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28/07/2025

"क्या आपने इस बार पौधा लगाया?"


#मिट्टीसेप्यार #प्राकृतिकजीवन #हरीयाली #आमकापौधा

11/07/2025

बरसात में घर में ही उगाएं सब्जियां।

07/07/2025
यह तस्वीर बताती है कि पर्यावरण बचाने की दृढ़ इच्छाशक्ति शक्ति हो तो कुछ भी असंभव नहीं।
03/07/2025

यह तस्वीर बताती है कि पर्यावरण बचाने की दृढ़ इच्छाशक्ति शक्ति हो तो कुछ भी असंभव नहीं।

20/06/2025
आयुर्वेदिक गुणों से भरपूरी गुलमोहरगुलमोहर एक बेहद सुंदर, छायादार और गर्मियों में खिलने वाला वृक्ष है। दूर से ही लोगों को...
13/06/2025

आयुर्वेदिक गुणों से भरपूरी गुलमोहर
गुलमोहर एक बेहद सुंदर, छायादार और गर्मियों में खिलने वाला वृक्ष है। दूर से ही लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है। गर्मियों के मौसम में इसके फूल अलग छटां बिखेरते हैं। बंगलुरु शहर में सड़क के किनारे कतारबद्ध लगे गुलमोहर के वृक्ष र्गिमयों में अपने फूलों से शहर की सुंदरता पर चार चांद लगाते हैं। भारत समेत दुनिया के कई उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में इसे सजावटी पेड़ के रूप में लगाया जाता है। गुलमोहर एक छायादार वृक्ष होने के साथ-साथ इसके फूल एक सुंदर और औषधीय गुणों वाला फूल होते हैं। यह अपनी लाल और नारंगी रंगीन पत्तियों के लिए प्रसिद्ध है। आयुर्वेद में, इसे कई बीमारियों के इलाज में उपयोग किया जाता है, जैसे कि डायरिया, बवासीर और बालों का झड़ना।
गुलमोहर फूल के औषधीय गुण:
एंटीबैक्टीरियल:
यह बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करता है।
एंटीफंगल:
यह फंगस के संक्रमण को रोकने में मदद करता है।
एंटी-इंफ्लेमेटरी:
यह सूजन को कम करने में मदद करता है।
एंटी-ऑक्सीडेंट:
यह शरीर को प्रâी रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाता है।
गुलमोहर फूल के उपयोग:
डायरिया:
गुलमोहर फूल का चूर्ण डायरिया के इलाज में उपयोगी है।
बवासीर:
गुलमोहर फूल का उपयोग बवासीर के इलाज में किया जाता है।
बालों का झड़ना:
गुलमोहर फूल के तेल का उपयोग बालों को मजबूत बनाने और बालों के झड़ने को रोकने के लिए किया जाता है।
अन्य बीमारियां: गुलमोहर फूल का उपयोग गठिया, मुंह के छाले, मासिक धर्म में दर्द और अन्य बीमारियों के इलाज में किया जाता है.
गुलमोहर के पेड़ के बारे में: गुलमोहर का पेड़ मेडागास्कर का मूल है और यह एक आभूषण पौधा है। यह अपनी सुंदर छतरी के आकार और रंगीन फूलों के लिए जाना जाता है। गुलमोहर के पेड़ को पार्क, बगीचे और सड़क के किनारे लगाने के लिए आदर्श माना जाता है।

पौधारोपण के बाद पौधों में नियमित पानी डालना भी जरूरी है।
08/06/2025

पौधारोपण के बाद पौधों में नियमित पानी डालना भी जरूरी है।

एक था गुलमोहर आते- जाते सब बेसाख्ता ही रुक जाते थे,उस घने दरख्त की ठंडी -ठंडी छांव में !कितना खूबसूरत, दिलकश कदमों में, ...
07/06/2025

एक था गुलमोहर
 आते- जाते सब बेसाख्ता ही रुक जाते थे,उस घने दरख्त की ठंडी -ठंडी छांव में !कितना खूबसूरत, दिलकश कदमों में, राहों में बिछा -बिछा- सा, शिवपुर बाईपास पर हाईवे के दूसरे
किनारे सुशोभित तंदुरुस्त गुलमोहर पर बहार जब आती,तो स्वर्ग की अप्सरा भी लजा जाती। भाई,क्या खूब गदरायी हुई डालियां थीं उसकी, बूटा -सा कद, हरी -हरी चिकनी पत्तियां, लाल- लाल फूलों के रस भरे गुच्छे, ज़रा सी हवा के मादक स्पर्श से ही छलक पड़ते,बरस पड़ते, मुसाफ़िरों के तपते माथे पर।
 हम सब सवारी लेने के लिए इस गुलमोहर की शरण में इकट्ठे होते और तरह-तरह की मुद्राओं में सेल्फी लेते हुए इतराया करते। पास में ही टीन शेड  में चाय की टपरी से पुरवा भर चाय और चटपटी, कुरकुरी पकौड़ियां लेकर ज़िंदगी के मज़े लेते। धीरे-धीरे मजबूत गुलमोहर के नीचे नन्हे- मुन्ने प्यारे-प्यारे दो पौधे और फूट पड़े! हमने उन्हें अपने बगीचे में रोपने का सोचा ही था, कि गर्मी की छुट्टियां आ गई । उस गुलमोहर पर ढेर सारे तरह-तरह के पंछी बसेरा लेते और बहुत से पशु नीचे छांव में भरी
दुपहरिया ढलक जाते। और उसके बाद जब लौटे तो सब
वीरान हो चुका था। हमारी हरियाली उजड़ चुकी थी। बस थोड़ा सा सूखा तना बचा था। विकास, चौड़ीकरण, सुंदरीकरण के फैलाव ने निगल लिया हमारे गुलमोहर को, सपरिवार। रह गया बस ठूंठ, चिलचिलाती धूप में जलते सर, सब बेआसरा, लावारिस हो गए। पल भर में ही हमारा गुलमोहर ‘है’ से ‘था’ में तब्दील हो गया। पर्यावरण की सुरक्षा की बात करने वाले तथा कथित माननीय हरे-भरे पेड़ों के हत्यारे बन बैठे। उस तने के चारों ओर ईंटों की एक दीवार बना दी गई है और अब वहां एकत्र होता है आस-पास का प्रदूषित कचरा, प्लास्टिक की बोतले, पॉलिथीन, डब्बे वगैरह-वगैरह। यह सिर्फ एक गुलमोहर के मरने की कहानी नहीं है दोस्तों! जाने कितने दरख्तों को ऊंची इमारतों की नींव में दफ़नाया जा चुका है, तालाब पाट कर सड़कें और मैदान बन चुके हैं। मत रौंदो, हरियाली को,पेड़ों को, जंगलों को, पहाड़ों को, नदियों और बगीचों को आओ! मिल कर लगाएं ढेर सारे पौधे इस पर्यावरण- दिवस पर, इस शेर को गुनगुनाते हुए कहा कि-
‘जिएं तो अपने बगीचे में गुलमोहर के तले ।
मरें तो ग़ैर की गलियों में गुलमोहर के लिए।।’
डा.एस.बाला

एक था गुलमोहर आते- जाते सब बेसाख्ता ही रुक जाते थे,उस घने दरख्त की ठंडी -ठंडी छांव में !कितना खूबसूरत, दिलकश कदमों में, ...
07/06/2025

एक था गुलमोहर
आते- जाते सब बेसाख्ता ही रुक जाते थे,उस घने दरख्त की ठंडी -ठंडी छांव में !कितना खूबसूरत, दिलकश कदमों में, राहों में बिछा -बिछा- सा, शिवपुर बाईपास पर हाईवे के दूसरे
किनारे सुशोभित तंदुरुस्त गुलमोहर पर बहार जब आती,तो स्वर्ग की अप्सरा भी लजा जाती। भाई,क्या खूब गदरायी हुई डालियां थीं उसकी, बूटा -सा कद, हरी -हरी चिकनी पत्तियां, लाल- लाल फूलों के रस भरे गुच्छे, ज़रा सी हवा के मादक स्पर्श से ही छलक पड़ते,बरस पड़ते, मुसाफ़िरों के तपते माथे पर।
हम सब सवारी लेने के लिए इस गुलमोहर की शरण में इकट्ठे होते और तरह-तरह की मुद्राओं में सेल्फी लेते हुए इतराया करते। पास में ही टीन शेड में चाय की टपरी से पुरवा भर चाय और चटपटी, कुरकुरी पकौड़ियां लेकर ज़िंदगी के मज़े लेते। धीरे-धीरे मजबूत गुलमोहर के नीचे नन्हे- मुन्ने प्यारे-प्यारे दो पौधे और फूट पड़े! हमने उन्हें अपने बगीचे में रोपने का सोचा ही था, कि गर्मी की छुट्टियां आ गर्इं। उस गुलमोहर पर ढेर सारे तरह-तरह के पंछी बसेरा लेते और बहुत से पशु नीचे छांव में भरी
दुपहरिया ढलक जाते। और उसके बाद जब लौटे तो सब
वीरान हो चुका था। हमारी हरियाली उजड़ चुकी थी। बस थोड़ा सा सूखा तना बचा था। विकास, चौड़ीकरण, सुंदरीकरण के फैलाव ने निगल लिया हमारे गुलमोहर को, सपरिवार। रह गया बस ठूंठ, चिलचिलाती धूप में जलते सर, सब बेआसरा, लावारिस हो गए। पल भर में ही हमारा गुलमोहर ‘है’ से ‘था’ में तब्दील हो गया। पर्यावरण की सुरक्षा की बात करने वाले तथा कथित माननीय हरे-भरे पेड़ों के हत्यारे बन बैठे। उस तने के चारों ओर र्इंटों की एक दीवार बना दी गई है और अब वहां एकत्र होता है आस-पास का प्रदूषित कचरा, प्लास्टिक की बोतले, पॉलिथीन, डब्बे वगैरह-वगैरह। यह सिर्फ एक गुलमोहर के मरने की कहानी नहीं है दोस्तों! जाने कितने दरख्तों को ऊंची इमारतों की नींव में दफ़नाया जा चुका है, तालाब पाट कर सड़कें और मैदान बन चुके हैं। मत रौंदो, हरियाली को,पेड़ों को, जंगलों को, पहाड़ों को, नदियों और बगीचों को आओ! मिल कर लगाएं ढेर सारे पौधे इस पर्यावरण- दिवस पर, इस शेर को गुनगुनाते हुए कहा कि-
‘जिएं तो अपने बगीचे में गुलमोहर के तले ।
मरें तो ग़ैर की गलियों में गुलमोहर के लिए।।’
डा.एस.बाला

वाराणसी में 5 जून 2025 को विश्व पर्यावरण दिवस पर जनमुख ग्रीन के कार्यक्रम में हजारों पौधे बांटें गए और पौधे लगाए भी गए। ...
05/06/2025

वाराणसी में 5 जून 2025 को विश्व पर्यावरण दिवस पर जनमुख ग्रीन के कार्यक्रम में हजारों पौधे बांटें गए और पौधे लगाए भी गए।

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