Sankhya Art Foundation

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सादर आभार🙏 - दैनिक जागरण, वाराणसी
14/04/2026

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पुस्तक परिचय- षडंगलेखक- त्रिवेणी प्रसाद तिवारीTriveni Tiwari पुस्तक के बारे में दो शब्द-कलाएं हमारे देश के दर्शन - अध्या...
26/10/2025

पुस्तक परिचय- षडंग
लेखक- त्रिवेणी प्रसाद तिवारी
Triveni Tiwari

पुस्तक के बारे में दो शब्द-

कलाएं हमारे देश के दर्शन - अध्यात्म की वैचारिकी का दृश्यात्मक रूप हैं। वह पश्चिम की भांति भारत में मनोरंजन मात्र नहीं है। भारत की अक्षुण्ण ज्ञान परम्परा में षड्दर्शन का जो स्थान है, वही महत्व चित्रकला में षडंग का है।
चित्रकला एवं मूर्तिकला की भारतीय परम्परा और उनका सौंदर्य दर्शन इक्कीसवीं सदी में प्रासंगिक एवं प्रायोगिक, दोनों हैं । वैश्विक कला परिदृश्य में कलाओं की वैयक्तिक अभिव्यंजना के बीच भारतीय कला 'लीयते परमानंदम् ' को कला की अंतिम उपलब्धि मानती है। इस पुस्तक में परमानंद के षडंग की ही व्याख्या की गई है ...

लेखक परिचय-

त्रिवेणी प्रसाद तिवारी मूलत: एक संवेदनशील मूर्तिशिल्पी हैं, जिनका माध्यम सेरामिक है। वह काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी से 'पाॅटरी सेरामिक एण्ड डिजाइन' में परास्नातक हैं। दिल्ली, मुम्बई जैसे महत्वपूर्ण विभिन्न स्थानों पर कई कला-प्रदर्शनियों में उनकी कलाकृतियों ने सभी का ध्यान आकृष्ट किया है। ललित कला अकादमी में उनकी एकल प्रदर्शनी "बीजक" सेरामिक विधा के गाम्भीर्य वैचारिकी के लिए जानी जाती है। प्रथम भारतीय अंतरराष्ट्रीय सेरामिक बिनाले जयपुर में प्रदर्शित उनकी मूर्तिशिल्प "उजड़े शहर में बीज" काफी चर्चित रही।
एक कलाकार की अभिव्यक्ति रूप - रंग एवं रेखाओं के दृश्यमान प्रस्तुति में होती है। वह कला रचना की वैयक्तिक अनुभूतियों पर गहराई से बात तो कर सकता है परन्तु कला के सौंदर्यशास्त्रीय पक्ष पर लिखना उसके लिए कहीं अधिक कठिन होता है। प्रस्तुत पुस्तक में त्रिवेणी प्रसाद तिवारी, कला की शास्त्रीय परिप्रेक्ष्य एवं कलाकार के अनुभूतिजन्य भावों को सरल ढंग से व्यक्त करते हैं। कला में षडंग की भारतीय अवधारणा को सहज रूप में रेखांकित करना ही इस पुस्तक का लक्ष्य है। चूॅंकि वह मौलिक रूप से कलाकार हैं इसलिए उनके लेखन में शास्त्रीयता के साथ भावप्रवणता भी है, जो इस पुस्तक को सैद्धांतिक शुष्कता से बचाती है। इस पुस्तक को पढ़ना केवल भारतीय कला की महान षडंग अवधारणा से परिचित होना ही नहीं है बल्कि कलाकार के हृदय में बनने वाली कलाकृतियों के निर्माण प्रक्रिया की ऊहापोह और घटित आनंद को करीब से अनुभूत करना भी है।

डॉ. जय प्रकाश सिंह
सहायक आचार्य
हिमाचल प्रदेश केन्द्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला
एवं
उप सम्पादक
संवाद सेतु (आनलाइन)

सादर आमंत्रण 🙏
16/04/2025

सादर आमंत्रण 🙏

https://www.newspost.live/en/nuances-water-colours-taught/Special thanks to News Post
08/10/2024

https://www.newspost.live/en/nuances-water-colours-taught/

Special thanks to News Post

Dateline Rishikesh: Close to two dozen students of the Department of Fine Arts, Devbhoomi Uttarakhand University under Assistant Professor Dr. Mantosh Yadav took part in a one-day water-colour workshop hosted by renowned Kashi artist Hari Darshan Sankhya. Held on the banks of the serene Ganges at Ra...

https://khabarnewindia.com/details-NzQ5OQ==
08/10/2024

https://khabarnewindia.com/details-NzQ5OQ==

देहरादून, खबर न्यू इंडिया (न्यूज़ डेस्क): देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय के ललित कला विभाग के छात्रों देहरादून के ...

We are glad to share with you some glimpses of the plein air watercolor workshop by artist Hari Darshan Sankhya.this wor...
06/10/2024

We are glad to share with you some glimpses of the plein air watercolor workshop by artist Hari Darshan Sankhya.this workshop was at the bank of Holy river Ganges in rishikesh.

we are thankful to Parvarish Foundation Varanasi

Convener: Mr. Arun Dabral
Co-ordinator: Dr Mantosh Yadav

Special thanks to Dr. Santosh Sahani

04/10/2024
काशी के कला गुरु एवं चित्रकार श्री मन्नमथ कुमार दास की 17वी पुण्यतिथि के अवसर  पर सांख्य आर्ट फाउंडेशन एवं परवरिश फाउंडे...
29/08/2024

काशी के कला गुरु एवं चित्रकार श्री मन्नमथ कुमार दास की 17वी पुण्यतिथि के अवसर पर सांख्य आर्ट फाउंडेशन एवं परवरिश फाउंडेशन, वाराणसी के संयुक्त तत्त्वधान में एक दिवसीय चित्रकला शिविर का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर संकटमोचन स्थित "मन्मथ आर्ट सेन्टर एवं गैलरी" में काशी के लगभग 30 युवा चित्रकारों ने बनारस के विभिन्न विषयों पर अर्धारित अनेक चित्रों का निर्माण कर दास जी को सृजनात्मक श्रद्धांजलि अर्पित की। श्री दास के चित्रों का मुख्य विषय बनारस ही रहा है अतः बनारस के घाट, गलियों, साधु इत्यादि विषयो के चित्र मुख्य रूप से बनाये गए।
शिविर के दौरान श्री दास जी के अनेक चित्रों को प्रदर्शित किया गया, जिससे छात्रों को कला की अनेक बारीकियों को समझने का भी दुर्लभ संयोग मिला।
श्री दास जी का जन्म अविभाजित भारत के मयमनसिंह में हुआ था जो वर्तमान में बांग्लादेश में है।आपने अपनी कला शिक्षा शांतिनिकेतन में महान कलागुरु श्री नंदलाल बसु से लिया, तत्पश्चात गुरु की आज्ञा मानकर आप काशी में आ गए और थियोसॉफिकल सोसायटी, कमच्छा में कला प्रध्यापक के रूप में महत्वपूर्ण योगदान देते हुए अनेक छात्रों को सवारने का महनीय कार्य किया।
अध्यापन कार्य के साथ ही श्री दास ने अपनी चित्रकला की सृजनात्मक यात्रा को भी निरंतर जारी रखा। श्री दास जी मुख्यतः परंम्परिक रूप से प्रयुक्त खनिज एवं वास्पतिक रंग का प्रयोग करते हुए बनारस के घाट और गंगा के किनारे के दृश्य पर अर्धारित हजारों चित्रों का निर्माण किया। आपको छात्र जीवन से ही, रवींद्रनाथ टैगोर, अबनिन्द्र नाथ टैगोर, महात्मा गाँधी आदि महापुरुषो का सानिध्य का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ, जिसका प्रभाव उनके जीवन और कला पर भी व्यापक रूप से दिखाई पड़ता है। यही कारण रहा कि श्री दास जी दुनिया की चकाचौंध से दूर रहकर अंतर्मुखी होकर निष्काम भाव से कला साधना में रत रहे।
शिविर की आयोजक और श्री दास जी की बेटी तथा सांख्य आर्ट फाउंडेशन की सह संस्थापिका इंद्राणी पॉल ने बताया कि श्री दास जी ने तो अपना पूरा जीवन ही कला को समर्पित कर दिया था, और उन्हे छात्रों के साथ चित्र निर्माण करना बहुत पसंद था, उनके द्वारा शुरू की गयी इसी परंपरा को जारी रखने की कोशिश तहत इस शिविर का आयोजन किया गया जिससे कला के माध्यम से छात्रों में सृजनात्मक अभिक्षमता का विकास हो सके।
शिविर का उद्घाटन विशिष्ट अतिथि के रूप me उपस्थित श्री दास जी धर्मपत्नी श्रीमती इरा दास जी द्वारा किया गया तथा , डॉ. गार्गी चटर्जी, श्री पी के पॉल, श्री प्रवीण कुमार सिंह, अदिति रमन, श्री अनीश कुमार, श्रीमती तनुका, श्रीआज़ाद कपूर,श्री प्रतिम,विशाल मौर्य, वीरू कुमार, अंजनी मौर्य, नीतू गौतम, अनामिका पांडेय, सिमरन सोनकर, गीतांजलि गोंड, आयुषी मौर्य, नेहा प्रजापति, मधु, आभा चौरसिया, खुशी मौर्य, स्वीटी कुमारी, शालिनी मौर्या, हिमांशु, अमन मौर्य, दीपक मौर्य, हीना अंसारी, खुशी सिंह, शिवांगी जयसवाल, प्रवीण प्रकाश हिमांशु इत्यादि गणमान्यजन विशेष रूप से उपस्थित रहे।
शिविर आये सभी युवा कलाकारों को प्रोत्सहना के उद्देश्य से श्री पॉल की धर्मपत्नी के हाथों से प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम का संचालन गार्गी चटर्जी तथा धन्यवाद ज्ञापन इंद्राणी पॉल ने किया।

सहृदय आभार : जन संदेश टाइम्स, वाराणसीदिनांक: 9 जुलाई, 2024, पृष्ठ संख्या- 16विशेष आभार: श्री वीरेंद्र श्रीवास्तव जी
09/07/2024

सहृदय आभार : जन संदेश टाइम्स, वाराणसी
दिनांक: 9 जुलाई, 2024, पृष्ठ संख्या- 16

विशेष आभार: श्री वीरेंद्र श्रीवास्तव जी

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