23/07/2023
"गोपालदास नीरज"
जन्म: 4 जनवरी 1925,इटावा, उत्तर प्रदेश
मृत्यु: 19 जुलाई 2018, दिल्ली
गीतों के राजकुमार कहे जाने वाले हिंदी के महान गीतकार गोपाल दास नीरज जी का जन्म गंगा यमुना किनारे बसे शहर इटावा में हुआ। गरीबी से गीतकार बनने का यह सफर एक गीत के स्वरों की तरह था, या कहिए आरोह अवरोह की तरह!
एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था “गंगा किनारे हमारा घर हुआ करता था और घर में बेहद गरीबी थी। जो लोग गंगा नदी में 5 पैसे, 10 पैसे फेंकते थे, हम बच्चे गोता लगाकर उन्हें निकालकर इकठ्ठा करते थे और इसी जमा पूंजी से घर का चूल्हा जलता था।”
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने उन्हें हिंदी की वीणा नाम से अलंकृत किया। वे अपने समय के बेहतरीन कवि और लेखक थे, उनके लेख, कविताएं लोगों को मंत्रमुग्ध कर देती थीं।
कवि सम्मेलनों की अपार लोकप्रियता उन्हें बॉलीवुड के घर मुंबई तक ले गई। सन् 1969 में चांद और बिजली, 1971 में पहचान और 1972 में मेरा नाम जोकर के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ गीतकार का खिताब मिला।
भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री और पद्मभूषण से नवाजा।
19 जुलाई 2018 को एक लंबी बीमारी के कारण उनका देहांत हो गया और वे हिंदी जगत को हमेशा के लिए अलविदा कह गए।
कविता संग्रह - संघर्ष, अंतर्ध्वनि, विभावरी, प्राणगीत, दो गीत, नीरज की पाती, तुम्हारे लिए आदि।
गजलें- जितनी भारी गठरी होगी, सफर में रहा, तुम्हारे घर का सफर
फिल्मी गीत - फूलों के रंग से, लिखे जो खत तुझे आदि।