ShivBodh International Organisation

ShivBodh International Organisation Founded by Shivbodh Avikalp Ji, Shivbodh International Organization is dedicated to preserving humanity and its core values.

The organization's mission is to serve humanity, promote spiritual education, and foster global peace.

ज्ञानसागर हंसाय नीरक्षीरविवेकिने ।विश्वमानवमुक्ताय शंकराचार्य समर्पयेत् ॥
09/03/2026

ज्ञानसागर हंसाय नीरक्षीरविवेकिने ।
विश्वमानवमुक्ताय शंकराचार्य समर्पयेत् ॥

Dakshināmnāya (South)

May happiness come into everyone's life.
30/03/2025

May happiness come into everyone's life.

Daily at Shivala Ghat , Varanasi
29/10/2024

Daily at Shivala Ghat , Varanasi

28/10/2024

वेद पढ़ के उसके अर्थ को नहीं समझा होता तो जीवन रट्टू तोता ही रह जाता काशी जहाँ चेतना कुछ सार्थक करने की ओर आपको प्रेरित करती है वहीं पर " शिवबोधत्त्व सेवा सूत्र ; का आविर्भाव हुआ है और वह जीवन के लिये भविष्य के लिये हम सबके के लिये महत्वपूर्ण है .

जीवन के सन्दर्भ में बड़ा व्यापार होता जा रहा है , थोड़ी चर्चा थोड़ा स्मरण मृत्यु का भी हो तो ग़लत है पूर्ण स्मरण मृत्यु का होना चाहिये ऐसा जैसे जब मिले स्वीकार लेंगे जाने को तैयार होंगे -

जब लोगों को साफ़ स्वच्छ पानी पर्याप्त मात्रा में मिलेगा
जब शिवाला घाट पे १००० पौधों से निकली स्वच्छ और सुगन्धित हवा पुण्यात्माओं की धरा के नये तंतुओं को सींच रही होगी

हमारे घर वाले संस्था के लोग सौभाग्यशाली हैं जो उनका जीवन वैदिक गंगा पूजन एवं गंगा आरती जैसे कार्यक्रम में लगा है उसकी व्यवस्था में सुबह से शाम हो रही है ।
ये वही कार्य है जो मुक्त करता जा रहा है जिस कार्य को करते हुये हमारे माता - पिता सहित सभी लोगों का यह जीवन सार्थक सनातन धारा में विलीन हो रहा है
सभी को ये पता है अन्तिम श्वास तक ये कार्य करते हुये हमलोग जीवन को गंगा में विसर्जित करेंगे यही जीवन की सबसे श्रेष्ठ गति होगी ।

गंगाजल भी गतिमान है
समय भी गतिमान है
संकल्प दिये की भाँति
गंगा में प्रवाहित कर दिया है

आप भी जीवन समर्पित कर सकते हैं !

।। पृथिव्यै च स्वाहा ।।
Shivala Ghat Ganga Aarati

।। गृहाण शिवबोधत्त्वम् ।।
27/10/2024

।। गृहाण शिवबोधत्त्वम् ।।

Acharya Shivankar आचार्य व्रजेन्द्र व्याससंस्कृतिसंस्कृते वासुधैव कुटुम्बकम् समर्पिता अस्माकं वेबसाइट्।www.shivbodh.onli...
22/10/2024

Acharya Shivankar आचार्य व्रजेन्द्र व्यास
संस्कृतिसंस्कृते वासुधैव कुटुम्बकम् समर्पिता अस्माकं वेबसाइट्।
www.shivbodh.online

भृगुवल्ली: ब्रह्म के विविध स्वरूपों की खोजमहाभारत के अनुशासनपर्व में वर्णित भृगुवल्ली, तैत्तिरीय उपनिषद का एक महत्वपूर्ण...
13/10/2024

भृगुवल्ली: ब्रह्म के विविध स्वरूपों की खोज

महाभारत के अनुशासनपर्व में वर्णित भृगुवल्ली, तैत्तिरीय उपनिषद का एक महत्वपूर्ण भाग है। इस उपनिषद में ऋषि भृगु और उनके पिता वरुण के बीच ब्रह्म के ज्ञान की प्राप्ति का मार्ग बताया गया है।

वरुण ने भृगु को बताया कि ब्रह्म वह है, जिससे सभी जीव उत्पन्न होते हैं, जिससे जीवित रहते हैं और अंत में जिसमें समा जाते हैं। उन्होंने कहा, "यतो वा इमानि भूतानि जायन्ते। येन जातानि जीवन्ति। यत्प्रयंत्यभिसांविशंति। तद्विजिज्ञासस्व। तद ब्रह्मेति।" (जिससे ये सभी जीव उत्पन्न होते हैं, जिससे जीवित रहते हैं और जिसमें समा जाते हैं, उसे जानो, वही ब्रह्म है।)

वरुण ने भृगु को ब्रह्म को जानने के लिए अन्न, प्राण, नेत्र, कर्ण, मन और वाणी का उपयोग करने का निर्देश दिया। "अन्नम प्राण: चक्षु: श्रोतम मनोवाचमिति।" (अन्न, प्राण, नेत्र, कर्ण, मन और वाणी ये ब्रह्म को जानने के माध्यम हैं।)

भृगु ने इन माध्यमों का उपयोग करते हुए ब्रह्म के विभिन्न स्वरूपों का अनुभव किया। उन्होंने पाया कि:

अन्न (वनस्पति) ब्रह्म है।
प्राण (जीव चेतना) ब्रह्म है।
मन (उच्च चेतना) ब्रह्म है।
विज्ञान अर्थात सत्य ब्रह्म है।
आनन्द ब्रह्म है।
इस ज्ञान के बाद, भृगु ने ब्रह्म के आचरण के बारे में भी सीखा। उन्होंने पाया कि:

अन्न की निन्दा न करें।
अन्न जल का त्याग न करें।
अन्न की वृद्धि करें।
अतिथि का सम्मानपूर्वक अन्न द्वारा सत्कार करें।
शरीर उपासना - शरीर के हाथ पैर मुख वाणी गुदा आदि कर्म और गति के माध्यम हैं। इनका ध्यान रखें।
प्रकृति उपासना - वर्षा, विद्युत, पशु, नक्षत्र, प्रजा, आकाश आदि रूप में देव या प्रकृति उपासना।
भृगु ने इन सभी स्तरों का अनुभव किया और अंततः परम आनंद प्राप्त किया। ब्रह्मवल्ली में परम आनंद का गणितीय सूत्र भी दिया गया है, जिसका गुणन फल अनन्त है।

भृगुवल्ली में कई महत्वपूर्ण मंत्र भी शामिल हैं, जो ब्रह्म के ज्ञान और आचरण के मार्ग को बताते हैं। इनमें से कुछ मंत्र हैं:

"ॐ तत् सतिति तिरोऽध्यात्मं च विद्यात्। तदेव ब्रह्मेति संप्रजानीतम्।" (ॐ तत् सतिति, यह आत्मा है, इसे जानना चाहिए। यह ही ब्रह्म है, इसे समझना चाहिए।)

"ॐ अग्निर्देवता। अग्निर्ज्योतिर्देवता। अग्निर्दृष्टिर्देवता। अग्निर्हृदयं देवता। अग्निर्वाक्देवता। अग्निर्प्राणदेवता। अग्निर्मनोदेवता। अग्निर्विज्ञानं देवता। अग्निरानन्दो देवता।" (ॐ अग्नि देवता है, अग्नि प्रकाश देवता है, अग्नि दृष्टि देवता है, अग्नि हृदय देवता है, अग्नि वाणी देवता है, अग्नि प्राण देवता है, अग्नि मन देवता है, अग्नि विज्ञान देवता है, अग्नि आनंद देवता है।)

"ॐ प्राणो देवता। प्राणो ज्योतिर्देवता। प्राणो दृष्टिर्देवता। प्राणो हृदयं देवता। प्राणो वाक्देवता। प्राणो प्राणदेवता। प्राणो मनोदेवता। प्राणो विज्ञानं देवता। प्राणोऽऽनन्दो देवता।" (ॐ प्राण देवता है, प्राण प्रकाश देवता है, प्राण दृष्टि देवता है, प्राण हृदय देवता है, प्राण वाणी देवता है, प्राण प्राण देवता है, प्राण मन देवता है, प्राण विज्ञान देवता है, प्राण आनंद देवता है।)

ये मंत्र ब्रह्म के विभिन्न स्वरूपों और उनके गुणों का वर्णन करते हैं। इन मंत्रों का जाप और मनन करने से ब्रह्म के ज्ञान की प्राप्ति होती है।

ब्रह्म का ज्ञान प्राप्त करने के लिए अन्न, प्राण, नेत्र, कर्ण, मन और वाणी का उपयोग करें। ब्रह्म के विभिन्न स्वरूपों का अनुभव करें और उनके आचरण का पालन करें। ऐसा करने से परम आनंद प्राप्त होगा।

भृगुवल्ली एक महान उपनिषद है, ब्रह्म के ज्ञान की प्राप्ति का मार्ग बताती है। इस उपनिषद का अध्ययन और मनन करने से व्यक्ति ब्रह्म के साथ एकात्मता प्राप्त कर सकता है।
Shivbodh Avikalp

इस ब्रह्माण्ड का सृजन एवं पालन करने वाली शक्ति का उपासक हूँ  , फिर कैसे  क्षुद्रतम् बातों से प्रभावित हो सकता हूँ ईश्वर ...
03/10/2024

इस ब्रह्माण्ड का सृजन एवं पालन करने वाली शक्ति का उपासक हूँ ,
फिर कैसे क्षुद्रतम् बातों से प्रभावित हो सकता हूँ ईश्वर ने यह देह दिया मानव बन कर कुछ कर्म करने का कर्मलोक में जन्म हुआ फिर साधारण कैसे हो सकता है ?

एक ऐसा पण्डित बनना बहुत आसान है जो बँधे - बँधाये ढर्रे पे चला जा रहा है, ऐसा नहीं की उनको संतोष और सुख मिला है वो भी हाय - हाय करके सामान्य बने हैं या कृत्रिम तुष्टिपूर्ण भाव भंगिमा बनाये विचरण कर रहे हैं ।

जीवन में आप सभी बन्धन स्वीकार कीजिये, लेकिन ऐसा बन्धन जो दिखावा और ढोंग करवाता हो उसको आप विसर्जन कर दें या स्वयं हो जायें क्यूँकि जब जीवन में जीवन नहीं है तो क्या ख़ाक जी रहें हैं राख हो जायें ।

काशी में घाट पर जहाँ कहीं भी गंगा आरती होती है एकदम क़रीब से तटस्थ होकर गंगा आरती एवं उसमें होने वाले सभी क्रिया - कलापों गतिविधियों को भली भाँति देखने पर एक रिक्तता का अनुभव हुआ, ऐसा लगा की इस कार्यक्रम को और अच्छा सुन्दर बनाया जा सकता है और इसमें जो आधुनिक रीति की कुछ अनावश्यक विधियाँ जोड़ी गई हैं उन्हें हटाना चाहिये ।

शिवाला घाट पर शिवबोध गंगा आरती का कार्यक्रम शुरू हुआ यह कार्यक्रम के साथ सभी के लिये शुद्ध पेय जल की पर्याप्त मात्रा का होना भी शिवबोध का लक्ष्य है और शिवाला घाट पे 1000 गमलों में लगे हाइब्रिड पौधे जो जगह और आकार में छोटे होते हुये भी अपनी जाति में अद्भुत हैं उनका वृक्षारोपण करना है ।

ये कार्य करने में वह पूर्णता है जैसे अविकल्प को होना चाहिये जिसके जैसा कोई नहीं, फिर शिवबोध अविकल्प की बात है अपना खाये और घर भरना चाहते तो कई कार्य हैं किसी दूसरे देश जाकर मन्दिर में पूजन - अर्चन करके जीवन यापन कर सकते हैं ।

गंगा पूजा गंगा आरती का वह स्वरूप जो होना चाहिये और भव्यता तो इतनी जैसी विश्व में कहीं हो ना, ऐसे आयोजन को प्रतिदिन बीच में रहते हुये संपन्न करना ही मुक्ति देने वाला है,

एक तरफ़ गंगा देवी के पूजक भक्तवृन्द एक तरफ़ दक्षिण से उत्तर की और बहती माँ गंगा की धारा बीच में पण्डित, पुजारी, कर्मचारी, शिवबोध और शिवबोधि ।

वर्ष में एक बार 2 महीने के लिये जब गंगा का जलस्तर ऊपर आता है तो अपने साथ मिट्टी भी लाता है जो बहुत उर्वरक होती है, उससे घाट और सीढ़ियाँ दब जाते हैं फिर कार्तिक में पूर्णिमा तक नगर निगम के द्वारा उन्हें हटाया जाता है
पानी के तेज धार से उन मिट्टि के सभी अवशेष साफ़ कर दिये जाते हैं पानी की धार से बह कर वह पुनः गंगा में चली जाती है ।

इस वर्ष शिवाला घाट पे बढ़ी हुई मिट्टी से गंगा आरती देखने वालों को दुविधा हो रही थी तो हमने इसे स्वयं हटाने का निर्णय लिया और फावड़े से प्रात : काल ही शुरू हो गये ।
कई लोग आये गये अधिकांशत : अपने कार्य से आये और गये किन्तु जो स्थानीय या बाहर के थे उनमें से कुछ लोगों ने जो कहा वो …

1- अरे गुरु काहें परेशान होत हुआ अभियें देव दिवाली तक साफ़ हो जाई,

2- अरे एनकर मोटर चोरी हो गैल नाहीं तो इतना खटे के न पड़त.

3- गुरु दूसरा मोटर लाइये .

4- आप बहुत अच्छा काम कर रहें हैं .

5- ऊहाँ करे के बाद एहरो साफ़ कर दिहा .

इन सभी के बीच में एक - दो लोगों को छोड़ ऐसा और कोई नहीं था जो आये और कहे की हम भी सहयोग करते हैं।
2 दिन में 10 सीढ़ी जितनी जगह जिस पर मिट्टी की मोटी चद्दर जमीं थी वह हटा पाया जिससे लोग बिना मिट्टी पर फिसले पत्थर पर पाँव रख कर गंगा जी तक जा सकते हैं .

रात्रिकाल में आरती पूर्ण होने के पश्चात ही हमने ये घोषणा की थी जिन्हें भी श्रमदान करना हो वह प्रात: काल आयें, हम सभी लोग मिल कर तट को साफ़ करेंगे ,

दिल्ली से घूमने आये मित्तल जी और उनका परिवार यहाँ होटल में जब तक थे प्रात: सायंकाल की आरती में नियमित आते रहे और बड़े उत्साह एवं उमंग के साथ सम्मिलित होते रहे ।

सुबह जब उन्होंने देखा की हम अकेले लगे हैं तो उन्होंने कहा आज अभी वापस जा रहें हैं अन्यथा आपके साथ लग जाते , हमने कहा आप अतिथि हैं आप आनन्द लें यह सब तो जिम्मेदारी के अन्तर्गत आता है , फिर उन्होंने पड़ी मिट्टी और फावड़े को देख यह अनुमान लगाया की बहुत समय लगने वाला है और उन्होंने कहा यहाँ लेबर 500₹ के हिसाब से उपलब्ध हैं आप 5 श्रमिकों को लगाकर हटवा लें जिसका वहन वह करेंगे ।

वह धन देकर गये सम्पर्क सूत्र के साथ , यह बात है आपके साथ साझा करने का कारण मात्र इतना है हम यजमानी के भरोसे नहीं जीते हैं कुछ अच्छा करना है नक़्शा तैयार है अधिक समय नहीं लगेगा , शिवाला घाट पर लगने वाले पौधों में एक पौधा मित्तल एण्ड फैमिली के नाम से होगा उनसे प्राप्त जो धन था वह पूर्ण व्यय नहीं हुआ शेष से ही गमला और पौधा आ गया है अब वह इस पुण्यक्षेत्र में आने वालों के लिये वायु शुद्धता के साथ वातावरण को सुगन्धित करता रहेगा, इतना हम सहयोग कर ही सकते हैं अपने वर्तमान के समकालीन मित्रों के साथ भविष्य के सभी अतिथियों के लिये,

इसीलिये कौन क्या कहता है इस पर ध्यान नहीं क्या करता है इस पर ध्यान देना चाहिये ।

हम एक सार्वभौमिक मानवकल्याण के ध्येय लिये इस जीवन के साथ आनेवाले समय या लोगों के लिये अभी ही सार्थक कार्य कर रहें हैं ।

इसलिये शिवबोध अविकल्प जानते हैं मानते हैं पूर्ण विश्वास के साथ he is not an ordinary man, . ShShivala Ghat Ganga Aarti ।। अस्तु ।।

02/10/2024

अगले लेख का शीर्षक - i ' m not ordinary man.

ShivBodh Ganga Aarati Shivala Ghat Varanasi
12/09/2024

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