13/03/2025
✍️ आरती जायसवाल
कण-कण में घुला है रंग कि;होली आई है,
हवा में बहे उमंग कि;होली आई है।
प्रिय! रंगों प्रेम के रंग कि; होली आई है,
मनभाए पिया का संग कि;होली आई है।
सनन-सनन पुरवइया चले और झूमे डाली- डाली,
प्रिय! आओ लगा लें अंग कि;होली आई है।
महुआ खिले ,आम बौराये,गेहूं हुआ सुनहरा,
जीवन भर न छूटे;साथी! रंग लगा दो गहरा,
मौसम ने पी ली है भंग कि; होली आई है।
हाथों में छुपाए रंग सखी! क्यों बैठी चुपके-छुपके,
खुल कर खेलो रंग कि; होली आई है।
©️ जिन्दगी के गीत