Arya samaj Saraswati nagar

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आर्य समाज शिमला के वार्षिक उत्सव पर आज एक शोभायात्रा निकाली गई जिसमें बड़े उत्साह पूर्वक लोगों ने भाग लिया। यद्यपि वर्षा...
12/06/2026

आर्य समाज शिमला के वार्षिक उत्सव पर आज एक शोभायात्रा निकाली गई जिसमें बड़े उत्साह पूर्वक लोगों ने भाग लिया। यद्यपि वर्षा के कारण असुविधा रही फिर भी लोग डटे रहे

31/05/2026
28/05/2026

मांसाहार उचित या अनुचित ?

#डॉ_विवेक_आर्य

प्रोफेसर आर्य एवं मौलाना साहिब की भेंट आज बाज़ार में हो जाती है। मौलाना साहिब जल्दी में थे बोले की ईद आने वाली हैं इसलिए क़ुरबानी देने के लिए बकरा खरीदने जा रहा हूँ। आर्य साहिब के मन में तत्काल उन लाखो निर्दोष बकरों, बैलो, ऊँटो आदि का ख्याल आया जिनकी गर्दनो पर अल्लाह के नाम पर तलवार चला दी जाएगी। वे सब बेकसूर जानवर धर्म के नाम पर क़त्ल कर दिए जायेगे।

आर्य जी से रहा न गया और वे मौलाना साहिब से बोले की -यह क़ुरबानी मुस्लमान लोग क्यों देते हैं?

यूँ तो मौलाना जल्दी में थे पर जब इस्लाम का प्रश्न हो तो समय निकल ही आया। अपनी लम्बी बकरा दाड़ी पर हाथ फेरते हुए बोले- इसके पीछे एक पुराना किस्सा है। हज़रत इब्राहीम से एक बार सपने में अल्लाह ने उनकी सबसे प्यारी चीज़ यानि उनके बेटे की क़ुरबानी मांगी। अगले दिन इब्राहीम जैसे ही अपने बेटे इस्माइल की क़ुरबानी देने लगे। तभी अल्लाह ने उन के बेटे को एक मेढ़े में तब्दील कर दिया और हज़रत इब्राहीम ने उसकी क़ुरबानी दे दी। अल्लाह उन पर बहुत मेहरबान हुआ और बस उसके बाद से हर साल मुस्लमान इस दिन को बकर ईद के नाम से बनते है और इस्लाम को मानने वाले बकरा, मेढ़े, बैल आदि की क़ुरबानी देंते हैं। उस बकरे के मांस को गरीबो में बांटा जाता हैं। इसे जकात कहते है। इससे भारी पुण्य मिलता है।

आर्य जी- जनाब अगर अनुमति हो तो में कुछ पूछना चाहता हूँ?

मौलाना जी – बेशक से

आर्य जी- पहले तो यह की बकर का असली मतलब गाय होता है। न की बकरा फिर बकरे, बैल, ऊंट आदि की क़ुरबानी क्यों दी जाती हैं ?

दूसरे बकर ईद के स्थान पर इसे गेंहू ईद कहते तो अच्छा होता क्योंकि एक किलो गौशत में तो दस किलो के बराबर गेंहू आ जाता हैं। वो ना केवल सस्ता पड़ता हैं, अपितु खाने के लिए कई दिनों तक काम आता है।

आपका यह हजरत इब्राहीम वाला किस्सा कुछ कम जँच रहा है। क्योंकि अगर इसे सही माने तो अल्लाह अत्याचारी होने के साथ साथ क्रूर भी साबित होता है।
आज अल्लाह किसी मुस्लमान के सपने में क़ुरबानी की प्रेरणा देने के लिए क्यों नहीं आते? क्या आज के मुसलमानों को अपने अल्लाह पर विश्वास नहीं है की वे अपने बेटो की क़ुरबानी नहीं देते? बल्कि एक निरपराध पशु के कत्ल के गुन्हेगार बनते हैं। यह संभव ही नहीं हैं क्योंकि जो अल्लाह या भगवान प्राणियों की रक्षा करता है। वह किसी के सपने में आकर उन्हें मारने की प्रेरणा देगा।
मुसलमानों की बुद्धि को क्या हो गया हैं? अगर हज़रत इब्राहीम को किसी लड़की के साथ बलात्कार करने को अल्लाह कहते तो वे उसे नहीं मानते तो फिर अपने इकलौते लड़के को मारने के लिए कैसे तैयार हो गए? मुसलमानों को तत्काल इस प्रकार का कत्लेआम को बंद कर देना चाहिए। मुसलमानों के सबसे पाक किताब कुरान-ए-शरीफ के अल हज 22:37में कहा गया है- न उनके मांस अल्लाह को पहुँचते हैं और न उनके रक्त , किन्तु उसे तुम्हारा तकवा (धर्मप्रयाणता) पहुँचता हैं। यही बात अल- अनआम 6:38 में भी कही गई है। हदीसो में भी इस प्रकार के अनेक प्रमाण मिलते हैं। यहाँ तक की मुसलमानों में सबसे पवित्र समझी जाने वाली मक्का की यात्रा पर किसी भी प्रकार के मांसाहार, यहाँ तक की जूं तक को मारने की अनुमति नहीं होती हैं। तो फिर अल्लाह के नाम पर इस प्रकार कत्लेआम क्यों होता है?

मौलाना जी- आर्य जी यहाँ तक तो सब ठीक हैं पर मांसाहार करने में क्या बुराई हैं?

आर्य जी -पहले तो शाकाहार विश्व को भुखमरी से बचा सकता है। आज विश्व की तेजी से फैल रही जनसँख्या के सामने भोजन की बड़ी समस्या है। एक कैलोरी मांस को तैयार करने में 10 कैलोरी के बराबर शाकाहारी पदार्थ की खपत हो जाती है। अगर सारा विश्व मांसाहार को छोड़ दे तो धरती के सिमित संसाधनों का उपयोग सही प्रकार से हो सकता है। कोई भी भूखा नहीं रहेगा। क्यूंकि दस गुना मनुष्यो का पेट भरा जा सकेगा। अफ्रीका में तो अनेक मुस्लिम देश भुखमरी के शिकार हैं। अगर ईद के नाम की जकात में उन्हें शाकाहारी भोजन दिया जाये तो 10 गुणा लोगों का पेट भरा जा सकता हैं।

दूसरे मांसाहार अनेक बीमारियों की जड़ हैं। इससे दिल के रोग, गोउट(Gout), कैंसर जैसे अनेको रोगों की वृद्धि देखी गई हैं। एक मिथक यह है की मांसाहार खाने से ज्यादा ताकत मिलती है। इस मिथक को पहलवान सुशील कुमार ने विश्व के नंबर एक पहलवान है और पूर्ण रूप से शाकाहारी है तोड़ दिया है। आपसे ही पूछते है की क्या आप अपना मांस किसी को खाने देंगे? नहीं ना तो फिर आप कैसे अन्य का मांस खा सकते हैं?

मौलाना जी – आर्य जी आप शाकाहार की बात कर रहे है तो क्या पोंधो में आत्मा नहीं होती हैं? क्या उसे खाने से पाप नहीं लगता है? महान वैज्ञानिक जगदीश चन्द्र बासु के मुताबिक तो पोंधो में जान होती है?

आर्य जी- पोंधो में आत्मा की स्थिति सुषुप्ति की होती हैं। अर्थात सोये हुए के समान, अगर किसी पशु का कत्ल करे तो उसे दर्द होता है, वो रोता है, चिल्लाता है। मगर किसी पोंधे को कभी दर्द होते, चिल्लाते नहीं देखा जाता। जैसे कोमा के मरीज को दर्द नहीं होता है। उसी प्रकार से पोंधो को भी उखाड़ने पर दर्द नहीं होता हैं। उसकी उत्पत्ति खाने के लिए ही ईश्वर ने की है। जगदीश बासु का कथन सही हैं की पोंधो में प्राण होते हैं पर उसमे आत्मा की क्या स्थिती है और पोंधो को दर्द नहीं होता है। इस बात पर वैज्ञानिक मौन है। सबसे महतव्पूर्ण बात है की शाकाहारी भोजन प्रकृति के लिए हानिकारक नहीं है। कुरान या बाइबिल की मान्यता के अनुसार किसी भी पशु को ईश्वर ने भोजन के लिए पैदा किया है तब तो पशुओं की स्वाभाविक प्रवृति यही होनी चाहिये की वे स्वयं मनुष्य के पास उसका भोज्य पदार्थ बनने के लिए आये और दूसरे बिना संघर्ष के अपने प्राण दे देने चाहिये?

मौलाना जी- परन्तु हिन्दुओ में कोलकता की काली और गुवहाटी की कामख्या के मंदिर में पशु बलि दी जाती हैं। वेदों में भी हवन आदि में तो पशु बलि का विधान है।
आर्य जी- जो स्वयं अंधे हैं वे दूसरो को क्या रास्ता दीखायेंगे? हिन्दू जो पशु बलि में विश्वास रखते है खुद ही वेदों की आज्ञा के विरुद्ध कार्य कर रहे है। पशु बलि देने से केवल और केवल पाप लगता है। भला किसी को मारकर आपको सुख कैसे मिल सकता है? जहाँ तक वेदों का प्रश्न है मध्यकाल में कुछ अज्ञानी लोगो ने हवन आदि में पशु बलि देना आरंभ कर दिया था। उसे वेद संगत दिखाने के लिए महीधर, सायण आदि ने वेदों के कर्म कांडी अर्थ कर दिए। जिससे पशु बलि का विधान वेदों से सिद्ध किया जा सके। बाद में मैक्समूलर , ग्रिफीथ आदि पाश्चात्य लोगो ने वेदों के उसी गलत निष्कर्षों का अंग्रेजी में अनुवाद कर दिया। जिससे पूरा विश्व यह समझने लगा की वेदों में पशु बलि का विधान है। आधुनिक काल में ऋषि दयानंद ने जब देखा की वेदों के नाम पर किस प्रकार से घोर प्रपंच किया गया है। तो उन्होंने वेदों का एक नया भाष्य किया जिससे फैलाई गयी भ्रांतियों को मिटाया जा सके। देखो वेदों में पशु रक्षा के विषय में बहुत सुंदर बात लिखी है-
ऋगवेद 5/51/12 में अग्निहोत्र को अध्वर यानि जिसमे हिंसा की अनुमति नहीं है कहाँ गया है
यजुर्वेद 12/32 में किसी को भी मारने से मनाही है
यजुर्वेद 16/3 में हिंसा न करने को कहाँ गया है
अथर्ववेद 19/48/5 में पशुओ की रक्षा करने को कहाँ गया है
अथर्ववेद 8/3/16में हिंसा करने वाले को मारने का आदेश है
ऋगवेद 8/101/15 में हिंसा करने वाले को राज्य से निष्काषित करने का आदेश है

इस प्रकार चारो वेदों में अनेको प्रमाण हैं जिनसे यह सिद्ध होता हैं की वेदों में पशु बलि अथवा मांसाहार का कोई वर्णन नहीं है।

मौलाना जी – हमने तो सुना हैं की अश्वमेध में घोड़े की, अज मेध में बकरे की, गोमेध में गों की और नरमेध में आदमी की बलि दी जाती थी।
आर्य जी- आपकी शंका अच्छी है। मेध शब्द का अर्थ केवल मात्र मारना नहीं है। मेधावी शब्द का प्रयोग जिस प्रकार से श्रेष्ठ अथवा बुद्धिमान के लिए किया जाता है उसी प्रकार से मेध शब्द का प्रयोग श्रेष्ठ कार्यो के लिए किया जाता है।
शतपथ 13/1/6/3 एवं 13/2/2/3 में कहाँ गया हैं की जो कार्य राष्ट्र उत्थान के लियें किया जाये उसे अश्वमेध कहते है। निघंटु 1/1 एवं शतपथ 13/15/3 के अनुसार अन्न को शुद्ध रखना, संयम रखना, सूर्य की रौशनी से धरती को शुद्ध रखने में उपयोग करना आदि कार्य गोमेध कहलाते हैं। महाभारत शांति पर्व 337/1-2 के अनुसार हवन में अन्न आदि का प्रयोग करना अथवा अन्न आदि की उत्पादन क्षमता को बढ़ाना अजमेध कहलाता है। मनुष्य के मृत शरीर का उचित प्रकार से दाह कर्म करना नरमेध कहलाता है।

मौलाना जी – हमने तो सुना है की श्री राम जी मांस खाते थे एवं महाभारत वनपर्व 207 में रांतिदेव राजा ने गाय को मारने की अनुमति दी थी।

आर्य जी- रामायण , महाभारत आदि पुस्तकों में उन्हीं लोगो ने मिलावट कर दी हैं। जो हवन में पशु बलि एवं मांसाहार आदि मानते थे। वेद स्मृति परंपरा से सुरक्षित है इसलिए वेदों में कोई मिलावट नहीं हो सकती। वेदों मे से एक शब्द अथवा एक मात्रा तक को बदला नहीं जा सकता। रामायण में सुंदर कांड स्कन्द 36 श्लोक 41 मेंस्पष्ट कहाँ गया हैं की श्री राम जी मांस नहीं लेते वे तो केवल फल अथवा चावल लेते है।

महाभारत अनुशासन पर्व 115/40 में रांतिदेव को शाकाहारी बताया गया है।
शांति पर्व 261/47 में गाय और बैल को मारने वाले को पापी कहा गया हैं। इस प्रकार के अन्य प्रमाण भी मिलते हैं जिनसे यह भी सिद्ध होता है की रामायण एवं महाभारत में मांस खाने की अनुमति नहीं हैं। जो भी प्रमाण मांसाहार के समर्थन में मिलते है, वे सभी सब मिलावट हैं।
मौलाना जी – तो क्या आर्य जी हमे किसी को भी मारने की इजाजत नहीं है?
आर्य जी – बिलकुल मौलाना साहिब। यहाँ तक की कुरान के उस अल्लाह को ही मानना चाहिए जो अहिंसा, सत्य,प्रेम, भाईचारे का सन्देश देता हैं। क़ुरबानी, मारना,जलना,घृणा करना,पाप करना आदि सिखाने वाली बातें ईश्वरकृत नहीं हो सकती।
हदीस ज़द अल-माद में इब्न क़य्यिम ने कहाँ हैं की “गाय के दूध- घी का इस्तेमाल करना चाहिए क्योंकी यह सेहत के लिए फायदेमंद है और गाय का मांस सेहत के लिए नुकसानदायक हैं”
मौलाना जी- आर्य जी आपकी बातों में दम बहुत है और साथ ही साथ वे मुझे जच भी रही है। अब मैं कभी भी जीवन भर मांस नहीं खाऊंगा। ईद पर बकरा नहीं काटूँगा और साथ ही साथ अपने अन्य मुस्लिम भाइयों को भी इस सत्य के विषय में बताऊंगा।

आर्य जी आपका सही रास्ता दिखने के लिए अत्यंत धन्यवाद।

बाइबिल पर सप्रमाण ३१ प्रश्न       - डॉ श्रीराम आर्यपहला प्रश्न जो खुदा अपनी गलतियों पर पछताता हो वह आगे गलती नहीं करेगा ...
19/05/2026

बाइबिल पर सप्रमाण ३१ प्रश्न - डॉ श्रीराम आर्य
पहला प्रश्न
जो खुदा अपनी गलतियों पर पछताता हो वह आगे गलती नहीं करेगा इसकी क्या गारंटी है और उसके न्याय पर भी कैसे भरोसा किया जा सकता है?(उत्पत्ति६-६)
६. और यहोवा पृथ्वी पर मनुष्य को बनाने से पछताया, और वह मन में अति खेदित हुआ।
प्रश्न-२
जो खुदा अपनी बात पर भी कायम ना रहने वाला हो, उसके आश्वासन व कानूनों पर भरोसा करने वाले धोखा नहीं खाएंगे इसकी क्या गारंटी है?( शैमुएल-2/30,31

प्रश्न-३
जब बाईबिल के अनुसार ईश्वर बहुत से है तो इसाई उनमें से कौन से ईश्वर को मानते हैं? और उसकी पहचान व उसका हुलिया क्या है?( भजन संहिता ८२ /1एवं उत्पत्ति 3/22)

प्रश्न-४
ईशा कौन से ईश्वर का इकलौता बेटा था? ईशा ईश्वर का इकलौता बेटा था, इसका क्या सबूत है? क्योंकि मरियम ने कभी नहीं बताया कि ईश्वर से उसे गर्भ रहा था और बाइबिल में ईश्वर ने भी अपने से मरियम को गर्भ रहने की बातें नहीं कहीं है। (युहन्ना ३/16)

प्रश्न-५
ईसाई संप्रदाय में बाप बेटी आपस में शादी कर सकते हैं क्या यह बात बाइबल के खिलाफ है?(१कुरैन्थियो ७ /37)

प्रश्न-६
विज्ञान ने तारों को पृथ्वी से भी दोगुनी बड़े लोक के बराबर सिद्ध किया है तो बाइबिल में तारों का पृथ्वी पर अंजीर के फलों की तरह गिर पड़ना क्या यह सिद्ध नहीं करता है कि बाईबिल का लेखक बे-पढ़ा लिखा व्यक्ति था?(प्रकाशित वाक्य ६/13)

प्रश्न-७
एक कुंड की शराब की लहरें गजो उची सौ कोस तक बहना गप्प क्यों ना माना जाए क्या यह बात किसी तर्क या प्रमाण से साबित की जा सकती है?(प्रकाशित वाक्य पैरा १४/20)

प्रश्न-८
गर्भवती मां के पेट में 2 बच्चों की कुश्ती का करना क्या इसे बाइबिल की गप्प ना मानी जाए?(उत्पत्ति २५/21-22)

प्रश्न-९
किस प्रकार यह संभव हो सकता है कि गर्भ के अंदर बैठा हुआ बालक गर्भाशय में से हाथ बाहर निकालकर डोरा बन्धवाकर, फिर अंदर गर्भाशय में स्वयं हाथ भीतर खींच ले? यह भी बाइबिल की गप्प क्यों ना मानी जाए क्योंकि गर्भस्थ बालक मे इतनी चेतना वह शक्ति संभव नहीं है।( बाईबल उत्पत्ति ३८/28-29)

प्रश्न-१०
जब ईसाई खुदा मनुष्य की फौजी मदद साथ में रहते हुए भी विपक्ष की फौजियों से हार गया वह उन्हें पराजित नहीं कर सका तो ऐसे खुदा को सर्वशक्तिमान कैसे साबित किया जा सकता है?(न्यायियो 1/19)

प्रश्न- ११
इसाईं खुदा के पास 20 करोड़ घुड़सवार फौज किससे लड़ने को व अपनी किससे रक्षा करने के लिए रहती है ?( प्रकाशित वाक्य पैरा १०/16-17)

प्रश्न- १२
खुदा की 12 से भी ज्यादा फौजी पलटन ऊनपर कितना वार्षिक व्यय होता है इन फौजियों का कमांडर कौन है यह कभी लड़ने भी गई है या निकम्मी पड़ी-पड़ी एक ही जगह पर खाती रहती है उसका बायबिल से विवरण पेश करें?(मत्ती २६/५३)

प्रश्न- १३
जब खुदा याकूब से कुश्ती में रात भर जोर करने पर भी ना जीत सका तो ऐसे कमजोर खुदा से उसके अनुयाई बड़े-बड़े युद्ध में मदद कि आशा क्यों रखते हैं-?
उत्पत्ति प्रकरण ३२/24से 32तक))

प्रश्न-१४
पैगंबर लूट के द्वारा अपनी पुत्रियों से व्यभिचार को सारी बाइबिल में कहीं भी पाप क्यों नहीं माना गया है और उसे कहीं भी धिक्कारा कर्मों नहीं गया है? -(उत्पत्ति-१९/30से 38))

प्रश्न-१५
जब खुदा भी मेहनत करने से थक जाता है और आराम करके अपना जी ठंडा करता है तो उसे सर्वशक्तिमान कैसे माना जा सकता है? -(निर्गमन ३१/17)

प्रश्न-१६
जो खुदा याददाश्त के लिए डायरी वा रजिस्टर लिख कर रखता हो वह सर्वज्ञ खुदा कैसे माना जा सकता है?
(निर्गमन ३२/31,32,33)

प्रश्न-१७
जिस व्यक्ति को इतनी भी पदार्थ विद्या ना आती हो कि पीतल पत्थर से बनती है या तांबा जस्ता मिलाने से बनती है उसके द्वारा लिखी गई पुस्तक धर्म पुस्तक कैसे मानी जा सकते हैं?-(बाइबिल अय्यूब प्रकरण२८/2)

प्रश्न-१८
जिस धर्म पुस्तक लिखने वाले को इतना भी भूगोल ना आता हो कि विश्व पृथ्वी के खंभों पर धरा है या परस्पर आकर्षणानुकर्षरण के आधार पर परमात्मा उसे धारण करता है उसकी लिखी पुस्तक प्रमाणित कैसे मानी जा सकती है
जिस पुस्तक में ऐसी बे सर पैर की बातें हो उसे गप्प पुस्तक यदि माना जाए तो क्या गलत होगा/?
बाईबल १शैमुएल २/8)

प्रश्न 19
क्या साउल को राजा बना कर बाद में पछताना इसाई खुदा की अनुभवहीनता वा सरवज्ञता का खुला उपहास नहीं है?
(बाइबल १ सैमुएल१५/३५)

प्रश्न 20
क्या इसाई खुदा को खुले मैदान में पृथ्वी पर रहने में चोर डाकुओं का भय लगता था जो वह बेचारा बिना मकान के इधर-उधर मारा मारा फिरता रहता था?, ( १ इतिहास १७/4,5)

प्रश्न 21
जब इसाई खुदा के बहुत से बेटे थे तो उसकी बीवियां कितनी थी वे सभी बेटे सदा कुवारे ही रहे थे या उनके कभी विवाह भी हुए थे बतावें कि खुदा का परिवार कितना बड़ा था ?(अय्यूब-१/6)

प्रश्न 22
जब चर्बी खाते-खाते खुदा का पेट भर गया तो उसके बाद भी जो लोग उसे चर्बी खिलाते रहते थे उसको पचाने के लिए खुदा ने में कोई चूर्ण या दवा खाई थी या कोई आसन
लगाकर हाजमा ठीक किया था?( याशायह1/11)

प्रश्न 23
जो खुदा अपने शत्रुओं से परेशान रहता हो उन्हीं से लड़कर बदले झुकाता हो वह भी क्या खुदा माना जा सकता है ईर्ष्या द्वेष रखना क्या खुदा का गुण है या उसमें दोष है? (याशायाह 1/24)

प्रश्न नं 24
जब खुदा युद्ध करने को स्वर्ग से उतरता है युद्ध के बाद फिर स्वर्ग चला जाता है तो वह सर्व व्यापक नहीं रह सकता क्या खुदा में इतनी भी ताकत नहीं कि स्वर्ग में बैठे-बैठे अपनी फौज से जमीन के अपने दुश्मनों पर विजय प्राप्त कर सके वह भी क्या खुदा है जिसे स्वयं पैदा किए लोगों से युद्ध करने को आना पड़ता है और उनसे भी हार जाता है ?
(याशायाह ३१/4)

प्रश्न 25
खुदा चर्बी बाकून जैसी चीजें क्यों खाता है फल मेवा घी दूध आदि उसे क्यों पसंद नहीं है क्या इनको खाने से वह बीमार पड़ जाता है?(यहेजकेल ४४ /15)

प्रश्न 26
खुदा ने इसराइलीओं को पखाने से रोटी पका कर खाने की गंदी आज्ञा क्यों दी थी(यहेजकेल ४ / १२,१३)

प्रश्न 27
खुदा फाटक बंद मकान अर्थात बहिस्त में क्यों रहता है क्या डर लगा रहता है कि जमीन के लोग वहां जाकर खुदा को खत्म ना कर दें?(यहेजकेल ११/1)

प्रश्न 28
खुदा मुकदमा लोगों के खिलाफ लड़ता था तो फैसला करने वाला जज तथा खुदा का वकील पैरवी करने के लिए कौन होता था?(यहेजकेल 17/20)

प्रश्न 29
खुदा का गुस्से बाज हो ना उसे दिमाग की कमजोरी का बीमार साबित करता है क्या कोई ऐसा तरीका भी है जिससे खुदा की इस बीमारी के दोष को दूर किया जा सके?(याशायह 54/7,8)

प्रश्न 30
जब शराब (दाख मधु) पीने से बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है तो खुदा और मसीही लोगों को शराब पिलाकर उनको बर्बाद क्यों करते थे तथा मसीह स्वयं शराब क्यों छ् था क्या लोगों को नुकसान पहुंचाने से भी गुनहगार नहीं थे?(याशायह 25/6, युहन्ना 2/7,8,9 होशे 4/11)

प्रश्न 31
संसार में दूसरों को गाली देना पाप माना जाता है तो ईशा ने अपने से पहले पैदा हुए महापुरुषों को चोर डाकू बताकर गाली क्यों दी क्या इससे मसीह का गुनहगार होना प्रमाणित सिद्ध नहीं है?(युहन्ना 10/7,8)

14/05/2026

*39 ने ईसाई मत छोड़ा
*
*आज याने 12 मई 2026 को दिंडोशी भाग के आरे कॉलनी के युनिट नंबर 32 मे रहने वाले कुरमी पासी समाज के 14 पुरूष 14 महिला और 11 बाल ऐसे कुल 39 लोगो ने ईसाई धर्म छोड पुनः हिंदू धर्म मे प्रवेश किया |*
**कार्यक्रम गोरेगाव पूर्व स्थित मसुराश्रम मे संपन्न हुआ | कार्यक्रम के पश्चात सभी को प्रमाणपत्र वितरित किये गये |*

*(वर्तमान में शुद्धि ही आपकी आने वाली पुश्तों की रक्षा करने में सक्षम हैं। याद रखें आपके धार्मिक अधिकार तभी तक सुरक्षित हैं, जब तक आप बहुसंख्यक हैं। इसलिए अपने भविष्य की रक्षा के लिए शुद्धि कार्य को तन, मन, धन से सहयोग कीजिए। )
*

आर्यसमाज पुस्तकालय सरस्वती नगर में आयी नई पुस्तके इस प्रकार है
07/04/2026

आर्यसमाज पुस्तकालय सरस्वती नगर में आयी नई पुस्तके इस प्रकार है

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