06/08/2026
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राजभवन शिमला
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला स्थित ऐतिहासिक राजभवन में समाज सेवा, मानवीय संवेदना और युवा ऊर्जा का एक अनूठा संगम देखने को मिला। राज्य के महामहिम राज्यपाल श्री कविंदर गुप्ता ने रविवार को आयोजित एक विशेष अभिनंदन समारोह के दौरान समाज सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रही प्रसिद्ध संस्था "सेल्फ एजुकेट फॉर वॉलंटियरिज्म अवेयरनेस" (SEVA) और उसके समर्पित स्वयंसेवकों को सम्मानित किया।
यह सम्मान 'नेशनल इंटीग्रेटेड फोरम ऑफ आर्टिस्ट्स एंड एक्टिविस्ट्स' (NIFA) द्वारा 14 मार्च 2026 को आयोजित राष्ट्रव्यापी रक्तदान अभियान 'संवेदना-1' में SEVA द्वारा दिए गए असाधारण योगदान और उत्कृष्ट संगठन क्षमता के उपलक्ष्य में प्रदान किया गया।
राजभवन के दरबार हॉल में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने स्वयं SEVA के अध्यक्ष सुमन शांत, सह-संस्थापक मुकेश भारद्वाज कृष्ण दत्त, रोहन केस्टा, बिनाक्षी शर्मा , तथा प्रमुख स्वयंसेवकों बॉबी शर्मा,काजल चौहान , नीरज राणा को स्मृति चिह्न, प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।
समारोह को संबोधित करते हुए हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल श्री कविंदर गुप्ता ने SEVA के युवा कार्यकर्ताओं के जज्बे और निस्वार्थ भावना की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने भले ही अभूतपूर्व प्रगति कर ली हो, लेकिन मानव रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प आज तक नहीं बनाया जा सका है। ऐसे में किसी भी दुर्घटना या गंभीर बीमारी के दौरान किसी मरीज की जान बचाने के लिए केवल दूसरा इंसान ही रक्तदान कर सकता है।
"रक्तदान केवल एक चिकित्सीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवता और करुणा की पराकाष्ठा है। जब एक युवा बिना किसी स्वार्थ के अपना रक्त किसी अनजान व्यक्ति के लिए दान करता है, तो वह न केवल एक जीवन बचाता है बल्कि समाज में भाईचारे और आत्मीयता का संदेश भी फैलाता है। SEVA संस्था ने जिस प्रकार हिमाचल के दूर-दराज क्षेत्रों के युवाओं को इस पवित्र कार्य से जोड़ा है, वह पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणादायक है।"
राज्यपाल ने इस अवसर पर उपस्थित सभी युवाओं और अतिथियों को 'नशा मुक्त भारत' की शपथ भी दिलाई। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए 'नशा मुक्त युवा विकसित भारत संकल्प अभियान' का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा में मोड़ना राष्ट्र निर्माण के लिए अनिवार्य है। यदि युवा रक्तदान और जनसेवा जैसे अभियानों से जुड़ेंगे, तो समाज से नशे जैसी सामाजिक बुराइयां स्वतः ही समाप्त हो जाएंगी।
साथ ही उन्होंने वर्तमान परिदृश्य का जिक्र करते हुए कहा कि हाल ही में छात्र आंदोलनों में देखने को मिली नकारात्मक भावना को दूर करने और भटके हुए युवाओं को पुनः समाज की मुख्यधारा व सही पटरी पर लाने के लिए समाज सेवा ही सबसे उत्तम व्यवस्था और माध्यम है।
सम्मान प्राप्त करने के उपरांत SEVA के पदाधिकारियों और स्वयंसेवकों ने इस राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय सम्मान को अपनी संस्था के प्रत्येक रक्तदाता, जमीनी कार्यकर्ताओं और क्षेत्र की जनता को समर्पित किया।
अध्यक्ष सुमन शांत ने भावुक होते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में विशेष रूप से नेरवा (चौपाल क्षेत्र) के युवाओं ने रक्तदान को एक साधारण सेवा से आगे बढ़ाकर एक "जन आंदोलन" का रूप दे दिया है।
"Self Educate for Volunteerism Awareness" (SEVA) की नींव जून 2025 में रखी गई थी। संस्था का मुख्य ध्येय ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के युवाओं को स्वयंसेवा और नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूक करना था।
स्थापना के बाद से ही संस्था ने स्वास्थ्य क्षेत्र को प्राथमिकता देते हुए शिमला जिला और आसपास के क्षेत्रों में नियमित रक्तदान शिविरों का आयोजन शुरू किया।
मेडिकल कॉलेजों के लिए लाइफलाइन:
SEVA ने अपने अल्पकालिक कार्यकाल में सरकारी मेडिकल कॉलेज रोहड़ू तथा शिमला के प्रमुख अस्पतालों (जैसे IGMC और दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल) के लिए 500 यूनिट से अधिक रक्त एकत्र कर ब्लड बैंकों को सौंपा है।
शिविरों के अलावा, संस्था ने एक समर्पित व्हाट्सएप ग्रुप और हेल्पलाइन नेटवर्क बनाया है। जब भी राज्य के भीतर या राज्य के बाहर (जैसे चंडीगढ़, दिल्ली) किसी मरीज को दुर्लभ ब्लड ग्रुप या प्लेटलेट्स (SDP) की तत्काल आवश्यकता होती है, SEVA के स्वयंसेवक अपनी निजी गाड़ियों से तुरंत अस्पताल पहुंचकर रक्तदान करने के पूरे प्रयास में रहते हैं।
आपदा प्रबंधन और वित्तीय सहायता:
हिमाचल प्रदेश में पिछले मानसून सत्र के दौरान आई प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी SEVA के कार्यकर्ताओं ने अग्रिम मोर्चे पर रहकर कार्य किया। संस्था ने आपदा प्रभावित परिवारों की मदद के लिए धन जुटाया और इसे मुख्यमंत्री राहत कोष (CMRF) में अंशदान के रूप में जमा कराया। इसके अलावा भूस्खलन और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राशन और जरूरी सामान का वितरण भी किया।
SEVA के अध्यक्ष सुमन शांत और सह-संस्थापक मुकेश भारद्वाज ने संस्था के विजन को स्पष्ट करते हुए कहा कि SEVA का लक्ष्य केवल ब्लड बैग्स की संख्या बढ़ाना या आंकड़े प्रस्तुत करना नहीं है।
"हमारा प्राथमिक उद्देश्य समाज में करुणा, संवेदनशीलता, सामाजिक उत्तरदायित्व और मानवीय मूल्यों की एक ऐसी संस्कृति विकसित करना है जहाँ कोई भी मरीज, गरीब या बेसहारा व्यक्ति केवल इसलिए अपनी जान न गंवाए क्योंकि उसे सही समय पर रक्त नहीं मिल सका। जब एक युवा 18 वर्ष की आयु में पहली बार रक्तदान करता है, तो उसके भीतर समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना जागृत होती है।"— सुमन शांत, अध्यक्ष, SEVA
सह-संस्थापक कृष्ण दत ने बताया कि दुर्गम पहाड़ी इलाकों में जहाँ परिवहन और संचार की सीमाएं होती हैं, वहाँ मरीजों के परिजनों के लिए रक्त की व्यवस्था करना किसी दुःस्वप्न जैसा होता है। ऐसे समय में SEVA के स्वयंसेवक एक देवदूत की तरह खड़े होते हैं।