31/12/2019
श्रीमती सुधा राठौर जी की इस लेखनी का इस श्रद्धांजलि का शब्दों में वर्णन करने में हम असमर्थ महसूस कर रहे हैँ | उनका असीम प्रेम कवियत्री उषा जी के लिए आनंदित, आंदोलित कर देने वाला है जो उनके सपनो को पूरा करने में लगे सदस्यों के लिए प्रेरणा बन रहा है |
आपकी इस श्रद्धांजलि को यहाँ देते हुए आपके इस प्रेम को संभाल कर रख लेना चाहते हैँ| आशा करते हैँ आपका यहाँ प्रेम हम पर सदा युहीं बना रहे|
नमन
(Welfare association for economically backward classes)
(सुधा जी द्वारा अतुलनीय श्रद्धांजलि )
स्व. उषा साहिबा द्वारा रचित और अविशा प्रकाशन द्वारा प्रकाशित "तुम में लीन " काव्य- संग्रह के फेसबुक लोकार्पण अवसर पर, मैं कवयित्री उषा जी की स्मृतियों को श्रद्धापूर्वक शत्- शत् नमन करती हूँ।🙏🙏
स्व. उषा जी के आत्मीय आग्रह पर मैंने उनकी पुस्तक "तुम में लीन" के लिए *शुभकामना* संदेश लिखा था, वही प्रेषित कर रही हूँ ।
शुभकामनाएँ
शब्द - शब्द में भाव का , अंतर्तम उद्वेग।
निर्मल,मंथर सरित सम, कविताओं का वेग।।
कविता, जिसमें उचित शब्द संयोजन हो, भावप्रवणता हो और साथ ही संप्रेषण की शक्ति भी हो । शैली ऐसी जो मन को छूकर पाठक से तादात्म्य स्थापित करे तथा सहज,सरल अबाध प्रवाह के साथ अंतर्मन पर अपने पदचिन्ह छोड़ती चले।
उषा जी के संग्रह " तुम में लीन " में लगभग सभी कविताएँ अपने मापदंड पर खरी उतरती हैं । उनमें कवयित्री की संवेदनशीलता विशेष रूप से अधिक मुखरित हुई है। नारी-विमर्श पर रचित उनकी कविताओं में कहीं व्यथा के बिंब हैं कहीं मनुहार, प्रेम और विश्वास के शब्दचित्र हैं।
मर्म को आंदोलित करती हैं उनकी यह कविता...
क्यों दर्द मिला
हर बार मुझे
क्यों आँसू की
सौगात मिली
और..
चलो अच्छा हुआ
अनदेखा कर मेरे
सामने से गुज़र गए
एक ओर जहाँ प्रकृति के साथ उनके निश्छल सम्वाद मुग्ध करते हैं ...
अंधेरों ने पलक खोलीं
और उजाला हो गया
वहीं दूसरी ओर उसके साथ हो रहे खिलवाड़ से वे अत्यंत व्यथित भी हैं..
" एक वृक्ष की निर्मम हत्या "शीर्षक की कविता में उनकी कातरता हमें पर्यावरण संरक्षण का एक संदेश भी देती है। कवयित्री की मनोव्यथा के चरम को छूती एक बानगी और...
ताजमहल पर
ये गिद्ध क्यों मंडराते हैं
क्या उनको शिल्पकारों के
कटे हुए हाथ
नज़र आते हैं ?
भावुक हृदया उषा जी की कविताओं में, चिंतन-मनन में डूबी उनकी भक्ति की तूलिका, आस्था व श्रद्धा के अलौकिक दृश्यों को सजीव कर देती है। वे स्वयं में ही जीवन के प्रश्नों का समाधान ढूँढ लेती हैं कि....
निराकार मन होता व्यथित
जब अपनों को देख उदास
ईश्वर के सिमरन में जप करता
मन ईश्वर में लीन ही रहता
और यह भी कि...
एक सा जन्म और एक सी मृत्यु
देह अलग-अलग पर आत्मा एक
संक्षेप में, सरलहृदया,उदारमना उषा जी की रचनाएँ उनकी स्वभावगत् विशेषताओं का ही दर्पण हैं। उनकी रचनाधर्मिता लेखनी के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित है। आशा करती हूँ कि पाठकों द्वारा कविताओं को अवश्य ही सराहना मिलेगी।
आज वे हमारे बीच नहीं हैं... किंतु उनकी अविस्मरणीय स्मृतियाँ अशेष हैं।
अपने एक दोहे के साथ उन्हें अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित करती हूँ....
ज्यों सागर में है लहर , लहर बीच है मीन।
सृजन-प्रवाह सहित उषा,सदैव "तुम में लीन"।।
💐
सुधा राठौर
20-12-2019