गौरैया बचाओ/Save Sparrow

गौरैया बचाओ/Save Sparrow ये गौरैया को बचाने का एक अभियान है

गोरैया एक छोटी चिड़िया है। यह हल्की भूरे रंग या सफेद रंग में होती है। इसके शरीर पर छोटे छोटे पंख और पीली चोंच व पैरों का रंग पीला होता है। नर गोरैया का पहचान उसके गले के पास काले धब्बे से होता है। १४ से १६ से.मी. लंबी यह चिड़िया मनुष्य के बनाए हुए घरों के आसपास रहना पसंद करती है। यह लगभग हर तरह की जलवायु पसंद करती है पर पहाड़ी स्थानों में यह कम दिखाई देती है। शहरों, कस्बों गाँवों और खेतों के आसपास

यह बहुतायत से पाई जाती है। नर गौरैया के सिर का ऊपरी भाग, नीचे का भाग और गालों पर पर भूरे रंग का होता है। गला चोंच और आँखों पर काला रंग होता है और पैर भूरे होते है। मादा के सिर और गले पर भूरा रंग नहीं होता है। नर गौरैया को चिड़ा और मादा चिड़ी या चिड़िया भी कहते हैं।
कम होती संख्या

पिछले कुछ सालों में शहरों में गौरैया की कम होती संख्या पर चिन्ता प्रकट की जा रही है। आधुनिक स्थापत्य की बहुमंजिली इमारतों में गौरैया को रहने के लिए पुराने घरों की तरह जगह नहीं मिल पाती। सुपरमार्केट संस्कृति के कारण पुरानी पंसारी की दूकानें घट रही हैं। इससे गौरेया को दाना नहीं मिल पाता है। इसके अतिरिक्त मोबाइल टावरों से निकले वाली तंरगों को भी गौरैयों के लिए हानिकारक माना जा रहा है। ये तंरगें चिड़िया की दिशा खोजने वाली प्रणाली को प्रभावित कर रही है और इनके प्रजनन पर भी विपरीत असर पड़ रहा है जिसके परिणाम स्वरूप गौरैया तेजी से विलुप्त हो रही है। [2] गौरैया को घास के बीज काफी पसंद होते हैं जो शहर की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों में आसानी से मिल जाते हैं। ज्यादा तापमान गौरेया सहन नहीं कर सकती। प्रदूषण और विकिरण से शहरों का तापमान बढ़ रहा है। कबूतर को धार्मिक कारणों से ज्यादा महत्व दिया जाता है। चुग्गे वाली जगह कबूतर ज्यादा होते हैं। पर गौरैया के लिए इस प्रकार के इंतज़ाम नहीं हैं। खाना और घोंसले की तलाश में गौरेया शहर से दूर निकल जाती हैं और अपना नया आशियाना तलाश लेती हैं।[3]

एक कथा के अनुसार, कुरुक्षेत्र के युद्धक्षेत्र को विशाल सेनाओं के आवागमन के लिए तैयार किया जा रहा था। पेड़ों को उखाड़ने औ...
18/04/2026

एक कथा के अनुसार, कुरुक्षेत्र के युद्धक्षेत्र को विशाल सेनाओं के आवागमन के लिए तैयार किया जा रहा था। पेड़ों को उखाड़ने और भूमि को समतल करने हेतु हाथियों का उपयोग किया जा रहा था। ऐसे ही एक पेड़ पर एक गौरैया अपने चार बच्चों के साथ रहती थी।
जब वह पेड़ उखाड़ा गया, तो उसका घोंसला नीचे गिर गया। चमत्कारवश उसके बच्चे सुरक्षित तो रहे, परंतु वे इतने छोटे थे कि उड़ने में असमर्थ थे। भयभीत और असहाय गौरैया इधर-उधर सहायता के लिए देखने लगी।
उसी समय उसने देखा कि श्रीकृष्ण अर्जुन के साथ वहाँ आ रहे हैं। वे युद्धभूमि का निरीक्षण करने और युद्ध से पूर्व रणनीति बनाने आए थे। साहस जुटाकर गौरैया अपने छोटे पंख फड़फड़ाती हुई किसी प्रकार श्रीकृष्ण के रथ तक पहुँची और विनती करने लगी कि हे कृष्ण, कृपया मेरे बच्चों की रक्षा कीजिए। युद्ध आरंभ होने पर वे कुचल दिए जाएँगे। सर्वव्यापी भगवान ने उत्तर दिया,
मैं तुम्हारी पीड़ा समझता हूँ, परंतु मैं प्रकृति के नियमों में हस्तक्षेप नहीं कर सकता। गौरैया ने श्रद्धा से कहा
हे प्रभु, मैं जानती हूँ कि आप ही मेरे उद्धारकर्ता हैं। मैं अपने बच्चों का भाग्य आपके चरणों में समर्पित करती हूँ। अब यह आप पर है कि आप उन्हें बचाएँ या न बचाएँ।
श्रीकृष्ण बोले
कालचक्र पर किसी का वश नहीं होता।
तब गौरैया ने पूर्ण विश्वास के साथ कहा कि
प्रभु, आप कैसे और क्या करते हैं, यह मैं नहीं जानती। परंतु आप ही काल के नियंता हैं। मैं स्वयं को और अपने परिवार को पूर्णतः आपको समर्पित करती हूँ।
भगवान ने कहा
अपने घोंसले में तीन सप्ताह का भोजन एकत्र कर लो।
इस संवाद से अनजान अर्जुन ने गौरैया को हटाने का प्रयास किया। गौरैया कुछ क्षण अपने पंख फैलाकर खड़ी रही और फिर अपने घोंसले में लौट गई। दो दिन बाद शंखनाद के साथ युद्ध आरंभ हुआ। कृष्ण ने अर्जुन से कहा
मुझे अपना धनुष और बाण दो।
अर्जुन चकित रह गया, क्योंकि कृष्ण ने शस्त्र न उठाने की प्रतिज्ञा ली थी। फिर भी उसने श्रद्धापूर्वक धनुष सौंप दिया। कृष्ण ने एक हाथी की ओर बाण चलाया, परंतु बाण हाथी को घायल करने के स्थान पर उसकी गर्दन में बँधी घंटी से टकराकर चिंगारी के साथ गिर पड़ा।
अर्जुन मुस्कुरा उठा।
क्या मैं प्रयास करूँ, प्रभु?
कृष्ण ने धनुष लौटाते हुए कहा
अब कोई अन्य कार्य आवश्यक नहीं है।
अर्जुन ने पूछा कि केशव, आपने हाथी को बाण क्यों मारा? वह तो जीवित है, केवल उसकी घंटी टूटी है। कृष्ण ने उत्तर नहीं दिया और शंखनाद करने का संकेत किया। अठारह दिनों के भीषण युद्ध के बाद पांडवों की विजय हुई। एक दिन कृष्ण अर्जुन को युद्धभूमि के एक सुदूर स्थान पर ले गए, जहाँ अब भी अनेक शव अंतिम संस्कार की प्रतीक्षा में पड़े थे। वहाँ कृष्ण एक स्थान पर रुके और बोले, अर्जुन, कृपया इस घंटी को उठाकर एक ओर रख दो।
अर्जुन ने वही घंटी उठाई, जो उस हाथी के गले में थी। जैसे ही घंटी उठी, एक के बाद एक चार छोटे पक्षी और फिर उनकी माँ गौरैया बाहर निकल आए। वे आनंदपूर्वक कृष्ण के चारों ओर मंडराने लगे। अठारह दिनों तक वही टूटी हुई घंटी उस परिवार का सुरक्षित आश्रय बनी रही थी।
अर्जुन ने हाथ जोड़कर कहा, क्षमा कीजिए प्रभु। आपको मानव रूप में देखकर मैं भूल गया था कि आप वास्तव में कौन हैं।
आइए, हम भी इस समय को उस घंटी रूपी घर की तरह मानें, परिवार के साथ संयम, आस्था और धैर्य रखते हुए, जब तक प्रभु स्वयं हमें बाहर निकालें।
🙏जय श्री राधे कृष्ण🙏

09/04/2026

Celebrating my 14th year on Facebook. Thank you for your continuing support. I could never have made it without you. 🙏🤗🎉

टिटहरी प्रकृति का असली मौसम विभाग है!  इसके सामने कई बार वैज्ञानिकों की भविष्यवाणी भी गलत पड़ जाती है। यह पक्षी अपने व्य...
09/04/2026

टिटहरी प्रकृति का असली मौसम विभाग है! इसके सामने कई बार वैज्ञानिकों की भविष्यवाणी भी गलत पड़ जाती है। यह पक्षी अपने व्यवहार से पहले ही मानसून के संकेत दे देता है।

👉 माना जाता है कि अगर टिटहरी 4 अंडे देती है, तो लगभग 4 महीने तक अच्छी बारिश होती है।

👉 अगर यह ऊँची जगह पर अंडे दे, तो समझा जाता है कि उस साल बारिश ज्यादा होने की संभावना है। पिछले साल कई जगह ऐसा देखने को मिला और कई क्षेत्रों में अच्छी बारिश भी हुई।

👉 अगर टिटहरी छत या बहुत ऊँची जगह पर अंडे दे, तो लोग इसे ज्यादा पानी या बाढ़ के संकेत के रूप में भी देखते हैं।

👉 अगर किसी साल टिटहरी नीचे जमीन में गड्ढे में अंडे दे या दिखाई ही न दे, तो इसे कम बारिश या सूखे के संकेत के रूप में भी माना जाता है।

प्रकृति और जीव-जंतु हमारे पर्यावरण का अहम हिस्सा हैं। पहले के समय में लोग इन संकेतों से मौसम का अंदाजा लगाते थे। आज विज्ञान बहुत आगे है, लेकिन प्रकृति के संकेतों को समझना भी उतना ही जरूरी है।

22/03/2026

आप अभी 432 हर्ट्ज़ की फ़्रीक्वेंसी सुन रहे हैं। अपने नर्वस सिस्टम को संतुलित करने के लिए कुछ पल निकालें।

यह आवाज़ सेरोटोनिन और एंडोर्फिन जैसे 'हैप्पी हॉर्मोन्स' को स्वाभाविक रूप से रिलीज़ करने में मदद करती है, और साथ ही ब्लड प्रेशर व दिल की धड़कन को भी नियंत्रित करती है।

आज का दिन उस प्यारी सी चिड़िया  गौरैया  की याद दिलाता है, जिसकी चहचहाहट कभी हर आंगन की पहचान थी।आज वो कहीं खो सी गई हैआइ...
20/03/2026

आज का दिन उस प्यारी सी चिड़िया गौरैया की याद दिलाता है, जिसकी चहचहाहट कभी हर आंगन की पहचान थी।
आज वो कहीं खो सी गई है
आइए, दाना-पानी और सुरक्षित जगह देकर उसे वापस बुलाएं।
गौरैया को बचाइए, प्रकृति को बचाइए। 🐦💚

“विश्व गौरैया दिवस"आइए, इस दिवस पर अपने आस-पास चहकने वाली नन्ही चिड़िया 'गौरैया' के संरक्षण का प्रण लें।
20/03/2026

“विश्व गौरैया दिवस"

आइए, इस दिवस पर अपने आस-पास चहकने वाली नन्ही चिड़िया 'गौरैया' के संरक्षण का प्रण लें।

उसने पूछा : कैसी हो !मैंने कहा : गौरैया-सीअपने होने में लघुत्तम उड़ान में महत्तम उसने पूछा : कहाँ हो ! कहा मैंने : होना ...
20/03/2026

उसने पूछा : कैसी हो !
मैंने कहा : गौरैया-सी
अपने होने में लघुत्तम
उड़ान में महत्तम

उसने पूछा : कहाँ हो !
कहा मैंने : होना तो चाहती हूँ
गौरैया की ही तरह
घर की हर मुँडेर पर
हर आँगन में
अभी जीवन को चहक की दरकार है

- विशाखा मुलमुले
विश्व गौरैया दिवस विशेष

20/03/2026

क्या आज आपने देखी कोई गौरैया?

आज है.

यह छोटी-सी चिड़िया हमारे पर्यावरण, हवा-पानी और मौसम का हाल बताती है.

कभी यही गौरैया घरों की मुंडेर और बाग-बगीचों को अपनी चहचहाहट से गुंजाया करती थी.

आज यह दिखाई कम देती है. इसीलिए हमें विश्व गौरैया दिवस मनाना पड़ रहा है.

आज भी जब दिख जाती हैं सुबह गौरैया,लंबा सफर तय करा देती है ' बचपन का !!              ~ सेजल
20/03/2026

आज भी जब दिख जाती हैं सुबह गौरैया,
लंबा सफर तय करा देती है ' बचपन का !!

~ सेजल

इंडियन रॉबिन की साइट विजिटमार्च का महीना है। रॉबिन का प्रजनन मौसम शुरू हो रहा है। पिछले साल ₹450.- का यह घोंसला खरीदा था...
08/03/2026

इंडियन रॉबिन की साइट विजिट

मार्च का महीना है। रॉबिन का प्रजनन मौसम शुरू हो रहा है। पिछले साल ₹450.- का यह घोंसला खरीदा था। इस मौसम में लगता है किरायेदार आने वाला है।

आज पहले नर और उसके बाद मादा एक बार निरीक्षण कर गये। नर तो ऊपर ही बैठा पर मादा ने अंदर जा कर आधा मिनट समय व्यतीत किया — यह देखने के लिये कि कमरा कम्फर्टेबल है या नहीं।

क्या ख्याल है, अगर रॉबिन घोंसला चुन ले तो एक सीसीटीवी कैमरे का जुगाड़ किया जाये उसकी एक्टिविटी देखने के लिये? कितना खर्चा आयेगा उसपर?

घोंसले की जगह सही है या बदली जाये? गिलहरी रॉबिन की प्रतिद्वंद्वी है और कौआ, सांप, बिल्ली उसके प्रीडेटर।

अगर किसी का मोबाइल खोया है तो वो भारत सरकार की सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर की वेबसाइट (http://ceir.gov.in) के ल...
21/11/2025

अगर किसी का मोबाइल खोया है तो वो भारत सरकार की सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर की वेबसाइट (http://ceir.gov.in) के लिंक https://ceir.gov.in/Request/CeirUserBlockRequestDirect.jsp पर जाकर डिटेल्स दर्ज कराए। देशभर में अगर कहीं वो मोबाइल चल रहा है तो पुलिस पर अलर्ट पहुंचेगा। देश भर में इस तकनीक से इस साल ऐसे कई हजार मोबाइल मिले हैं।

Users can block their mobile phone if it is lost/stolen.

रात के साढ़े 11 बजे थे। बच्चों का होमवर्क जैसे-तैसे पूरा हुआ था और अब सोने की तैयारी चल रही थी।बेटी बिस्तर पर बैठी, बाल ...
15/09/2025

रात के साढ़े 11 बजे थे। बच्चों का होमवर्क जैसे-तैसे पूरा हुआ था और अब सोने की तैयारी चल रही थी।

बेटी बिस्तर पर बैठी, बाल फैलाए शिकायत कर रही थी, “पापा, देखो न, भैया मेरी पेंसिल ले गया!”

बेटा तुरंत बोला, “झूठ! ये मेरी पेंसिल है।”
पिता हँसते हुए बोले,
“अरे, तुम दोनों तो रोज़ अदालत ले आते हो मेरे पास। चलो, अब लड़ो मत और जल्दी सो जाओ, मैं कल ऑफिस से आते वक्त दोनों के लिए नई पेंसिल ले आऊंगा।”

फिर वो बेटी के पास बैठे और कंघी उठाकर उसके बाल सुलझाने लगे।

“पापा, आपको तो चोटी बनानी ही नहीं आती,”
बेटी ने फिर वही ताना मारा।

बेटा शरारत से बोला,
“हाँ पापा, आप तो चोटी की जगह रस्सी बना देते हो!”

पिता ज़ोर से हँस पड़े।
“हाँ, मुझे कुछ नहीं आता… बस तुम दोनों ही तो यहाँ उस्ताद हो।”

तीनों की हँसी पूरे कमरे में गूंज गई। छोटी-छोटी किलकारियों से कमरा जैसे किसी मेले-सा हो गया।
बेटी मुस्कुराती हुई रज़ाई में घुस गई और बेटा भी तकिए पर सिर रखकर हँसते-हँसते आँखें मूँदने लगा।

पिता ने दोनों के माथे पर हाथ फिराया।
उनकी आँखों में उस पल संतोष था—एक ठंडी शांति, जैसे दुनिया की सारी मेहनत इन्हीं दो साँसों के लिए है।

धीरे से दरवाज़ा बंद करके वो बाहर आए।
अपने कमरे में जाते वक्त उनकी नज़र ड्रॉइंग रूम में रखी अपनी पत्नी की तस्वीर पर पड़ी, जो अब इस दुनिया में नहीं है। कुछ पल के लिए वो थम गए। बच्चों के कमरे से निकला मेला अचानक जैसे किसी अदृश्य दीवार से टकरा गया और पूरी दुनिया सन्नाटे में बदल गई। वो तस्वीर के पास वाली कुर्सी पर बैठे।
तस्वीर को हाथ में लिया।

धीमी आवाज़ में बोले,
“काश… तुमने मुझे चोटी बनाना सिखा दिया होता।”

यह कहते-कहते वो रुआंसे हो गए। उन्होंने तस्वीर को घूरा—जैसे उम्मीद हो कि उस मुस्कान से कोई जवाब निकलेगा। पर दीवारें खामोश थीं, घड़ी बेरहम टिक-टिक कर रही थी।
उन्होंने तस्वीर को सीने से लगाया।
“देख रही हो न… दोनों कितनी जल्दी बड़े हो रहे हैं। हर दिन कुछ नया मांगते हैं, पूरी कोशिश कर रहा हूँ कि उन्हें तुम्हारी कमी न खले"।ये कहते हुए उन्होंने खिड़की से बाहर झाँका—रात गहरी थी, सड़क पर सन्नाटा पसरा था।
जैसे पूरा शहर सो रहा हो और सिर्फ़ एक आदमी जाग रहा हो, अपनी तस्वीर से बातें करता हुआ।

“तुम्हारे बिना हँसी भी अधूरी है,बच्चों की चोटी, उनकी शरारतें… सब अधूरा है। मैं बस अभिनय करता हूँ उनके सामने कि मैं मज़बूत हूँ। असलियत तो ये है कि मैं रोज रात को तुम्हें याद करता हूँ टूटता हूँ
आँसू उनकी हथेलियों से फिसलकर तस्वीर पर गिर गए। तस्वीर पर चमकती वो बूंदें ऐसे लग रही थीं जैसे तस्वीर भी रो रही हो।

Dirección

Mexico City

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