीं बख्शते ! मैंने देखा है जो ऊपर से जितने व्यस्त होते हैं वह भीतर से उतने ही खाली होते हैं , जिन्हें हम बाहरी रूप से प्रसन्न और खुशमिजाज़ समझते हैं भीतर से वह उतने ही दुखी होते हैं ! स्वच्छ रंग बिरंगे , सजे संवरे , इठलाते , गाते बजाते अनुभव करते हैं वास्तव में वह उतने ही भीतर से सहमे होते हैं ! प्रेम की सुगन्ध और प्रसन्नता -यह दो ही शब्द हैं जिनसे हमारा परिचय तंत्र कराता है ! कई लोग किसी असाध्य रोग से पीड़ित हो जाते हैं ! वह यही सोचते है हम कोई ना कोई चिकित्सीय उपाय खोज लेंगे यह उसी शुतुरमुर्ग की तरह सोचना है जो आंधी आते देख सिर को रेत में छुपा लेता है और सोच लेता है , अब खतरा टल गया ! यह उसकी मिथ्या सोच है ! हमारे ऋषि मुनि सेकड़ों वर्ष बीहड़ जंगलों में , उन्नत पहाड़ों में गुज़ार देते थे , कभी रोगी नहीं होते थे ! कभी कोई हिंसक जानवर उनपर हमला नहीं करता था ! मृत्यु भी उनकी कुटिया के बाहर खड़ी उनके चलने की प्रतीक्षा करती थी ! यह उनके संयम और तप का बल था ! तंत्र आज भी है , साधक आज भी हैं , लेकिन उनमे संयम और तप का बल कहाँ है ? वह तो केवल गाल बजाना जानते हैं , पुस्तकें ही उनकी गुरु हैं , उन्ही के बल पर एठते हैं ! पुस्तकीय ज्ञान ख़त्म उनका भी ज्ञान ख़त्म ! उनके भीतर किताब बोलती है , लोगों द्वारा बतलाया आधा ज्ञान बोलता है , वह और उनका स्वयं का अर्जित ज्ञान कहाँ बोलता है ? ‘प्रेम’ का तो बीज उनके ह्रदय में लगता कहाँ है ? जो उनमे से प्रेम का झरना फूटे ! साधना करनी है – करो , तंत्र ज्ञान प्राप्त करना है – करो लेकिन वह प्यार सहज और सच्चा होना चाहिए ! झूठ , फरेब के वृक्ष पर केवल विष के फल लगते है अरे मित्र भगवान भी स्वच्छ स्थान पर आते है ! शीघ्र ही गुरु धाम में ‘गुरुपूर्णिमा के साधना शिविर’ का आयोजन होने जा रहा है ! मिशन ने तो आपके लिए साधना और सिद्धि का पवित्र द्वार खोल दिये है अब केवल निश्चय आपको करना है ! सौभाग्य से साधना को , सिद्धि को मापने का कोई यंत्र नहीं होता......कि मेरे पास कितनी शक्ति है और सामने वाले के पास कितनी शक्ति है ? साधना और सिद्धि को पुष्ट करने के लिए साधना शिविर का आयोजन होता है आवश्यकता केवल वहां तक आने की है ! तंत्र में भैरवी चक्र ही नहीं श्री चक्र , आद्या चक्र , शिव चक्र , विष्णु चक्र आदि अनेक प्रकार के चक्रों का विवरण मिलता है ! इनका विवरण उपनिषदों में भी आता है ! आज भैरवी चक्र , तंत्र भैरवी साधना के विषय में मौन ही रहूँगा ! भैरवी साधना , भैरवी चक्र साधना , तंत्र द्वरा कुंडलिनी (सर्पिणी) जागरण पर भी मैं मौन ही रहूँगा ! पूर्ण रुपेंण जानने के लिये मेरी नयी पुस्तक ‘’तंत्र भैरवी जिस्सी’ और वामाचार , अघोर , अघोरी , औघड़ साधना लघु पुस्तिका पढ़ें ! इसके लिए आप जयेश भाई गायवाला से सम्पर्क करें ! अधिक जानने के लिए और मेरी पुस्तक “तंत्र भैरवी मिन्ही” ( उपन्यास रूप ) , टोना टोटका गंडे , तावीज़ , नज़र , डोरा , भभूत ,सम्पूर्ण ज्योतिष विद्या एवं अप्सरा साधना रहस्य प्राप्त एवं गोपनीय तांत्रिक मुद्राएँ और मेरा बिल्कुल नया नावेल ‘’बिन फेरे हम तेरे’’ और ‘’क्या यही प्यार है ?’’ प्राप्त करने अथवा वास्तु विजिट के लिए जयेश भाई गायवाला से आज ही सूरत ( गुजरात ) मोबाइल मोबाइल न. 09825574899 पर सम्पर्क करें कृपया वाटस एप्प ( WHATTS APP . ) नहीं करें ! WHATT’S APP करने पर आपके निवेदन पर कोई विचार नहीं किया जायेगा ! सनसनीखेज़ – रोचक – रोमांचक – रहस्यमय – होरर तंत्र और ज्ञानवर्धक काल्पनिक कथा / लेख के लिए मेरे पेज “तांत्रिक बहल की तंत्र यात्रायें” में मेरी सर्वथा नयी तंत्र मन्त्र कथा “तांत्रिक पण्डित” पढ़ें अर्थात लोमहर्षक घटनाओं की दास्तान या जिसने खोजा है उसने ही इस रहस्य को पाया है ! ज्ञान प्राप्ति के लिए यह उक्ति एकदम सही चरितार्थ होती है , स्वयं पढ़ें और अन्य तंत्र प्रेमियों को भी पढने के लिए प्रेरित करें ! U . TUBE पर मेरे चैनल TA**RA SABKE LIYE MISSION ( tm ) में मुझे लाइव देखें और लाइक , शेयर , फ़ॉलो और सब्सक्रायिब भी करें ! ! शेष फिर ! गुरु स्मरण !! हरी ॐ प्रभु !!!.

04/06/2026

(24) मित्रों ! यूँ तो प्रत्येक कलमकार , मूर्तिकार , कलाकार जो भी वह लिखता है , अथवा बनाता है उसे प्राय: श्रेष्ठ ही समझता है ! उस कहानी का , लेख का , मूर्ती का वास्तविक मूल्य या स्तर तो आलोचना करने वाला आलोचक ही निश्चित करता है ! मैंने यूँ तो अपने लेखकीय जीवन में हज़ारों पुस्तकें और आलेख लिखे लेकिन ‘बिन फेरे हम तेरे’ ‘क्या यही प्यार है ?’ यह दोनों पुस्तकें शुद्ध आत्मीय प्रेम पर आधारित थीं ! इन पुस्तकों को मैंने प्यार की कलम को दिल की स्याही में डुबोकर वक़्त के कागज़ पर लिखा है ! इन पुस्तकों के किरदार मेरे जीवन से जुड़े थे , लेकिन उन्हें कागज़ पर उतारने का अवसर जीवन के दूसरे समय में मिला ! बख्शिन्द्रा शमा मुझे बचपन के दिनों में मिली थी ! तब शायद प्रेम को समझना तो बहुत दूर की बात थी मैं प्रेम का अर्थ भी नहीं समझता था ! प्रेम नाम के पक्षी से मै अनजान था ! ना मैं शमा को जानता था , ना शमा मुझे जानती थी , लेकिन हमारा मन यही कहता था , अब खोज करने की आवश्यकता नहीं है , जिसे मिलना था अब वो मिल गया है ! इसके बाद मेरी दूसरी पुस्तक ‘क्या यही प्यार है ?’ ने आकार लिया ! जिसमे बख्शिन्द्रा ने प्यार को एक नया नाम दिया ! लोगों ने उसे बहुत बहकाने की कोशिश की लेकिन वो अपने प्यार , अपने जनून के साथ चट्टान के समान अडिग खड़ी रही ! यह मेरी जवानी का समय था ! हम प्रेम का ना केवल अर्थ समझते थे वरन उसमे जीना भी शुरू कर दिया था ! इसके बाद मेरी प्रोढावस्था आयी जिसमे उम्र के साथ मिन्ही ने प्रवेश किया ! तंत्र भैरवी मिन्ही जो तंत्र ज्ञान का सागर थी ! वो एक ऐसा सागर थी जो मुंह तक भर तो सकता है लेकिन छलक नहीं सकता था ! मिन्ही और जिस्सी एक सिक्के के दो पहलु थे ! इन्होने मेरा परिचय तंत्र की उच्चतम क्रिया ‘भैरवी साधना’ और ‘भैरवी चक्र साधना’ और कुछ अन्य गोपनीय तंत्र की साधनाओं से कराया ! तब मेरी पुस्तक ‘तंत्र भैरवी मिन्ही’ प्रकाश में आयी ! मिन्ही और जिस्सी ने मेरा परिचय ‘भैरवी साधना’ और ‘तंत्र भैरवी जिस्सी’ से कराया और उन दोनों ने मिलकर मेरी भेंट ‘तंत्र भैरवी साधना’ और ‘भैरवी चक्र साधना’ से करायी ! तब मुझे पता चला तंत्र में सितारों से आगे जहाँ और भी हैं , अभी तंत्र में इम्तिहान और भी हैं ! मिन्ही ने देहरादून में भैरवी साधना का अनुभव कराया और जिस्सी ने भैरवी चक्र साधना का चक्कर मुझे हिमालय की ऊंची बर्फीली चोटी पर समझाया ! मैंने ना केवल तांत्रिक जीवन जिया है सत्य कहूँ तो तंत्र का ज्ञान रस पीया है ! अनेक मेरे अपने लोगों ने मेरे लेखन , मेरे अनुभव की नकल करने की असफल कोशिश की लेकिन निकला क्या चूं चूं का मुरब्बा ! तंत्र भैरवी जिस्सी और तंत्र भैरवी मिन्ही ना केवल पढने की चीज़ हैं वरन ह्रदय में उतारने की चीज़ भी हैं ! मुझे पूरा विश्वास है अपने अथक परिश्रम , अटूट लगन और तंत्र में प्रीती के कारण जयेश भाई गायवाला , डॉ.आर.एस.प्रसाद तांत्रिक , परविज्ञानी जितेन्द्र , पवन कुमार सिन्हा एडवोकेट , स्वामीजी मनोज , बाबा सत्या नन्द दास जिनकी पुस्तक शीघ्र बाज़ार में आने वाली है , तांत्रिक सूरज जो मेरे और मेरी जान के रक्षक हैं , भाई कमल नारायण शर्मा , मनारंजन मोहोंतो एक दिन मेरा हाथ पकड़कर भैरवी साधना , तंत्र भैरवी चक्र साधना अवश्य करेंगे ! अन्यों को तंत्र के समुन्द्र में उल्टे सीधा हाथ पाव मारने दो ! यह करना तो दूर उसका सिरा तक नहीं पा सकेंगे !भैरवी चक्र साधना में पांच , सात या नौ साधक भाग लेते हैं ! कभी कभी साधकों की संख्या इससे अधिक भी हो सकती है ! जब इस तंत्र चक्र में नौ साधक होते हैं तो उनमे ‘’नौ ग्रहों’’ की उर्जा बारी बारी से जगाई जाती है तथा साधकों के विशेष कर्मों पर ज्ञानपूर्वक द्रष्टि केन्द्रित की जाती है ! विशेष बात यह है ‘’भैरवी चक्र’’ का आरम्भ व समापन किसी विशेष स्त्री की पूजा से होता है ! जो नग्नावस्था में चक्र के मध्य में होती है ! इस सिद्धांत का पालन किसी भी युवा लड़की के द्वारा भी किया जा सकता है ! इसमें आयु का कोई बंधन नहीं है , बंधन केवल सौंदर्य का है ! वह भैरवी चक्र पूजा में भाग नहीं लेती है ! वह केवल पुष्प माला , सुगन्ध , ऋतुफल , भोजन , वस्त्र आदि वस्तुएं ही प्राप्त कर सकती है ! इस सिद्धांत को प्रत्येक भैरवी को जानना चाहिए ! यह सत्य है कि भैरवी चक्र का अभ्यास अत्यंत कठिन है , क्योंकि किसी साधक की मानसिकता होती है कि वह प्रथम अवसर पर ही स्वयं को संतुष्ट करले ! यह सोच सर्वथा गलत है कि भैरवी चक्र साधना और भैरवी साधना पाप की ओर धकेलने वाली है ! अत: जो साधक इस चक्र में भाग लेना चाहते हैं उन्हें चाहिए कि वह चक्र कर्म का अभ्यास पहले अच्छी प्रकार करलें ! एक अन्य गोपनीय अभ्यास ‘खुगहरी’ है ! {आकाश में उड़ने वाला} इसको साधकों ने किया तो क्या होगा ? शायद कभी सुना भी नहीं होगा ! ‘चिरनड संहिता इस तकनिक को समझाती है ! यहाँ यह विषय नहीं है , इसलिए मौन ही रहूँगा ! भैरवी चक्र का गोपनीय ज्ञान फ़िर कभी दूंगा , वह भी केवल योग्य साधकों को , स्वस्थ रहा तो पाहंदा या सूरत में ! क्या आप जानते हैं ? हाथ में सभी प्रकार के चिकित्सीय द्रव्य होते हैं जो सम्पूर्ण शरीर को ध्यानपूर्वक छूने से पूर्ण रूप से साधना का फल देते हैं ! इन दो हाथों की दस शाखाएं अपने कोमल संसर्ग से सभी रोगों को दूर भगा देती हैं ! कुछ अज्ञानी साधक इस आलिंगन को बुरा समझते हैं लेकिन ‘कालिका पुराण’ कहता है = किसी जोड़े की आलिंगन में कल्पना , एक आठ पंखुड़ी वाले स्थल को ॐ से विस्फुटीत होते ह्रदय चक्र में देखना ! आठ भागों जिनके केन्द्र में ॐ है पंखुड़ी के सिरे से निकलकर कमल के चक्कर लगाते हैं ! एक जल तथा दूसरी अग्नि की गोलाई इस कल्पना के चारों ओर घूमकर ब्रह्म सम्बन्धी अवधारणा को पृथक करती है ! इस प्रकार ध्यान लगाने से ईश्वर को ईश्वर के समीप लाकर सब कुछ पायेगा तथा आध्यत्मिक बनकर स्वयं में ईश्वर को रचा जा सकता है ! क्या आपको पता है ? उर्जा शरीर के नौ छिद्रों से बाहर जाती है = मुख , नाक , दो आँख , दो कान , कपाल , गुदा तथा सम्भोग अंग ! इस ह्रास को रोकने की अनेक विधियाँ हैं ! इस पर चर्चा फ़िर कभी ! मैं जानता हूँ विषय जटिल है , लेकिन अगर आपने कुंडलिनी जागरण , भैरवी चक्र साधना को करनी है तो पहले इसे समझना होगा ! अधिक जानने के लिए और मेरी पुस्तक “तंत्र भैरवी मिन्ही” ( उपन्यास रूप ) , टोना टोटका गंडे , तावीज़ , नज़र , डोरा , भभूत ,सम्पूर्ण ज्योतिष विद्या एवं अप्सरा साधना रहस्य प्राप्त एवं गोपनीय तांत्रिक मुद्राएँ और मेरा बिल्कुल नया नावेल ‘’बिन फेरे हम तेरे’’ और ‘’क्या यही प्यार है ?’’ प्राप्त करने अथवा वास्तु विजिट के लिए जयेश भाई गायवाला से आज ही सूरत ( गुजरात ) मोबाइल मोबाइल न. 09825574899 पर सम्पर्क करें कृपया वाटस एप्प ( WHATTS APP . ) नहीं करें ! WHATT’S APP करने पर आपके निवेदन पर कोई विचार नहीं किया जायेगा ! सनसनीखेज़ – रोचक – रोमांचक – रहस्यमय – होरर तंत्र और ज्ञानवर्धक काल्पनिक कथा / लेख के लिए मेरे पेज “तांत्रिक बहल की तंत्र यात्रायें” में मेरी सर्वथा नयी तंत्र मन्त्र कथा “तांत्रिक पण्डित” पढ़ें अर्थात लोमहर्षक घटनाओं की दास्तान या जिसने खोजा है उसने ही इस रहस्य को पाया है ! ज्ञान प्राप्ति के लिए यह उक्ति एकदम सही चरितार्थ होती है , स्वयं पढ़ें और अन्य तंत्र प्रेमियों को भी पढने के लिए प्रेरित करें ! U . TUBE पर मेरे चैनल TA**RA SABKE LIYE MISSION ( tm ) में मुझे लाइव देखें और लाइक , शेयर , फ़ॉलो और सब्सक्रायिब भी करें ! ! शेष फिर ! गुरु स्मरण !! हरी ॐ प्रभु !!!.

01/06/2026

मित्रों ! एक बार मुझे एक शुद्ध व्यवसायी ज्योतिषी मित्र के पास जाने का अवसर प्राप्त हुआ ! मैंने उनके व्यक्तित्व की इस व्यवसायीक दुर्बुद्धि को जानने के लिए मैंने उनसे पूछा कि वैवाहिक विलम्ब की इस निरन्तर बडती हुई समस्या के निदान स्वरूप आप क्या बतलाते हैं ? मेरे इस प्रश्न के उत्तर में उन्होंने तत्काल कहा कि आज के सन्दर्भ में ज्योतिषी को व्यवसायिक होना ही चाहिए , अन्यथा उनका कोई मूल्य नहीं होता ! मैं तो कन्या के पिता से कहता हूँ कि इस कन्या के जन्मांग में तीव्र ग्रहदोष एवं अन्य दोष हैं , वैवाहिक जीवन में अनेकानेक बाधाएं हैं ! विवाह से पूर्व एक तांत्रिक अनुष्ठान करना होगा जिसके लिए इतना व्यय होगा ! इसके पश्चात एक वर्ष तक आपको भी प्रयत्न करना होगा ! वह अभिभावक जो कन्या के विवाह के लिये प्रयत्नशील हैं , वह कठोर परिश्रम करके एक वर्ष के भीतर जैसे तैसे वर प्राप्त कर ही लेते हैं और तब इसका श्रेय मुझे और मेरे अनुष्ठान को प्राप्त होता है { संभवत: जो कभी किया ही जाता नहीं है } अगर कभी अनुमान के विपरीत होता है तो उसका उत्तर देने के लिए अनेकाएक बहाने तो हैं ही ! ज्योतिषी मित्र का यह उत्तर सुनकर मैं अवाक़ रह गया ! ज्योतिषी को अर्थ के अनर्थकारी रूप से जोड़ने वाले ज्योतिषियों की एक बहुत बड़ी संख्या है ! निराश माँ बाप के पास विश्वास करने के अतिरिक्त और उपाय ही क्या है ? मेरे एक परिजन हैं जब तक 5 – 10 ज्योतिषियों से ना पूछ लें तब तक उन्हें विश्वास ही नहीं होता ! आपका एक उपाय असफल और अनाड़ी ज्योतिषी के दस उपाय राम के बाण ! अपना अगर अपने व्यय पर आपका उपाय करता है तो लोभी लालची और अगर कोई ज्योतिषी काफी धन लेकर उपाय करता है और अगर असफल हो जाता है तो अपना भाग्य ! अच्छा ज्योतिषी बनने के लिए माँ सरस्वती की साधना करें ! इस फलदाई साधना को करने के लिये सफ़ेद हक़ीक की अभिमंत्रित माला और भूरे हकीक की माला दोनों को मिलकर प्रयोग करनी है ! आसन सफ़ेद प्रयोग में लेना है ! मुख पूर्व की ओर रखना है ! समय प्रात: 12 बजे से पहले का ही रखना है ! मन्त्र ::=:: मैं तो स्वाधिष्ठान तक आया , अति अद्भुत देखी तेरी माया ! मान सरोवर त्रिकोण दिव्य सुन्दर श्रीधाता शारदा बेठी हैं कमल पर !! इस साधना में अगर प्राण प्रतिष्ठित रजत का श्री सरस्वती यंत्र अपने सामने रख सकें तो अधिक उचित रहेगा ! आजकल अधिकांश लोग राहूकाल का विचार करते हैं ! यह काल शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना गया है ! इसलिए शुभ कार्यों में इस समय को छोड़ दिया गया है! यंत्रों को लिखने में और उपायों के करने में हमें शुभ घडी की आवश्यकता होती है ! इसके लिए राहुकाल वर्जित है ! यह समय प्रात: 8 बजे से लेकर 6 बजे तक चलता है ! प्रत्येक काल का 1:30 मिनट होता है ! राहूकाल का क्रम इस प्रकार है = सोम , शनि , गुरु , बुद्ध , मंगल और रविवार ! राहू काल का क्रम यही है ! उपाय हम लगभग उन्हीं ग्रहों का करते हैं जो प्राय: हमें अशुभ फल दे रहे होते हैं , कार्यों में रुकावट उत्पन कर रहे हैं , स्वस्थ्य पर और आय के साधनो पर बुरा प्रभाव डाल रहे हैं ! जो ग्रह हमें लाभ दे रहे हैं वह शुभ हैं ! अगर लाभ देने वाला ग्रह अगर पूरा लाभ नहीं दे पा रहा है तो उसकी वस्तुएं घर में रखने या पास रखने से उसकी शक्ति बड जाती है ! अशुभ ग्रह का रत्न कभी नहीं पहिनना चाहिए ! जिन बच्चों के विवाह में अनदेखी बाधा आ रही है तो वह गुरु की होरा में विवाह के लिए बातचीत करें ! होरा भी महत्वपूर्ण होता है ! कहा है ::=:: सूर्य शुक्र बुद्ध चन्द्रमा शनि गुरु मंगलवार ! होरा का क्रम है यही मित्रों करो विचार !! विवाह सम्बन्धी कार्य या आयोजन में गुरु की होरा देखें ! स्मरण रहे चन्द्रमा की होरा सभी कार्यों के लिए शुभ है ! अधिक जानने के लिए और मेरी पुस्तक “तंत्र भैरवी मिन्ही” ( उपन्यास रूप ) , टोना टोटका गंडे , तावीज़ , नज़र , डोरा , भभूत ,सम्पूर्ण ज्योतिष विद्या एवं अप्सरा साधना रहस्य प्राप्त एवं गोपनीय तांत्रिक मुद्राएँ और मेरा बिल्कुल नया नावेल ‘’बिन फेरे हम तेरे’’ और ‘’क्या यही प्यार है ?’’ प्राप्त करने अथवा वास्तु विजिट के लिए जयेश भाई गायवाला से आज ही सूरत ( गुजरात ) मोबाइल मोबाइल न. 09825574899 पर सम्पर्क करें कृपया वाटस एप्प ( WHATTS APP . ) नहीं करें ! WHATT’S APP करने पर आपके निवेदन पर कोई विचार नहीं किया जायेगा ! सनसनीखेज़ – रोचक – रोमांचक – रहस्यमय – होरर तंत्र और ज्ञानवर्धक काल्पनिक कथा / लेख के लिए मेरे पेज “तांत्रिक बहल की तंत्र यात्रायें” में मेरी सर्वथा नयी तंत्र मन्त्र कथा “तांत्रिक पण्डित” पढ़ें अर्थात लोमहर्षक घटनाओं की दास्तान या जिसने खोजा है उसने ही इस रहस्य को पाया है ! ज्ञान प्राप्ति के लिए यह उक्ति एकदम सही चरितार्थ होती है , स्वयं पढ़ें और अन्य तंत्र प्रेमियों को भी पढने के लिए प्रेरित करें ! U . TUBE पर मेरे चैनल TA**RA SABKE LIYE MISSION ( tm ) में मुझे लाइव देखें और लाइक , शेयर , फ़ॉलो और सब्सक्रायिब भी करें ! ! शेष फिर ! गुरु स्मरण !! हरी ॐ प्रभु !!!.

29/05/2026

मित्रों ! ज्योतिष , हस्तरेखा , अंक ज्योतिष मेरा प्रिय विषय कभी नहीं रहा , लेकिन सीखा सब कुछ ! मेरा दो प्रिय मित्र थे एक स्व. पं. श्याम सुन्दर वत्स दूसरे हस्तरेखा शास्त्री दोनों की ही प्रष्ठभूमि ग्रामीण थी ! दोनों बला के हस्तरेखा विशेषज्ञ थे ! उनकी कही अधिकांश बातें सत्य होती थीं !ज्योतिष तो मैंने किनसे सीखी थी उनका नाम तो मैं पहले ही लिख चुका हूँ ! मैं वो नहीं जो पहले सीखूं और बाद में उनका नाम लेने में या गुरु कहने में जिझकूं ! मैं एक नहीं ऐसे अनेक लोगों को जानता हूँ जिन्होंने काफी समय तक विद्वान के पास रहकर विद्या अध्ययन किया ! जब थोड़ी पहचान बनी तो अपने शिक्षा गुरु का वो नाम नहीं बतलाते थे खोजते खोजते मर जाओ पर वह तथाकथित गुरु नहीं मिलते थे ! मेरे विचार से लाख लानते हैं ऐसा स्वार्थी विद्यार्थियों पर ! मुझसे पूछो , एक बार नहीं हज़ार बार पूछो तो बार बार यही कहूँगा मेरे गुरु स्वामी नारायण नंदा थे ! लेखन के गुरु स्व. गोविन्द सिंह थे ! शेर ओ शायरी के गुरु मेरे पूज्यनीय दादाजी और पिताश्री थे ! यह लिखने में शर्म या झिझक कैसी और क्यों ? तांत्रिक सूरज सदैव से मेरे जीवन दाता रहे ! डॉ.आर.एस.प्रसाद तांत्रिक , जयेश भाई गायवाला , स्वामीजी मनोज , भाई कमल नारायण शर्मा , मनारंजन मोहोंतो , पराविज्ञानी जितेन्द्र , अरविन्द बजाज मेरी मदद के साथ सदैव आगे बढाने में अग्रणी रहे ! मैं उन लोगों के नाम नहीं लिखूंगा जो जय चन्द थे ! मैंने उन्हें आगे बडाया – आगे बड़े जब उन्होंने मुझे छोड़ दिया तो मैंने भी उनका त्याग कर दिया ! अब उनकी उन्नति को ज़माना नोट करेगा ! मैंने सदैव अपनी ज्योतिष की पोस्टों में सूत्र दिए हैं ! जो बड़े काम के हैं ! मैं एक रेल के इंजिन की तरह हूँ जो सदैव आने वाले स्टेशनो को देखता है जो बीत गए उनकी बात गयी ! यह वो लोग हैं जो केवल रस्म अदा करते हैं ! कहा है – जनाजे को मेरे वो रुकवा के बोले ! यह लौटेंगे कब तक कहाँ जा रहे हैं ? क्या जाने वाले कभी आते हैं उनकी तो बस याद आती है ! दोस्तों ! अनेक बार ऐसा भी होता है विद्वान को जन्म की तारीख तो पता होती है , पर वार के विषय में संशय रखता है ! वार निकालने की विधि प्रस्तुत है = पहले महीने के अंक नोट करलें – जनवरी -7 , फ़रवरी 3 , मार्च 3, अप्रैल 6 , मई 1 , जून 4 , जुलाई 6 , अगस्त 2 , सितम्बर 5, अक्टूबर 7 , नवम्बर 3 , दिसंबर 5 ! सबसे पहले वर्ष के अंक लो उसके पश्चात वर्ष अंक चोथाई करके 1/4 अंक जोड़ो , फ़िर उसमे जिस माह कि तारीख हो वो अंक जोड़ो और उसके बाद ऊपर बताये गए माह के हिसाब से माह का अंक जोड़ो ! कुल योग में 7 का भाग दो ! भाग देने पर जो शेष बचे उस अंक को शनिवार से गिनने पर वार का पता चल जाएगा ! अब उदहारण से समझीये – मानलो हमें 10 मार्च 1990 का वार जानना है तो मार्च के 3 अंक हुए + सन 1990 लिया+ 497 + चोथाई 497 लिया 10 मार्च का अंक +10 लिया कुल योग आया 2500 अब 7 से भाग दिया तो शेष 1 रहा दिन शनिवार हुआ ! अब मैं कुछ वास्तुशास्त्र के विषय में लिखूंगा ! ध्यान से पढ़े ! अगर आप अपना भवन बनाने के प्रयास में है तो सबसे पहले यह जान लें कि भूमि कैसी है ? क्योंकि भवन निर्माण की पहली सीड़ी भूखंड है ! वास्तु सम्मत भूमि कैसी हो ? भूमि का चुनाव करने का आधार क्या है ? वास्तु शास्त्र के अनुसार हड्डी युक्त , दीमक वाली भूमि धन और आयु को खा जाती है , कटी फटी भूमि कष्ट देने वाली, ऊंची नीची भूमि शत्रु वृद्धि वाली , शल्य युक्त भूमि कलेश कारक , पत्थरों से युक्त भूमि दरिद्रता लाने वाली , बड़े बड़े गड्डों से युक्त असत्य वाचन करने वाली संतान को जन्म देने वाली तथा टेड़ी और रेतीली भूमि विद्या से हीन संतति उत्पन्न करती है ! सांप , चूहों की बाम्बी से युक्त भूमि विपत्ति और नालायक सन्तति देती है ! भूमि चार प्रकार की होती है ! ब्राह्मणी भूमि , क्षत्रिय भूमि , वैश्य भूमि और त्याज्य भूमि होती है ! ब्राह्मणी भूमि = जिस भूमि का रंग श्वेत , घी के सामान गंध , स्वाद मधुर तथा स्पर्श सुखद हो ऐसी भूमि ब्राह्मणी कहलाती है ! यह उत्तम मानी गयी है ! क्षत्रिय भूमि = रक्त के समान , रक्त के गंध वाली , कठोर तथा कसेले स्वाद वाली भूमि क्षत्रिय भूमि मानी गयी है ! यह उपयुक्त रहती है ! वैश्य भूमि = पीले , शुद्ध मधु के सामान गंध वाली , खट्टे अथवा अमलिय स्वाद वाली भूमि कहलाती है ! यह श्रेष्ठ मानी गयी है ! त्याज्य भूमि – श्याम रंग वालीं, मदिरा के समान गंध वाली , बहुत कठोर स्पर्श तथा कडवे तिक्त स्वाद वाली भूमि को शुद्रा भूमि कहा है ! इसे त्याग देना चाहिए ! आपकी भूमि आपको लाभ देगी या हानि देगी ? देखने के लिए उपाय करें ! यह उपाय कभी स्वयं ना करें किसी विश्वसनीय विद्वान से ही कराएं ! हम भवन लेते हैं ! बड़ा लाभ होता है , लेकिन अचानक हानि और अशांति शुरू हो जाती है ! बनते कार्य रुक जाते हैं ! संतान या तो निकम्मी हो जाती है या आवारा हो जाती है ! उल्टे सीधे लोगों में बेठना , नौकरी में व्यवधान आना , संतान का ना होना , गर्भपात होना , किसी युवा परिजन की मृत्यु होना यह सब दोष हैं ! इनसे सुरक्षित रहने के लिए उपाय करना चाहिए ! लापरवाही करने पर एक दिन बर्बादी निश्चित है ! आपकी भूमि , फ्लैट , दुकान देने वाली है अर्थात धननाश करने वाली है या धन , सुख सम्रद्धि देने वाली है इसका परिक्षण एक बार अवश्य करलें ! परिणाम देखकर आप स्वयं समझ जायेंगे कि भूमि . भवन , फ्लैट , कार्यालय कैसा है ? यह विद्वान नहीं आप स्वयं बोलेंगे ! इसके लिए आप वास्तुविज्ञानी जयेश भाई गायवाला से सम्पर्क करें ! हानि होने से पहले निदान अच्छा है ! अधिक जानने के लिए और मेरी पुस्तक “तंत्र भैरवी मिन्ही” ( उपन्यास रूप ) , टोना टोटका गंडे , तावीज़ , नज़र , डोरा , भभूत ,सम्पूर्ण ज्योतिष विद्या एवं अप्सरा साधना रहस्य प्राप्त एवं गोपनीय तांत्रिक मुद्राएँ और मेरा बिल्कुल नया नावेल ‘’बिन फेरे हम तेरे’’ और ‘’क्या यही प्यार है ?’’ प्राप्त करने अथवा वास्तु विजिट के लिए जयेश भाई गायवाला से आज ही सूरत ( गुजरात ) मोबाइल मोबाइल न. 09825574899 पर सम्पर्क करें कृपया वाटस एप्प ( WHATTS APP . ) नहीं करें ! WHATT’S APP करने पर आपके निवेदन पर कोई विचार नहीं किया जायेगा ! सनसनीखेज़ – रोचक – रोमांचक – रहस्यमय – होरर तंत्र और ज्ञानवर्धक काल्पनिक कथा / लेख के लिए मेरे पेज “तांत्रिक बहल की तंत्र यात्रायें” में मेरी सर्वथा नयी तंत्र मन्त्र कथा “तांत्रिक पण्डित” पढ़ें अर्थात लोमहर्षक घटनाओं की दास्तान या जिसने खोजा है उसने ही इस रहस्य को पाया है ! ज्ञान प्राप्ति के लिए यह उक्ति एकदम सही चरितार्थ होती है , स्वयं पढ़ें और अन्य तंत्र प्रेमियों को भी पढने के लिए प्रेरित करें ! U . TUBE पर मेरे चैनल TA**RA SABKE LIYE MISSION ( tm ) में मुझे लाइव देखें और लाइक , शेयर , फ़ॉलो और सब्सक्रायिब भी करें ! ! शेष फिर ! गुरु स्मरण !! हरी ॐ प्रभु !!!.

28/05/2026

मित्रों ! तंत्र पर मैंने खूब लिखा , बहुत लिखा और अब भी लिख रहा हूँ , लेकिन ज्योतिष पर कुछ पुस्तकें , कुछ आलेख ही लिखे ! मैं कोई ज्योतिषी नहीं हूँ , तांत्रिक बहल हूँ ! ज्योतिष मेरे परिचित ज्योतिष के शिखर पुरुषों की देन है ! मैं स्वयं ज्योतिषी नहीं बना वरन मेरे मित्र ज्योतिषियों ने मार मार कर ज्योतिषी बनाया ! ज्योतिषी तो मैं आज भी नहीं हूँ बस जन्मपत्रिका देख लेता हूँ ! खेर , आज का मेरा विषय है – ग्रह कैसे अस्त होते हैं ? जन्मपत्रिकाओं में अपने ग्रहों का अस्त होना सुना है ! आपके ह्रदय में यह जिज्ञासा अवश्य उठती होगी कि ग्रह अस्त कैसे होते हैं ! अस्त होना ज्योतिषियों की तकनीकी भाषा है , वैसे ना कोई अस्त होता है और ना कोई उदय होता है ! अस्त शब्द का शाब्दिक अर्थ है अद्रश्य होना या छुप जाना ! इस प्रकार कोई ग्रह जब अद्रश्य हो जाता है अथवा छुप जाता है , तो वह ग्रह अस्त माना जाता है ! अब प्रश्न उठता है कि ग्रह अस्त कब होता है ? ज्योतिष में प्रयुक्त नवग्रहों में तेजस्वी सूर्य सबसे चमकदार ग्रह है ! इसके प्रकाश के समक्ष अन्य ग्रहों का प्रकाश बहुत ही कम है ! खगोल शास्त्र के अनुसार तो चन्द्रमा , मंगल , बुद्ध , गुरु , शुक्र , शनि आदि ग्रह सूर्य के प्रकाश से ही चमकते हैं ! ग्रहों का अस्त होना सूर्य के समीप आने से होता है ! अगर कोई ग्रह सूर्य के समीप आता है , तो सूर्य के तेज़ प्रकाश में वह द्रष्टिगोचर नहीं होता है , फलत: वह अस्त हो जाता है ! सूर्य के अलावा अन्य सभी ग्रह अस्त और उदय होते हैं ! ज्योतिष में अस्त ग्रह के शुभ प्रभाव कभी नहीं मिलते हैं ! अब प्रश्न उठता है कि कोई ग्रह सूर्य के कितने निकट आने पर अस्त होगा ? इस विषय में ज्योतिष शास्त्र में सूर्य से अंशात्मक स्थिति के आधार पर ग्रहों के अस्त होने से सम्बंधित नियम बनाए गए हैं ! जिन अंशों के भीतर ग्रह विशेष की सूर्य के साथ निकटता होने पर वह अस्त हो जाता है , ज्योतिष में उन अंशों को ‘’कालांश’’ कहते हैं ! सूर्य से अधिक गति वाले ग्रह बुद्ध और शुक्र पूर्व और पश्चिम दिशाओं में उदय और अस्त होते हैं ! जबकि सूर्य से कम गति वाले ग्रह मंगल , गुरु और शनि पश्चिम दिशा में अस्त होकर पूर्व दिशा में उदय होते हैं ! अब विभिन्न ग्रह कब और किस प्रकार अस्त होते हैं ? समझें =
*सूर्य से 12 अंश की दूरी पर स्थित चन्द्रमा अस्त होता है ! चन्द्रमा 24 अंश तक अस्त रहता है ! अस्त की स्थिति में अमावस्या और शुक्लपक्ष की प्रतिपदा तिथियाँ होती हैं !
* मंगल सूर्य से 17 अंश की दूरी तक अस्त होता है ! यह 34 अंश तक अस्त की स्थिति में रहता है ! मंगल 4 माह के बाद उदय होता है !
* बुद्ध मार्गी स्थिति में सूर्य से 14 अंश दूरी तक अस्त रहता है ! 28 अंश तक अस्त रहता है ! यह लगभग 32 दिन तक अस्त रहता है !
* सूर्य से 11 अंश दूरी तक अस्त रहता है ! यह 22 अंश तक अस्त रहता है ! गुरु लगभग एक माह के बाद उदय होता है !
* शुक्र मार्गी स्थिति में 8 अंश की दूरी तक अस्त रहता है ! वक्री स्थिति में भी 8 अंश की दूरी तक अस्त रहता है ! 16 अंश तक अस्त स्थिति में रहता है ! शुक्र पश्चिम में उदय होने के बाद 240 दिन के बाद वक्री होता है ! वक्री होने के बाद 23 के बाद पश्चिम में अस्त होता है !
* शनि सूर्य से 15 अंश की दूरी पर अस्त होता है ! यह 30 अंश तक अस्त रहता है ! शनि अस्त होने के सवा महीने के बाद उदय होता है ! अधिक जानने के लिए और मेरी पुस्तक “तंत्र भैरवी मिन्ही” ( उपन्यास रूप ) , टोना टोटका गंडे , तावीज़ , नज़र , डोरा , भभूत ,सम्पूर्ण ज्योतिष विद्या एवं अप्सरा साधना रहस्य प्राप्त एवं गोपनीय तांत्रिक मुद्राएँ और मेरा बिल्कुल नया नावेल ‘’बिन फेरे हम तेरे’’ और ‘’क्या यही प्यार है ?’’ प्राप्त करने अथवा वास्तु विजिट के लिए जयेश भाई गायवाला से आज ही सूरत ( गुजरात ) मोबाइल मोबाइल न. 09825574899 पर सम्पर्क करें कृपया वाटस एप्प ( WHATTS APP . ) नहीं करें ! WHATT’S APP करने पर आपके निवेदन पर कोई विचार नहीं किया जायेगा ! सनसनीखेज़ – रोचक – रोमांचक – रहस्यमय – होरर तंत्र और ज्ञानवर्धक काल्पनिक कथा / लेख के लिए मेरे पेज “तांत्रिक बहल की तंत्र यात्रायें” में मेरी सर्वथा नयी तंत्र मन्त्र कथा “तांत्रिक पण्डित” पढ़ें अर्थात लोमहर्षक घटनाओं की दास्तान या जिसने खोजा है उसने ही इस रहस्य को पाया है ! ज्ञान प्राप्ति के लिए यह उक्ति एकदम सही चरितार्थ होती है , स्वयं पढ़ें और अन्य तंत्र प्रेमियों को भी पढने के लिए प्रेरित करें ! U . TUBE पर मेरे चैनल TA**RA SABKE LIYE MISSION ( tm ) में मुझे लाइव देखें और लाइक , शेयर , फ़ॉलो और सब्सक्रायिब भी करें ! ! शेष फिर ! गुरु स्मरण !! हरी ॐ प्रभु !!!.

मेरे विचार में ज्योतिषी जब भी जन्मपत्रिका पर फल कथन पर बेठे तो 3 बार इस मन्त्र को बोल ले = नमस्कराए गुरु शरणम् तो फल कथन अधिक सटीक होगा ! दोष शान्ति के लिए उपवास , मन्त्र जप , हवन , तीर्थाटन और स्नान , ब्राह्मण को वस्त्र देना सबसे श्रेष्ठ उपाय है ! इसके बाद केवल किसी तीर्थ स्थान पर केवल तर्पण कर देने से ग्रहों का कोप शान्त हो जाता है !

27/05/2026

मित्रों !ज्योतिष पर आलेख लिखने से पहले एक द्रष्टान्त प्रस्तुत है ! स्वर्णकार बूडा हो चुका था !उसने अपने पुत्र को दुकान पर बिठाया , काम सिखाना शुरू किया ! थोड़े ही दिन में ही पुत्र कुशल पारखी बन गया ! एक दिन बाप बेटा दुकान पर बेठे थे कि बेटे के बचपन का एक मित्र पुराने गहनों की टूट फूट ठीक कराने आया ! बेटे ने तत्काल उसके गहने उसे ठीक करके दे दिए ! मित्र ने उसे पारिश्रमिक देना चाहा , तो मित्रता की दुहाई देते हुए उसने लेने से मना कर दिया ! मित्र के चले जाने पर पिता ने एक लम्बी ठंडी सांस खींची और कहा – वत्स , मैंने तुम्हे काम तो पूरा सिखा दिया , पर दुनियादारी की सीख देना भूल गया ! बाप की बात पूरी होने से पहले ही पुत्र ने जेब से एक कागज़ की पुड़िया निकाल कर उसमे रखा सोने का एक टुकड़ा दिखाते हुए कहा – पिताजी ! दुनियादारी तो मुझे उस दिन समझ में आ गयी थी , जब पहली बार आपके साथ दुकान पर काम सीखने बेठा था ! आप कुशल , सफल ज्योतिषी बने , पर दुकानदारी का सदैव ध्यान रखें ! एक कुशल ज्योतिषी सफल मनोवैज्ञानिक और इमानदार दुनियादार भी होना चाहिए ! खेर , आज मैं आपको शिशु के जन्म से सम्बंधित कुछ ज्योतिषीय सूत्र बतलाता हूँ ! ज्योतिष विज्ञान में संतान उत्पत्ति के विविध योगो का सटीक विश्लेषण किया गया है ! ज्योतिष शास्त्र में ऋतु काल की 16 रात्रियों को गर्भादान के योग्य माना गया है , उनमे भी शुरू की चार रात्रियों का निषेध किया गया है ! बाद की 12 रात्रियों में से छ आठ दस बारह चोदह और सोलवीं रात्री में गर्भादान पुत्र संतान प्रदान करता है ! ऋतु काल की चोथी रात्री से सोलह रात्री तक गर्भादान से उत्पन्न होने वाली संतान के विषय में कहा गया है कि इन रात्रियों में गर्भादान से उतपन्न संतान क्रमश: अल्पायु पुत्र , कन्या , वंश का वृद्धिकर्ता पुत्र , वन्ध्या कन्या , पुत्र सौन्दर्यवती कन्या , प्रभावशाली पुत्र , कुरूप कन्या , धनी पुत्र , पापाचारिणी कन्या , धर्मात्मा पुत्र , धन संपन्न कन्या तथा ज्ञानवान पुत्र होता है ! गर्भादान के समय विद्यमान लग्न से तृतीया , पंचम , नवम में सूर्य और लग्न में शुभग्रह की द्रष्टि हो तो उत्पन्न संतान बुद्धिमान और दीर्घायु होती है ! इसके अतिरिक्त संतान और विषम राशि में पुरुष नवांश में बली गुरु , लग्न , सूर्य व चन्द्रमा हो तो पुत्र संतान और सम राशि में सम नवांश में ये ही ग्रह और लग्न हों तो पुत्री संतान होती है ! यह ग्रह अगर द्वीस्वाभाव राशि में हों तो जुड़वां संतान का योग बनता है ! मैं और अधिक विस्तार में ना जाते हुए , वैसे भी जन्मपत्रिका देखने सिखाने का मेरा कोई इरादा नहीं है ! जन्म समय से जाने शिशु का स्वाभाव =

प्रात: 6 से 9 – इस समय में जन्मे शिशु क्रोधी होते हैं लेकिन तेज़ बुद्धि वाले होते हैं ! क्रोध में हानि कर लेते हैं !

प्रात: 8 से 10 – इस समय जन्मे शिशु आलसी होते हैं ! बिना सोचे व्यय कर देते हैं , प्राय: जन्म स्थान से दूर रहते हैं ! पिता पक्ष से हानि उठा सकते हैं !

प्रात: 10 से 12 यह चंचल होता है ! संगीत प्रेमी , धनी , बिद्धिमान और उच्च अधिकारी बनता है ! संपत्ति का सुख मिलता है !

दोपहर 12 से 2 यह स्वाभिमानी बुद्धि , व्यवसायी , ऊंची नोकरी मिलती है ! पेत्रक संपत्ति मिलती है ! 30 वर्ष की आयु में भाग्योदय होता है !

सांय 2 से 4 शिशु दीर्घायु होता है ! सत्यवादी होता है ! परिजनों एवं मित्रों से कष्ट पाता है ! धार्मिक होता है !

सांय 4 से 6 बातूनी होता है ! 25 वर्ष की आयु के बाद सफ़लता मिलती है ! बातों से कमाता है !

सांय 6 से 8 शिशु पतला एवं मध्यम कद वाला होता है ! इर्शालू होता है ! साझेदारी से लाभ होता है ! विदेश यात्रा करता है !

रात्री 10 से 12 शिशु बुद्धिमान होते हैं ! अपना काम बनाने में निपुण होते हैं ! बचपन में दुखी युवावस्था में सुखी होते हैं !रात्री 12 से 2 शिशु सुन्दर होता है ! पिता से इन्हें सुख कम मिलता है ! 22 वर्ष में भाग्योदय होता है ! जन्म स्थान से दूर रहते हैं ! 40 – 50 वर्ष की आयु में सम्मान पाते हैं !स्त्री पक्ष से सुखी रहते हैं !

प्रात: 2 से 4 बच्चा पराक्रमी , तेजस्वी और मधुर बोलने वाला होता है ! व्यवसायी होते हैं !20 – 25 वर्ष की आयु में धन लाभ होता है !

प्रात: 4 से 6 बच्चा क्रोधी और निर्बल होता है ! शत्रुओं को भी मित्र बना लेता है ! अधिक जानने के लिए और मेरी पुस्तक “तंत्र भैरवी मिन्ही” ( उपन्यास रूप ) , टोना टोटका गंडे , तावीज़ , नज़र , डोरा , भभूत ,सम्पूर्ण ज्योतिष विद्या एवं अप्सरा साधना रहस्य प्राप्त एवं गोपनीय तांत्रिक मुद्राएँ और मेरा बिल्कुल नया नावेल ‘’बिन फेरे हम तेरे’’ और ‘’क्या यही प्यार है ?’’ प्राप्त करने अथवा वास्तु विजिट के लिए जयेश भाई गायवाला से आज ही सूरत ( गुजरात ) मोबाइल मोबाइल न. 09825574899 पर सम्पर्क करें कृपया वाटस एप्प ( WHATTS APP . ) नहीं करें ! WHATT’S APP करने पर आपके निवेदन पर कोई विचार नहीं किया जायेगा ! सनसनीखेज़ – रोचक – रोमांचक – रहस्यमय – होरर तंत्र और ज्ञानवर्धक काल्पनिक कथा / लेख के लिए मेरे पेज “तांत्रिक बहल की तंत्र यात्रायें” में मेरी सर्वथा नयी तंत्र मन्त्र कथा “तांत्रिक पण्डित” पढ़ें अर्थात लोमहर्षक घटनाओं की दास्तान या जिसने खोजा है उसने ही इस रहस्य को पाया है ! ज्ञान प्राप्ति के लिए यह उक्ति एकदम सही चरितार्थ होती है , स्वयं पढ़ें और अन्य तंत्र प्रेमियों को भी पढने के लिए प्रेरित करें ! U . TUBE पर मेरे चैनल TA**RA SABKE LIYE MISSION ( tm ) में मुझे लाइव देखें और लाइक , शेयर , फ़ॉलो और सब्सक्रायिब भी करें ! ! शेष फिर ! गुरु स्मरण !! हरी ॐ प्रभु !!!.

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