21/10/2024
’एक विचार’
सिख धर्म में करवाचौथ जैसे त्यौहार की कोई जगह नहीं है, क्योंकि सिख धर्म हमें सिखाता है कि जीवन, उम्र और भाग्य सिर्फ और सिर्फ वाहेगुरु के हाथों में है। सिख धर्म में हम किसी बाहरी रस्मों, व्रतों या रिवाजों पर विश्वास नहीं करते, बल्कि सच्ची श्रद्धा और वाहेगुरु की भक्ति पर ज़ोर देते हैं।
उदाहरणों के साथ समझने के लिए:
1. रस्मों और व्रतों पर विश्वास नहीं:
सिख धर्म का सबसे बड़ा सिद्धांत यह है कि किसी भी रस्म या व्रत से हमारी जिंदगी पर कोई असर नहीं पड़ता। मान लीजिए, एक महिला करवाचौथ का व्रत रखती है ताकि उसके पति की उम्र लंबी हो, लेकिन सिख धर्म हमें यह सिखाता है कि उम्र या जीवन सिर्फ वाहेगुरु की मर्जी से ही तय होता है, ना कि किसी व्रत से।
उदाहरण: जैसे आप बारिश को रोकने के लिए छाता पकड़ सकते हैं, लेकिन आप छाते से बारिश को नहीं रोक सकते, उसी तरह व्रत रखने से किसी की उम्र या तकदीर को नहीं बदला जा सकता।
2. बराबरी और सम्मान:
सिख धर्म में पुरुष और महिला को एक समान माना गया है। अगर एक महिला अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखे, तो इसका मतलब यह हुआ कि वो खुद से कमज़ोर समझी जा रही है और पति की भलाई का ज़िम्मा सिर्फ उसके ऊपर है। सिख धर्म हमें सिखाता है कि दोनों पति-पत्नी को मिलकर ज़िंदगी के फैसले करने चाहिए और गुरबाणी के अनुसार चलना चाहिए।
उदाहरण: जैसे एक गाड़ी के दो पहिये होते हैं, दोनों के बिना गाड़ी नहीं चल सकती। इसी तरह, पति और पत्नी को बराबर की जिम्मेदारी निभानी चाहिए, ना कि एक-दूसरे के लिए व्रत रखना।
3. सच्चा भरोसा सिर्फ गुरु पर:
सिख धर्म में हमें सिखाया गया है कि हर मुश्किल या ख़ुशी में, हमें सिर्फ गुरु ग्रंथ साहिब और वाहेगुरु पर भरोसा रखना चाहिए। किसी विशेष रस्म से हमारे जीवन में कोई बदलाव नहीं होता। सच्ची भक्ति और सच्चे दिल से नाम जपने से ही मन को शांति मिलती है।
उदाहरण: जैसे एक बीज को पानी और धूप चाहिए उगने के लिए, वैसे ही हमारी आत्मा को वाहेगुरु का नाम चाहिए आगे बढ़ने के लिए, ना कि बाहरी रस्में या व्रत।
सिख धर्म का संदेश:
सिख धर्म का मुख्य संदेश यह है कि हर परिस्थिति में सिर्फ वाहेगुरु पर भरोसा करना चाहिए, और बाहरी रस्मों से दूर रहना चाहिए। हमें वाहेगुरु के नाम का सुमिरन, सेवा और आपसी प्यार पर ज़ोर देना चाहिए, क्योंकि यही असली धर्म है।
🙏भूल चूक मुआफ़
सुरजीत सिंघ