29/08/2024
📝 *दोस्त ❗ऐक ऐसा रिश्ता है ,जो ईन्सान अपने नफ़्स से पसंद करता है , तमाम रिश्ते-नाते वालिदैन की तरफ़ से कायम है ..पर दोस्ती का रिश्ता अपनी मर्जी और नियत पर रहता है ... हम दोस्त की सबसे अफ़ज़ल मिसाल देखें❗तो दुनिया की नमूना ऐ जिंदगी में आका ﷺ के हक़ चार यार सबसे आला है ,ये बात हक़ है कि अल्लाह ﷻ ने उनकी दोस्ती को तमाम उरुजियत की मिसाल बनाने के लिए उनमें रिश्तेदारी भी कायम करवाई , तारीखें दुनिया में दोस्त की मिसाल में एक नाम सुल्तान महमूद गज़नी رحمتہ اللہ علیہ और उनके खा़स अज़ीज़ सैयद अयाज़ رحمتہ اللہ علیہ का है और विलायत के आला मक़ाम पर दोस्ती की सरे फ़ेहरिस्त में महबूबे ईलाही हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया رحمتہ اللہ علیہ और हज़रत अमीर खुशरो चिश्ती निज़ामी رحمتہ اللہ علیہ का ज़िक्र हमेशा याद किया जायेगा...* ✅ *अय 🅰️ आशीकाने रसुल ❗दोस्त "किरदार" का आईना होता है, फितरत और तबियत का साझेदार होता है ,उसकी सोहबत ही ईन्सान के लिए जीने का रुख़ तय करती है,ईन्सान कि जींदगी में सोहबत बहोत मायने रखती है क्योंकि दोस्त कयामत के दिन गवाह होगा❗सब कारगुजारी का...*
💥 *ईन्सान अपनी तबियत के लिए अपने नफ़्स की गिरफ़्त में अपनी दोस्ती कायम करता है,कोई लज्जतो-मस्ती के लिये दोस्ती करता है ,तो कोई सेर-सपाटे के लिये दोस्ती करता है , कोई गुंडो मवालियो से दोस्ती करता है ताकी माशरे मे धांक जमा सके❗कोई लिडरो से दोस्ती करता है ताकी उसकी दोस्ती काम आ सके ❗कोई अमिरो से दोस्ती करता है ,तो कोई ऐश अय्याशी के लिए दोस्त बनाता है , लेकिन याद रखो❗ये सारी दोस्ती उस दिन जब कयामत क़ायम होगी❗दुश्मनी मे बदल जाएगी... जब कोई किसी के काम ना-आएगा❗अगर कोई काम आएगा तो नेक सिरत दोस्त जो वली है,वो अल्लाह वाले काम आएगे❗वो ख़ास बंदे... जो अल्लाह سُبْحَانَهُ وَ تَعَالَى कि तरफ ( दिन शरियत , तौहीद , ईबादत और नेक व जायज़ हलाल काम की तरफ़ ) बुलाने मे वो दाढी वाले , अमामा वाले ,टोपी -कुरता वाले ,वो ईमान और ईबादत की दावत देनेवाले❗जिन्हे हासीद हिकारत कि नज़रो से देखा करते थे❗वो अल्लाह के नेक बंदे काम आएगे❗चुनांचे अल्लाह ﷻ इरशाद फरमाता है...*
*الْأَخِلَّاءُ يَوْمَئِذٍ بَعْضُهُمْ لِبَعْضٍ عَدُوٌّ إِلَّا الْمُتَّقِينَ*
✍️ *यानी - गहरे दोस्त उस दिन एक दुसरे के दुश्मन होंगे मगर परहेज़गार... 📗सुराह जुखरुफ -आयत नम्बर 67*
💚 *अमीरूल मोमेनीन ख़लीफतूल मुस्लेमीन मौला ऐ कायनात सैयदना हजरत अली کَرَّمَ اللّٰہُ وَجْھَہُ الْکَرِیْم इस आयत कि तफसिर मे फरमाते है कि...* 🌹 *"जब दो (२) मोमिन दोस्ती करते है और उन मे से एक मर जाता है ,तो वो अल्लाह तबारक व त'आला कि बारगाह मे अर्ज़ करता है... ' या अल्लाह❗ मेरा फलां दोस्त ,मुझे तेरी इताअ'त कि तरफ़ , नेकी कि तरफ़ , हिदायत कि तरफ़ बुलाता था❗लिहाज़ा अब वो अकेला रह गया है ,मेरे बाद तु उसे गुमराह ना-होने दे,उसे हिदायत दे... ' और जब दुनिया में रहा वो दूसरा भी मर जाता है तो अल्लाह तबारक व त'आला दोनों दोस्तों को जमा करके फरमाता है कि... "क्या कहते हो❗ तुम दोनों❗एक दुसरे के लिये❓" तो वो दोनों दोस्त एक दुसरे कि तारीफ करते है... लिहाज़ा अल्लाह तबारक व त'आला दोनों दोस्तों को बख्श देता है , ठिक इसी तरह दो (२) बदबख्त दोस्तो को जमा किया जाता है ,तो वो दोंनो एक दुसरे पर लानतान करते है और कहते है ... 'काश ❗तु मुझे बुराई कि तरफ ना-ले जाता... ' हत्ता कि दोनों एक दुसरे के दुश्मन बन जाएगे...* ✅ *🅰 अय आशीकाने रसुल❗ नेकोंकार की ,अच्छों और सच्चों की , खौफे़ खूदा में रोंनेवालो की, अमले सालेह करनेवालों की... सोहबत , दोस्ती ईख्तियार करो❗की अत्तार की दुकान पर बैठनें से भी खूशबू मिलतीं है ,और लूहार की भठ्ठी से धूंआ और चिनगारियाँ❗यह महज़ मुद्दा समझाने की मिसाल है... खूश्बू और लूत्फ़ की और तपीश और चिंगारीयों की...हम सब दोस्त बनाते हैं ,हम जानते हैं कि कैसे हमारे दोस्त हैं ... अब ❗ज़रा गौ़र करो वो खा़स बंदे "वली अल्लाह" जो अल्लाह ﷻ को महबुब रख़ते है ,जब उनकी दोस्ती रब ऐ जूलजलाल से हैं ,तो उनकी सोहबत के आशी व तलबगार कैसे उनकी सिफारिश से अल्लाहسُبْحَانَهُ وَ تَعَالَى की रहीमी-करीमी न-पा सकेंगे... लिहाज़ा हर मुसलमान को चाहिए कि दुनिया में भी उनसे दोस्ती रखें जो दुनिया में भी और दुनिया के बाद भी काम आ सके..तो हमें ईन्सान होने के नाते नेक और सालेह ईन्सान से दोस्ती करनी चाहिए... कुरान,सुन्नत, नमाज़,सखावत से दोस्ती करनी चाहिए...यकीन जानों... नमाज़-रोजा़-तिलावत और अमले सालेह भी मददगार होंगे..."दोस्त" बनाना कोई छोटी बात नहीं है...सबकी अपनी मर्जी ,पसंद और फितरत होती है...* ✍️ *~z@£... ❤️*