Ahle Sunnat Khidmat Committee-Baroda

Ahle Sunnat Khidmat Committee-Baroda We are working as cherity. AAMIN

AHLE SUNNAT KHIDMAT COMMITI :
IS KA MAKSAD TAMAM SUNNI BHAI EK HO KAR
SUNNIYAT KI KHIDMAT AUR USKE MAAN NE WALO
KO EK AUR NEK BAN NE KI KAUSIS KE ZARIYA BAN
NE WALI COMMITI KA NAAM AHLE SUNNAT KHIDMAT
COMMITI HE TO TAMAM BARODA AUR HINDUSTAN KE
TAMAM SUNNI BHAI IS COMMITI ME MEMBER BAN KAR
KHIDMAT DENE KE LIYE KOSIS KAR SAKTE HE ALLAH PAAK
TAMAM SUNNIYO KI NEK TAMANNAO KO USKE HABIB E PAAK
( SALALLAHO ALAY HE WASSALAM ) KE SADKE TUFEL HAME
IS MAKSAD ME KAAMYAB KARE.

Insaan Ke Teen Dushman!Hazrat Sayyiduna Yahya bin Mu'az Razi Rahmatullah Alaih farmate hain:"Insaan ke teen dushman hain...
19/02/2026

Insaan Ke Teen Dushman!

Hazrat Sayyiduna Yahya bin Mu'az Razi Rahmatullah Alaih farmate hain:

"Insaan ke teen dushman hain:
(1) Duniya
(2) Shaitan aur
(3) Nafs,
Lihaza duniya se kinara kashi ikhtiyar kar ke, Shaitan ki mukhalifat kar ke aur Nafs ki khwahishat ko tark kar ke is se mehfooz rahe."

(Ihya-ul-Uloom, Jild 3, Safha 201)

Eid E Chistiya Mubarak ho
27/12/2025

Eid E Chistiya Mubarak ho

16/09/2024

*Jasne-e-eid e milad Mubarak*

_*☆ इस 12वीं शरीफ़ पर इन बातों का ध्यान रखें ;*_

_1. आप मुसलमान हैं लिहाज़ा जुलूस में भी अपना अंदाज़ मुसलमानों वाला ही रखें।_

_2. हाथ में कड़ा या गले में चैन हो तो उतार लें और सफ़ेद लिबास या कोई भी शरीफ़ों वाला लिबास पहन कर ही जाएं।_

_3. शोर-तमाशा करना हमारा काम नहीं।_

_4. जुलूस में डी-जे बिल्कुल भी ना लेकर जाएं, डी-जे पर नाच-गाना करने वाले हम में से नहीं।_

_5. याद रखें आप ना'त सुन कर झूमने वाले हैं, नाच-गाना करने वाले नहीं।_

_6. हम तो वोह हैं जो खाना खाने के बा'द भी सुन्नत अदा करते हैं लेकिन जुलूसे मीलाद में हमको क्या हो जाता है कि खाना फेंक कर बांटते हैं।_

_7. जुलूस में उल्टे सीधे नारे ना लगाए जाएं।_

_8. रास्ता जाम कर के ना चलें।_

_9. हम सब की अहम ज़िम्मेदारी है कि झंडे या कोई भी दीनी चीज़ ज़मीन या नाली में ना गिर जाए।_

_10. आपको देख कर लोग या तो इस्लाम से मुह़ब्बत करेंगे या नफ़रत, ये आपके हाथ में है।_

_11. बच्चों को तोह़फ़े दें, बताएं कि आज क्या दिन है और अल्लाह के आख़िरी नबीﷺ कौन हैं।_

_12. इस 12वीं शरीफ़ पर अल्लाह के आख़िरी नबीﷺ को कम अज़ कम 1000 दुरूद शरीफ़ का तोह़फ़ा ज़रूर पेश कीजिए।_

_13. हो सके तो 12वीं शरीफ़ को तहज्जुद की नमाज़ अदा करें और ख़ूब दुआ मांगें वरना फज्र तो जमात से अदा करनी ही है।_

_14. जुलूस के बा'द ज़ुहर की नमाज़ जान-बूझ कर छोड़ देने वाला आशिक़े रसूल नहीं होता।_

_15. निय्यत कीजिए कि इस 12वीं शरीफ़ से अगली 12वीं शरीफ़ तक कोई नमाज़ कज़ा नहीं होगी।_
_*إن شاء الله*

16/09/2024
03/09/2024

🅰️ *आशीकाने रसुल* Ⓜ️ *मदरसा ऐ सीद्दीके अकबर* 🅰️ *ऐहले सुन्नत‌‌ खिदमत कमिटी* 🗓️ *शहादते सैयदे अबरार हज़रत ईमाम हसन मुज़तबा رضي الله عنه हिजरी-५० सफ़र २८ ,१ अप्रैल -६७० ईस्वी❗आज २८ सफ़र १४४६ है तो हिजरी साल के मुताबिक १३९६ और ग्रेगरियन केलेन्डर के मुताबिक १३५४ वी यवमे शहादत है...* 📝 *ईमामत के महकते फ़ूल हम सबीहे रसुलुल्लाह ,अव्वल फ़रजंदे मौला ऐ का़यनात व खातूने जन्नत सैयदे अबरार आका व मौला ईमामे हसने मुज़तबा رضي الله عنه की विलादते पाक हिजरत के तीसरे साल माहे रमज़ान मुबारक के १५ वे दिन ,१ दिसम्बर ६२४ ईस्वीसन को हुई... आप رضي الله عنه मौला ऐ का़यनात व खातूने जन्नत की पांच औलाद ऐ पाक़ में सबसे बड़े है ,आप رضي الله عنه ने आका ﷺ की सोहबत और परवरिश सात (7) साल की उम्र तक पाई ,आप के फ़जाईल और मरातिब को सहाबा रिदवानुल्लाही त'आला अजमईन के सामने आका ﷺ ने बयान और पेशनगोई से फ़रमाया और क़यामत तक के ईन्सानो - जिन्नों को भी बतला दिया की सैयदे अबरार वाकई हर लिहाज़ से "हसन" है...* ♥️ *सैयदे अबरार हसने मुज़तबा رضي الله عنه खिलाफ़ते राशेदाह के पाँचवे (5) ख़लीफ़तूल मुस्लेमीन है ,आप मुसलमानों के अमीरूल मोमिनीन है,मौला ऐ कायनात हज़रत अली کَرَّمَ اللّٰہُ وَجْھَہُ الْکَرِیْم की शहादत के बाद ,सबने आप رضي الله عنه की बैअत की और अपना "अमीरूल मोमिनीन" माना , उस वक़्त भी दमिश्क़ के गवर्नर अमीर मुआविया رضي الله عنه थे ,, उनके मातहत भी ईस्लामी रियासत का बड़ा हिस्सा और फौज थी❗सिफ्फीन की जंग और उसके बाद भी मुतालबात की कशीदगी कायम थी❗अमीरुल मोमिनीन ख़लिफतूल मुस्लेमीन सैयदना ईमामे हसन رضي الله عنه की फौजमें ज्यादातर नापाक़ जहन और फितरत के राफ़जी छिपे थे ,, जो बार-बार आका हसन رضي الله عنه से जंग के लिए कहते-उकसाते कि आप हज़रत मुआविया رضي الله عنه से जंग करके शाम क़ब्ज़े कर ले, जबकि अमीरूल मोमिनीन सैयदना हसने मुजतबा رضي الله عنه (दोनों तरफ़ के नाहक़ मुसलमानों के खून और नुकसान की वजह से) उनके साथ जंग के खिलाफ थे❗आप رضي الله عنه के ईस रुखसे आपकी फौज नाराज़ थी , क्योंकि जंग की आड़ में उन्हें मालों -दौलत चाहिए थी जो नहीं मिल रही थी❗ईस वज़ह ने भी आप رضي الله عنه के फौजीयों ने आपसे ही बगावत करली , फौजने अंदरो - अंदर लूटपाट की , कुछ राफ़जी फौजी लूटेरोंके पास हिस्से में कोई माल असबाब "लूट" का नही आया तो उन्होंने अमीरूल मोमिनीन सैयदना ईमामे हसन मुज़तबा رضي الله عنه का ही खैमा लूट लिया और आप رضي الله عنه पर हमला करके ज़ख्मी कर दिया , लानती राफ़जीयों ने आप رضي الله عنه के पैर पर नेजा मारके ज़ख्मी कीया❗ईस करतूत से आप رضي الله عنه ने समझ लिया की ये साथी नहीं घोखे़बाज़़ हैं , जिनकी अपनी खूदगर्जी़ हैं और ये अपने मफाद़ की ख़ातिर कीसी भी हद तक जा सकते हैं , लिहाजा़ आप رضي الله عنه ने चंद शर्तों के साथ हज़रत अमीर मुआविया رضي الله عنه के साथ सुलह करली...* 📝 *सैयदना आका हसन ऐ मुज़तबा رضي الله عنه ने हूकूमत छोड़ के सुलेह की और यह तय पाया गया की...* 🌟 *फिलहाल हज़रत अमीर मुआविया رضي الله عنه खलीफा के ओहदे पर कायम होते हैं , वह हुकूमत करेंगे❗मगर उनके इन्तेक़ाल के बाद सैयदना ईमाम हज़रत हसन رضي الله عنه अन्हु ही वापस ख़लीफा होंगे...*

🌟 *हुकूमत (हज़रत अमीर मुआविया رضي الله عنه) की जानिब से... ईराक़ , हिजाज़ व मदीना (तय्बाह) वग़ैरह के लोगों से सैयदना अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली کَرَّمَ اللّٰہُ وَجْھَہُ الْکَرِیْم के ज़माने के मुताअल्लिक़ कोई मुतालेबा नहीं किया जायेगा...*

🌟 *हज़रत सैयदना इमाम हसन رضي الله عنه के ज़िम्मे जो भी क़र्ज़ हैं, उसकी अदायगी हुक्मरान हज़रत अमीर मुआविया رضي الله عنه करेंगे...*

✅ *अय 🅰️ आशीकाने रसुल❗ये तीन (३) शर्तें अमीर मुआविया رضي الله عنه की जानिब से मानने पर , दोनों जानिब सहमति हो गई ,ये सूलह 41 हिजरी में हुई थी मगर इसके कुछ साल बाद हिजरी ५० मे माहे सफ़र के २८ वे दिन आप رضي الله عنه को ज़हर दिया गया जिस से सैयदना हज़रत ईमाम हसन رضي الله عنه का विसाल हो गया❗ان للہ وانا الیہ راجعون ... यह सच है कि आप رضي الله عنه को ज़हर देकर शहीद किया गया है मगर असली का़तिल की निशानदेही कभी नहीं हुई ❗ कुछ लोग अपने मफा़द और फ़साद की बिना पर जिन्हें का़तिल बता रहे हैं ,उनका भी नाम न-आका हसन رضي الله عنه ने बताया ,न-आका हुसैन رضي الله عنه ने बताया ❗तब से ही असली का़तिल पोशीदा है ,अय 🅰️ आशीकाने रसुल ❗उस दौर के हालात , पसमंजर और कारगुजारी से तो यकीनन ऐक सच्चाई ये उभरकर आती हैं कि... राफ़जी कूफी आप رضي الله عنه ने जो सूलह की उसकी वज़ह से नाराज़ थे और आपसे ईन्तिकाम लेना चाहते थे और खा़रजी तो ऐहले बैत के खूले दुश्मन थे, वो भी सिफ्फिन और नहरवान की वज़ह से आपसे अदावत रख़ते थे❗येही तमाम लोग आप رضي الله عنه की शहादत में और आपके जनाजा़ मुबारक पर तीर बरसानें में उमय्यद मरवानीयों के साथी रहे हैं...आप رضي الله عنه की पहली ख्वाहिश रौजा़ ऐ रसुलﷺ में मदफ़न होंने की थी और जिसके लिए उम्मूल मोमिना हज़रत आयशा सीद्दीका رضی اللہ تعالیٰ عنہا से आका हुसैन رضي الله عنه को इजाज़त मिलने के बावजूद हासिदों के फ़साद की वज़ह से दूसरी वसियत के मुताबिक बकी़ में आपको मदफ़न किया गया...आप ऐक अज़ीम "सैयद" है ... जिन्होंने मुसलमानों के दो गिरोह में अमन क़ायम करवा के उम्मते मोहम्मदﷺ पर एहसान किया❗ईमामे हसने मुज़तबा رضي الله عنه की सूरत और सिरत तस्वीरें आकाﷺ है ,आज हम उनकी शख्सियत के बहूत से पहेलू से न वाक़िफ है , जिम्मेदार हमारे बड़े है ,उलमा व अकाबेरीन है ,मुतवल्ली और महतमीम है ,स्कोलर और पीर है...और सबसे बढ़कर हम आम ऐहले सुन्नत है...जो खूद भी हमारे अपने मोहसिनो की तवारीख और तारीफ़ से कोसों दूर है ,ईल्तिजा है...आज और आनेवाले दिनों में शाने मौला हसने मुज़तबा पर खिराज ऐ अकिदत हो ❗ अपनी हैसियत और नियत के साथ इस्तेता'अत और अकीदत के साथ...* 🅰️ *आशीकाने रसुल* Ⓜ️ *मदरसा ऐ सीद्दीके अकबर* 🅰️ *ऐहले सुन्नत खिदमत कमिटी*

📝 *दोस्त ❗ऐक ऐसा रिश्ता है ,जो ईन्सान अपने नफ़्स से पसंद करता है  , तमाम रिश्ते-नाते वालिदैन की तरफ़ से कायम है ..पर दोस...
29/08/2024

📝 *दोस्त ❗ऐक ऐसा रिश्ता है ,जो ईन्सान अपने नफ़्स से पसंद करता है , तमाम रिश्ते-नाते वालिदैन की तरफ़ से कायम है ..पर दोस्ती का रिश्ता अपनी मर्जी और नियत पर रहता है ... हम दोस्त की सबसे अफ़ज़ल मिसाल देखें❗तो दुनिया की नमूना ऐ जिंदगी में आका ﷺ के हक़ चार यार सबसे आला है ,ये बात हक़ है कि अल्लाह ﷻ ने उनकी दोस्ती को तमाम उरुजियत की मिसाल बनाने के लिए उनमें रिश्तेदारी भी कायम करवाई , तारीखें दुनिया में दोस्त की मिसाल में एक नाम सुल्तान महमूद गज़नी رحمتہ اللہ علیہ और उनके खा़स अज़ीज़ सैयद अयाज़ رحمتہ اللہ علیہ का है और विलायत के आला मक़ाम पर दोस्ती की सरे फ़ेहरिस्त में महबूबे ईलाही हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया رحمتہ اللہ علیہ और हज़रत अमीर खुशरो चिश्ती निज़ामी رحمتہ اللہ علیہ का ज़िक्र हमेशा याद किया जायेगा...* ✅ *अय 🅰️ आशीकाने रसुल ❗दोस्त "किरदार" का आईना होता है, फितरत और तबियत का साझेदार होता है ,उसकी सोहबत ही ईन्सान के लिए जीने का रुख़ तय करती है,ईन्सान कि जींदगी में सोहबत बहोत मायने रखती है क्योंकि दोस्त कयामत के दिन गवाह होगा❗सब कारगुजारी का...*
💥 *ईन्सान अपनी तबियत के लिए अपने नफ़्स की गिरफ़्त में अपनी दोस्ती कायम करता है,कोई लज्जतो-मस्ती के लिये दोस्ती करता है ,तो कोई सेर-सपाटे के लिये दोस्ती करता है , कोई गुंडो मवालियो से दोस्ती करता है ताकी माशरे मे धांक जमा सके❗कोई लिडरो से दोस्ती करता है ताकी उसकी दोस्ती काम आ सके ❗कोई अमिरो से दोस्ती करता है ,तो कोई ऐश अय्याशी के लिए दोस्त बनाता है , लेकिन याद रखो❗ये सारी दोस्ती उस दिन जब कयामत क़ायम होगी❗दुश्मनी मे बदल जाएगी... जब कोई किसी के काम ना-आएगा❗अगर कोई काम आएगा तो नेक सिरत दोस्त जो वली है,वो अल्लाह वाले काम आएगे❗वो ख़ास बंदे... जो अल्लाह سُبْحَانَهُ وَ تَعَالَى कि तरफ ( दिन शरियत , तौहीद , ईबादत और नेक व जायज़ हलाल काम की तरफ़ ) बुलाने मे वो दाढी वाले , अमामा वाले ,टोपी -कुरता वाले ,वो ईमान और ईबादत की दावत देनेवाले❗जिन्हे हासीद हिकारत कि नज़रो से देखा करते थे❗वो अल्लाह के नेक बंदे काम आएगे❗चुनांचे अल्लाह ﷻ इरशाद फरमाता है...*
*الْأَخِلَّاءُ يَوْمَئِذٍ بَعْضُهُمْ لِبَعْضٍ عَدُوٌّ إِلَّا الْمُتَّقِينَ*
✍️ *यानी - गहरे दोस्त उस दिन एक दुसरे के दुश्मन होंगे मगर परहेज़गार... 📗सुराह जुखरुफ -आयत नम्बर 67*
💚 *अमीरूल मोमेनीन ख़लीफतूल मुस्लेमीन मौला ऐ कायनात सैयदना हजरत अली کَرَّمَ اللّٰہُ وَجْھَہُ الْکَرِیْم इस आयत कि तफसिर मे फरमाते है कि...* 🌹 *"जब दो (२) मोमिन दोस्ती करते है और उन मे से एक मर जाता है ,तो वो अल्लाह तबारक व त'आला कि बारगाह मे अर्ज़ करता है... ' या अल्लाह❗ मेरा फलां दोस्त ,मुझे तेरी इताअ'त कि तरफ़ , नेकी कि तरफ़ , हिदायत कि तरफ़ बुलाता था❗लिहाज़ा अब वो अकेला रह गया है ,मेरे बाद तु उसे गुमराह ना-होने दे,उसे हिदायत दे... ' और जब दुनिया में रहा वो दूसरा भी मर जाता है तो अल्लाह तबारक व त'आला दोनों दोस्तों को जमा करके फरमाता है कि... "क्या कहते हो❗ तुम दोनों❗एक दुसरे के लिये❓" तो वो दोनों दोस्त एक दुसरे कि तारीफ करते है... लिहाज़ा अल्लाह तबारक व त'आला दोनों दोस्तों को बख्श देता है , ठिक इसी तरह दो (२) बदबख्त दोस्तो को जमा किया जाता है ,तो वो दोंनो एक दुसरे पर लानतान करते है और कहते है ... 'काश ❗तु मुझे बुराई कि तरफ ना-ले जाता... ' हत्ता कि दोनों एक दुसरे के दुश्मन बन जाएगे...* ✅ *🅰 अय आशीकाने रसुल❗ नेकोंकार की ,अच्छों और सच्चों की , खौफे़ खूदा में रोंनेवालो की, अमले सालेह करनेवालों की... सोहबत , दोस्ती ईख्तियार करो❗की अत्तार की दुकान पर बैठनें से भी खूशबू मिलतीं है ,और लूहार की भठ्ठी से धूंआ और चिनगारियाँ❗यह महज़ मुद्दा समझाने की मिसाल है... खूश्बू और लूत्फ़ की और तपीश और चिंगारीयों की...हम सब दोस्त बनाते हैं ,हम जानते हैं कि कैसे हमारे दोस्त हैं ... अब ❗ज़रा गौ़र करो वो खा़स बंदे "वली अल्लाह" जो अल्लाह ﷻ को महबुब रख़ते है ,जब उनकी दोस्ती रब ऐ जूलजलाल से हैं ,तो उनकी सोहबत के आशी व तलबगार कैसे उनकी सिफारिश से अल्लाहسُبْحَانَهُ وَ تَعَالَى की रहीमी-करीमी न-पा सकेंगे... लिहाज़ा हर मुसलमान को चाहिए कि दुनिया में भी उनसे दोस्ती रखें जो दुनिया में भी और दुनिया के बाद भी काम आ सके..तो हमें ईन्सान होने के नाते नेक और सालेह ईन्सान से दोस्ती करनी चाहिए... कुरान,सुन्नत, नमाज़,सखावत से दोस्ती करनी चाहिए...यकीन जानों... नमाज़-रोजा़-तिलावत और अमले सालेह भी मददगार होंगे..."दोस्त" बनाना कोई छोटी बात नहीं है...सबकी अपनी मर्जी ,पसंद और फितरत होती है...* ✍️ *~z@£... ❤️*

27/08/2024

*वैसे तो पूरी गाज़ा पट्टी समुद्र के किनारे है,मगर वहा पीने का पानी पाइप लाइन के जरिए या तो मिस्र से आता है या यहूदी कब्जे वाले इस्राएल इलाके से जिसे यहूदियों ने 7 अक्टूबर के बाद से ही बंद कर दिया है और मिस्त्र की पाइप लाइन उड़ा दी,मगर अल्लाह की कुदरत है गाज़ा के ज्यादातर इलाके में महज 1 फ़ीट खोदने पर ही पीने लायक मीठा पानी निकल रहा है,इस तरह के कई गैबी मदद अल्लाह के तरफ से नज़र आती है।*

Address

Vadodara

Telephone

+919714899777

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Ahle Sunnat Khidmat Committee-Baroda posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Organization

Send a message to Ahle Sunnat Khidmat Committee-Baroda:

Share