Tara Sansthan

Tara Sansthan Tara Sansthan, an NGO devoted to the suffering poor & old people, was founded in Udaipur ( Raj. ) INDIA in 2009.

श्रीमती कल्पना गोयल
संस्थापक एवं अध्यक्ष

श्रीमती कल्पना गोयल डॉ. कैलाश मानव की पुत्री हैं और बचपन से ही नारायण सेवा संस्थान की दैनिक गतिविधियों में उनसे जुड़ी हुई हैं। कल्पनाजी दर्शनशास्त्र में स्नातक हैं अपने पिता के आशीर्वाद से, उन्होंने वर्ष 2009 में तारा संस्थान की स्थापना की। तब से, कल्पना जी तारा संस्थान की संस्थापक व अध्यक्ष के रूप में योजना और प्रशासन जैसे सभी पहलुओं पर काम कर रही हैं।

्री दीपेश मित्तल
संस्थापक एवं सचिव

श्री दीपेश मित्तल एक इंजीनियरिंग स्नातक हैं और सन 2001 से नारायण सेवा संस्थान के संस्थापक डॉ. कैलाश मानव के करीबी सहयोगी थे और फिर श्रीमती कल्पना गोयल के साथ काम किया। वे तारा संस्थान के संस्थापक भी हैं और अब संस्थापक और सचिव के रूप में तारा संस्थान की गतिविधियों की योजनाओं के कार्यान्वयन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

The activities of the Sansthan:
1. OLD AGE HOMES: -
• Called “ANAND VRIDHASHRAM” to take care of elderly people who are destitute, lonely and helpless. Tara Sansthan is running 6 Anand Old Age Homes completely free of cost in Rajasthan, Prayagraj, Banaras and Raipur.
2. EYE HOSPITALS: -
• Called “TARA NETRALAYA” Operates free eye hospitals in 5 cities - Udaipur, Delhi, Mumbai, Faridabad and Loni (Ghaziabad). Organize free eye camps to select patients for providing general eye treatment, mainly cataract operations absolutely free to the poor and the needy.
3. HELPING YOUNG WIDOWS: -
• Tara Sansthan helps by way of providing Rs. 1000/- per month to the women whose husbands died early and left them support less.
4. SHIKHAR BHARGAV PUBLIC SCHOOL: -
• Another way of helping widows is providing their children with free education at the "Shikhar Bhargav Public School" (English Medium) in Udaipur run by the Sansthan itself.
5. AN INFORMAL EVENING SCHOOL FOR SLUM KIDS (Masti Ki Pathashala)
• This special evening school aims to help provide a better future to the working-class children living in the slums of Udaipur.

वृद्धाश्रम नहीं, बुजुर्गों का अपना परिवार :तारा संस्थान द्वारा सिग्नेचर ग्लोबल फाउंडेशन के सहयोग से संचालित बनारस के राम...
19/05/2026

वृद्धाश्रम नहीं, बुजुर्गों का अपना परिवार :
तारा संस्थान द्वारा सिग्नेचर ग्लोबल फाउंडेशन के सहयोग से संचालित बनारस के रामनगर वृद्धाश्रम में बुजुर्ग आवासियों की दैनिक दिनचर्या की कुछ भावुक तस्वीरें - जहाँ कोई साथ बैठकर अपनेपन के पल बांट रहा है, कोई भोजन प्रसाद ग्रहण कर रहा है, तो कोई मेडिकल वार्ड में उपचार के दौरान देखभाल और स्नेह पा रहा है।
तारा संस्थान का प्रयास है की हर बुजुर्ग को सिर्फ आश्रय ही नहीं, बल्कि परिवार जैसा वातावरण, सम्मान और बेहतर देखभाल मिल सके।

19/05/2026
तारा संस्थान उदयपुर द्वारा गुजरात के पालनपुर में निःशुल्क आँखों की जाँच एवं मोतियाबिंद ऑपरेशन चयन हेतु दो दिवसीय शिविर क...
18/05/2026

तारा संस्थान उदयपुर द्वारा गुजरात के पालनपुर में निःशुल्क आँखों की जाँच एवं मोतियाबिंद ऑपरेशन चयन हेतु दो दिवसीय शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में 306 लोगों ने अपनी आँखों की जाँच करवाई। जाँच के दौरान 27 मरीजों में मोतियाबिंद पाया गया, जिन्हें संस्थान द्वारा संचालित सचिन भाटिया आई हॉस्पिटल, उदयपुर में निःशुल्क ऑपरेशन के लिए चयनित किया गया।

16/05/2026

आईये कुछ पल हमारे वृद्धाश्रम के माता - पिता समान बुजुर्गों के साथ भी बिताइये

"सब कुछ देकर भी खाली रह गए हाथ… फिर मिला सुकून"गुजरात के जूनागढ़ से आने वाले 72 वर्षीय राउदी भाई की जिंदगी त्याग, जिम्मे...
16/05/2026

"सब कुछ देकर भी खाली रह गए हाथ… फिर मिला सुकून"

गुजरात के जूनागढ़ से आने वाले 72 वर्षीय राउदी भाई की जिंदगी त्याग, जिम्मेदारी और अंततः सुकून की तलाश की कहानी है। एक समय था जब उनका घर परिवार की खुशियों से भरा हुआ था। दो बेटे, दो बेटियां—सभी के भविष्य को संवारने का सपना उनकी आँखों में था। उनकी पत्नी घर पर चरखे से सूत कातकर घर में हाथ बंटाती थीं, और राउदी भाई खाने के तेल की रिफाइनरी में ऑपरेटर का काम करते थे। सीमित आय के बावजूद दोनों ने मिलकर अपने बच्चों के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया।
लेकिन जिंदगी ने अचानक करवट ली। उनकी पत्नी को कैंसर हुआ—और जब तक इस बीमारी का पता चला, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इलाज की पूरी कोशिश भी उन्हें बचा नहीं सकी। आज से 22 साल पहले पत्नी के जाने के साथ ही राउदी भाई की जिंदगी में एक गहरा खालीपन उतर आया। उस समय उनके केवल एक बेटे और एक बेटी की ही शादी हुई थी। लेकिन एक पिता के रूप में उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों से कभी मुंह नहीं मोड़ा। बड़े बेटे के साथ रहते हुए उन्होंने दिन - रात मेहनत की—कभी रिफाइनरी का काम, तो कभी गार्ड की नौकरी—बस एक ही उद्देश्य था, अपने बच्चों को बसते हुए देखना। उन्होंने अपनी सारी जमा पूंजी बच्चों की शादी और उनके भविष्य को संवारने में लगा दी। यहां तक कि अपने बड़े बेटे का कर्ज चुकाने के लिए अपना खुद का मकान भी बेच दिया। इसके बाद वे उसी बेटे के साथ किराए के घर में रहने लगे।
लेकिन जीवन के इस पड़ाव पर, जब इंसान सुकून चाहता है, राउदी भाई के मन में एक अजीब सी बेचैनी थी। सब कुछ करने के बाद भी उन्हें अपने ही घर में वह शांति नहीं मिल रही थी, जिसकी उन्हें तलाश थी। इसी तलाश ने उन्हें "तारा संस्थान" के वृद्धाश्रम तक पहुंचाया। आज राउदी भाई वहीं रहते हैं — जहाँ उन्हें वह शांति और सुकून मिला है जिसकी उन्हें बरसों से जरूरत थी। अब उनके चेहरे पर एक संतोष है—एक ऐसा संतोष, जो अपने कर्तव्यों को पूरी तरह निभाने के बाद आता है। राउदी भाई की कहानी हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि जीवन भर अपनों के लिए सब कुछ देने वाला व्यक्ति आखिर में सिर्फ दो चीजें चाहता है—सम्मान और सुकून। और जब यह मिल जाता है, तो जिंदगी का हर दर्द कहीं न कहीं हल्का पड़ जाता है।

“जब जीवन ने सब छीन लिया और 'तारा' ने सहारा दिया"उदयपुर की शांत गलियों में कभी एक ऐसी महिला रहती थीं, जिनकी जिंदगी संघर्ष...
15/05/2026

“जब जीवन ने सब छीन लिया और 'तारा' ने सहारा दिया"
उदयपुर की शांत गलियों में कभी एक ऐसी महिला रहती थीं, जिनकी जिंदगी संघर्षों की लंबी कहानी थी - कंकु बाई। 90 वर्ष की उम्र में आज उनकी आंखों में सुकून है, लेकिन इस सुकून तक पहुंचने का रास्ता आसान नहीं था। करीब 20 साल पहले उनके पति का देहांत हो गया। पति को अस्थमा की बीमारी थी और वे मंडी में काम करके घर चलाते थे। पति के जाने के बाद जैसे कंकु बाई का सहारा ही छिन गया। एक बेटा था लेकिन वह भी जन्म के महज 15 दिन बाद ही इस दुनिया को अलविदा कह गया। इसके बाद उनकी जिंदगी में अपना कहने वाला कोई नहीं रहा। परिवार के नाम पर सिर्फ जेठानी और उनका बेटा थे लेकिन कंकु बाई ने हमेशा अपने दम पर जीना चुना। दूध और सब्जी बेचकर उन्होंने अपना गुजारा किया। थोड़ी - बहुत खेती की जमीन थी] लेकिन वक्त की मार ने वह भी बिकवा दी।
एक दिन जैसे किस्मत ने एक और परीक्षा ले ली। सब्जी बेचकर उठते ही उनके पैर में अचानक कुछ हुआ और वे वहीं गिर पड़ीं। उस गिरावट ने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी। तब से वे बिस्तर पर आ गईं - कमर, हाथ और पैरों में इतनी तकलीफ कि दोबारा खड़ा होना भी मुश्किल हो गया। करीब डेढ़ साल तक वे इसी हालत में रहीं। कुछ समय तक रिश्तेदारों ने सहारा दिया] छह महीने तक अपने पास रखा लेकिन हर सहारा हमेशा के लिए नहीं होता। इसी दौरान किसी ने उन्हें तारा संस्थान के बारे में बताया। एक उम्मीद की किरण जगी और उन्होंने वृद्धाश्रम जाने की इच्छा जताई। आज कंकु बाई तारा संस्थान के वृद्धाश्रम में हैं। अब उनकी दुनिया एक बिस्तर तक जरूर सीमित है लेकिन इस बिस्तर के आसपास देखभाल, अपनापन और सुकून है। मेडिकल वार्ड में उनकी नियमित देखभाल हो रही है - दवाइयों से लेकर दैनिक जरूरतों तक, हर चीज का ध्यान रखा जा रहा है। कभी जो महिला जीवन की हर कठिनाई से अकेले लड़ी, आज वह सुकून से कह सकती हैं कि अब वह अकेली नहीं हैं।

🌸 सेवा, संवेदना और समर्पण की मिसाल 🌸तारा संस्थान द्वारा देशभर में संचालित सभी नेत्र चिकित्सालयों में आज International Nu...
12/05/2026

🌸 सेवा, संवेदना और समर्पण की मिसाल 🌸

तारा संस्थान द्वारा देशभर में संचालित सभी नेत्र चिकित्सालयों में आज International Nurses Day बड़े सम्मान और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर सभी नर्सिंग स्टाफ का सम्मान कर उनके समर्पण, सेवा भावना और मरीजों के प्रति उनके अथक योगदान के लिए आभार व्यक्त किया गया। 💐
नर्सें केवल उपचार का हिस्सा नहीं होते, बल्कि हर मरीज के लिए उम्मीद, देखभाल और विश्वास का दूसरा नाम होती हैं।
तारा संस्थान अपने सभी नर्सिंग स्टाफ को उनके अमूल्य योगदान के लिए हृदय से धन्यवाद एवं शुभकामनाएँ देता है। ❤️

🌸 अंतर्राष्ट्रीय मातृ दिवस के अवसर पर उदयपुर की पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन जी ने तारा संस्थान द्वारा संचालित कृष्णा शर...
12/05/2026

🌸 अंतर्राष्ट्रीय मातृ दिवस के अवसर पर उदयपुर की पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन जी ने तारा संस्थान द्वारा संचालित कृष्णा शर्मा आनंद वृद्ध आश्रम का आत्मीय दौरा किया।

इस अवसर पर संस्था प्रमुख कल्पना गोयल जी द्वारा उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। डॉ. अमृता दुहन जी ने वृद्धाश्रम में रह रही bedridden बुजुर्ग माताओं को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया और उनके साथ समय बिताकर उनका हालचाल जाना।

विजिट के दौरान उन्होंने सभी आवासियों से मुलाकात कर उनके जीवन, स्वास्थ्य एवं आवश्यकताओं के बारे में जानकारी ली तथा उन्हें सकारात्मक जीवन जीने के लिए प्रेरित करते हुए महत्वपूर्ण परामर्श भी दिए।

उनका यह स्नेहपूर्ण और संवेदनशील व्यवहार सभी बुजुर्गों के चेहरे पर मुस्कान और आत्मीयता की अनुभूति लेकर आया। 💐

तारा संस्थान के सभी वृद्धाश्रमों में आज अंतर्राष्ट्रीय मातृ दिवस प्रेम, सम्मान और भावनाओं के साथ मनाया गया। 🌸💖राजकीय वृद...
10/05/2026

तारा संस्थान के सभी वृद्धाश्रमों में आज अंतर्राष्ट्रीय मातृ दिवस प्रेम, सम्मान और भावनाओं के साथ मनाया गया। 🌸💖

राजकीय वृद्धाश्रम बलीचा में पेंशनर समाज द्वारा बुजुर्ग माताओं का सम्मान किया गया। माँ द्रौपदी देवी वृद्धाश्रम में अग्रवाल समाज ने मातृ दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया, वहीं कृष्णा शर्मा आनंद वृद्धाश्रम में कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने बुजुर्ग माताओं के साथ यह दिन हर्षोल्लास से मनाया।

इसी अवसर पर वृक्षम अमृतम सेवा संस्था, उदयपुर द्वारा तारा संस्थान की संस्थापक एवं अध्यक्ष श्रीमती कल्पना गोयल जी को “नारी शक्ति सम्मान” से सम्मानित किया गया। 🌿✨

तारा संस्थान द्वारा संचालित “मस्ती की पाठशाला” के बच्चों ने भी अपनी भावनाओं को सुंदर ग्रीटिंग कार्ड बनाकर व्यक्त किया, जिसने सभी का मन मोह लिया।

माँ केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि प्रेम, त्याग और संस्कारों की सबसे सुंदर पहचान हैं।
सभी माताओं को मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ। 🙏💐

बनारस के रामनगर वृद्धाश्रम में आज सेवा, सम्मान और अपनत्व से भरा एक विशेष दिन रहा।सिग्नेचर ग्लोबल फाउंडेशन इंडिया के प्रम...
10/05/2026

बनारस के रामनगर वृद्धाश्रम में आज सेवा, सम्मान और अपनत्व से भरा एक विशेष दिन रहा।

सिग्नेचर ग्लोबल फाउंडेशन इंडिया के प्रमुख श्री प्रदीप कुमार अग्रवाल जी एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती मधु अग्रवाल जी ने वृद्धाश्रम पहुँचकर आवासियों से आत्मीय मुलाकात की। इस अवसर पर तारा संस्थान के दिल्ली संरक्षक श्री सत्यभूषण जैन जी भी उपस्थित रहे।संस्थान के संस्थापक एवं सचिव श्री दीपेश मित्तल जी ने अतिथियों को पूरे वृद्धाश्रम का भ्रमण करवाया एवं सभी आवासियों से परिचय करवाया। श्री अग्रवाल जी ने अपने हाथों से सभी बुजुर्गों को भोजन प्रसाद कराया, जिससे पूरा वातावरण भावुक और आत्मीय हो उठा। विशेष कार्यक्रम के दौरान वृद्धाश्रम आवासियों द्वारा प्रस्तुत फैशन शो ने सभी का मन मोह लिया। साथ ही श्री प्रदीप कुमार अग्रवाल जी एवं श्रीमती मधु अग्रवाल जी ने बुजुर्ग माताओं को शॉल ओढ़ाकर एवं श्रीफल भेंट कर उनका सम्मान किया।

तारा संस्थान परिवार की ओर से आपका हार्दिक आभार एवं धन्यवाद।

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