21/08/2026
जहाँ उम्मीद ने थामा एक परिवार का हाथ:
प्रतीप की कहानी उन हजारों बच्चों की प्रेरणा है, जिनके जीवन में कठिनाइयाँ तो बहुत होती हैं, लेकिन सही समय पर मिला एक सहारा उनकी पूरी दुनिया बदल सकता है। तारा संस्थान द्वारा उदयपुर में विधवा महिलाओं के बच्चों के लिए समाजसेवी एवं तारा संस्थान, दिल्ली के संरक्षक श्री एन. पी. भार्गव जी के सहयोग से निःशुल्क संचालित शिखर भार्गव पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाला प्रतीप आज आत्मविश्वास के साथ अपने उज्ज्वल भविष्य की ओर कदम बढ़ा रहा है। लेकिन उसकी इस मुस्कान के पीछे उसकी माँ का अथाह संघर्ष और त्याग छिपा हुआ है।
प्रतीप अपनी माँ का इकलौता पुत्र है। उसके जन्म से पहले ही उसके जीवन से पिता का साया उठ गया। जब उसकी माँ केवल तीन महीने की गर्भवती थीं, तभी एक सड़क दुर्घटना में उनके पति का असामयिक निधन हो गया। यह दुखद घटना उनके पूरे जीवन को बदल देने वाली थी। प्रतीप की माँ ने अपने परिवार की इच्छा के विरुद्ध अपनी पसंद से विवाह किया था। पति के निधन के बाद ससुराल में परिस्थितियाँ इतनी कठिन हो गईं कि वहाँ रहना संभव नहीं रहा। अंततः उन्होंने अपने मायके लौटकर अपने पिता के साथ नया जीवन शुरू किया। आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी और सबसे बड़ी चिंता अपने बेटे की शिक्षा को लेकर थी। वे चाहकर भी उसे किसी अच्छे विद्यालय में पढ़ाने में सक्षम नहीं थीं।
इसी दौरान उन्हें जानकारी मिली कि तारा संस्थान द्वारा संचालित शिखर भार्गव पब्लिक स्कूल में विधवा महिलाओं के बच्चों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जाती है। यह जानकारी उनके लिए किसी नई उम्मीद से कम नहीं थी। उन्होंने तुरंत विद्यालय पहुँचकर प्रतीप का प्रवेश कराया और यहीं से उनके जीवन में एक सकारात्मक बदलाव की शुरुआत हुई।
आज प्रतीप विद्यालय की कक्षा पाँचवीं का छात्र है। वह पढ़ाई में अत्यंत मेधावी, अनुशासित और जिज्ञासु है। शिक्षक भी उसकी लगन और सीखने की इच्छा की सराहना करते हैं। आर्थिक अभाव अब उसके सपनों के रास्ते में बाधा नहीं बन रहे, क्योंकि उसे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिल चुका है।
प्रतीप की कहानी यह संदेश देती है कि यदि समाज जरूरतमंद परिवारों के साथ खड़ा हो जाए, तो कठिन से कठिन परिस्थितियाँ भी किसी बच्चे के भविष्य को अंधकारमय नहीं बना सकतीं। तारा संस्थान का उद्देश्य केवल निःशुल्क शिक्षा देना नहीं, बल्कि ऐसे बच्चों को आत्मविश्वास, अवसर और सम्मान के साथ जीवन में आगे बढ़ने का मार्ग प्रदान करना है।
आज प्रतीप अपनी मेहनत और अपनी माँ के संघर्ष को अपनी सबसे बड़ी प्रेरणा मानते हुए एक सुनहरे भविष्य की ओर बढ़ रहा है। उसकी सफलता यह विश्वास दिलाती है कि सही समय पर मिला सहयोग किसी बच्चे का पूरा जीवन बदल सकता है।