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SROT Foundation Water Source Conservation

 #जल स्रोत अर्थात तालाब, कुण्ड, पोखरा, नदी  संरक्षित तो जल संरक्षित।।इसलिए आईये जल का एवं जल स्रोत का संरक्षण करें।
28/07/2026

#जल स्रोत अर्थात तालाब, कुण्ड, पोखरा, नदी संरक्षित तो जल संरक्षित।।
इसलिए आईये जल का एवं जल स्रोत का संरक्षण करें।

19/07/2026

तालाब, कुण्ड, पोखरा, नदी तभी बच पायेगा। जब सबका सहयोग मिलेगा। सरकार तालाब, कुण्ड, पोखरा का जीर्णोद्धार करा सकती है लेकिन उन्हें संरक्षित करने की जिम्मेदारी स्थानीय लोगों का है। इसलिए आईये जल स्रोतों को संरक्षित किया जाये।
#जल है तो कल है जल स्रोत है तो जल है इसलिए आईये जल का एवं जल स्रोत का संरक्षण करें।
#जलहैतोकलहै #विरासतसेविकास #घाटसंस्कृति

एक पेड़ मां के नाम के अन्तर्गत आयोजित कार्यक्रम में सम्मिलित होकर छात्र एवं छात्राओं के साथ अनेकों फलदार पेड़ एपेक्स इंस...
18/07/2026

एक पेड़ मां के नाम के अन्तर्गत आयोजित कार्यक्रम में सम्मिलित होकर छात्र एवं छात्राओं के साथ अनेकों फलदार पेड़ एपेक्स इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड हास्पिटल चुनार मिर्जापुर के परिसर में लगाया गया।

आज एपेक्स इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड हास्पिटल चुनार मिर्जापुर में पर्यावरण संरक्षण विषय पर व्याख्यान देने का अवसर...
18/07/2026

आज एपेक्स इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड हास्पिटल चुनार मिर्जापुर में पर्यावरण संरक्षण विषय पर व्याख्यान देने का अवसर मिला। साथ ही एक पेड़ मां के नाम अन्तर्गत अतिथियों एवं छात्र एवं छात्राओं द्वारा स्पेक्स परिसर में अनेकों फलदार पेड़ लगाए गए।

13/07/2026

#जलस्रोत
जल स्रोत संरक्षण हेतु पन्द्रह वर्षों से निरंतर जारी है #जल है तो कल है जल स्रोत है तो जल है" कि सेवा संकल्प की यात्रा।

काशी के जल स्रोत अर्थात तालाब, कुण्ड, पोखरा को संरक्षण, पुनर्जीवन एवं स्वच्छ व सुंदर बनाने का संकल्प जारी है। मेरा मानना है कि जल स्रोत सुरक्षित रहेंगे तो भविष्य भी सुरक्षित रहेगा। क्योंकि जल नहीं होगा तो कल नहीं होगा।

इसलिए आईये जल का एवं जल स्रोत का संरक्षण करें।

 #काशीके   #तालाब  #कुण्ड  #पोखराकाशी के जल स्रोत अर्थात तालाब, कुण्ड, पोखरा केवल जल स्रोत नहीं है बल्कि यह काशी की सांस...
12/07/2026

#काशीके #तालाब #कुण्ड #पोखरा
काशी के जल स्रोत अर्थात तालाब, कुण्ड, पोखरा केवल जल स्रोत नहीं है बल्कि यह काशी की सांस्कृतिक स्मृति, धार्मिक परम्परा एवं ऐतिहासिक धरोहर के जीवंत प्रतीक है। इनका संरक्षण केवल पर्यावरणीय दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक संरक्षण की दृष्टि से भी अत्यंत आवश्यक है।

पर्यावरणीय दृष्टि से देखे तो तालाब प्राचीन काल के हार्वेस्टिंग सिस्टम है जो बरसाती पानी संरक्षित कर भूगर्भ में भेजता है। जिससे जलस्तर में वृद्धि होती है। तथा आस पास के वातावरण को शीतलता प्रदान करता है। अनेकों पक्षी तालाब के पास के पेड़ों पर घोंसले बनाते हैं। तथा विभिन्न जीव-जंतुओं को आश्रय मिलता है।

तालाबों, कुण्डों, पोखरों के किनारे काशी में मेला लगने का प्रचलन बहुत पुराना है।

शंकुलधारा पोखरा पर लगभग 12-13वीं शताब्दी से कष्टहरिया मेला लगता है। जिसका वर्तमान स्वरूप कटहरिया मेलें ने ले लिया है। विश्व में शंकुलधारा पोखरा एक मात्र स्थान है जहां कटहरिया मेला लगता है। इस मेले में आने वाले लोग कटहल के कौआ को खरीद कर भगवान को चढ़ाते हैं, उसके उपरांत प्रसाद के रूप में खाते है और घर ले जाते हैं।

लोलार्क कुण्ड पर संतान प्राप्ति हेतु विशेष स्नान मेलें के रूप में लगता है। जिसमें लाखों से भी अधिक भीड़ होती है। यह भीड़ देश के विभिन्न क्षेत्रों से आने वालों लोगों की होती है। आधुनिकता के दौर में भी यह परम्परा चल रही है।

सोनिया तालाब से भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन के दौरान नमक सत्याग्रह आंदोलन की शुरुआत हुई थी। जहां सम्पूर्ण काशी के लोग एकत्रित होकर नमक सत्याग्रह में सम्मिलित हुए थे।

रामकुण्ड के किनारे राष्ट्रीय आन्दोलन के दौरान क्रांतिकारियों के बैठक का विशेष स्थान हुआ करता था।

इसलिए इन जल स्रोतों को बचाने की संरक्षित करने की आवश्यकता है नही तो हम काशी की सांस्कृतिक विरासत एवं स्मृति को भूल जायेंगे।

आइये जल का एवं जल स्रोत का संरक्षण करें क्योंकि जल है तो कल है जल स्रोत है तो जल है।

आज टर्निंग इंडिया पत्रिका ने मेरे जल स्रोत संरक्षण के काम को अपनी पत्रिका में स्थान देते हुए प्रकाशित किया। इसके लिए श्र...
11/07/2026

आज टर्निंग इंडिया पत्रिका ने मेरे जल स्रोत संरक्षण के काम को अपनी पत्रिका में स्थान देते हुए प्रकाशित किया। इसके लिए श्री आशुतोष त्रिपाठी जी वाराणसी ब्यूरो टर्निंग इंडिया पत्रिका एवं उनके सभी सहयोगी का बहुत बहुत धन्यवाद देता हूं कि आपने मेरे अभियान #जल है तो कल है जल स्रोत है तो जल है को बहुत महत्वपूर्ण मानते हुए विशेष स्थान दिया है।

जल स्रोत संरक्षण एवं बरसाती जल संरक्षण में बड़ी भूमिका मिडिया से जूड़े बन्धुओं का होता है। वह जब किसी जल मित्र या जल योद्धा की कहानी को अपनी पत्रिका में प्रकाशित करते हैं, तो उस कहानी को पढ़ कर भी बहुत लोग प्रभावित होते हैं और स्वयं जल स्रोत संरक्षण के कार्य में लग जाते हैं, इससे अभियान को गति मिलती है तथा अप्रत्यक्ष रूप से मिडिया बंधुओं का जल संरक्षण एवं जल स्रोत संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका हो जाती है। यदि जल स्रोत संरक्षण कार्य को आप द्वारा प्रकाशित नहीं किया जाये। तो कोई अभियान बड़े स्तर पर प्रचारित एवं प्रसारित नहीं हो सकता है।

देश में जल संरक्षण एवं जल स्रोत संरक्षण की जिम्मेदारी प्रत्येक व्यक्ति की है जब तक सामूहिक प्रयास नहीं होगा तब तक जल स्रोत संरक्षण आसान नहीं है।

जल स्रोत अर्थात तालाब, कुण्ड, पोखरा केवल जल भंडारण की स्थान नहीं है बल्कि यह वास्तव प्राचीन काल के हार्वेस्टिंग सिस्टम है। जहां बरसाती पानी को एकत्रित कर भूगर्भ में भेजा जाता है। जिससे भूगर्भ जलस्तर में वृद्धि हो सकें।

आईये जल का एवं जल स्रोत का संरक्षण करें। क्योंकि #जल है तो कल है जल स्रोत है तो जल है।

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