09/06/2026
भक्त हनुमान आ भगवान रामक पहिल भेंट -
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भक्त हनुमान आ भगवान रामक पहिल भेंटक प्रसंग रामायणक एकटा अत्यंत भावुक आ महत्वपूर्ण अध्याय अछि।
किष्किन्धा कांडक पावन कथा
शूर्पणखाक नाक काटि देला कें बाद, रावण माता सीताक हरण कऽ लेने छल। प्रभु श्रीराम आ भैया लक्ष्मण माता सीताक खोज करैत-करैत ऋष्यमूक पर्वत कें नजदीक पहुँचलाह। एहि पर्वत पर वानरराज सुग्रीव अपन मंत्री कें संग रहैत छलाह। रावणक डर सँ सुग्रीव सब समय भयभीत रहैत छलाह।
हनुमानजीक विप्र रूप
जखन सुग्रीव दूटा अस्त्र-शस्त्र सँ सुसज्जित तेजस्वी युवक कें अपन पर्वत कें दिस आबैत देखलखिन, तँ ओ डरा गेलाह। ओ बुझलाह जे हुनकर भाई बाली हुनका मारबाक लेल कोनो योद्धा कें पठौने अछि। सुग्रीव अपन सभ सँ बुद्धिमान आ निष्ठावान मंत्री हनुमानजी कें आदेश देलखिन जे ओ ब्राह्मणक रूप धऽ कऽ हुनकर थाह लऽ कऽ आबैथि।
प्रभु श्रीरामक अनन्य भक्त हनुमानजी एकटा ब्राह्मण (विप्र) कें भेष धारण कयलनहि आ श्रीराम-लक्ष्मणक लग पहुँचि गेलाह।
पहिल भेंट आ मधुर संवाद
हनुमानजी दुनू भाय कें देखि कऽ अत्यंत प्रभावित भेलाह। हुनकर तेज देखि कऽ हनुमानजी प्रणाम कयलखिन आ बड़ मधुर स्वर में पुछलखिन:
"अहाँ सभ के छी? अहाँक रूप तँ राजा सन अछि, मुदा अहाँ जटाधारी कें भेष में वन-वन भटकि रहल छी। अहाँक चरण कोमल अछि, मुदा अहाँ एहि कड़कड़ात रौद आ काँट-कूस वाला रास्ता पर चलि रहल छी। की अहाँ सृष्टि कें रचयिता ब्रह्मा, विष्णु आ महेश में सँ कोनो एक छी की ?"
प्रभु श्रीरामक परिचय
हनुमानजीक बात सुनि कऽ प्रभु श्रीराम मुस्कुराए लगलाह आ बजलाह:
"हम अयोध्याक राजा दशरथक पुत्र राम आ लक्ष्मण छी। हम अपन पिताक आज्ञा सँ वनवास कऽ रहल छी। वन में दुष्ट राक्षस हमर पत्नी सीताक हरण कऽ लेलक अछि। हम ओहि सीताक खोज में एहि दिस अएलहुँ अछि। मुदा हे विप्रवर, अहाँ अपन परिचय दिअ, अहाँ के छी?"
हनुमानजीक वास्तविक रूप
जखनहि प्रभु श्रीराम अपन परिचय देलखिन, हनुमानजीक हृदय आनंद सँ भरि गेलैन्ह। हुनकर आँखि सँ नोर बहय लागल। ओ बुझि गेलाह जे जेकर ओ दिन-राति ध्यान करैत छलाह, ओ साक्षात पूर्ण ब्रह्म हुनकर सोझाँ ठाढ़ छैथि।
हनुमानजी तुरंत ब्राह्मणक भेष त्यागि कऽ अपन असली वानर रूप में आबि गेलाह आ प्रभु श्रीरामक चरण पकड़ि लेलाह। ओ भावुक भऽ कऽ बजलाह:
"हे प्रभु! हम तँ अज्ञानी वानर छी, अहाँ कें नहि चीन्हि सकलहुँ। मुदा अहाँ तँ अंतर्यामी छी, अहाँ हमरा सँ हमर परिचय की पुछैत छी? हम अहाँक दास हनुमान छी।"
प्रभु श्रीराम परम भक्त हनुमान कें तुरंत जमीन सँ उठा कऽ अपन छाती सँ लगा लेलखिन। श्रीराम बजलाह जे अहाँ हमरा ओतबे प्रिय छी जतेक भैया लक्ष्मण छैथि।
एहि प्रकारें, भक्त आ भगवानक पहिल मिलन भेल। एकरा बाद हनुमानजी श्रीराम आ लक्ष्मण कें अपन कंधा पर बइसा कऽ ऋष्यमूक पर्वत पर सुग्रीव सँ भेट करबैलखिन, जतय अग्नि कें साक्षी मानि कऽ श्रीराम आ सुग्रीव में अटूट मित्रता भेल।
..✍️कीर्ति नारायण झा