14/04/2026
क्या आपको पता है,
हजारों साल पहले हमारे ऋषि-मुनि
बिना सैटेलाइट, बिना टेलीस्कोप
के दक्षिण ध्रुव तक की सीधी रेखा
जानते थे?
सोमनाथ के बाण स्तंभ पर अंकित: 'समुद्रांत दक्षिण ध्रुव पर्यंत अबाधित ज्योतिर्मार्ग' –
सिर्फ समुद्र, कोई जमीन नहीं!
आर्यभट्ट ने 23 साल की उम्र में
पृथ्वी को घूमते हुए बताया,
दिन-रात का रहस्य खोला –
वो भी 476 ईस्वी में!
वराहमिहिर ने गुरुत्वाकर्षण जैसा
विचार दिया, त्रिकोणमिति को
नई ऊँचाई दी,
Pascal's Triangle का बीज बोया!
ये कोई संयोग नहीं,
ये हमारी रगों में बहता वैदिक ज्ञान है!
हमारे पूर्वज आकाश को छूते थे,
जबकि दुनिया अंधेरे में थी।
आज हम सिर झुकाते हैं विदेशी विज्ञान
के आगे, याद रखो –
हमारी जड़ें सूर्य से भी ऊँची हैं!
जय हिंद! जय भारत! 🇮🇳
हर हर महादेव 🚩